स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका की लॉन्ग टर्म कर्ज की रेटिंग को ‘ट्रिपल ए’ से कम करके ‘एए प्लस’ कर दिया है। रेटिंग कम होने से ज्यादा खतरनाक अवस्था अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार का बहुत ज्यादा सुस्त होना है। डर की वजह से सरकार एतहियाती रवैया अपनाने की नाकाम कोशिश कर रही है। यूरोप और मध्य पूर्व देशों के हालत भी अच्छे नहीं हैं। दिन प्रति दिन इन देशों में कर्ज का संकट और भी गहराता चला जा रहा है। अब सब कुछ इन देशों की सरकार पर निर्भर करता है कि वे किस तरह से इस कर्ज संकट से मुकाबला करते हैं। हालांकि अमेरिका ने बेरोजगारी के फ्रंट पर अच्छा काम किया है। लेकिन फिलहाल उसका लाभ उसको मिलता नहीं दिख रहा है। ध्यातव्य है कि जुलाई में 75,000 के अनुमान के मुकाबले में अमेरिका ने 1,17,000 बेरोजगारों को नौकरी मुहैया करवाया है।
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पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी की भारत यात्रा के साथ ही एक बार फिर से भारत-पाक के बीच बेहतर सम्बंधों की आस बढ़ गई है। हिना की इस यात्रा के साथ ही कई सवाल मौजूं हो गए हैं। मसलन भारत-पाक के बीच बेहतर संबंध न होने के दो प्रमुख कारण कश्मीर और आंतकवाद हैं। हिना रब्बानी ने एक चैनल से कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को ज्यादा झेल रहा है ऐसे में दोनों को मजबूती से एक होकर इस लड़ाई को लड़ने की जरुरत है। इस वार्ता के चंद दिनों पहले, 13 जुलाई को मुंबई में बम धमाके हुए थे। यह धमाके उस वक्त हुए जब भारत-पाक के बीच वार्ता और 2 जी स्पेक्ट्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दा जोर पकड़ा था तो वहीं 19 जुलाई को भारत के साथ रणनीतिक वार्ता के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी नई दिल्ली पहुंच रही थीं।
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आप आस्ट्रेलिया आये और नेड केली की रोचक कहानी सुने बिना चले जाएँ, यह संभव नहीं. अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने के जुर्म में २५ साल के आयरिश नौजवान नेड केली को सन १८८० में अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था. मेलबर्न की ओल्ड जेल (आज म्यूजियम) की कालकोठरी और उस स्थान को देखकर मैं हैरत में पड़ गया, जहां नेड को आनन- फानन में फाँसी दी गयी. आस्ट्रेलिया के मंझे हुए कलाकारों द्वारा एक घंटे के नाटक का मंचन देखकर मैं मंत्रमुग्ध हो गया. यह नाटक नेड की जिन्दगी पर फांसी स्थल पर होता है. मजेदार बात यह है कि नेड की जिन्दगी को जिसने भी जानने की कोशिश की वह बहता ही चला गया.
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अपने देश में राष्ट्रीय भाषा होते हुए भी हिंदी को अपनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है. यह हैरत की बात है लेकिन खुशी की नहीं. पर मेलबर्न में हिंदी की लड़ाई की खबर सुन मुझे हैरत भी हुई और खुशी भी. पैसा, सोहरत और सम्मान की खोज में भारतीय विदेश में बस रहे है. प्रतिभा और लगन इसमें लोगों की मदद कर रही है. विदेश में बसने के 10-15 वर्ष निकलने पर सब को अपनों की याद सताती है. शुरू के साल शानदार जीवन जीने में निकल जाते हैं. लेकिन सब कुछ पाने के बाद अचनक दुनिया सूनी-सूनी सी लगती है और यादें पीछा करती हैं. इस बात का आभाष मुझे मेलबर्न में बसे भारतीयों से बात करने के बाद हुआ. वतन के प्रति निष्ठा एक भले इंसान में जीवन पर्यन्त रहती है. वतन से दूर रहकर यह निष्ठा और मजबूत होती है. धीरे-धीरे यह निष्ठा उसका बल बनती है.
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दुनिया में अपने शांत स्वभाव के लिए मशहूर नॉर्वे में जब पिछले सप्ताह 32 साल के एंडर्स बेहरिंग ब्रेविक ने लेबर पार्टी की युवा शाखा के कार्यक्रम में बम विस्फोट और घातक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी करके लगभग 90 लोगों को बेवजह दर्दनाक मौत दी, तो सभी हिल उठे. एक द्वीप पर डेढ घंटे तक चले इस तांडव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भी पहुंचने में देर हुई क्योंकि नॉर्वे में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं हुआ था और काफी हद तक ऐसे हादसों से अनजान नॉर्वे में खुद पुलिस को भी अनेक बार ऐसे हथियार लेकर चलने की इजाजत अब तक नहीं है. तब अटलांटिक पार बराक ओबामा से लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून तक सभी ने इसे इस्लामी आंतकवाद की नई वारदात मानते हुए बयान भी जारी कर दिए कि वे संकट की इस घड़ी में नॉर्वे के 'संघर्ष' में उसके साथ हैं.
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रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार को जताने का त्यौहार माना जाता है। इस पर्व में बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं। भारत में इस त्यौहार को बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। अब चीन भी इस त्यौहार से जुड़ गया है। गौरतलब है कि सीधा-सीधा इस त्यौहार का भले ही चीन से कोई सरोकार नहीं है। फिर भी व्यापार के लिहाज से चीन का इस पर्व से गहरा रिश्ता है। रक्षाबंधन में एक महीना से भी कम समय बचा है और भारत का बाजार चीन की डिजाइनर राखियों से पट गया है। हर तरफ चाइना मेड राखियों की भरमार है। राखी के लिए कच्चा माल तक चीन से मंगवाया जा रहा है। दिल्ली के सदर बाजार, चाँदनी चौक, शंकर मार्केट एवं पहाड़गंज में राखी बनाने के लिए धागे, जरी, छोटी गुड़िया, कार्टून कैरेक्टर के छोटे टेडी इत्यादि चीन से आयात किये जा रहे हैं। चोरी से भी डिजाइनर राखी और उसको बनाने के लिए कच्चा सामान चीन से आ रहा है।
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दो दिनों में बस्तर में तीन नक्सली हमले में 15 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। व्यवस्था के बागियों की यह करतूत चिंताजनक है। चिंता इसलिए भी बड़ी है कि इलाके में सेना प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत हो रही है और आने वाले दिनों में इलाके के सुरक्षा की कमान भारतीय सेना के हाथ आने वाली है। जाहिर है मुकाबला बागियों और सेना के बीच शुरू होने का खतरा है। सेना को सरकारी संपदा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ विशेष अधिकार के साथ कड़ाई से सैनिक धर्म निभाने की अनुमति मिल गई है। अब बस सेना के हाथ कमान थमाने की औपचारिकता भर पूरी होनी है। आने वाले दिनों में छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा इलाके में संघर्ष भीषण होने वाला है।
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दूसरी महा लड़ाई के दौरान, जब लंदन और पेरिस पर बमों की बारिश हो रही थी और हिटलर के जुल्मों को रोकना बेहद मुश्किल लग रहा था, तब महात्मा गांधी ने एक असाधारण सलाह दी थी। इस सलाह के लिए देश-विदेश में गांधी जी की कठोर आलोचना हुई थी और उनकी बात को बिल्कुल हवाई करार दिया गया था। जिस तरह के वातावरण में हमारा जन्म और परवरिश हुई है, उसमें गांधी जी की बहुत-सी बातें हवाई ही लगती हैं। लेकिन कोई बात हवाई है या उसमें कुछ दम है, इसका इम्तहान तो परीक्षण के दौरान ही हो सकता है। गांधी जी की सलाह पर अमल किया जाता, तो यह सामने आ सकता था कि प्रतिकार का एक अहिंसक रूप भी हो सकता है और इससे भी बड़ी बात यह कि वह सफल भी हो सकता है।
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: सरबजीत की रिहाई के सवाल को टाल गए लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सगीर अहमद कादरी : पाकिस्तान में आए दिन बम धमाके हो रहे हों, मिलिट्री मुख्यालय से कुछ मीटर दूरी पर अलकायदा मुखिया ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया हो, पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ फरार हों, एशिया टाइम्स ऑनलाइन के पाक ब्यूरो चीफ सैयद सलीम शहजाद की हत्या कर लाश लावारिसों की तरह फेंक दी गई हो, ड्रोन हमले में कुख्यात आतंकवादी मारे जा रहे हों या कराची स्थित मेहरान नौसेना एयरबेस पर हुए हमले में सैनिक मारे गए हों, परंतु लाहौर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति सगीर अहमद कादरी के मुताबिक पाकिस्तान में पूरी तरह से अमन और शान्ति है। साथ ही पाक मीडिया को लपेटे में लेते हुए आरोप लगाते हैं पाकिस्तान में दहशतगर्दी मीडिया का दुष्प्रचार है।
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क्या अमेरिका के 9/11 और मुंबई के 26/11 की तरह ही पिछले हफ्ते पाकिस्तान के कराची में 22/05 का हमला था? यह सवाल पाकिस्तान और पश्चिमी दुनिया के अखबारों में इस समय प्रमुखता से उठ रहा है. वैसे पिछली दो मई को ऐबटाबाद में ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी सैनिकों द्वारा खोज कर मारे जाने के ठीक बीस दिनों बाद कराची के मेहरान स्थित नौसेना केंद्र पर हुए इस भीषण आतंकी हमले को दुनिया बहुत गंभीरता से ले रही है. हालांकि इसमें मरने वालों की संख्या सिर्फ 14 है, लेकिन इसे पाकिस्तान के इतिहास में अपने ढंग का ऐसा पहला हमला माना जा रहा है, जिसकी तुलना 9/11 और 26/11 से की जा रही है. अंतर सिर्फ यह है कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के 9/11 और मुंबई के 26/11 में जहां अंतर्राष्ट्रीय आतंकियों ने आम नागरिकों को अपना निशाना बनाया था. वहीं 22/05 को तालिबानियों ने आम नागरिकों की जान लेने की जगह पाकिस्तान सरकार और उसके सबसे बडे़ सैन्य केंद्रों में से एक को नुकसान पहुंचाना चाहा है और करोड़ों अमेरिकी डॉलर यानी कि अरबों की सैन्य सम्पत्ति को क्षति पहुंचाई है.
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आज कल सभी न्यूज़ चैनल और पत्र-पत्रिकाएं जब चीन के विषय में बाते करतें हैं तो उनका निष्कर्ष यही होता है कि चीन भारत के हितों के खिलाफ कार्य कर रहा है और भारत के खिलाफ युद्ध की तैयारी में लगा हुआ है। किसी हद तक यह बात सच भी है किन्तु लाख टके का सवाल है कि क्या कभी चीन भारत पर आक्रमण करेगा? आइये इस प्रश्न का उत्तर ढूंढे। चीन इस दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला एक जिम्मेवार देश है। उस पर अपने नागरिकों के भरण पोषण और उनके हितों की रक्षा की जिम्मेवारी है। जिस प्रकार हर देश को अपने नागरिकों के सुखद ओर स्वर्णिम भविष्य की कामना होती है उसी प्रकार चीन को भी अपने देश के नागरिकों के लिए सम्पन्नता और दुनिया में सम्मानजनक स्थान चाहिए।
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प्रकृति के साथ सबसे बड़ा पाखंड संयुक्त राष्ट्र संघ की कृपा से पूरी दुनिया में हो रहा है। दुनिया में भी यह विकासशील देशों में अधिक हो रहा है। विकासशील देशों में भी सबसे ज्यादा भारत दैट इज इंडिया में हो रहा है। मजे की बात यह भी है कि प्रकृति के खेल को सबसे पहले भारत ने समझा था। जब समझा था तब इसका नाम भारत था या कुछ और – यह इतिहास और शोध का विषय है। मुझे नहीं पता का ऋग्वेद का वास्तविक लेखन या अनुभव काल क्या रहा है। लोग मान कर चलते हैं कि यह कम से कम पांच हजार साल पुराना है। वामपंथ की दुनिया में जैसे बात बात पर मार्क्स की पूंजी का हवाला दिया जाता है, वैसे ही हमारे यहां ऋग्वेद का हवाला दिया जाता है। मेरे पास ऋग्वेद का जो हिंदी अनुवाद है वह सायण भाष्य पर आधारित है।
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ओसामा बिन लादेन का 20 साल का बेटा हमजा लादेन गायब है. वो कहां गया, कुछ पता नहीं. पिछले दिनों जब एबटाबाद में आधी रात हेलिकाप्टरों में सवार अमेरिकी सैनिकों ने लादेन के ठिकानेवाली हवेली पर धावा बोला था, तो बताया गया कि लादेन और उसके बेटे हमजा की गोलीबारी में मौत हो गई थी. लेकिन बाद में पता चला कि लादेन के साथ उसके बेटे की मौत जरूर हुई लेकिन मरनेवाला हमजा नहीं था, बल्कि वो 22 वर्षीय खालिद लादेन था. खालिद भाई है हमजा का.
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: सरकारी दबाव से परेशान होकर मोहम्मद यूनुस ने उठाया यह कदम : सरकारी दखलंदाजी एवं बेतुके हस्तक्षेप के कारण बांग्लादेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पितामह ने अपना पद छोड़ दिया है, इसी के साथ एक और कर्मवीर ने घटिया व्यवस्थाओं से तंग आकर अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के विश्व प्रसिद्ध उदार अर्थव्यवस्था के समर्थक गरीबों को स्वावलंबी बनाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने लघु ऋण प्रदाता संस्था ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसा उन्होंने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों के चलते किया, जिस में सरकारी कार्यप्रणाली एवं न्यायालय के अनुचित हस्तक्षेप की बहुत बड़ी भूमिका है..कुछ समय पहले उनपर सरकार द्वारा विदेशी धन के लेन-देन का आरोप लगा था, जिस में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं पाया गया.
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आतंक का साम्राज्य अजर-अमर नहीं होता, उसका अंत होना तय है। अंतरराष्ट्रीय आतंक का पर्याय बन चुका ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सरजमीं पर अमेरिकी नौसेना कमांडो दस्ते के हाथों 2 मई को जिस तरह मारा गया, उससे तो यही जाहिर होता है। मुसोलिनी व हिटलर का दुखद अंत अब विश्व इतिहास का हिस्सा बन चुका है। हालांकि उनके आतंक का खौफ़ अभी भी दुनिया के ज़ेहन से मिटा नहीं है। और ओसामा तो अभी-अभी मरा है। जाहिर है उसका आतंक इतना जल्द मिटने वाला नहीं है। अमेरिका के खिलाफ ओसामा का 9/11 का इस्लामी जिहाद भी लोगों ने अचरज से देखा। आज उसकी मौत को भी लोग उसी अंदाज में देख रहे हैं।
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