उत्तर प्रदेश की पुलिस हिन्दू वाहिनी की लठैत बन गयी है.... दलितों पर हमले करने वाले सवर्णों को पता है कि मुख्यमंत्री उनके समर्थक हैं...

लखनऊ : रिहाई मंच में महाराजगंज में हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा धर्मान्तरण का आरोप लगाकर जबरन चर्च में प्रार्थना रोकने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिन्दू युवा वाहिनी के लोग अल्पसंख्यक समुदाय के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे है जिसको बर्दाश्त नही किया जायेगा. मंच ने राजधानी लखनऊ में दलित परिवार के ऊपर हमले और आगरा,प्रतापगढ़ और फिरोजाबाद में पुलिसकर्मियों की हत्या पर टिप्पणी करते हुए कहा कि योगी की कानून व्यवस्था की यही सच्ची तस्वीर है.

जनाब, चप्पलमार सांसद प्रकरण अभी खत्म नहीं हुआ है । कभी किसी नेता या किसी वीआईपी पर को आम व्यक्ति जब जूता-चप्पल या स्याही फेंक कर किसी मुद्दे पर अपना विरोध जताता है तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने में जरा भी देर नहीं लगती, उसको गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डालने में पुलिस भी पूरी मुस्तैदी दिखाती है । हालांकि इस तरह की घटनाएं हमला या मारपीट नहीं होतीं। भले ही ये तरीका गलत हो, मगर ये तो एक तरह की अभिव्यक्ति ही है। यह आक्रोश जताने का एक तरीका है।

CAG, Enforcement directorate investigate this case. Destroying Kirana merchants the Bjp way. Bjp gov is deliberately not printing  RS 1000 notes. One for vastu and another for destroying kirana merchants all over india. Suppose you are going to buy a Cfl  bulb  with mrp 200 and u have rs 2000 note only. U will go to kirana merchant and He will give your cfl bulb  to you. But he has no change for rs 2000 note. So you will leave that shop and go go reliance or more or bigbazar( who fund BJP gov ), who have change for your rs 2000 note.

मोदी-योगी बताएं देश मनुस्मृति से चलेगा या फिर बाबा साहेब के संविधान से... भाजपा शासित राज्यों में हिंदुत्ववादी संगठन चला रहे हैं समानांतर सरकार... गौ हत्या के नाम पर देश की संसद को गुमराह कर रही है मोदी सरकार
 
लखनऊ : रिहाई मंच ने झारखण्ड के गुमला में मुहम्मद सालिक और राजस्थान के अलवर में गौ रक्षकों द्वारा पहलू खान की निर्मम हत्या की निंदा करते हुए कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में हिंदुत्ववादी संगठन समानांतर सरकार चला रहे हैं, जो कि मानवता को भी शर्मसार कर देने वाला है। मंच ने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह से पहलू खान की हत्या के बाद मुहम्मद सालिक को गौ रक्षकों ने पीट -पीटकर मार डाला उसने यह साबित कर दिया है कि भाजपा शासित राज्यों में कानून-व्यवस्था का क्या हाल है।

अर्पण जैन 'अविचल'
समर्थता के साथ सार्थकता की पूंजी समेटे हुए, तरंग आभामंडल की भाँति सौंदर्य की अनुपम कृति, जिसमें भावना का अथाह सागर भी समाया है तो सर्वस्व अर्पण करती हुई ममता का अंबर भी | जिसकी आराधना से आसक्ति के तिमिर मिटते जाते हैं, जिसके गीत भ्रमर गुंजन की भांति कानों की खनक बने हुए है, जो त्याग की प्रतिमूर्ति समान सहज, सुंदर, और यथार्थ के धरातल का आलोक भी है | जिसके कारण ही परम सत्ता के अनूठे सृजन का गौरव भी स्थापित होता है | वही जिसे लोग करुणामयी, सौभाग्यशाली, ममतामयी, मार्मिक और पूजनीय के नाम से पुकारते है, वहीं जो स्थापित सर्वस्व का आधारभूत स्तंभ है, वहीं जो संकल्प की सहजता का प्रतिमान है, वहीं जो स्वार्थ से परे केवल समाज का रंग है, लोग जिसे नारी, महिला, स्त्री, देवी, चपला, चंचला तमाम उपमानों से पुकारते हुए ईश् कृति का धन्यवाद ज्ञापीत करते है, वहीं समाज के रंगों के एकत्रीकरण का तार्किक कारण भी है |

जिस समय देश में मां की आराधना का पर्व नवरात्र मनाते हुए देवी की पूजा-अर्चना हो रही है, उन्हीं दिनों में विडियो वायरल कर एक बेटी का मजाक बनाया जा रहा है। हैरत है कि विडियो में बोलने वाली बिटिया के भाव समझे बिना लोग बड़े चाव से इस विडियो को वायरल कर आग की तरह फैलाने की अपील कर रहे हैं। गायत्री मंत्र का उच्चारण भी जिन्हें ठीक से याद नहीं होगा, ऐसे लोग धर्म और आस्था की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए खुद को समाज में श्रेष्ठ बताने के लिए इस विडियो के साथ मनगढ़ंत बातें लिखकर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में विभिन्न भारतीय भाषाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी भाषाओं के हितों में सामूहिक आवाज उठाने के लिए भारतीय भाषा समूह ( बी बी एस)  का गठन किया है। भारतीय भाषा समूह ने सरकार से भारतीय भाषाओं के हितों के लिए भाषा आयोग बनाने की मांग की है जिसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो। भारतीय भाषा समूह ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित अपनी इस बैठक में यह आकलन प्रस्तुत  किया कि 1947 के बाद सत्ता के केन्द्र  दिल्ली में भारतीय भाषाओं की जो उपस्थिति सुनिश्चित की गई थी वे बेदखल की जा रही है। सत्ता के कई प्रतिष्ठानों से कई भारतीय भाषाएं विस्थापित कर दी गई है।इनमें आकाशवाणी ले कर भारतीय संसद जैसी संस्थाएं भी शामिल है।

आज के दैनिक जागरण में छपी खबर के अनुसार अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर सोमनाथ की तर्ज पर भव्य राम मंदिर बनवाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद् ने निर्णायक लड़ाई लड़ने का मन बनाया है.इसके तहत उसने नवरात्रि के पहले दिन से पूरे देश में रामोत्सव मनाने की घोषणा कर दिया है.इसके तहत यह पुरे देश में 5000 स्थानों पर रामोत्सव मनायेगा..विहिप के काशी प्रान्त के प्रमुख के मुताबिक पूरे देश में राम-महोत्सव 11 अप्रैल तक मनाया जायेगा.वहां के विहिप जिला प्रवक्ता के मुताबिक़ राम मंदिर बहुसंख्य समाज की आस्था ,सम्मान और अस्मिता का सवाल है.इस मसले पर पूरे देश में निर्णायक माहौल बनाएगा .

बजट में रोकथाम की कोशिश गायब... अपनी कमाई की जानकारी देने को लेकर देश की आम जनता और राजनीतिक दलों के लिए दोहरे मापदंड क्यों है? जैसी कि उम्मीद थी, मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी की परेशानियां झेलने के दौरान जनता द्वारा राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे तथा उनकी कमाई को पारदर्शी बनाने हेतु उठाई गई मांग की दिशा में सरकार अपने इस बजट में कुछ कड़े प्रावधान लायेगी, परन्तु ऐसा कुछ न कर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देशवासियों को निराश ही किया है। हालांकि दिखावे के तौर पर कुछ ऐसा जरूर किया गया है जिससे ऐसा भ्रम फैले कि सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है।

(अनुवादकीय नोट : यद्यपि मीरा नंदा ने यह लेख 2007 में मायावती के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के समय तहलका मैगज़ीन में अंग्रेजी में लिखा था परन्तु इसमें उसने मायावती की सर्वजन की राजनीति से उपजे जिन खतरों और कमजोरियों को डॉ. आंबेडकर के माध्यम से इंगित किया था, आज वे सभी सही साबित हुयी हैं. मायावती हिंदुत्व को रोकने में सफल होने की बजाये स्वयम उसमें समा गयी है. मीरा नंदा की अम्बेडकरवाद की समझ बहुत गहरी और व्यापक है.- एस.आर. दारापुरी)

मायावती के चुनाव अभियान में भीम राव आंबेडकर का नाम बार बार आता है . परन्तु क्या संविधान निर्माता उसकी राजनीति की तारीफ करते? मीरा नंदा ने चुनाव उपरांत इन दोनों के बीच वार्तालाप की कल्पना की है.

फरीदाबाद से छेड़ेंगे मजदूरों की हक की लड़ाई... साथियों, इस रविवार को मुझे फरीदााद में उस दयानंद कॉलोनी में जाकर उन मजदूरों के प्रधानों से बात करने का मौका मिला जो मजदूर बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने पत्थर खदान मालिकों के चंगुल से मुक्त कराकर पुनर्वासित किये हैं। वहां जाकर मैंने देखा कि स्वामी जी का यह प्रयास समाजसुधारकों व समाजसेवकों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। 1980 के आसपास स्वामी जी ने पत्थर खदान में काम कर रहे बंधुआ मजदूरों की एक बड़ी लड़ाई लड़ी।

फाइट फॉर राइट ने मनाए शहादत दिवस व लोहिया जयंती

नोएडा। देश को चलाने वाले आजादी की कीमत को भूल गए हैं। देश को आजाद कराने में सब कुछ न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों के परिजन फटे हाल में में हैं और देश से गद्दारी करने वाले लोकतंत्र की मलाई चाट रहे हैं। यह फाइट फॉर राइट के राष्ट्रीय अध्यक्ष चरण सिंह राजपूत ने सेक्टर 12 स्थित शिमला पार्क में आयोजित शहादत दिवस व लोहिया जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से किसान आत्म हत्या कर रहे हैं। मजदूर का जमकर शोषण हो रहा है। गरीब की कोई सुनने वाला नहीं है। मीडिया पूंजपीतियों की रखैल बनकर रह गया है। उससे तो यह ही लग रहा है कि देश आज भी गुलाम है। स्वाभिमानी खुद्दार व निर्भीक आदमी का आज भी दमन हो रहा है।

To,
Hon’ble Home Minister
Government of India, New Delhi
Through: Secretary- Ministry of Home Affairs
Subject: To declare Hindi as the National Language
Respected Sir,

Father of the nation Mahatma Gandhi, in his address to the Gujrat Education Conference at Bharuch in 1917, stressed the need of a national language and expressed: “Hindi is the only language, which could be adopted as the ‘National Language’ because it is the language spoken by majority of the Indians. It has the potential of being used as economic, religious and political communication link.”

SC disposed off the petition for appointment of the judges directing the UOI to take appropriate steps to reduce the pendency of case to 3 years with liberty to file a fresh petition if UOI does not take apt steps in this regard.

PRAYER

It is the most respectfully prayed that this Hon'ble Court may be pleased to allow petitioner to amend the prayer:

हमारे समाज में एक सोच बहुत ज्यादा प्रभावशाली है और वो है बिना सोचे-समझे किसी प्रथा को जन्म दे देना। संपूर्ण ज्ञान ना होते हुए भी लोग परम्पराओं को मान देने लगते हैं फिर चाहे वे किसी अन्य के लिए दुखदायी ही क्यों ना हो। कुछ इसी प्रकार की सोच का परिणाम है वर्तमान में प्रचलित ‘तीन तलाक’ की परम्परा। तीन तलाक की परम्परा आज मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए एक अभिशाप बन गई है। इस परम्परा ने ना जाने कितनी ही महिलाओं के जीवन को नरक बना दिया और ‘तीन तलाक’ की प्रथा न जाने कितने अनगिनत घर-परिवारों को नष्ट किया। आज अब धर्म और परम्परा के नाम पर सुधार की जरूरत एवं आवश्यकता है।

लीजिए, कॉर्पोरेट्स के दबाव में देश के गरीब-गुरबों के पेट पर लात मारने को एक और सरकारी सूनामी कहर बन कर टूटने ही वाली है। पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने के बाद केन्द्र सरकार आर्थिक सुधारों के बहाने कॉर्पोरेट घरानों की तिजौरियां भरने को कुछ बड़े और कड़े फैसले लेने जा रही है। इनके जरिये सरकार श्रम कानूनों में सुधार के नाम पर कंपनियों को उत्पादन लागत घटाने तथा निर्यात-प्रोत्साहन के हिसाब से कर्मचारियों की मनमानी छंटनी करने की छूट देने जा रही है। नोटबंदी से तो देशभर में लगभग डेढ़ सौ ही अकाल मौत की नींद सो गये थे, लेकिन इस सूनामी की भेंट कितने बेकसूर चढ़ेंगे इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।