दिनेश शाक्‍यचंबल के बीहड़ों के आसपास रहने वाले वासिंदों के अलावा डाकुओं से जुडे़ हुये बहुतेरे लोग इस बात को भली-भांति जानते हैं कि सीमा परिहार खूंखार दस्यु सरगना निर्भय गूर्जर की पहली बीबी है, लेकिन इस बात का उसके पास ऐसा कोई सबूत नही है, जिससे सीमा अदालत मे साबित कर सके और हुआ भी ऐसा ही,  अदालत में सीमा इस बात को साबित करने में नाकाम रही है। इलाहबाद उच्च न्यायलय की अशोक भूषण और रणविजय सिंह की संयुक्त खण्डपीठ ने फिल्म बीहड़ के निर्माण को रोकने की सीमा की अपील को खारिज करते हुये फिल्म के निर्माण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

बीहड़ फिल्म के निर्माता निर्देशक कृष्णा मिश्रा ने अदालत के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुये कहा है कि इससे उन्हें बल मिला है कि जिस मकसद के तहत वे इस फिल्म का निर्माण करने में लगे हुये हैं उसमें वे पूरी तरह से सफल होंगे। कभी चंबल के बीहड़ में अपने आतंक के बलबूते पर कुख्यात हुई सीमा परिहार, निर्भय गुर्जर जैसे खूंखार डाकू की बीबी है कि नहीं इसमें अब इस लिहाज से संशय नजर आता है क्यों कि अदालत ने सीमा परिहार से निर्भय गूर्जर की बीबी होने का सबूत मांग लिया है और सीमा परिहार डाकू निर्भय गूर्जर के साथ हुई अपनी शादी का सबूत दे पाने में नाकाम रही हैं। अब ना तो निर्भय गूर्जर ही जिंदा है और ना ही सीमा परिहार चंबल के बीहड़ों में आंतक मचाती हुई नजर आ रही हैं फिर यह बात साबित करने की भला क्या जरूरत आन पड़ी है?  यह बात फिलहाल समझ से परे नजर आ रही है और जरूर ही यह बात सबके मन में कील की तरह से चुभ रही होगी कि आखिरकार सीमा परिहार को यह सब करने की जरूरत क्यों पड़ गई?

सीमा को यह सब करने की जरूरत नहीं पड़ी है बल्कि सीमा को अदालत के आदेश का पालन भी करना पड़ रहा है। असल में सीमा परिहार ने चंबल के खूंखार डाकू के जीवन पर बनाई जा रही फिल्म बीहड़ में निर्भय गूर्जर के किरदार और खुद की बिना अनुमति के बाबजूद फिल्म के निर्माण पर नाराजगी जताते हुये सीमा की तरफ से इलाहबाद उच्च न्यायालय मे एक वाद इस बाबत दायर किया गया कि बीहड़ फिल्म का निर्माण तत्काल प्रभाव से रोका जाए। सीमा परिहार ने बीहड़ फिल्म को लेकर जो आपत्ति अदालत मे दाखिल की थी उसमें दो बातें कही गई हैं-  एक तो बीहड़ फिल्म का प्रमुख किरदार निर्भय गूर्जर की बीबी होने के नाते बिना उनकी अनुमति फिल्म कैसे बनाई जा रही है?  इसके अलावा सीमा परिहार ने बीहड़ फिल्म के निर्माता-निर्देशक कृष्णा मिश्रा से अपनी पुरानी फिल्म वुडेंड में काम करने के एवज में बतौर एग्रीमेंट भुगतान ना किये गये बकाये 20 लाख रूपये की मांग की है। सीमा ने अदालत में कहा कि वुडेंड फिल्म का निर्माण भले ही उसकी जिंदगी पर किया गया हो लेकिन समझौते के मुताबिक उसे 20 लाख रुपये की रकम नहीं दी गई है।

सीमा के इस कथन की बाबत अदालत ने वुडेंड फिल्म को लेकर हुये एग्रीमेंट की प्रति मांगी, जिसे भी दिखा पाने मे सीमा परिहार कामयाब नहीं हो सकी हैं। अदालत ने सीमा परिहार से ऐसे दो दस्तावेजों की मांग की, जिसमें से एक का सबूत दे पाना तो किसी भी सूरत में इसीलिये संभव नहीं है क्यों कि डाकू जीवन मे जब निर्भय गूर्जर के साथ सीमा परिहार की शादी हुई तो मात्र डाकू जीवन की शादी थी, उस समय ना तो फोटो खींची गई या कोई रिकार्ड किया गया क्‍यों कि बीहड़ में यह कैसे संभव हो सकता था?  ना ही कोई ऐसा गवाह है जो खुले आम कह सके कि उसके सामने सीमा परिहार सीमा की शादी निर्भय के साथ हुई है। दूसरी बुडेंड फिल्म के निर्माण के दौरान सीमा परिहार के फिल्म में काम करने के एवज मे बीस लाख रूपये के एग्रीमेंट का है, जिसे भी सीमा अदालत में पेश करने में नाकाम रही हैं। इसके बाबत कहा जा सकता है कि सीमा परिहार पूरी तरह से अशिक्षित हैं और हो सकता हो इसी का फायदा उठाया गया हो। किसी  ऐसे दस्तावेज को सीमा को दे दिया गया हो, जो एग्रीमेंट ना हो और उसे एग्रीमेंट बता दिया गया हो,  और सीमा समय पर बीस लाख वाले एग्रीमेंट को भी अदालत में पेश करने में कामयाब नहीं हो सकी हैं।

यहां इस बात का जिक्र करना बेहद जरूरी हो जाता है कि सीमा परिहार को लेकर चंबल के बीहड़ों में डाकुओं के बीच में घमासान होता रहा है, कई बार सीमा परिहार को लेकर लालाराम या फिर रामआसरे फक्कड़ नामक डाकू के बीच गोलीबारी होती रही है, लेकिन सीमा परिहार का एक बेटा सागर है जिसके बाप का नाम डाकू लालाराम है। चंबल के बीहड़ों में सीमा ही ऐसी पहली डाकू रही है, जिसने बीहड़ में रहते हुये बेटे को जन्म देकर चंबल में मां बनने वाली डाकू बनी। सीमा परिहार पहली दस्यु सुंदरी के रूप में सामने आई थीं, जिसने अपने डकैती के जीवन काल में ही माँ का तो दर्जा हासिल कर लिया, परंतु पत्नी वह आज तक किसी की नहीं बन सकी। हालांकि कुख्यात दस्यु सरगना निर्भय सिंह गूर्जर के साथ बेशक कुठारा (अजीतमल) में सात फेरे लिए हों और दस्यु सरगना रामआसरे तिवारी उर्फ फक्कड़ ने कन्यादान भी किया हो, परंतु निर्भय की मौत के बाद उसे न तो पति के अंतिम संस्कार की पुलिस प्रशासन ने ही और न ही समाज ने मान्यता दी। बीहड़ में रहने के बावजूद हथियारों से दूर रहने वाली सीमा परिहार को विभिन्न दल जिस्म के लिए अपनाते रहे और सीमा सिर्फ गैंगवार से ही जूझती रही।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बिठौली थाना क्षेत्र के कालेश्वर की गढ़िया (अनेठा) में खासा दबदबा रखने वाले बलबल सिंह परिहार के पुत्र शिरोमणि सिंह की सबसे छोटी बेटी की जिंदगी इस कदर बदनुमा हो जाएगी, यह किसी को नहीं पता था। सीमा की तीनों बड़ी बहनों की शादी हो गई थी। इसके बाद शिरोमणि सिंह औरैया जनपद के अयाना थाना क्षेत्र के ग्राम बबाइन में जा बसे। इसी बीच अपनी बड़ी बहिन मंजू के घर चकरनगर क्षेत्र में गई सीमा की आंख सिपाही भारत सिंह से क्या लड़ी कि उसकी जिंदगी की तस्वीर ही बदल गई।

बकौल सीमा परिहार महज तेरह साल की उम्र में रंजिश के चलते कुख्यात दस्यु सरगना लालाराम ने उसे अगवा कर लिया और अठारह वर्ष उसने लालाराम के साथ बिताए। इस बीच वह सामाजिक जीवन में वापस न जा सके इसके लिए उसके ऊपर पुलिस ने दर्जनों मुकदमे दर्ज कर लिए। सीमा परिहार को पाने के लिए लालाराम गिरोह के ही जय सिंह ने बगावत कर ली, परंतु पुलिस ने जब जय सिंह का जीना मुश्किल कर दिया तो फक्कड़ की शर्त पर जय सिंह ने निर्भय गूर्जर को सौंपा। इसके बाद 5 फरवरी, 1989 को फक्कड़ ने कन्यादान देकर निर्भय के साथ उसके सात फेरे करा दिए। जिंदगी की परेशानी यहां भी खत्म नहीं हुई। बीहड़ों में ही उसने मातृत्व सुख हासिल किया और निर्भय और लालाराम के बीच भंवर में वह फंस कर रह गई। दोनों में गैंगवार हो गया और अंतत: वर्ष 2000 में कानपुर देहात जनपद में लालाराम पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया। इसी के साथ सीमा ने भी बीहड़ी जीवन को त्याग आत्मसमर्पण कर दिया। 7 नवंबर, 2005 को निर्भय की मौत के बाद जब सीमा परिहार ने अपने पति का पुलिस प्रशासन से शव मांगा तो उसके अनुरोध को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया, बावजूद इसके सीमा ने वाराणसी में निर्भय की अस्थि विसर्जित कर जबरन पत्नी का दर्जा हासिल करने की कोशिश की।

सीमा परिहार महिला डकैतों में ऐसी पहली महिला है जिसने बीहड़ी जीवन में मां बनने का सुख हासिल किया। हालांकि सीमा के बाद चंदन की पत्नी रेनू यादव, सलीम गूर्जर की प्रेयसी सुरेखा उर्फ सुलेखा और जगन गूर्जर की पत्नी कोमेश गूर्जर भी मां के सुख को हासिल कर चुकी थीं। सीमा परिहार की अपील के खारिज होने के बाद चंबल के खूंखार दस्युओं के जीवन को लेकर बनाई जा रही फिल्म बीहड़ हर हाल में आम दर्शकों को जरूर दिखायी जायेगी। फिल्म बीहड़ अब चंबल के बीहड़ में फिल्म की शूटिंग पूरी तरह से हो गई है और फिल्म की यूनिट भी बीहड़ से वापस लौट गई है। फिल्म के निर्माता कृष्णा मिश्रा का कहना है कि चंबल के बीहड़ों में होने वाली फिल्म की शूटिंग अब पूरी हो गई है फिल्म की कहानी के अनुरूप डाकुओं का गैंग जब बीहड़ से निकल कर शहरी इलाके में जाता है तब वहां पर गणेश पूजा के दौरान होने वाले एक गाने की शूटिंग बाकी रह गयी है।

लेखक दिनेश शाक्य सहारा समय उत्तर प्रदेश उत्तराखंड न्यूज चैनल में इटावा के रिर्पोटर हैं।