Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

संजय द्विवेदी
समूची मानवता के लिए खतरा बन चुके खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रति भारतीय युवाओं का आकर्षण निश्चित ही खतरनाक है। कश्मीर से लेकर केरल और अब गुजरात में दो संदिग्धों की गिरफ्तारी चिंतनीय है ही। आखिर आईएस के विचारों में ऐसा क्या है कि भारतीय मुस्लिम युवा अपनी मातृभूमि को छोड़कर, परिवार और परिजनों को छोड़कर एक ऐसी दुनिया में दाखिल होना चाहता है, जहां से लौटने का रास्ता बंद है। इंटरनेट के प्रसार और संचार माध्यमों की तीव्रता ने जो दुनिया रची है, उसमें यह संकट और गहरा हो रहा है। हमारे नौजवान अगर गुमराही के रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी को जहन्नुम बनाने पर आमादा हैं तो देश के बुद्धिजीवियों, राजनेताओं, अफसरों, धर्मगुरूओं को जरूर इस विषय पर सोचना चाहिए। सही मायने में यह वैश्विक आतंकवाद की वह नर्सरी है जिसमें मजहब के नाम पर बरगलाकर युवाओं को इसका शिकार बनाया जा रहा है।

विनीत तिवारी

जब लैटिन अमेरिका के मुश्किल हालात पर बात करने के लिए और वहां की जनता  के साथ अपनी एकजुटता ज़ाहिर करने के लिए जोशी-अधिकारी इंस्टिट्यूट ने पुणे मे सभा की तो ये एक मौका था जिसमे हम समाजवाद की मंज़िल, उस तक पहुंचने के अपने रास्ते और अपने कदमों की परख भी कर सकते थे। दुनिया के दूसरे गोलार्ध मे मौजूद क्रांतिकारी संघर्षरत जनता के साथ अपनी एकजुटता ज़ाहिर करने के लिए जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट अॉफ सोशल स्टडीज द्वारा शंकर ब्रह्मे समाज विज्ञान ग्रंथालय के सहयोग से पुणे मे १७ जून २०१६ को एक सभा का अायोजन किया गया। लोकायत के सभागृह मे अायोजित इस सभा मे मुख्य अतिथि के तौर पर भारत मे वेनेज़ुएला के राजदूत श्री आगुस्तो मोंतीएल और उनकी जीवनसाथी सुश्री मिली मोंतीएल शरीक हुए।  स्वागत किया अद्वैत पेडनेकर ने और अतिथयों का परिचय दिया विनीत तिवारी ने। श्री आगुस्तो मोंतीएल और उनकी जीवनसाथी सुश्री मिली मोंतीएल को स्मृति चिन्ह भेंट किए सीपीआई की वरिष्ठ कॉमरेड शांता रानाडे और भारतीय महिला फेडरेशन की सक्रिय कार्यकर्ता कॉमरेड लता भिसे ने।

संसार के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों में शामिल ब्रिटिश वैज्ञानिक स्टीफन विलियम हॉकिंग ने कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में कहा कि विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है कि ईश्वर जैसी किसी चीज का अस्तित्व नहीं है। माना कि स्टीफन हॉकिंग अंतरिक्ष विज्ञान के एक अच्छे ज्ञाता हो सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह तो नहीं है कि वे अध्यात्म जैसे अति सूक्ष्म अन्तर्विज्ञान की भी जानकारी रखते हैं और वे इस पर अधिकृत रूप से कुछ भी कह सकने में सक्षम हैं। इसलिए ब्लैक होल पर किये अपने अनुसंधान तथा डॉक्टरेट वाले स्टीफन हॉकिंग का ईश्वरीय सत्ता के विषय में इस तरह की बात करना तो ऐसा है, जैसे प्राइमरी स्कूल का कोई छात्र हॉकिंग को अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ाने की कोशिश करे।

: ये कहानी सिर्फ पायलट कैस हुसैन और फरीदा सिंह की ही नहीं है, आम जज्बातों की अभिव्यक्ति भी है : पिछले दिनों पाकिस्तानी वायुसेना के पूर्व पायलट कैस हुसैन ने जब 46 साल के बाद उस हमले के शिकार पीडित परिवार की बेटी को पत्र लिखकर माफी मांगी जिस में गलती से भारतीय नागरिक विमान के पायलट समेत आठ लोग मारे गए थे, तो सभी चौंके थे. बात 1965 के सितंबर महीने की है. उस हादसे में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता, उनकी पत्नी, तीन सहायक, एक पत्रकार और दो पायलटों के साथ उड़ रहे भारतीय नागरिक विमान को पाकिस्तान ने सीमा के एकदम नजदीक इस गलतफहमी में मार गिराया था कि वो भारत का लडाकू हमलावर विमान है, जो पाकिस्तानी क्षेत्र में घुस रहा था.

दुनिया में अमीर-गरीब के बीच खाई लगातार गहराती जा रही है--ऑक्सफैम

यदि दुनिया भर में गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली ब्रिटिश गैर-सरकारी संगठन ऑक्सफैम की सोमवार को दावोस में जारी रिपोर्ट पर यकीन करें तो ‘सारे रास्ते रोम की तरफ जाते हैं’ यह कहावत अक्षरशः सही साबित होती है। यह बात आधुनिक मानव-समाज के उस छोटे से हिस्से पर पूरी तरह लागू होती है जिसके पास दुनिया की आधी से भी ज्यादा संपत्ति इकट्ठा हो गई है। विगत कुछेक दशकों में वैश्विक अर्थ-व्यवस्था के नियम-कायदों का अधिकाधिक लाभ इसी वर्ग को मिलने तथा दुनिया भर में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने से अमीरों और गरीबों के बीच का फासला इस कदर बढ़ा है कि दुनिया की आधी आबादी के पास जितनी संपत्ति है, उससे भी अधिक दौलत सिमट कर केवल 8 ही धनाढ्य लोगों के पास एकत्र हो गई है। इन सबसे अमीर आठ उद्योगपतियों में अमेरिका के छः, स्पेन और मेक्सिको के एक-एक उद्योगपति शामिल हैं। ऑक्सफैम ने दुनिया में अमीर और गरीबों के बीच के व्यापक अंतर और मुख्यधारा की राजनीति में उत्पन्न हो रहे असंतोष को भी रेखांकित किया है।

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की लॉन्ग टर्म कर्ज की रेटिंग को ‘ट्रिपल ए’ से कम करके ‘एए प्लस’ कर दिया है। रेटिंग कम होने से ज्यादा खतरनाक अवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार का बहुत ज्यादा सुस्त होना है। डर की वजह से सरकार एतहियाती रवैया अपनाने की नाकाम कोशिश कर रही है। यूरोप और मध्य पूर्व देशों के हालत भी अच्छे नहीं हैं। दिन प्रति दिन इन देशों में कर्ज का संकट और भी गहराता चला जा रहा है। अब सब कुछ इन देशों की सरकार पर निर्भर करता है कि वे किस तरह से इस कर्ज संकट से मुकाबला करते हैं। हालांकि अमेरिका ने बेरोजगारी के फ्रंट पर अच्छा काम किया है। लेकिन फिलहाल उसका लाभ उसको मिलता नहीं दिख रहा है। ध्‍यातव्य है कि जुलाई में 75,000 के अनुमान के मुकाबले में अमेरिका ने 1,17,000 बेरोजगारों को नौकरी मुहैया करवाया है।

मानवीयता कहती है कि जरूरतमंद की जितनी मदद हो सकती है वह अवश्‍य करनी चाहिए किंतु जिसे जरूरत है वही गाली-गलौच करे, अपमान जनक भाषा में प्रश्‍नोत्‍तर करे, तब ऐसे जरूरतमंद के लिए क्‍या करें ? सीधी बात है कि ऐसे व्‍यक्‍ति, संस्‍था, समूह, देश या अन्‍य कोई क्‍यों न हो उसके साथ किसी प्रकार की मानवीयता नहीं दिखाई जानी चाहिए। उसे तो फिर इसके लिए अपनी ताकत का अहसास कराने की जरूरत होती है।

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी की भारत यात्रा के साथ ही एक बार फिर से भारत-पाक के बीच बेहतर सम्बंधों की आस बढ़ गई है। हिना की इस यात्रा के साथ ही कई सवाल मौजूं हो गए हैं। मसलन भारत-पाक के बीच बेहतर संबंध न होने के दो प्रमुख कारण कश्मीर और आंतकवाद हैं। हिना रब्बानी ने एक चैनल से कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को ज्यादा झेल रहा है ऐसे में दोनों को मजबूती से एक होकर इस लड़ाई को लड़ने की जरुरत है। इस वार्ता के चंद दिनों पहले, 13 जुलाई को मुंबई में बम धमाके हुए थे। यह धमाके उस वक्त हुए जब भारत-पाक के बीच वार्ता और 2 जी स्पेक्ट्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दा जोर पकड़ा था तो वहीं 19 जुलाई को भारत के साथ रणनीतिक वार्ता के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी नई दिल्ली पहुंच रही थीं।

अमेरिका के 24 से ज्ज्यादा प्रदेशों की जेलों में हजारों कैदी श्रमिकों ने दो सप्ताह से ज्यादा हड़ताल रखी लेकिन अमेरिकी मीडिया ने इसे ब्लैकआउट कर रखा। बड़े या कहें कि तुर्रमखां मीडिया घरानों न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, एनबीसी न्यूज, एबीसी न्यूज, एमएसएनबीसी, फॉक्स न्यूज, सीएनएन और एनपीआर ने लेशमात्र भी इस ऐतिहासिक प्रिजन लेबर स्ट्राइक को जगह नहीं दी। आलम यह रहा कि इन अखबारों एवं न्यूज चैनलों पर नजर गड़ाए रखने वालों को इस हड़ताल की भनक तक नहीं लगी।

आप आस्ट्रेलिया आये और नेड केली की रोचक कहानी सुने बिना चले जाएँ, यह संभव नहीं. अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने के जुर्म में २५ साल के आयरिश नौजवान नेड केली को सन १८८० में अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था. मेलबर्न की ओल्ड जेल (आज म्‍यूजियम) की कालकोठरी और उस स्थान को देखकर मैं हैरत में पड़ गया,  जहां नेड को आनन- फानन में फाँसी दी गयी. आस्ट्रेलिया के मंझे हुए कलाकारों द्वारा एक घंटे के नाटक का मंचन देखकर मैं मंत्रमुग्‍ध हो गया. यह नाटक नेड की जिन्दगी पर फांसी स्थल पर होता है. मजेदार बात यह है कि नेड की जिन्दगी को जिसने भी जानने की कोशिश की वह बहता ही चला गया.

Rana Yashwant : पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ का कार्यकाल बढना तय-सा लग रहा है. भारत के साथ पाकिस्तान का जो मौजूदा रिश्ता है, वो जनरल शरीफ के लिये बहुत मुफीद है. हालात जितने नाज़ुक रहेंगे, नए चीफ को कमान न देने का दबाव नवाज़ शरीफ पर उतना ही ज्यादा रहेगा. लिहाज़ा जनरल राहिल शरीफ को जबतक उन्हें एक्सटेंशन नहीं मिल जाता, तबतक वे भारत के साथ युद्द अब-हुआ, तब-हुआ सा माहौल बनाए रखेंगे. वैसे, नवाज़ शरीफ चाहते नहीं है कि वे राहिल की मियाद बढाएं, क्योंकि राहिल में शरीफ को जनरल मुशर्रफ दिखने लगे हैं. मुशर्रफ को बतौर जनरल इसी नवाज शरीफ ने एक्सटेंशन दिया था, लेकिन मुशर्रफ ने शरीफ का तख्ता पलट दिया.

अपने देश में राष्ट्रीय भाषा होते हुए भी हिंदी को अपनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है. यह हैरत की बात है लेकिन खुशी की नहीं. पर मेलबर्न में हिंदी की लड़ाई की खबर सुन मुझे हैरत भी हुई और खुशी भी. पैसा, सोहरत और सम्मान की खोज में भारतीय विदेश में बस रहे है. प्रतिभा और लगन इसमें लोगों की मदद कर रही है. विदेश में बसने के 10-15 वर्ष निकलने पर सब को अपनों की याद सताती है. शुरू के साल शानदार जीवन जीने में निकल जाते हैं. लेकिन सब कुछ पाने के बाद अचनक दुनिया सूनी-सूनी सी लगती है और यादें पीछा करती हैं. इस बात का आभाष मुझे मेलबर्न में बसे भारतीयों से बात करने के बाद हुआ. वतन के प्रति निष्ठा एक भले इंसान में जीवन पर्यन्‍त रहती है. वतन से दूर रहकर यह निष्ठा और मजबूत होती है. धीरे-धीरे यह निष्ठा उसका बल बनती है.

"फ्रांस के साथ 7.8 बिलियन यूरो यानि करीब 59 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के तहत भारत को 36 रॉफेल लड़ाकू विमान हासिल होगा"। लीजिए, शुरू हो गया 21वीं सदी के महान मानवीय सभ्यताओं के बीच व्यापार। यह हास्यास्पद है और हास्यास्पद ही नहीं बल्कि मजाक है। मजाक हम गरीब और अनपढ़ जनता का नहीं बल्कि मजाक महान फ्रांस का है, मजाक फ्रांस के विद्वानों और उनके महान साहित्यों का है, मजाक फ्रांस के उस गौरवशाली इतिहास का है जो इस आधुनिक युग में "स्वतंत्रता, समानता और इन सबसे बढकर 'भाईचारे'" को अपने देश में स्थापित करने व इस विचार को पूरी दुनिया में इसे फैलाने व स्थापित करने का श्रेय लेता रहता है।

गिरीश जी दुनिया में अपने शांत स्वभाव के लिए मशहूर नॉर्वे में जब पिछले सप्ताह 32 साल के एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने लेबर पार्टी की युवा शाखा के कार्यक्रम में बम विस्फोट और घातक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी करके लगभग 90 लोगों को बेवजह दर्दनाक मौत दी, तो सभी हिल उठे. एक द्वीप पर डेढ घंटे तक चले इस तांडव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भी पहुंचने में देर हुई क्योंकि नॉर्वे में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ था और काफी हद तक ऐसे हादसों से अनजान नॉर्वे में खुद पुलिस को भी अनेक बार ऐसे हथियार लेकर चलने की इजाजत अब तक नहीं है. तब अटलांटिक पार बराक ओबामा से लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून तक सभी ने इसे इस्लामी आंतकवाद की नई वारदात मानते हुए बयान भी जारी कर दिए कि वे संकट की इस घड़ी में नॉर्वे के 'संघर्ष'  में उसके साथ हैं.

It is reported today in the media that the Pakistan Prime Minister has appointed 22 members of the Pakistan Parliament to go around the world as special envoys to highlight the Kashmir issue, and he himself will address the U.N. General Assembly about it in September. Thus, it is evident that the Pakistan Govt. is hell bent on escalating the issue What should our response be ? I submit that the Indian Govt. should now derecognize that fake, artificial entity ( I refuse to call it a country ) called Pakistan.