सतीश सिंह रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार को जताने का त्यौहार माना जाता है। इस पर्व में बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं। भारत में इस त्यौहार को बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। अब चीन भी इस त्यौहार से जुड़ गया है। गौरतलब है कि सीधा-सीधा इस त्यौहार का भले ही चीन से कोई सरोकार नहीं है। फिर भी व्यापार के लिहाज से चीन का इस पर्व से गहरा रिश्‍ता है। रक्षाबंधन में एक महीना से भी कम समय बचा है और भारत का बाजार चीन की डिजाइनर राखियों से पट गया है। हर तरफ चाइना मेड राखियों की भरमार है। राखी के लिए कच्चा माल तक चीन से मंगवाया जा रहा है। दिल्ली के सदर बाजार, चाँदनी चौक, शंकर मार्केट एवं पहाड़गंज में राखी बनाने के लिए धागे, जरी, छोटी गुड़िया, कार्टून कैरेक्टर के छोटे टेडी इत्यादि चीन से आयात किये जा रहे हैं। चोरी से भी डिजाइनर राखी और उसको बनाने के लिए कच्चा सामान चीन से आ रहा है।

आलोक कुमारदो दिनों में बस्तर में तीन नक्सली हमले में 15 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। व्यवस्था के बागियों की यह करतूत चिंताजनक है। चिंता इसलिए भी बड़ी है कि इलाके में सेना प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत हो रही है और आने वाले दिनों में इलाके के सुरक्षा की कमान भारतीय सेना के हाथ आने वाली है। जाहिर है मुकाबला बागियों और सेना के बीच शुरू होने का खतरा है। सेना को सरकारी संपदा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ विशेष अधिकार के साथ कड़ाई से सैनिक धर्म निभाने की अनुमति मिल गई है। अब बस सेना के हाथ कमान थमाने की औपचारिकता भर पूरी होनी है। आने वाले दिनों में छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा इलाके में संघर्ष भीषण होने वाला है।

आरपी सिंहआतंक का साम्राज्य अजर-अमर नहीं होता, उसका अंत होना तय है। अंतरराष्ट्रीय आतंक का पर्याय बन चुका ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सरजमीं पर अमेरिकी नौसेना कमांडो दस्ते के हाथों 2 मई को जिस तरह मारा गया, उससे तो यही जाहिर होता है। मुसोलिनी व हिटलर का दुखद अंत अब विश्व इतिहास का हिस्सा बन चुका है। हालांकि उनके आतंक का खौफ़ अभी भी दुनिया के ज़ेहन से मिटा नहीं है। और ओसामा तो अभी-अभी मरा है। जाहिर है उसका आतंक इतना जल्द मिटने वाला नहीं है। अमेरिका के खिलाफ ओसामा का 9/11 का इस्लामी जिहाद भी लोगों ने अचरज से देखा। आज उसकी मौत को भी लोग उसी अंदाज में देख रहे हैं।

राजकिशोर दूसरी महा लड़ाई के दौरान, जब लंदन और पेरिस पर बमों की बारिश हो रही थी और हिटलर के जुल्मों को रोकना बेहद मुश्किल लग रहा था, तब महात्मा गांधी ने एक असाधारण सलाह दी थी। इस सलाह के लिए देश-विदेश में गांधी जी की कठोर आलोचना हुई थी और उनकी बात को बिल्‍कुल हवाई करार दिया गया था। जिस तरह के वातावरण में हमारा जन्म और परवरिश हुई है, उसमें गांधी जी की बहुत-सी बातें हवाई ही लगती हैं। लेकिन कोई बात हवाई है या उसमें कुछ दम है, इसका इम्तहान तो परीक्षण के दौरान ही हो सकता है। गांधी जी की सलाह पर अमल किया जाता, तो यह सामने आ सकता था कि प्रतिकार का एक अहिंसक रूप भी हो सकता है और इससे भी बड़ी बात यह कि वह सफल भी हो सकता है।

गिरीशजीअमेरिका ने सोचा था कि ओसामा बिन लादेन के शव को समुद्र में दफनाएंगे तो लादेन जैसे शीर्षस्थ आतंकी का कोई अवशेष नहीं बचेगा और उसकी कोई ऐसी मजार वगैरह नहीं बन पाएगी, जहां उससे सहानुभूति रखने वाले पहुंच सकेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. एबटाबाद की जिस हवेली में लादेन को मारा गया, अब उसे कौतूहलवश देखने के लिए ही भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. इसमें पुरुष, महिला और बच्चे भी शामिल हैं. वैसे एबटाबाद पहले भी प्राकृतिक सुंदरता के चलते पयर्टक स्थल के रूप में मशहूर था. लेकिन अब उसके प्रति जिज्ञासा के और भी बढ़ने के आसार हैं. लादेन की सबसे छोटी पत्नी यमनी जो अंतिम समय उसके साथ थी 'उसके द्वारा यह खुलासा होने पर कि लादेन पिछले पांच साल से वहीं रह रहा था' अनेक मसले उठ गए हैं.

: सरबजीत की रिहाई के सवाल को टाल गए लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सगीर अहमद कादरी : पाकिस्तान में आए दिन बम धमाके हो रहे हों, मिलिट्री मुख्यालय से कुछ मीटर दूरी पर अलकायदा मुखिया ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया हो, पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ फरार हों, एशिया टाइम्स ऑनलाइन के पाक ब्यूरो चीफ सैयद सलीम शहजाद की हत्या कर लाश लावारिसों की तरह फेंक दी गई हो, ड्रोन हमले में कुख्यात आतंकवादी मारे जा रहे हों या कराची स्थित मेहरान नौसेना एयरबेस पर हुए हमले में सैनिक मारे गए हों, परंतु लाहौर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति सगीर अहमद कादरी के मुताबिक पाकिस्तान में पूरी तरह से अमन और शान्ति है। साथ ही पाक मीडिया को लपेटे में लेते हुए आरोप लगाते हैं पाकिस्तान में दहशतगर्दी मीडिया का दुष्प्रचार है।

अमेरिका का अल कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाया गया 'ऑपरेशन जेरीनेमो' की सारे संसार में तारीफ हो रही है कि किस प्रकार उसके नेवी सील के जांबाज कमांडोज ने एबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य अकादमी की नाक के नीचे मात्र 40 मिनट में पाकिस्तानी सरकार, सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई को खबर हुए बगैर दुनिया के सबसे वांटेड आतंकवादी को न सिर्फ मार गिराया बल्कि उसका शव और कम्प्यूटर आदि सुबूत लेकर स्टील्थ टेक्नॉलॉजी से निर्मित हेलीकाप्टरों में उड़कर अपने ठिकाने पर लौट भी आये। दुनिया को इसकी सूचना तभी लगी जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने व्हाइट हाउस से यह सम्बोधन किया कि लादेन मारा जा चुका है। अब सारी बहस इस पर हो रही है कि लादेन के शव के फोटो क्यों नहीं जारी किये गये, उसे समुद्र को क्यों दफना दिया गया, सारे आपरेशन की खबर पाकिस्तान सरकार को क्यों नहीं दी गयी, क्या पाकिस्तान को ओसामा के ठिकाने की जानकारी थी, अमेरिकी हमले के दौरान पाकिस्तानी सेना की नाकामी पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं।

गिरीशजीक्या अमेरिका के 9/11 और मुंबई के 26/11 की तरह ही पिछले हफ्ते पाकिस्तान के कराची में 22/05 का हमला था? यह सवाल पाकिस्तान और पश्चिमी दुनिया के अखबारों में इस समय प्रमुखता से उठ रहा है. वैसे पिछली दो मई को ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी सैनिकों द्वारा खोज कर मारे जाने के ठीक बीस दिनों बाद कराची के मेहरान स्थित नौसेना केंद्र पर हुए इस भीषण आतंकी हमले को दुनिया बहुत गंभीरता से ले रही है. हालांकि इसमें मरने वालों की संख्या सिर्फ 14 है, लेकिन इसे पाकिस्तान के इतिहास में अपने ढंग का ऐसा पहला हमला माना जा रहा है, जिसकी तुलना 9/11 और 26/11 से की जा रही है. अंतर सिर्फ यह है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के 9/11 और मुंबई के 26/11 में जहां अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकियों ने आम नागरिकों को अपना निशाना बनाया था. वहीं 22/05 को तालिबानियों ने आम नागरिकों की जान लेने की जगह पाकिस्तान सरकार और उसके सबसे बडे़ सैन्य केंद्रों में से एक को नुकसान पहुंचाना चाहा है और करोड़ों अमेरिकी डॉलर यानी कि अरबों की सैन्य सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई है.

जगमोहन फुटेला कोताही करे कोई, पर इतना भी काफूर ना हो/खुदगर्जी के हाथों, इतना भी मजबूर ना हो जितना कि आज पाकिस्तान है. फ्रांस में सरफ़रोश होते प्रधानमन्त्री गिलानी हों या इस्लामाबाद में मीडिया से रूबरू होते विदेश सचिव सलमान बशीर. चेहरे उड़े हैं. आखों के अक्स चेहरे के भावों से मेल नहीं खाते. थोड़ी सी बेवफाई फिल्म के एक गीत का वो शे'र शायद इसी सीन के लिए लिखा गया हो-कौन ढूंढे सवाल दर्दों के,लोग तो बस सवाल करते हैं. सवाल समस्या हो गए हैं.शक्लें दोनों की देखी नहीं जातीं.ओसामा दुश्मन दोनों का था. मारा भी दोनों ने मिल के होगा. घर के भेदी के बिना तो भगवान राम भी रावण को नहीं मार पाए थे.पर पाकिस्तान है कि मानने को तैयार नहीं है.मान लेता तो नाम नेकी मिलती. अब बदनामी ज्यादा है. पढ़िए, पाकिस्तान के विदेश सचिव ने प्रेस कांफ्रेंस में क्या क्या कहा.

आज कल सभी न्यूज़ चैनल और पत्र-पत्रिकाएं जब चीन के विषय में बाते करतें हैं तो उनका निष्कर्ष यही होता है कि चीन भारत के हितों के खिलाफ कार्य कर रहा है और भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है। किसी हद तक यह बात सच भी है किन्तु लाख टके का सवाल है कि क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा? आइये इस प्रश्न का उत्तर ढूंढे। चीन इस दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला एक जिम्मेवार देश है। उस पर अपने नागरिकों के भरण पोषण और उनके हितों की रक्षा की जिम्मेवारी है। जिस प्रकार हर देश को अपने नागरिकों के सुखद ओर स्वर्णिम भविष्य की कामना होती है उसी प्रकार चीन को भी अपने देश के नागरिकों के लिए सम्पन्नता और दुनिया में सम्मानजनक स्थान चाहिए।

प्रमोद पांडेय...नहीं। यह न्याय नहीं है। ओसामा बिन लादेन के मारे जाने मात्र से आतंक या आतंकवाद का अंत हो गया यह सोचना जल्दबाजी होगी। ओसामा का मारा जाना किसी कथा का अंत नहीं, शुरुआत है। 11 सितम्बर, 2001 (9/11) को न्यूयॉर्क के जिन टावरों को गिराकर अलकायदा ने दुनियाभर में दहशत पैदा कर दी, वहां 01  मई की रात लादेन के मारे जाने से टावरों के स्थान पर बने जीरो ग्राउंड पर लोग जश्न में डूब गए। लादेन अमेरिका की मोस्ट वांटेड सूची में सबसे ऊपर था। इसीलिए अमरीकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने इसे एक उपलब्धि बताया है-'अल कायदा के खिलाफ कार्रवाई में यह अमेरिका की सबसे बड़ी उपलब्धि है। ...न्याय मिल चुका है।'

जुगनू शारदेयप्रकृति के साथ सबसे बड़ा पाखंड संयुक्त राष्ट्र संघ की कृपा से पूरी दुनिया में हो रहा है। दुनिया में भी यह विकासशील देशों में अधिक हो रहा है। विकासशील देशों में भी सबसे ज्यादा भारत दैट इज इंडिया में हो रहा है। मजे की बात यह भी है कि प्रकृति के खेल को सबसे पहले भारत ने समझा था। जब समझा था तब इसका नाम भारत था या कुछ और – यह इतिहास और शोध का विषय है। मुझे नहीं पता का ऋग्वेद का वास्तविक लेखन या अनुभव काल क्या रहा है। लोग मान कर चलते हैं कि यह कम से कम पांच हजार साल पुराना है। वामपंथ की दुनिया में जैसे बात बात पर मार्क्स की पूंजी का हवाला दिया जाता है, वैसे ही हमारे यहां ऋग्वेद का हवाला दिया जाता है। मेरे पास ऋग्वेद का जो हिंदी अनुवाद है वह सायण भाष्य पर आधारित है।

गिरीशजी: अब मानवाधिकारों पर गोलबंदी : सीरिया में मानवाधिकार हनन के नाम पर नई अंतर्राष्‍ट्रीय गोलबंदी शुरु हो गई है. मुद्दा बताया जा रहा है आमजन के अधिकारों के हनन का, लेकिन पर्दे के पीछे सियासत कुछ और ही है! पश्चिमी खेमा अमेरिकी अगुवाई में दमिश्क के खिलाफ अंतर्राष्‍ट्रीय कार्रवाई के लिए लामबंद है, उसे लीबिया के घटनाक्रम से संतोष नहीं है. इसीलिए तो लीबिया के खिलाफ संयुक्त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की कार्रवाई की तरह सीरिया के मसले में जब सुरक्षा परिषद में सफलता नहीं मिली तो फिर संयुक्त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद में मामला उठाया गया. वहां सीरिया में राष्‍ट्रपति बशर अल असद की सरकार द्वारा मानवाधिकार हनन की निन्दा ही नहीं की गई, बल्कि परिषद ने जांच कराने का फैसला भी किया है.

ओसामा बिन लादेन का 20 साल का बेटा हमजा लादेन गायब है. वो कहां गया, कुछ पता नहीं. पिछले दिनों जब एबटाबाद में आधी रात हेलिकाप्टरों में सवार अमेरिकी सैनिकों ने लादेन के ठिकानेवाली हवेली पर धावा बोला था, तो बताया गया कि लादेन और उसके बेटे हमजा की गोलीबारी में मौत हो गई थी. लेकिन बाद में पता चला कि लादेन के साथ उसके बेटे की मौत जरूर हुई लेकिन मरनेवाला हमजा नहीं था, बल्कि वो 22 वर्षीय खालिद लादेन था. खालिद भाई है हमजा का.

गिरीश : भारत की आतंक की चेतावनी अब सच साबित हो रही : लंदन के 'गार्जियन'  अखबार ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अमेरिका में 9/11 के आतंकी हमले के बाद से अमेरिका-पाकिस्तान के रिश्ते इतने खराब कभी नहीं रहे, जितने कि आज हैं. पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर की तल्खी को उद्धृत करते हुए लिखा गया है कि पाकिस्तान अब अमेरिका के इन आरोपों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के गुप्त रिश्ते अफगानिस्तान और कश्मीर के आतंकी गुटों और तालिबानियों से हैं. बशीर आईएसआई पर लगने वाले 'डबल गेम'  खेलने का आरोप भी गलत बताते हैं. ऐसे ही बयान पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमत मलिक ने भी दिए हैं कि अमेरिका की ओर से 'ब्लेमगेम'  बंद होना चाहिए. और, अब तो दोनों देशों को आपसी रिश्ते फिर से नए सिरे से शुरू करने की जरूरत है.

श्रवण : सरकारी दबाव से परेशान होकर मोहम्‍मद यूनुस ने उठाया यह कदम : सरकारी दखलंदाजी एवं बेतुके हस्तक्षेप के कारण बांग्लादेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पितामह ने अपना पद छोड़ दिया है, इसी के साथ एक और कर्मवीर ने घटिया व्यवस्थाओं से तंग आकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के विश्व प्रसिद्ध उदार अर्थव्यवस्था के समर्थक गरीबों को स्वावलंबी बनाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने लघु ऋण प्रदाता संस्था ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों के चलते किया, जिस में सरकारी कार्यप्रणाली एवं न्यायालय के अनुचित हस्तक्षेप की बहुत बड़ी भूमिका है..कुछ समय पहले उनपर सरकार द्वारा विदेशी धन के लेन-देन का आरोप लगा था, जिस में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया गया.