काफी कम समय में देश विदेश के भोजपुरिया दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने मे कामयाब रहा महुआ प्लस अब दर्शकों को एक नए कलेवर और नये रंग रूप में नज़र आएगा। महुआ प्लस पहले से ही अपने एक से बढ़कर एक  बेहतरीन रिएलिटी शोज के लिए दर्शकों के बीच काफी प्रसिद्द है जिसके वजह से यह चैनल दर्शकों के बीच पहली पसंद के साथ हमेशा सुर्खियों मे रहा है। भौजी नं वन, सुरवीर जैसे रिएलिटी शोज, नए भोजपुरी फिल्म, हिंदी - भोजपुरी फ़िल्मी गाने , भक्ति भजन आरती जैसे उम्दा कार्यक्रम को दर्शकों ने हमेशा अपना प्यार दिया है।

वर्जिन ट्री की पूजा के बारे में आपने तो सुना ही होगा, हिन्दू कॉलेज के हॉस्टलर्स अपनी वर्जिनिटी से छुटकारा पाने के लिए हर साल 14th Feb को इसकी धूमधाम से पूजा करते है, ये एक बहुत ही बड़ा उत्सव होता हैं!  मूवी के बारे में : "माय वर्जिन डायरी" मूवी, नॉर्थ कैंपस दिल्ली विश्विद्यालय, के हॉस्टलस की उन अनसुनी कहानियों के बारे में है! वहां ज़िन्दगी की शुरआत रात में होती है, सिगरेट और चाय के प्याले पर ज़िन्दगी की सारी उलझनों का समाधान खोजा जाता हैं !

Dayanand Pandey : आज हम ने भी यशराज फिल्म की अली अब्बास ज़फर निर्देशित फ़िल्म सुल्तान देख ली। फ़र्स्ट हाफ फ़िल्म बहुत ही फ़ास्ट है। लेकिन सेकेंड हाफ में फ़िल्म बुरी तरह लथड़ जाती है। हांफने लगती है। कहूं कि हिंदी फ़िल्म हो जाती है। जो भी हो तर्क और तथ्य पर गौर न करें तो सुल्तान एक ग़ज़ब की इंटरटेनर फ़िल्म है। सलमान के नाम पर यह फ़िल्म ख़ूब सारे रिकार्ड भी तोड़ रही है। कमाई सहित और भी ढेर सारे रिकार्ड। लेकिन एक तथ्य पर मैं फिर भी मिट्टी नहीं डाल पा रहा हूं कि पसलियां टूटने के बाद भी वह कैसे रिंग में फाईट करता जा रहा है।

फिल्मकार संजयलीला भंसाली के साथ दुर्व्यवहार निश्चय ही दुर्भाग्यपूर्ण है। किन्तु ऐतिहासिक तथ्यों और लोकमान्य प्रेरणादायक राष्ट्रीय विभूतियों की छवि विकृत करना भी एक सामाजिक अपराध है। यह आवश्यक है कि कवि-कथाकारों और कलाकारों को अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर रचना को अधिक से अधिक कलात्मक बनाने की छूट दी जानी चाहिए किन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि रचनाकार इतिहास के तथ्यों और स्वीकृत सत्यों को ही उलट कर रख दे। फिल्म ‘पद्मावती’ में महारानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया  जाना भी ऐतिहासिक तथ्यों को उलटना और महारानी पद्मावती की आदर्श सती की प्रेरक छवि को कलंकित करना है। यह अक्षम्य अपराध है। इस से केवल राजपूत समाज की ही नहीं बल्कि उस सारे भारतीय समाज की भावनाएं आहत हुई हैं जो अपनी मान-मर्यादा के लिए स्वयं को सहर्ष भस्मसात कर देने वाली महारानी  को अपना आदर्श मानता है ; उनके महान बलिदान पर गर्व का अनुभव करता है।

Abhishek Srivastava : मेरे साथ एक बड़ी दिक्‍कत यह है कि देह को ज़रा सी ठंडी हवा लगते ही मुझे नींद आ जाती है। पहली बार ईमानदारी से बता रहा हूं कि मैं इतनी फिल्‍में देखने सिनेमाहॉल में इसलिए जाता हूं ताकि दो-ढाई घंटा चैन से पसीना सुखा कर झपक सकूं। ज़ाहिर है, फिल्‍मों को परखने का मेरा पहला पैमाना भी इसी से तय होता है। हुआ यों कि अव्‍वल तो मैंने तय किया था कि Sultan नहीं देखूंगा। इस हफ्ते Kerry On Kutton की बारी थी।

Abhishek Srivastava :  "अपनी जान से भी कीमती कुछ और है क्या? है, वो कि जिसके लिए मरा जा सके!"  रंगून जानलेवा है। देख आइए। समझ में आ जाएगा कि जब तक जान देने लायक अपनी जान से कीमती कोई चीज़ न मिले, तब तक जान को बचाकर रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। नाखून कटा कर शहीद बने तो क्या ही बने! एक और बात समझ में आ सकती है- कि इश्क़ में जान देना लंठई है। इश्क़ करिए, लेकिन उसमें जान मत दीजिये क्योंकि इश्क़ से भी बड़ी शै दुनिया में है।

जिन्दगी के मायने जिसने आखों से देख अपने जेहन और कलम से अपने गीतों में उकेरा एक ऐसा ही नाम शैलन्द्र का है। ‘तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर, अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर’ 1950 में लिखे इस गीत में भविष्य की सम्भावनाओं और उसके संघर्ष को जो आवाज दी वह आजादी के बाद और आज के हालात का एक तुल्नात्मक अध्ययन है। और वे जब कहते हैं ‘ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन, ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन’ तो ऐसी सुबह की तलाश होती है, जिसे देखने का हक आने वाली नस्लों से कोई छीन नहीं सकता। और इसीलिए वे आगे कहते हैं कि बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये, न दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इन्क़लाब ये।

हमारे लिए कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता, बस किसी का बुरा नहीं होना चाहिए... फिल्म रईस का है ये डायलाग... इस सन्देश पर शाहरुख़ खान की नई फिल्म रईस में दिया गया है। फिल्म का नायक पूरी फिल्म में कई बार उपरोक्त सन्देश को दोहराता है। अब आप जरूर जानना चाहेंगे कि फिल्म के नायक का धंधा क्या है। फिल्म के नायक का धंधा शराब प्रतिबंधित राज्य गुजरात में दारु बेचने का है। है न कन्फ्यूजन! पूरी फिल्म की कहानी नायक के इसी कंफ्यूजन पर आधारित है।

इन दिनों एक प्रतिष्ठित चैनल पर प्रसारित हो रहे एक रियलटी ड्रामे के फाइनल एपिसोड की हर कोई बाट जोह रह है। हर किसी के दिल में ये सवाल है कि क्या वाकई में इस ड्रामे वाले स्वयंवर में सच्ची शादी हो पाएंगी या नहीं? पर जो भी हो यह केवल एक ड्रामा है और जो न केवल समाजिक बंधनों का बल्कि धर्म पर भी कुठाराघात कर रहा है। हमारे देश में प्रचीन काल से स्वयंवर की परम्परा चली आ रही है। सुंदर, सुशील राजकुमारियों के लिए श्रेष्ठतम वर की तलाश स्वयंवर के माध्यम से ही की जाती थी। राजा आस-पास की रियासतों के राजकुमारों को अपने यहां निमंत्रित करते थे और फिर उनकी योग्‍यता का परीक्षण किया जाता था। कभी-कभी इस तरह भी होता था कि राजकुमारियों को स्वाधिकार दिया जाता था कि वो खुद अपने योग्य वर का चयन करें। इतिहास गवाह है कि जब-जब नारी सर्वश्रेष्ठ दक्षता से परिपूर्ण होती थी तब स्वयंवर का आयोजन किया जाता था।

पूर्वापोस्ट की ओर से महाकवि जयशंकर प्रसाद की पुण्यतिथि पर उनकी अमर कहानी 'गुंडा' पर आधारित नाटक का भव्य मंचन हुआ। श्रीराम सेंटर, मंडी हाउस, नई दिल्ली में शाम 6.30 बजे नाटक का मंचन हुआ। इस नाटक मंचन में मुख्य अतिथि केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीडॉ महेश शर्मा और विशेष आमंत्रित अतिथि संत विवेकदास आचार्य जी, महंत कबीर मठ शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्म श्री रामबहादुर राय, चेररमैन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सांसद वीरेंद्र सिंह, डॉ शकील उज्जवला अंसारी, सदस्य राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग, उपेन्द्र कुमार( IAS ) पूर्व सचिव, भारत सरकार और बीके मौर्य ( IPS ), एडीजी, यूपी पुलिस शामिल हुए।

राजकपूर के साथ बिताए लम्‍हे, राजकुमार की ठाठ के गवाह, धर्मेन्‍द्र की जिंदादिली के किस्‍से,  दारा सिंह की ताकत को करीब से देखने और अमिताभ के साथ  बिताए पल... बस यही उसकी दौलत हैं...  अफसोस कि वह इस समय कंगाल है। हजार डेढ़ हजार रूपए की नौकरी करने करीब दस किलोमीटर का सफर तय करता है और फिर अपने गांव लौट जाता है। उसका कद महज दो फुट है पर इरादे बुलंद। वह कहता है, ऊपर वाले ने उसे महज दो फीट का बनाया है लेकिन  उसने अपने कद की कमी को कभी आडे़ नहीं आने दिया और बुलंद हौसलों के साथ दुनिया का सामना किया लेकिन अब वह थक चुका है। बात हो रही है करीब सौ से ज्‍यादा हिंदी फिल्‍मों में काम कर चुके कलाकार नत्‍थू दादा की।

अर्पण जैन 'अविचल'

सस्ती लोकप्रियता और बालीवूड का बहुत पुराना नाता हैं , किंतु जब फन को लेकर निम्‍न स्तर उतर कर कोई बात कही जाती है इन बातों से व्यक्ति की मानसिक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता हैं | बॉलीवुड में अपनी अदभुत आवाज़ के रंग बिखेरने वाले प्रख्यात पार्श्वगायक मोहम्मद रफी को लेकर करण जौहर द्वारा निर्देशित हालिया फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ रफ़ी साहब के फन पर संदेह का गोलघेरा लगाते हुए एक संवाद लिया गया हैं| फिल्म में अभिनेत्री अनुष्का शर्मा कहती हैं, “मोहम्मद रफी गाते नहीं, रोते थे.”

दिनेश शाक्‍यचंबल के बीहड़ों के आसपास रहने वाले वासिंदों के अलावा डाकुओं से जुडे़ हुये बहुतेरे लोग इस बात को भली-भांति जानते हैं कि सीमा परिहार खूंखार दस्यु सरगना निर्भय गूर्जर की पहली बीबी है, लेकिन इस बात का उसके पास ऐसा कोई सबूत नही है, जिससे सीमा अदालत मे साबित कर सके और हुआ भी ऐसा ही,  अदालत में सीमा इस बात को साबित करने में नाकाम रही है। इलाहबाद उच्च न्यायलय की अशोक भूषण और रणविजय सिंह की संयुक्त खण्डपीठ ने फिल्म बीहड़ के निर्माण को रोकने की सीमा की अपील को खारिज करते हुये फिल्म के निर्माण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

अभिव्यक्ति की आज़ादी और आलोचनात्मक विवेक पर जारी हमलों के ख़िलाफ़ एकजुट हों!

हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ‘द्रौपदी’ के मंचन को लेकर खड़ा किया गया हंगामा और इंदौर में इप्टा के राष्ट्रीय सम्मलेन में तोड़-फोड़ की कोशिश — हाल की ये दोनों घटनाएं बताती हैं कि राष्ट्रवादी उन्माद फैलाकर आलोचनात्मक आवाजों को दबा देने की नीति पर आरएसएस और उससे जुड़े अनगिनत संगठन लगातार, अपनी पूरी आक्रामकता के साथ सक्रिय हैं. हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में विगत 21 सितम्बर को महाश्वेता देवी को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी विश्व-प्रसिद्ध कहानी ‘द्रौपदी’ का मंचन किया गया. यह कहानी कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में है और इसका नाट्य-रूपांतरण / मंचन भी अनेक समूहों द्वारा अनेक रूपों में किया जा चुका है. ‘महाभारत’ की द्रौपदी की याद दिलाती इस कहानी की मुख्य पात्र, दोपदी मांझी नामक आदिवासी स्त्री, सेना के जवानों के हाथों बलात्कार का शिकार होने के बाद उनके दिए कपड़े पहनने से इनकार कर देती है जो वस्तुतः अपनी देह को लेकर शर्मिन्दा और अपमानित होने से इनकार करना है.

दिनेश शाक्‍य हम हमेशा से देखते रहे हैं कि किसी भी फिल्म की शूटिंग को लेकर निर्माता-निर्देशकों का रवैया या व्यवहार हरवक्त मधुर रहता है लेकिन निर्भय गूर्जर के जीवन पर बनने वाली बीहड़ नामक फिल्म के निर्माता-निर्देशक को शूटिंग के दौरान जिस तरह से गाली-ग्‍लौज करते हुये देखा जा रहा है, उसे देख कर यही कहा जा सकता है कि वे आम जिंदगी मे भी किसी विलेन या डान से कम नही हैं। जिस वाकये का यहां पर जिक्र हो रहा है वो असल में निर्भय गूर्जर पर बनने वाली फिल्म बीहड़ की शूटिंग के दौरान का है।

प्रभुनाथ शुक्ल

वालीवुड के बड़े पर्दे पर ‘लव‘ पर आधारित ‘इश्क क्लिक‘ 22 जुलाई को पूरे देश भर के सिनेमा घरों में रीलिज होने जा रही है। फिल्म का टेलर और म्यूजिक टीवी चैनलों और यूट्यूब पर धमाल मचा रहा है। फिल्म का प्रोमो और गीत ‘माना तुझी को खुदा‘ खूब चर्चित हो चुका है। अब तक करोड़ों लोग इस गीत को पसंद कर चुके हैं। फिल्म लव और रोमांस से भरी पड़ी है। फिल्म प्रेम और उसके अनसुलझे रहस्यों पर आधारित है। लव इंसान को किस गहराईयों तक पहुंचाता है इस फिल्म में यह सब आपको देखने को मिलेगा। फिल्म का अधिकांश हिस्सा दार्जिलिंग, मुंबई के अलावा दिल्ली और गुजरात में भी फिल्माया गया है।