फरीदाबाद से छेड़ेंगे मजदूरों की हक की लड़ाई... साथियों, इस रविवार को मुझे फरीदााद में उस दयानंद कॉलोनी में जाकर उन मजदूरों के प्रधानों से बात करने का मौका मिला जो मजदूर बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने पत्थर खदान मालिकों के चंगुल से मुक्त कराकर पुनर्वासित किये हैं। वहां जाकर मैंने देखा कि स्वामी जी का यह प्रयास समाजसुधारकों व समाजसेवकों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। 1980 के आसपास स्वामी जी ने पत्थर खदान में काम कर रहे बंधुआ मजदूरों की एक बड़ी लड़ाई लड़ी।

सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई इस लड़ाई के बल पर उन्होंने इन मजदूरों को ग्रीन फील्ड जैसी कॉलोनी के बगल में लगभग 30 बीघे के आसपास न केवल जमीन आवंटित कराई बल्कि इस जमीन पर मजदूरों के लिए मकान भी बनवाए। साथ ही एक कम्युनिटी सेंटर। स्कूल व अस्पताल के लिए जमीन भी आवंटित कराई। एक बड़ा शौचालय भी बनवाया। ये वही मजदूर हैं जिनके केस में स्वामी जी ने एक सादे पोस्टकार्ड पर इन मजदूरों की समस्या सुप्रीम कोर्ट को लिखी थी तथा सुप्रीम कोर्ट ने इस पोस्टकार्ड ही पीआईएल माना था। दरअसल पीआईएल स्वामी अग्निवेश की ही देन है। तब सुप्रीम कोर्ट के जज पीएन भगवती ने न्यूनतम वेतनमान से कम वेतन पाने वाले व्यक्ति को बंधुआ मजदूर माना था।

इन मजदूरों में से कुछ दयानंद कॉलोनी में तो कुछ विभिन्न 13 डेरों में रह रहे हैं। शासन व प्रशासन के निकम्मेपन की वजह से विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे इन मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी स्वामी जी ने मुझे दी है। अब हम लोग न केवल इन मजदूरों की समस्याएं सुलझाने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ रहे हैं बल्कि जिन लोगों को फ्लैट नहीं मिले हैं उनके लिए आवासीय योजना की मांग कर रहे हैं। विभिन्न डेरों में रह रहे इन मजदूरों की जमीन पर ही आवासीय इमारत खड़ी करवाकर इन मजदूरों को रहने के लिए मकान उपलब्ध कराने के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ने जा रहे हैं।

बंधुआ मुक्ति मोर्चा के बैनर तले असंगठित मजदूरों की हक की लड़ाई लड़ने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत इस ऐतिहासिक जगह फरीदाबाद से होगी। हम लोगों का मानना है मुट्ठी भर लोगों ने देश की बड़ी आबादी को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा हुआ है। हम लोगों को इन बंधुआ मजदूरों की लड़ाई लड़नी है।

CHARAN SINGH RAJPUT
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