कुमार सौवीर: शाहन के शाह : चलिए, आप दोनों महानुभाव भोजन ग्रहण कर लीजिए। यह सुनते ही पूरा वातावरण स्‍तब्‍ध हो गया। सुई भी गिरती तो लोग जान जाते। श्‍मशान सी चुप्‍पी छा गयी पूरे शास्‍त्रार्थ स्‍थल पर। वहां उपस्थित विद्वान लोग अब इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे, कि अब आगे क्‍या होगा। लेकिन भारती उठ खड़ी हो गयीं और पूरे सम्‍मान के साथ दोनों को भोजन के आसन की ओर आमंत्रित करने लगीं। उनका चेहरा विषाद रहित और प्रशांत था। बस यही बात तो लोगों को बेचैन किये जा रही थी, लेकिन भारती निस्‍पृह भाव से अपने काम में जुट गयीं। यह जानते हुए भी कि अगर वे चाहतीं तो अपने पति को इस शास्‍त्रार्थ में पराजित होने से बचा सकती थीं, ऐसा न भी करतीं तो कोई न कोई कारण बता कर पूरा शास्‍त्रार्थ स्‍थगित भी करने का अधिकार था उन्‍हें। लेकिन भारती पर न्‍याय का दायित्‍व था।

आज सम्पूर्ण भारत में एक बात राजनीति का का केन्द्र बिन्दु बना हुआ है लोकपाल बिल, अन्ना हजारे देश के हीरो बन चुके है। लेकिन जिस प्रकार सिक्के दो पहलू होते हैं उसी प्रकार हमें सिर्फ अन्ना व उनकी टीम के एक पहलू को नहीं देखना चाहिए कि सब अच्छा ही अच्छा है। निश्चित तौर अन्ना का आन्दोलन अत्यन्त महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें कई सवाल ऐसे हैं जिनका उत्तर ढूंढ़ा जाना चाहिए। आज हम और हमारा समाज भ्रष्‍टाचार के दलदल में धंसा हुआ है और अन्ना हजारे इससे तारनहार के रुप में उभर कर सामने आये हैं तो यह इसलिए भी जरुरी हो जाता है कि इस आन्दोलन के अनछुये पहलुओं पर कुछ प्रकाश डाला जाये।

संजीव खुदागाहएक डिप्टी कलेक्टर ने अपनी विद्वता को प्रदर्शित करते हुए बड़े ही गंभीर लहजे में कहा-''यार आरक्षण जैसी सुविधायें अत्यंत पिछड़े लोगों के लिए है उपर उठे लोग यानी क्रीमिलेयर को चाहिए की वे अपने अन्य भाई बन्धुओं के लिए आरक्षण का लाभ लेना बंद कर दें ताकि उन्हें भी मौका मिल सकें। हम जैसे लोगों को भी लाभ लेना बंद कर देना चाहिए।`` क्रीमिलेयर को इस तरह परिभाषित करने तथा आरक्षण पर ऐसे तर्क देने पर मुझे उस अधिकारी पर बड़ा आश्चर्य हुआ। आश्चर्य इसलिए और भी ज्यादा हुआ की वे स्वयं सुनार जाति के है, जो ओबीसी से ताल्लुक रखती है।

कुमार सौवीर: शाहन के शाह : दोनों हाथों में जलती लकडि़यां लेकर चिंघाड़ते दरवेश को देख लोगबाग परेशान हो गये। दरवेश चिल्‍ला रहा था- आज तो मैं जन्‍नत और दोजख, दोनों को ही फूंक डालूंगा। बेहाल लोगों ने सबब पूछा, तो दरवेश का जवाब था- ताकि लोग बिना सबब या चाहत-लालच के अल्‍लाह की इबादत कर सकें। शिबली बोले कि इबादत में लालच किस बात का। मगर लोग या तो दोजख में जाने से बचने के लिए इबादत में मशगूल रहते हैं या फिर जन्‍नत हासिल करने के लिए। जबकि होना तो यह चाहिए कि लोगों का मकसद दोजख-जन्‍नत को झटककर केवल अल्‍लाह के पास जाने की जुगत में रहें। शिबली बोले- लालच में किये गये किसी भी काम का अंजाम हमेशा ही खराब निकलता है।

डा. नूतन ठाकुर आजकल नेताओं को गाली देने का फैशन सा चल गया है और ऐसा करने वालों में ज्यादातर लोग वे हैं जो कथित सिविल सोसायटी से ताल्लुख रखते हैं. पूरे देश में एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि ये सिविल सोसायटी वाले आज के आधुनिक तारणहार हैं और शेष सारा देश भ्रष्ट है. खासकर नेता लोग तो देश को दिन-रात बेचे ही जा रहे हैं. यह एक ऐसा बिंदु है जिस पर हमें खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि इस तरह की बातें हमारे देश की मूलभूत प्रजातांत्रिक स्थितियों पर ही प्रत्यक्ष और परोक्ष ढंग से हमला हैं और कहीं ना कहीं अधिनायकवाद की ओर अग्रसर होती दिखाई देती हैं.

आशीष वशिष्‍ठ भ्रष्टाचार और कालेधन के विरूद्व जो मुहिम अन्ना और रामदेव ने छेड़ी है वो फिलहाल तो किसी मुकाम पर पहुंचती नजर नहीं आ रही है, लेकिन अनशन, आंदोलन और जनविरोध ने केन्द्र सरकार का ब्लड प्रेशर और तनाव जरूर बढ़ा रखा है। अभी शुरुआती मामला है क्योंकि जो विचार या मुद्दा एक बार उठता है वो कभी न कभी अपनी मंजिल तक पहुंच भी जरूर जाता है। अभी तक सरकार सभी मुद्दों और मसलों पर सरकार सांप की भांति कुंडली मारकर चुपचाप बैठी हुई थी। अन्ना हजारे और बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार, काले धन की वापसी और लोकपाल बिल रूपी सांप को सरकारी बांबी से बाहर निकालने के जैसे ही बीन बजाई बरसों-बरस से नींद की बेहोशी में मस्त सरकारी अमला और उनके आका हरकत में आ गए। जंतर मंतर पर अन्न्ना के अनशन को हलके में लेने वाली सरकार और उसके नुमांइदों को 24 घंटे के भीतर ही अपनी औकात समझ में आ गई थी।

जांजगीर-चांपा। समाज सेवा की दिशा में वैसे तो कई तरह के अनुकरणीय कार्यों की बानगी आए दिन सुनने को मिलती है और उनके कार्यों से समाज के लोगों को निश्चित ही बहुत कुछ सीखने को मिलता है। ऐसी ही मिसाल कायम कर रहे हैं, जिला मुख्यालय जांजगीर से लगे नैला के गोविंद सोनी। वे पिछले 26 बरसों से निःस्वार्थ ढंग से नैला रेलवे स्टेशन में गर्मी के दिनों में यात्रियों को पानी पिलाते आ रहे हैं। बरसों से जारी उनके जज्बे को देखकर हर कोई दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाता है, क्योंकि ढलती उम्र के बाद भी उनके चेहरे पर कहीं थकान नजर नहीं आती और वे पूरी उर्जा के साथ समाज सेवा में हर पल तल्लीन नजर आते हैं।

बी‍के कुठियालाभ्रष्टाचार के विरोध में उठी जनमानस की आवाज को जिस प्रकार से वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था ने कुचला है वह अप्रत्यक्षित था। अन्ना हजारे देश के विशिष्ठ और नगरीय जनता की आवाज को लेकर उठे। उनके साथ कुछ और भी प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया। कुटिलता से सरकार ने अन्ना हजारे की टीम को लुभाया और आन्दोलन टांय-टांय फिस्‍स हो गया। वार्ता के चक्रों में फंसाकर कुछ राजनेताओं ने तो स्थापित प्रतिष्ठा वाले अन्ना हजारे की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास किया। बाबा रामदेव की आवाज में निम्न मध्यवर्ग और ग्रामीण जनता की पीड़ा और विरोध शामिल था। भ्रष्टाचार की व्यापकता और उसकी विराटता से आम आदमी न केवल क्षुब्ध है बल्कि कुछ कर गुजरने की इच्छा भी रखता है। श्रीमती गांधी ने भी जयप्रकाश के नेतृत्व में युवा आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया था। जिसके कारण से भारत के प्रजातन्त्र के स्वर्णिम इतिहास में 19 महीने का एक काला अध्याय जुड़ा।

पदमपति शर्मा आधी रात का समय रहा होगा, रामलीला मैदान में एक अजीब सी ख़ामोशी छायी हुई थी. मंच हो या मैदान, वहां मौजूद हर शख्स थकान और नींद की खुमारी में डूबा हुआ.. अचानक एक और हलचल सी उठती नज़र आ रही है, मन आशंकित तो था कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाय. सिब्बल द्वारा शाम को बाबा का पत्र सार्वजनिक करने के बाद से ही वातावरण में तनाव तो पसर ही चुका था. हालांकि जब तीन जून की शाम दिल्ली के लिए रवाना हो रहा था तब तक टीवी पर बाबा राम देव और सरकार के बीच समझौते की खबर चल चुकी थी और कहा जा रहा था कि सत्याग्रह प्रतीकात्मक होगा. मगर जो भी कांग्रेस की कार्यशैली से परिचित रहा है, उसके दिल में धुकपुकी थी कि जो नज़र आ रहा है, दरअसल वैसा है नहीं.

: फादर्स डे पर विशेष : जून के तीसरे रविवार को मनाया जाने वाला फादर्स-डे क्या वाकई पिता-पुत्र के रिश्तों में सेतु का काम करता है? ये एक बड़ा प्रश्न है जिसका उत्तर हम सिर्फ अपनी अंतरात्मा में झांककर ही देख सकते हैं. आज कितने ही परिवार ऐसे होंगे जिन में पिता-पुत्र के बीच किसी न किसी बात को लेकर विवाद चल रहा होगा. कई पिता ऐसे होंगे जो अपने बेटे से प्रताड़ित हो रहे होंगे और कई ऐसे होंगे जो बीती रात को भूखे पेट सोये होंगे. उनके लिए फादर्स-डे कितनी महत्ता रखता है, शायद इसका अंदाज़ा हम और आप नहीं लगा सकते. पत्र-पत्रिकाओं में आये दिन प्रकाशित हो रही दिल दहला देने वाली ख़बरें- 'पुत्र ने पिता को पीटा', 'संपत्ति के लालच में पिता की हत्या', या 'बेटों ने बाप को घर से निकाला' को लोग पढ़ते हैं, जाहिर है कि ये बातें उनके जेहन को झकझोरने के लिए मजबूर भी करती होंगी, लेकिन उसके वावजूद भी वे अपने आप को बदलना नहीं चाहते.

दिल्ली के रामलीला मैदान में अहिंसक तरीके से चल रहे धरने में रात्रि को बाबा रामदेव और आम आदमी पर पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों द्वारा केंद्र सरकार के इशारे पर की गई कारवाई पर भारतेंदु ह्यूमन केयर एंड डेवलोप्मेंट सोसाइटी की बैठक में इसकी घोर निंदा कि गई. सोसाइटी के सचिव डॉ. पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि भारत एक लोकतान्त्रिक देश हैं यहाँ किसी भी व्यक्ति को अपनी बात शांति पूर्वक कहने का मौलिक अधिकार प्राप्त हैं. कल रात की घटना हमारे ६० साल से अधिक पुराने लोकतंत्र का काला अध्याय हैं. यह घटना हमें चीन के थेनयान चौक की याद दिलाती हैं जहाँ आम आदमी की आवाज़ को टैंको से कुचला गया था. डॉ. पीयूष ने कहा कि संस्था इस घटना के विरोध में देश के विभिन्न भागों में हस्ताक्षर अभियान चलाएगी.

गिरीशजीहाल में महिलाओं की स्थिति को लेकर चौंकाता हुआ एक सर्वे प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया है कि अफगानिस्तान, कांगो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया में महिलाओं की हालत बहुत खराब है. इन देशों को महिलाओं के लिए खतरनाक भी बताया गया है. पहले स्थान पर अफगानिस्तान है, जहां 87 फीसदी महिलाएं निरक्षर हैं, और 80 फीसदी का विवाह जबरदस्ती कराया जाता है. 100 में से 11 की मौत प्रसवकाल के दौरान हो जाती है. दूसरे स्थान पर कांगो है, जहां हर साल चार लाख महिलाएं बलात्कार का शिकार होती हैं. तीसरे पायदान पर पाकिस्तान है, यहां भी महिलाओं की स्थिति बहुत खराब है. यहां हर साल एक हजार को 'ऑनर किलिंग' का शिकार होना पड़ता है. सोमालिया में भी महिलाएं निरक्षरता और बलात्कार की शिकार हैं. वहां उनकी स्वास्थ्य सेवाओं में भी भारी कमी है.

देश में ढांचागत विकास की आंधी चल रही है. हमारे वित्त मंत्री के अनुसार देश की आर्थिक विकास दर 9 प्रतिशत के आस-पास है और उसमें सेवा क्षेत्र तथा ढांचागत विकास का आधे से ज्यादा योगदान है. आज संसद से लेकर सड़क तक अत्याधुनिक मॉल, शौपिंग काम्प्लेक्स, विश्व स्तरीय टाउन विकसित किये जा रहे है. बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपना प्लांट लगाने के लिए तो जल-जंगल-जमीन सब चाहिए.  लेकिन अब इसके लिए जमीन कम पड़ रही है. अब सरकार तथा बिल्डर्स किसानो से जमीन बेचने के लिए तथा मजदूरों से अपने आशियाने खाली करने को कह रही है, किसान जहाँ संगठित है वहां इसका विरोध कर रहे है नहीं तो चुपचाप औने पौने दाम पर जमीन बेचकर पलायन कर रहे है. ऐसा भी होता है कि झुग्गी-झोपडी-गरीब-आदिवासी की बस्ती अचानक बुलडोजर तले रौंद दी जाती है. लोग जब पूछते है कि हमें तो नोटिस मिला ही नहीं तो तपाक से उन्हें एक कागज दिखा दिया जाता है कि आपका मकान 'मास्टरप्लान' में आता है.

राजकुमार साहूभारतीय संस्कृति में संस्कार का अपना एक अलग ही स्थान है। सोलह संस्कारों में से एक होता है, विवाह संस्कार। देश-दुनिया में चाहे कोई भी वर्ग या समाज हो, हर किसी के अपने विवाह के तरीके होते हैं। मानव जीवन में वंश वृद्धि के लिए भी विवाह का महत्व सदियों से कायम है। इसके लिए समाज में एक दस्तूर भी तय किया गया है। ऐसे में आपको यह बताया जाए कि तालाब का भी विवाह होता है तो निश्चित ही आप चौंकेंगे! मगर ऐसी विवाह की परंपरा को दोहराई गई है, छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के केरा गांव में, जहां 80 बरसों बाद एक बार फिर तालाब का विवाह कराया गया। सभी रीति-रिवाजों के साथ ग्रामीणों ने दो दिनों तक यहां राजापारा नाम के तालाब के विवाह संस्कार को पूर्ण कराया और इस तरह तालाबों के संरक्षण के साथ, उसके अस्तित्व को बचाने की गांव वालों की मुहिम जरूर रंग लाएगी।

भारत पर बाबा रामदेव की असीम कृपा है। देश की जनता उनकी अनन्य भक्त है। दैनिक योग-प्रक्रिया के अनुपालन से बाबा रामदेव ने गरीबों को असाध्य रोगों से मुक्ति दिलाई है। आधे दशक से भी कम समय में भारत रोगमुक्त और लाइलाज बीमारियों के प्रकोप से निजात पा चुका है। ऐसा औरों का नहीं बाबा रामदेव का खुद ही मानना है। अपनी संपत्ति को लोक-संपत्ति घोषित कर चुके बाबा रामदेव पूँजी के अनावश्यक एकत्रण के सख्त खिलाफ हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ हालिया अभियान इसी का प्रमाण है। वे कहते हैं- 'विदेश ले जाए गए काले धन को राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित किया जाना चाहिए और काला धन रखने को राजद्रोह के समान समझा जाना चाहिए।' योगगुरु का उसूल है कि जो देने योग्य है उससे अधिकतम वसूल करो। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वे कारोबारी हैं या कि योग-साधना को 'व्यापार' की तरह 'हैण्डल'  करते हैं, जैसा कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने अपने ताजा बयान में कहा है।

जयशंकर भ्रष्टाचार एक बार फिर सुर्खियों में है.  इस बार घोटालेबाजों और उनके कारनामों के कारण नहीं बल्कि इस पर लगाम लगाने की मांग के साथ हो रहे धरना-अनशन आंदोलनों की वजह से. कुछ दिनों पहले समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार से निबटने की 'रामबाण दवा' के बतौर लोकपाल के गठन की मांग के साथ संसद के पास जंतर मंतर पर आमरण अनशन शुरू किया था. उन्हें दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों से मिले समर्थन के कारण आईपीएल से लेकर राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन, आदर्श फ्लैट आबंटन और फिर २जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटालों के एक- एक कर उजागर होते जाने से घबराई सरकार एक तरह से हिल सी गई थी.