इलाहाबाद के संगम तट पर अकबर का किला है और किले के अंदर अक्षयवट और सरस्वती कूप है। जिक्र की गई इन दोनों चीजो के बारे में बात की जाये तो ये दोनों चीजे हिंदुधर्म को मानने वालों के लिए बहुत महत्व की चीज है।

अक्षयवट को लेकर मान्यता है कि इस वट के नीचे वनगमन के दौरान भगवान राम ने शयन किया था और उन्हें जब उस पेड़ के नीचे बेहद आराम मिला तो उन्होंने उसे कभी भी नष्ट न होने का वरदान दिया था।

बाद में जब किले का निर्माण हो रहा था तो अक्षयवट किले की जद में आ गया, लेकिन रामदास नाम के एक भक्त के अनुरोध पर अकबर ने वट और वहां की मूर्तियों को जस का तस रहने दिया।

अब यहां से थोड़ी दूर और आगे बढे तो नगर कोतवाल लेटे हनुमान जी का मंदिर है और यहां मंदिर को कोई नुकसान ना पहुचे इसलिए इस विशाल किले की दिवार को टेढ़ा कर दिया गया।

यहां खास बात यह है कि इसका जिक्र तुसलिदास जी ने रामचरित मानस में नही किया है। हां.. उन्होंने प्रयाग महिमा में *को कही सकई प्रयाग प्रभाउ* और *अक्षयवट* का जिक्र जरूर किया है।

पर गंगा जमुनी तहजीब वाले इलाहाबाद शहर का बच्चा बच्चा जानता है कि किसने क्या और किसलिए किया?

वरना अकबर यूं ही महान और उसका दादा बाबर आक्रांता नही कहा जाता।

Deepak Pandey
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