रुद्रपुर, उत्तराखंड। जनकवि, बीबीसी के पूर्व प्रोड्यूसर, लेखक, अनुवादक और प्रकाशक नीलाभ, प्रख्यात चित्रकार हैदर रजा और प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी के निधन पर खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित सृजन पुस्तकालय में शिक्षा, सामाजिक, सांस्कृतिक, लेखन-पत्रकारिता आदि से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने तीनों विभूतियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। नीलाभ पर बात करते हुए मुकुल ने बताया कि ‘जंगल खामोश है’, चीजें उपस्थित हैं, ‘खतरा मोड़ के उस तरफ है’ और ‘ईश्वर को मोक्ष’ जैसी काव्य कृतियां दीं। नीलाभ ने प्रख्यात अंग्रेजी लेखिका अरुंधति राय के बहुचर्चित उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ का हिंदी में ‘मामूली चीजों के देवता’ शीर्षक से किया।

नीलाभ ने लेर्मोंतोव, बर्तोल्त ब्रेख्त, लोर्का आदि आदि अनेक विदेशी लेखकों की रचनाओं के हिंदी में अनुवाद किया इसके अतिरिक्त भारतीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका ‘नटरंग’ का संपादन भी किया। वे हमेशा, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी और गरीब वर्ग के संघर्षों में अग्रणी भूमिका में रहे। मुकुल ने जानकारी दी कि रंगों के चितेरे सैय्यद हैदर रजा अंतरराष्ट्रीय स्तर के चित्रकार थे। तैल और एक्रेलिक में बनाए चित्रों से उन्हें विशेष ख्याति मिली। इनमें भारतीय ब्रह्मांड, ज्ञान-विज्ञान के साथ ही दर्शन के चिन्ह भी परिपूर्ण हैं। भारत सरकार ने रजा को पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी के निधन की खबर आई। उन पर बात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनके लेखन में यर्थात और तार्किकता थी और वे जीवन पर्यन्त दबे-कुचले, आदिवासियों इत्यादि के साथ मजबूती से खड़ी रहीं और सत्ता के जनविरोधी चरित्र और कार्रवाइयों का दृढ़ता से विरोध किया। उनकी कृतियों और जनसंघर्षों और वैचारिक संघर्षों की बात करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हमें उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में व्यापक जनता तक जानकारी पहुंचानी चाहिए ताकि लोगों को बेहतर नागरिक बनने और बेहतर समाज निर्माण की प्रेरणा मिल सके। श्रद्धांजलि सभा में मुकुल, डा. शंभूदत्त पांडे ‘शैलेय’, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, हेम पंत, पूजा बोरा, पानसिंह बोरा, गोपाल गौतम, मसलहुद्दीन खान, दिनेश, विजेंद्र, मनोज, नबी अहमद मंसूरी, कय्यूम अंसारी, अजय तिवारी, रामकुमार, रजनीश, पंकज, देवेंद्र अर्श आदि मौजूद थे।