Home विदेश-ब्रह्मांड क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा?

क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा?

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आज कल सभी न्यूज़ चैनल और पत्र-पत्रिकाएं जब चीन के विषय में बाते करतें हैं तो उनका निष्कर्ष यही होता है कि चीन भारत के हितों के खिलाफ कार्य कर रहा है और भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है। किसी हद तक यह बात सच भी है किन्तु लाख टके का सवाल है कि क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा? आइये इस प्रश्न का उत्तर ढूंढे। चीन इस दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला एक जिम्मेवार देश है। उस पर अपने नागरिकों के भरण पोषण और उनके हितों की रक्षा की जिम्मेवारी है। जिस प्रकार हर देश को अपने नागरिकों के सुखद ओर स्वर्णिम भविष्य की कामना होती है उसी प्रकार चीन को भी अपने देश के नागरिकों के लिए सम्पन्नता और दुनिया में सम्मानजनक स्थान चाहिए।

उसे अपने 140 करोड़ लोगों के लिए यूरोपीय देशों और अमरीका के नागरिकों के समान सुविधाएँ और संसाधन चाहियें। वह वैश्विक महाशक्ति बनना चाहता है जिसके लिए वह प्रयासरत भी है। पिछले कुछ वर्षों में चीन एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है किन्तु उसे पता है कि केवल आर्थिक महाशक्ति बन कर वह यह सब हासिल नहीं कर सकता उसे आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक महाशक्ति भी बनना होगा। उसे वर्तमान महाशक्ति अमरीका से यह ताज हासिल करने के लिए सबसे पहले दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाना पड़ेगा क्योंकि जिस देश का अपने पड़ोसियों में ही दबदबा न हो उसे दुनिया का सिरमौर कौन मानेगा। दक्षिण एशिया में भारत सबसे बड़ा देश है। सबसे पहले उसे दक्षिण एशिया में भारत के बढ़ते क़दमों को रोकना होगा। उसे विश्व में एक महाशक्ति बनना है तो उसे हर अड़ोसी-पडोसी देश ख़ास तौर पर भारत से बीस रहना ही पड़ेगा। भारत अन्य दक्षिण एशियाई देशों के साथ जितना घुलमिल कर रहेगा भारत का प्रभाव उतना ही बढेगा जो कि चीन के लिए एक राजनीतिक चुनौती पेश करेगा और चीन के महाशक्ति बनने के सपने में एक बड़ी अड़चन साबित होगा।

इसलिए अन्य दक्षिण एशियाई देशों से भारत को दूर करने के लिए एवं भारत के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए चीन ने नेपाल में माओवादिओं को बढ़ावा दिया और नेपाल को आर्थिक सहायता बढ़ाकर वहां कि राजनीति में अपना हस्तक्षेप बढाकर भारत के प्रभाव को कम कर दिया। इसी कड़ी में चीन ने परोक्ष रूप से पकिस्तान को दोस्ती के बहाने आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक मदद देना आरम्भ किया जिसका दुरूपयोग भारत के खिलाफ हो रहा है और अब एक कदम आगे बढ़कर एक तीर से दो निशाने साधते हुए चीन ने बिखरते हुए पाकिस्तान का खुलकर साथ देना प्रारंभ कर दिया है और पाकिस्तान में अमरीकी प्रभाव को भी कमज़ोर करना प्रारंभ कर दिया है। भारत के खिलाफ अपने इस अभियान में चीन ने श्रीलंका में भी अपने पैर जमाकर भारत को चारों ओर से घेरने की कोशिश की है। इन बातों को सुन और पढ़ कर लगता है की चीन सचमुच भारत के खिलाफ कार्य कर रहा है और भारत के खिलाफ एक युद्ध की तैयारी कर रहा है।

किन्तु चीन दुविधा में भी है। वर्तमान महाशक्ति अमरीका के साथ G-8, नाटो देश एवं अन्य कई देश है। जो समय-समय पर संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे विश्व मंचों पर अमरीका के निर्णयों को सही ठहराने में और उन्हें लागू करवाने में अमरीका कि सहायता करते है। विपत्ति के समय हर प्रकार से अमरीका का साथ देते है एवं उसके लिए काम करते है। चीन के साथ ऐसा कोई गुट नहीं है। महाशक्ति बनने के लिए उसे भी कुछ देशों का साथ चाहिए ताकि जब वह महाशक्ति बने तो उसके भी कुछ सहयोगी हों और वह भी अमरीका कि तरह अपने सभी फैसले दुनिया पर लागू करवा कर राज कर सके। इसलिए उसे G-5 और ब्रिक्स जैसे संगठनों में भारत कि भागीदारी भी चाहिए क्योंकि भारत को नज़रंदाज़ करके विश्व के विषय में कोई नीति बनाना किसी बेवकूफी से कम नहीं है। भारत चीनी सामान का एक बहुत बड़ा खरीदार है चीन इतने बड़े बाज़ार को भी खोना नहीं चाहेगा। इन बातों को पढ़ और सुन कर लगता है कि चीन को भारत कि आवश्यकता है तो वह भारत पर आक्रमण क्यों करेगा?

किन्तु चीन जितना ताकतवर है उतना ही समझदार भी है। उसे भारत की सैन्य क्षमता का ज्ञान है उसे पता है कि यदि वह भारत के खिलाफ युद्ध करता है तो उसका नुकसान निश्चित है। क्योंकि अब 1962 वाला समय नहीं है। भारत भी एक सशक्त देश है। महाशक्ति पद का दावेदार है इसलिए वह भारत के खिलाफ प्रत्यक्ष युद्ध नहीं करना चाहेगा। जिस प्रकार पाकिस्तान चाहकर भी भारत का कुछ नहीं बिगाड़ सका और हर बार युद्ध में उसे मुह कि खानी पड़ी तो पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध (आतंकवाद) का सहारा लिया और काफी हद तक भारत की तरक्की को रोका और भारत को परेशान एवं कमज़ोर करने में कामयाब भी रहा। इसी बात से सबक लेते हुए चीन भी भारत के खिलाफ एक राजनीतिक युद्ध में संलग्न रहकर भारत से सीधा न उलझ कर, किसी न किसी बहाने भारत को उलझाकर रखना चाहता है। नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार में उसके हस्तक्षेप इसी योजना का एक अंग है ताकि भारत इन्ही मुद्दों में उलझकर रह जाए और चीन निश्चिन्त होकर दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाते हुए अपने लक्ष्य कि और बढ़ सके है इसलिए चीन द्वारा भारत पर आक्रमण कि संभावना बहुत ही कम है।

किन्तु अब सोचने का विषय यह है कि यदि चीन भारत के खिलाफ किसी भी प्रकार का दुस्साहस करता है तो भारत की क्या तैयारी है? हर देश को तरक्की करने और ऊँचे सपने देखने का अधिकार है। ऊँचा सोच कर चीन ने कुछ गलत नहीं किया है और यदि चीन भारत को अपने प्रगति के मार्ग में चुनौती के रूप में देखता है तो इसमें कुछ गलत भी नहीं है क्योंकि दक्षिण एशिया में सिर्फ भारत ही उसे आर्थिक और सामरिक टक्कर दे सकता है। हर देश को यह चाहिए कि वह अपने प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाओं को समय से पहले पहचान कर, समय रहते उस समस्या के समाधान के लिए सही कदम उठाये। यदि चीन हमे अपने प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधा मानकर इसके लिए तैयारी कर रहा है तो क्या गलत है। गलत तो भारत कर रहा है इस चुनौती को अनदेखा करके।  यदि भारत सशक्त एवं सजग होगा तो चीन भारत के विषय में अपनी भ्रांतियों पर पुनर्विचार करेगा एवं उसके साथ दोस्ती का व्यवहार करेगा और चीन चाह कर भी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ कुछ गलत करने की हिम्मत नहीं कर पायेगा जैसा कि वह अक्सर भारत की सीमाओं का अतिक्रमण करके और भारत के कुछ भूभागों पर अपना अधिकार दिखा कर एवं अन्य अनेकों प्रकार से करता रहा है। चीन द्वारा किसी भी प्रकार के दुस्साहस करने की स्थिति में भारत द्वारा पलटवार करने की क्षमता की कमी काफी लम्बे समय से अनुभव की जा रही है इसलिए भारत को हमले के लिए न सही आत्मरक्षा के लिए तो अपनी तैयारी रखनी ही पड़ेगी क्योंकि एक शक्ति ही दूसरी शक्ति का सम्मान करती है।

डॉक्टर घनश्याम वत्स

www.hritspandan.blogspot.com

mob: 09810829278

Comments
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Anonymous 2011-05-30 23:25:46

चीन दुविधा में नहीं है. चारों ओर से हमें घेर रहा है. सही वक्त का इन्तजार कर रहा है..
Kuldeep gupta- kanpur 2011-05-31 17:22:33

Cheen ek asia desh mana ja rha hai jo ki apni production ki hui cheezo ko dusri market me phucha rha hai taki dusre desh wasio ko uski cheez ki adat pad jye.
Or dusri baat cheen ne pt.jawahar lal nheru ke time(1962)me hamla kr diya tha lekin kuch year ke baat lal bhahadur sastari ne cheen ki foj ko khader diya.agr cheen bhart se dosti krna chata hai to phele use bhart ka hatyia hua hissa wapas krna hoga. lekin me bus yhi khau ga dusman chahe jaisa bi ho us kbi kamjor nhi samjna chaiye.
aakash deep 2011-06-10 19:02:01

:angry-red:
@China
Mahendra Kushwaha 2011-08-18 18:48:12

Bhediye ko bhai kah dene se wo Daat gadana nahi chhodega..........ye saale bharat ko charo dishao se gher rahe hai aur congress unhe protshahit kar raha hai ki aao aur loot lo bharat ko...
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