चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा। चुनाव प्रचार शुरू होता नहीं कि विभिन्न मीडिया समूहों के चुनावी सर्वे आने शुरू हो जाते हैं। सर्वे भी ऐसे कि विभिन्न समूह विभिन्न पार्टियों को आगे दिखाते हैं। सर्वे में एक बात प्रमुखता से आती है कि हर बार भापजा को बढ़त दिखाई जाती है। वह बात दूसरी है कि चुनाव परिणाम आने पर चुनावी सर्वे में आगे चलने वाली भाजपा अचानक पीछे चली जाती है। पूंजीपतियों की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा ने मीडिया का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक फायदा भी उठाया है। अब अन्य पार्टियां भी ऐसा करने का प्रयास करती हैं।

-निरंजन परिहार-
शीला दीक्षित ने राहुल गांधी को साफ साफ अपरिपक्व कहने के बाद भले ही अपने शब्दों को तोड़ – मरोड़ कर पेश करने की बात कही हो, लेकिन असल में माना जा रहा है कि शीला दीक्षित ने राहुल गांधी से उस बात का बदला ले लिया है, जिसमें राहुल गांधी ने उन पर सहारा से पैसे लेने का आरोप लगाया था। दरअसल, राहुल गांधी ने लोकसभा में जब भूकंप आने की बात कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सहारा से पैसे लेने का आरोप लगाने के सबूत के तौर पर जो कागज दिखाए थे, उनमें शीला दीक्षित का नाम भी था। अब इसे राहुल गांधी का बचपना नहीं तो और क्या कहा जाए कि उन्होंने जो सबूत दिखाए थे वे साफ साफ बताते हैं कि अगर मोदी ने गुजरात के सीएम रहते हुए सहारा से कोई धन लिया था, तो शीला दीक्षित ने भी दिल्ली की सीएम रहते हुए सहारा से करोड़ों रुपए लिए थे। देश में तो कोई भूचाल नहीं आया, लेकिन उल्टे कांग्रेस पर दाग जरूर लग गए।

‘काले धन’ को लेकर भाजपा-सरकार सांसत में पड़ गई है। हवन करते हुए उसके हाथ जल रहे हैं। ‘काले धन’ को खत्म करने का उसका इरादा क्रांतिकारी और ऐतिहासिक है लेकिन ऐसा लगता है कि अभिमन्यु ने चक्र-व्यूह में घुसना तो सीख लिया है किंतु उसे बाहर निकलना नहीं आता! मैं शुरू में समझ रहा था कि यह हमारा अभिमन्यु विदेश नीति के मामले में ही नौसिखिया है लेकिन आर्थिक मामलों में उसकी समझ कितनी दरिद्र है, इसका पता पिछले एक सप्ताह से पूरे देश को चल रहा है।

फागुन का महीना, देवरों पर चुनावों के साथ-साथ होली का भी खुमार, सामने प्यारी सी सलोनी सी भाभी- ऐसे माहौल में अगर छेड़छाड़ न होगी, तो क्या भजन-कीर्तन होगा? भाभी आयी थी कुछ वोट कमाने। सोचा होगा कि देवरों की ओर मीठी-सी मुस्कान फेंककर कुछ वोटों-सीटों का जुगाड़ हो जाएगा, जिससे अगले पाँच साल तक दाल-रोटी चलती रहेगी। पर देवर ठहरे देवर। भाड़ में गया वोट, चुनाव तो होते ही रहते हैं, पर भाभी से हँसी-ठिठोली-छेड़छाड़ का मौका बार-बार नहीं मिलता। इसलिए उन्होंने तय कर लिया था कि भाभी से होली खेलनी ही है।

जिस दिन से नोटबंदी की घोषणा मोदी जी ने की है एकाएक देशभक्तों के साथ ईमानदारों की फौज सोशल मीडिया पर नमूदार हो गई है। हालांकि ये फौज पहले से ही सक्रिय है और हर मुद्दे को देशहित से जोड़कर सवाल पूछने वालों को देशद्रोही और कालेधन का समर्थक बताया जाने लगा है। इन पाखंडियों से यह पूछा जाना चाहिए कि 8 दिसम्बर के बाद ही उनको हरीशचन्द्र की सवारी कैसे आने लगी..? मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसे तमाम लोगों को जानता हूं जो कालेधन पर ही फलते-फूलते रहे और आज भी उनके पाखंड की पोलपट्टी बखूबी खोल सकता हूँ। सवाल यह नहीं है कि मैं खुद को ईमानदार या हरीशचन्द्र बताने का प्रयास कर रहा हूं, मगर इतना तो तय है कि मैं पाखंडी भी नहीं हूं...  अभी कई लोग बड़ी शान से ये दावा कर रहे हैं कि जिन्हें मोदी जी के फैसले से परेशानी हो वे अपने पुराने नोट नहीं बदलवाएं या यह भी कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार की समाप्ति के इस महायज्ञ में वे अपनी आहूति देने को तत्पर हैं और जिन लोगों को कतार में खड़े होने में परेशानी हो रही है उस सूची से भी खुद को अलग मानते हैं।

To,
Hon’ble Home Minister
Government of India, New Delhi
Through: Secretary-Ministry of Home Affairs
Subject: Two-child Law to control population explosion       
Respected Sir,

Report of the National Commission to Review the Working of the Constitution (Justice Venkatchaliah Commission) noted with concern that proper planning and monitoring of the socio-economic development of the country is considerably hampered and neutralized by the exponential growth of population. The Commission recommended that an Article should be added as Directive Principles of State Policy after Article 47 of the Constitution of India as thus: Article 47A - Control of Population: “The State shall endeavour to secure control of population by means of education and implementation of small family norms.”

नई दिल्ली : स्काई कैंडल के संस्थापक निदेशक श्री गौरव गर्ग को ‘स्टार्टअप अवार्ड-2016’ से सम्मानित किया गया है। यह अवार्ड उन्हें युवा व्यवसायी के रूप में विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के लिए दिया गया है। उनका आॅनलाइन व्यवसाय में उल्लेखनीय योगदान है। विदित हो श्री गर्ग अजमेर (राजस्थान) निवासी एवं दिल्ली प्रवासी पत्रकार एवं साहित्यकार स्व. श्री रामस्वरूप गर्ग के पौत्र है। 10 पंडित पंत मार्ग पर राजस्थान मित्र परिषद नई दिल्ली द्वारा आयोजित वार्षिक स्नेह मिलन एवं सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर सुखी परिवार फाउंडेशन के संस्थापक गणि राजेन्द्र विजयजी, बीएसफ के डिप्टी कमांडेंट श्री कुलदीप चैधरी एवं राजस्थान मित्र परिषद के अध्यक्ष श्री कोमल चैधरी ने श्री गर्ग को यह सम्मान प्रदत्त किया।

पार्टी के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गया कोई वहां गया। ये मुआ चुनाव का सीजन ही ऐसा होता है। एक समय में यह रोग हमारे क्रिकेट खिलाड़ियों में था। वे "क्रीज " आते ही चले जाते थे। ऐसे खिड़लियों को ही नहीं भारतीय क्रिकेट टीम का नाम ही " आया राम - गया राम हो गया था। बहरहाल, अब इस रोग ने भारतीय राजनीति को ही अपनी चपेट में ले लिया है।सिर्फ और सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टियों को छोडकर शायद ही ऐसी कोई पार्टी हो जो इस महामारी से बची हो। जिस तरह साढ़े चार साल तक सभी पार्टियां धर्म और जाति निरपेक्ष होतीं हैं तो इनके नेता पार्टी के अंध'भक्त चुनाव करीब आते ही ये कुलबुलाने लगते हैं। पार्टियां सर्च लाइट (जमाना चिराग का जो नहीं रहा, लेकर " जिताऊ (टिकाऊ) उम्मीदवार तलशने लगतीं हैं और हमारे जनप्रतिनिधि मजबूत पार्टी और सीट की। साढ़े चार साल (इसलिए कि चुनाव पांच साल पर होते हैं) प्रतिद्वंद्वी पार्टी को पानी पी-पीकर कोसने वाले उसी पार्टी में ओलिया जाते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छापे गए और बाजार में उयोग के लिए जारी किये गये कुल नोटों का मूल्य 16 लाख 98 हजार 5 सौ 40 करोड़ रुपये है। इसमें एक हजार के नोटों का मूल्य 6 लाख 70 हजार करोड़ है । और पांच सौ के नोटों का मूल्य 8 लाख 25 हजार करोड़ रूपये है । दोनों तरह के नोटों का कुल मूल्य 14 लाख 95 हजार करोड़ रुपये । यानी 9 नोवेम्बर से बाजार में प्रचलन में बचे एक से लेकर सौ रुपये के नोटों का कुल मूल्य मात्र 2 लाख 3 हजार 5 सौ 40 करोड़ रुपये ही बैठता है । जाहिर सी बात है 14 लाख 95 हजार करोड़ रुपये मूल्य के सारे एक हजार और पांच सौ के नोट तो काले नहीं हो सकते । नकली नही हो सकते । आतंकवादियों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे नही हो सकते । एक अनुमान के अनुसार अधिकतम 15 या 20 प्रतिशत रकम ही नकली , काली आदि हो सकती है । यानी  मात्र 2 लाख 25 हजार करोड़ रुपये लगभग ।

इस ४ जनवरी से भारत के नए मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जगदीश सिंह खेहर कार्यभार संभल लिया. लेकिन भारतीय न्यायाव्यवस्था के इतिहास के पन्नों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर हमेशा याद रहेंगे. आमतौर पर कई जज सत्ता के पास होने पर पदोन्नति आदि अनेक कारणों से सत्ताधारियों की नाराजी मोल नहीं लेते. सेवानिवृत्ति के बाद किसी आयोग, प्रकल्प, विभाग या अन्य मलाईदार पद पर नियुक्त के लिए सत्ता से मधुर सम्बन्ध बनाये रखते हैं. वहीँ भारत के इस पूर्व मुख्यन्यायाधीश ने वर्तमान केंद्र सरकार के अच्छे दिन के दावों की धज्जियाँ उडा के रख दीं. जस्टिस ठाकुर ने मेमोरंडम ऑफ़ प्रोसीजर के तहत सरकार द्वारा राष्ट्रिय सुरक्षा का हवाला देकर नाम ठुकराए जाने की भी आलोचना की थी.

मुझे सख्त नियम पसंद नहीं हैं। मैं आसान नियमों में विश्वास करता हूं क्योंकि यहां जिंदगी पहले से ही बहुत मुश्किल है। मेरा मानना है कि हर दिन के साथ नियम और ज्यादा आसान हो जाने चाहिए ताकि यह दुनिया कहीं ज्यादा बेहतर जगह बन सके। आज रविवार था, इसलिए मैं यह दिन बंधी-बंधाई दिनचर्या में बर्बाद नहीं करना चाहता। मैं इत्मिनान से अखबार पढ़ता हूं, फिर टीवी पर मनपसंद कार्यक्रम देखता हूं। मुझे फिल्मों से कोई नफरत नहीं है लेकिन मैं सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्में ही ज्यादा पसंद करता हूं जो अब बहुत कम दिखाई देती हैं।

झारखंड के गोड्डा जिलान्तर्गत कोल इंडिया के सहायक कंपनी इसीएल की राजमहल परियोजना के ललमटिया में भोड़ाय कोल माइंस साइट में 29 दिसंबर की रात में खदान धंसने से हाहाकार मच गया। खदान धंसने की खबर जंगल में आग की तरह चारों तरफ फैल गई, अगल-बगल के गांवों के हजारों लोग घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन घटना की भयावहता ने सबको हिलाकर रख दिया। घटनास्थल के आसपास खदान में दबे मजदूरों को निकालने की कोई भी सुविधा न होने के कारण लोग उद्वेलित भी हुए, लेकिन उनके पास आक्रोश के अलावा और कुछ भी नहीं था, जिससे वे खदान में दबे मजदूरों को बाहर निकाल सकते थे।

By Justice Markandey Katju

The war drums can clearly be heard in our sub continent. The 'surgical' strike by the Indian army 3 kms. inside POK is said to have killed 50 terrorists and hit 7 of their camps and has been widely acclaimed in India as a great victory, with a lot of clapping and cheering. But it is doubtful whether the 'surgery' destroyed all the cancer cells. In fact it is likely to cause more metastasis.

जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा इन दिनों जान पड़ता है कि सम्मोहन के असर में है और साथ ही इश्क में भी मुब्तिला है। सम्मोहित आदमी वही महसूस करता है जो उसे करवाया जाता है। क्योंकि सम्मोहनकर्ता का यही निर्देश होता है। और इश्क की कैफियत का तो फिर कहना ही क्या। चारों ओर बस फूल ही फूल खिले होते हैं। दर्द मीठी लोरी सा लगता है और सड़े चूहे से गेंदे की सी महक आती है- जो तुमको पसंद वही बात कहेंगे, दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे।

साम्यवाद और समाजवाद पर ओशो का एक चर्चित भाषण

Vinay Shrikar : मैं ओशो का ''चेला'' नहीं हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि वामपंथियों और समाजवादियों को ओशो के इस प्रवचन पर जरूर गौर करना चाहिए। कबीर को याद कीजिए-- ''निन्दक नियरे राखिये, ऑंगन कुटी छवाय।'' ओशो वामपंथियों और समाजवादियों के सबसे अच्छे निन्दक थे। हो सकता है कि इस प्रवचन से हम अपने लिए कुछ सीखें। दूसरों की नहीं जानता, अपनी कह सकता हूँ। ओशो की किताबें पढ़-पढ़ कर मेरे अन्दर घुसा कम्युनिज्म ताकतवर हुआ है। ओशो और चाणक्य में एक समानता मैं देखता हूँ। दोनो अवसर का लाभ लेने की शिक्षा देते हैं। क्षणभंगुर जीवन कुछ कर गुजरने का अवसर ही तो है।

प्रधानमंत्री जी, ये सब लोग जो काम धंधे छोड़ कर लम्बी लम्बी लाइनों में लगे हैं, चुप चाप सब सह रहे हैं, वो इसलिए कर रहे हैं क्यूँकि उन्हें भारत के प्रधानमंत्री के नाम की संस्था पर विश्वास है। लेकिन आप क्या कर रहे हैं। आप उनके विश्वास से खेल रहे हैं । आप पूरे देश को लाइन में खड़ा कर के music कॉन्सर्ट में चुटकुले सुना रहे हैं, रैलियॉ कर रहे हैं। आप लगातार कह रहे हैं, आप के मंत्री कह रहे हैं कि कैश नहीं, कार्ड से पेमेंट करो। जाओ और कार्ड से ख़रीदारी करो । लेकिन कार्ड स्वीकार करने की सुविधा किसके पास है । पूरे देश में छः करोड़ छोटे दुकानदार हैं, रहड़ी वाले हैं, पटरी वाले हैं, घर घर जा कर दूध और सब्ज़ी बेचने वाले हैं। वो तो कार्ड नहीं ले सकते। आपने एक ही झटके में पूरे देश को मजबूर कर दिया है कि समान बड़ी बड़ी दुकानों से, शोरूम से, शॉपिंग माल से ही सब ख़रीदारी हो । माना अडानी, अम्बानी, रामदेव, बिग बाज़ार जैसे बड़े बड़े पूँजीपति आप के सगे हैं, आपका दिल उन्हीं के लिए धड़कता है, लेकिन ये अधिकार आप को किसने दिया कि ग़रीब दुकानदारों के पेट पर लात मार कर उनके ग्राहक अमीरों को सौंप दें । भारत का प्रधानमंत्री पूँजीपतियों का एजेंट नहीं हो सकता ।