पवन कुमार अरविंदभारतीय मूल के हालैंड निवासी अध्यापक व प्रसिद्ध नाट्यकर्मी रामदेव कृष्ण ने तुलसीदास की श्रीरामचरितमानस का डच भाषा में अनुवाद किया है। यह गद्य रुप में है। इसका लोकार्पण 14 जनवरी 2011 को सूरीनाम में पहली बार आयोजित होने वाले कुंभ मेले के दौरान वहां के राष्ट्रपति देसी बोतरस द्वारा किया जाएगा। श्री रामदेव इस सप्ताह अपने त्रि-दिवसीय दौरे पर भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली के संकटमोचन आश्रम में आयोजित एक सादे समारोह में डच भाषा में अनूदित ग्रंथ की पाण्डुलिपि की सीडी विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल को सौंपी। “विश्व हिंदू वॉयस” न्यूज वेब-पोर्टल से जुड़े पवन कुमार अरविंद ने रामदेव से विस्तृत बातचीत की है। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्‍य अंश-

पंजाब के साहित्य शिरोमणि पुरस्कार से सम्मानित और पंजाबी-हिंदी के विख्यात साहित्यकार डा. फूलचंद मानव को आस्ट्रेलिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। वहां पंजाबी कौंसिल आफ आस्ट्रेलिया के अध्यक्ष मोहिंदर सिंह, चेयरमैन मनधीर सिंह और महासचिव प्रभजोत सिंह ने एक बयान में यह जानकारी दी। कौंसिल पंजाबी समुदाय से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय काम करने के अलावा, साहित्य, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों में सराहनीय योगदान के फलस्वरूप लोगों को सम्मानित करती है। कौंसिल का गठन वर्ष 2005 में किया गया था। कौंसिल समय-समय पर ऐसे लोगों को सम्मानित करती रहती है। ओबर्न (आस्ट्रेलिया) में एक समारोह में इस बार फूलचंद मानव को सम्मानित किया जाएगा। डा. मानव की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे पंजाब के सरकारी कालेज में प्राध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और अब साहित्य सृजन में लगे हुए हैं। वे सरकारी पत्रिका जागृति के संपादक भी रह चुके हैं। वे ढकौली (जीरकपुर) में रहते हैं और साहित्य संगम नाम से संस्था भी चलाते हैं। संगम साहित्यिक गोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम आयोजित कराता रहता है।

: राष्‍ट्र का निर्माण संकल्‍प और श्रद्धा से संभव है - भय्यू जी महाराज : भारतीय ज्ञानपीठ, उज्‍जैन का वार्षिक प्रतिष्‍ठा शुरू : भारतीय ज्ञानपीठ उज्जैन द्वारा पदमभूषण डॉ. शिवमंगलसिंह सुमन की स्मृति में आयोजित आठवीं अखिल भारतीय सद्भावना व्याख्यानमाला का शुभारंभ 24 नवम्बर 2010 बुधवार को भारतीय ज्ञानपीठ माधवनगर रेलवे स्टेशन के सामने उज्जैन में राष्ट्रीय संत पूज्यश्री भय्यू जी महाराज संस्थापक श्री सद्गुरू आश्रम धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट इंदौर के ‘भारत के विकास पर भ्रष्टाचार का प्रभाव’ विषय उद्बोधन से हुआ। दिनांक 25 नवम्बर को देश के ख्यात न्यायविद् देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति माननीय श्री आर.सी. लाहेटी का व्याख्यान हुआ। श्री लाहोटी ने नगर के प्रबुद्ध वर्ग को भारतीय संविधान की आत्मा और आम आदमी विषय पर संबोधित किया। यह आयोजन 30 नवम्बर तक चलेगा। उज्जैन के भारतीय ज्ञानपीठ परिसर में आठ वर्षों से हो रहे सद्भावना व्याख्यानमाला में देश के प्रबुद्ध और बुद्धिजीवी वक्ताओं ने अपने ज्ञान और विचारों से श्रोताओं को बोद्धिक रूप से तृप्त किया है और उनके मन में उठ रहे सवालों, उलझनों को सुलझाने का प्रयास किया है। इस व्याख्यानमाला में देश के श्रेष्ठ विचारकों, वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रीयों, न्यायविदों, गांधीवादियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के विचारों का लाभ सुधि श्रोतोओं को प्राप्त होता है। व्याख्यानमाला में आये प्रबुद्ध वक्ताओं के विचारों को समेट कर एक स्मारिका के रूप में भी प्रकाशन किया जाता है। उज्जैन शहर में व्याख्यानमाला की हलचल दिखाई दे रही हैं।

अमिताभयह कविता नीरा राडिया प्रकरण के बाद आम तौर पर मीडिया के स्तर पर अपनाई गयी नीति पर एक प्रतिक्रिया है. सच और झूठ तो बड़े गूढ़ शब्द हैं पर दो-तरफे मानदंडों और चुप्पी/ नाराजगी ने कुछ सवाल जरूर खड़े लिए हैं, जिन्हें मैंने अपनी दृष्टि से प्रस्तुत किया है. इसका उद्देश्य किसी भी तरह से स्वयं को विशिष्ट बताना नहीं है, क्योंकि कोई व्यक्ति कितना अच्छा या बुरा है, यह उसे दूसरा क्या बताएगा और वह भी कितने दिनों तक दूसरों को उल्लू बनाएगा।

लोकेन्‍द्रमेरा सारा जीवन हिन्दी के आधार पर ही टिका हुआ है। हिन्दी मेरी मां है। हिन्दी के प्रति मेरी जो वफादारी है, वह मुझे असत्य लिखने नहीं देती। जो कुछ मैं लिखूंगा, सच लिखूंगा। मैं सच्ची निष्ठा से हिन्दी-जापानी दोनों भाषाओं की सेवा करूंगा। सत्य की पूजा और गुणगान ही मेरे शेष जीवन का लक्ष्य है। उक्त उद्घोषणा 'हिन्दी रत्न' (शांति निकेतन - 2006) साइजी माकिनो ने अपनी पुस्तक 'भारतवर्ष में पैंतालीस साल, मेरी हिन्दी-यात्रा' के बैक कवर पर लिखी है। इस उद्घोषणा ने मुझे काफी हद तक प्रभावित किया। वैसे इस पुस्तक से मेरा गहरा लगाव है। इसके दो कारण हैं- एक, मुझे पत्रकारिता का कखग पढ़ाने वाले शिक्षक श्री जयंत तोमर के चाचाश्री डॉ. रामसिंह तोमर जी का और दूसरा, मेरी जन्मस्थली ग्वालियर का इसमें खास उल्लेख है। श्री जयंत तोमर जी ने इस पुस्तक की चर्चा करते समय कहा था कि लेखक साइजी माकिनो, मुरैना के पास ऐतिहासिक महत्व का स्थल है नूराबाद, वहां रहे। माकिनो उनके चाचा रामसिंह जी से अक्सर जिक्र करते थे कि चंबल के बच्चे बड़े असभ्य, शैतान और परेशान करने वाले थे। इसका उल्लेख उन्होंने किताब में भी किया है। दरअसल जापानी साफतौर पर भारतीयों से भिन्न दिखते हैं। गांव के बच्चे उनके बालकों को छोटी-छोटी आंखों के चलते खूब चिढ़ाते और सताते थे। गांव के लोग उन्हें 'जापानी मास्टर' कहते थे तो वहीं गांव के ही एक संत रामदास जी महाराज उन्हें 'जापान का भगवान' बुलाते थे।

छिपकलियां बोलती हैं गोवा की

गोवा से

क्‍या बोलती हैं

जानता नहीं हूं

पर मैंने सुना है

: नजीर साहब के जन्म दिन पर : नजीर साहब की एक गजल है - कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे, मैं उतना याद आऊंगा मुझे जितना भुलाओगे। नजीर बनारसी भूलाने की चीज हो भी नहीं सकते। एक ऐसी शख्सियत जो दुनियां के हर मसले का हल मोहब्बत को ही मानते रहे। कहते रहे, ‘‘अगर इन्सां को इन्सां से मोहब्बत हो जाए यही दुनियां जो जहन्नुम है जन्नत हो जाए।’’ नजीर साहब की शायरी का यही दर्शन भी है और यही शिक्षा भी। शायरी को नजीर साहब वतनपरस्ती का जरिया और लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का जरिया मानते रहे। नजीर साहब कहा करते थे, ''मैं शायरी को सिर्फ अदब नहीं वतन की खिदमत का एक बड़ी सेवा मानता हूं। मेरे विचार से भाषा और वतनपरस्ती में घनिष्ट संबंध है।'' अपने शहर बनारस और गंगा से बेपनाह मोहब्बत करने वाले नजीर साहब कहा करते थे, ‘‘सोयेंगे तेरी गोद में एक दिन मरके, हम दम भी जो तोड़ेंगे तेरा दम भर के, हमने तो नमाजें भी पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू कर करके।’’

: जसम का बारहवां राष्‍ट्रीय सम्मेलन : लूट और दमन की संस्कृति के खिलाफ सृजन और संघर्ष को समर्पित जसम का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन 13-14 नवंबर को दुर्ग (छत्तीसगढ़) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रो. मैनेजर पांडेय और प्रणय कृष्ण को पुनः जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव रूप में चुनाव किया गया। सम्मेलन में 115 सदस्यीय नई राष्ट्रीय परिषद का चुनाव किया गया। कामकाज के विस्तार के लिहाज से महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के प्रतिनिधियों को भी राष्ट्रीय पार्षद बनाया गया। प्रलेस के संस्थापक सज्जाद जहीर की पुत्री प्रसिद्ध कथाकार-पत्रकार और नृत्यांगना नूर जहीर समेत 19 नए नाम राष्ट्रीय परिषद में शामिल किए गए। मंगलेश डबराल, अशोक भौमिक, शोभा सिंह, वीरेन डंगवाल, रामजी राय, मदन कश्यप, रविभूषण, रामनिहाल गुजन, शंभु बादल और सियाराम शर्मा को जसम का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी 35 सदस्यों की है, जिसमें सुधीर सुमन, भाषा सिंह, दीपक सिन्हा, सुरेंद्र सुमन, संतोष झा, अनिल अंशुमन, अजय सिंह, के. के. पांडेय, आशुतोष कुमार, बलराज पांडेय, संजय जोशी, सुभाष कुशवाहा, हिमांशु पंड्या, गोपाल प्रधान, कौशल किशोर, पंकज चतुर्वेदी, कैलाश बनवासी और सोनी तिरिया शामिल हैं।