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ढिबरी न्यूज में चैनल प्रमुख के लिये खुली अर्जी

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विनोद विप्लवमाननीय महोदय; मुझे ज्ञात हुआ है कि अंधविश्वास, विवेकहीनता, सामाजिक पागलपन, अश्लीलता, अनैतिकता एवं संस्कारहीनता के प्रचार-प्रसार के सर्वोच्च उद्देश्य को लेकर चलाये जा रहे अत्यंत लोकप्रिय, हर दिल अजीत एवं टीआरपी बटोरू चैनल 'ढिबरी न्यूज' में चैनल प्रमुख का पद कोई सुयोग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाने के कारण काफी समय से रिक्त है। मैं इस पद के लिये अपने को एक उम्मीदवार के रूप में पेश करते हुये पूर्ण विश्वास के साथ दावा करता हूं कि इस पद के लिये मुझ जैसा काबिल, सक्षम एवं सुयोग्य उम्मीदवार आपको ढिबरी लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेगा। महोदय, अगर आपको अपने चैनल की टीआरपी आसमान से भी आगे ले जानी है तो आप मेरी सशर्त सेवा ले सकते हैं।

इससे पहले मैंने बच्चे से लेकर बिल्ली और बंदरों के गड्ढे में गिरने की घटनाओं को पेश करने में सबसे आगे रहने वाले गड्ढा स्टार चैनल, हवेलियों को भूतहा और भयावह बनाकर कर दिखाने वाले चैनल सुनसान न्यूज 24, राखी सावंत जैसी चवन्नी छाप अभिनेत्रियों के बल पर भारी टीआरपी बटोरने वाले चैनल स्वांग इमेजिन, जूली-मटूकनाथ के साथ-साथ सुर्खियों में आये चैनल - झाडू तक और हल्की बारिश को महाप्रलय तथा मामूली आगजनी को महाविनाश साबित करने में माहिर चैनल - बर्बाद इंडिया टीवी जैसे अनेकानेक चैनलों में मालिक को लड़कियां सप्लाई करने वाले दलाल और विज्ञापन एजेंट से लेकर इनपुट हेड और चैनल प्रमुख के रूप में काम कर चुका हूं। इस समय मैं पाताल 7 चैनल में काम कर रहा हूं जिसने धरती के नीचे किये जाने वाले वैज्ञानिकों के प्रयोग से धरती के नष्ट होने की घोषणा करके काफी नाम कमाया था और यह महत्वपूर्ण ब्रेकिंग न्यूज मेरे ही उर्वर दिमाग की उपज थी।  

आदणीय महोदय, मैंने पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां देने वाले देश के एक नामी विश्वविद्यालय से पैसे दिये बगैर स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है जो मेरी काबिलियत का जीता-जागता प्रमाण है। मैंने न केवल अपने लिये बल्कि अपने अनेक लंगोटिया दोस्तों को भी डिग्रियां दिलायी है। मैंने सैकड़ों लड़के-लड़कियों को बोर्ड परीक्षाओं में पर्चियां पहुंचाकर अच्छे नम्बरों से उत्तीर्ण करवा कर देश के साक्षारता प्रतिशत में बढ़ोतरी करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मैं दीवार फांदने और पाइपों के जरिये पलक झपटते छतों पर पहुंचने में माहिर रहा हूं। मेरी इस योग्यता के कारण मुझे परीक्षाओं में चोरियां कराने के लिये दूर-दूर के परीक्षा केन्द्रों में अभिभावकों द्वारा आमंत्रित किया जाता रहा है। मैंने कई लड़कियों को पर्चियों के नाम पर प्रेम पत्र पहुंचा कर अनेक टूटे हुये दिलों एवं रिश्तों को जोड़ कर देश में प्रेम एवं भाइचारे को बढ़ावा दिया है। मेरे बदौलत परीक्षायें पास करके अच्छी-अच्छी डिग्रियां पाने वाले मेरे ये सभी मेधावी दोस्त इलेक्ट्रानिक मीडिया के विकास के मुख्य  प्रणेता बने हुये हैं। मैं और मेरे दोस्त अपने-अपने चैनलों की टीआरपी को जमीन से उठा कर आसमान पर और देश की जनता के विवेक को रसातल में पहुंचा कर देश में लोकतंत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

परम् पूज्यनीय मान्यवर, मेरा पक्का विश्वास है कि मेरे जैसे मीडियाकर्मियों की बदौलत टेलीविजन चैनलों ने देश में लोकतंत्र के विस्तार में जितना योगदान दिया है उतना किसी और ने नहीं दिया है। इन चैनलों ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया में अगर कहीं सच्चा लोकतंत्र है तो भारत में है जहां कोई कुछ भी करता रहे, कुछ भी दिखता रहे, कोई कुछ भी चिल्लाता रहे न तो सरकार के और न ही जनता के कानों में जू रेंगता है। यहां जनता मूर्ख बनकर, लूटकर और इज्जत खोकर खुश होती है - यह यही लोकतंत्र की असली पहचान है। इसलिये हमने जिन चैनलों में काम किया उनका सदुपयोग हमने लोकतंत्र को बढ़ाने में किया।

महोदय मैंने चापलूसी, दलाली, चोरी-चमारी, दंगेबाजी, रंडीबाजी, इश्कबाजी और रंगदारी जैसे हर क्षेत्रों में विशेश अनुभव बटोरे हैं। इस पत्र के जरिये मैं न केवल अपनी मानसिक एवं शैक्षणिक योग्यता का बल्कि शारीरिक योग्यता एवं क्षमता का ब्यौरा आपके सामने पेश करना चाहता हूं क्योंकि चैनलों में काम करने के लिये मानसिक योग्यता से कहीं अधिक पैर, घुटने और गले जैसे शरीर के विभिन्न अंगों की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण है।

जहां तक गले की क्षमता का सवाल है मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैंने अनेक परीक्षा केन्द्रों के बाहर खड़े होकर, बेरोजगारी के दिनों में फेरी लगाकर, मोहल्लों की औरतों को साड़ियां एवं ब्लाउज बेचने का भी काम कर चुका हूं। गला फाड़कर चिल्लाने की मेरी क्षमता के कारण कई मोहल्ले के लोगों ने कई बार मेरी पिटाई कर दी जिसके कारण मैंने सब्जी बेचने का धंधा छोड़कर अपने शहर के एक मशहूर कोठे पर चौकीदार की नौकरी करने लगा। कोठे पर चौकीदारी तथा साड़ियां-ब्लाउज बेचने के दौरान मेरी कई औरतों से गहरी दोस्ती हो गयी जो बाद में चैनलों की नौकरी के दौरान बहुत काम आयी। इस मामले में मेरे संपर्क का दायरा बहुत व्यापक है और ये संपर्क चैनलों की आमदनी बढ़ाने तथा कई अटके कामों में अत्यंत उपयोगी साबित हुये हैं।

गला-फाड़कर चिल्लाने का मुझे काफी अभ्यास रहा है। इस संबंध में मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारे यहां बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान परीक्षा केन्द्रों पर लाडडस्पीकर लगाकर परीक्षार्थियों को प्रश्नों के जबाव बताये जाते थे। कई बार तकनीकी खराबी आने पर मैं लाउडस्पीकर की मदद लिये बगैर चिल्ला-चिल्लाकर ही परीक्षार्थियों को प्रश्नों के उत्तर लिखवाता था। चिल्लाने की मेरी क्षमता ऐसी थी कि हर परीक्षार्थी बिना कोई गलती किये सभी प्रश्नों के सही उत्तर लिखते थे। कई बार तो पास के परीक्षा केन्द्रों के परीक्षार्थी भी मेरी आवाज सुनकर उत्तर लिख लेते थे। आप समझ सकते हैं कि देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार में मेरा कितना योगदान रहा है।

जहां तक मेरे पैर एवं घुटने की क्षमता का सवाल है मैं आपको बताना चाहता हूं कि चैनलों में आने के पहले मैं कई महीनों तक एक बहुत बड़े कारोबारी के बंगले पर सुरक्षा गार्ड के रूप में नौकरी कर चुका हूं जहां मेरा काम गेट पर लगातार खड़ा रहने का होता था। मेरी यह क्षमता चैनलों में रिपोर्टिंग के दौरान काफी काम आयी।

मेरी अन्य शारीरिक एवं मानसिक योग्यतायें निम्न लिखित है -

  1. मैं उफ किये बगैर एवं चेहरे पर शिकन लाये बगैर लगातार सौ जूते एवं चप्पले खा सकता हूं।

  2. खड़े-खड़े पचास लात-घूसे खाने की क्षमता। लात-घूसे खाने से शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है और नींद भी अच्छी आती है।

  3. मै मालिकों की गालियों को अपने लिये अमृत समान मानता हूं। जिस दिन मैं मालिक के मुंह से एक दर्जन गालियां हजम नहीं कर लूं उस दिन खाना हजम नहीं होता।

  4. अगर आपका दिल मुझे नौकरी से निकालने का हो तो पीठ पर पांच लात मारकर निकाल सकते हैं। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

  5. अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को गदहा-घोड़ा समझते हुये उन्हें भी लात-घूंसे और जूते-चप्पल बरसाने की काबिलियत रखता हूं।

  6. चापलूसी और दलाली में महारत। अपना काम निकालने के लिये थूक और जूते चाटने को पवित्र काम मानना।

  7. मुझे पढ़ने-लिखने से सख्त नफरत है। मैंने परीक्षाओं में नकल करके कापियों पर लिखने के अतिरिक्त अपने जीवन में कुछ भी नहीं लिखा है और न ही नकल करने के लिये बनायी गयी पर्चियों एवं कापियों के अलावा कुछ पढ़ा है।

महोदय, मैंने जो योग्यतायें गिनायी हैं, आज के समय में बहुत कम लोगों के पास ऐसी योग्यतायें है और मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो मुझसे कम योग्यता होने के वाबजूद बड़े-बड़े चैनलों के प्रमख बनकर दस-दस लाख रुपये की सेलरी ले रहे हैं। ऐसे में मैं अपनी काबिलियत को ध्यान में रखते हुये 15 लाख रुपये की मासिक सेलरी पाने की उम्मीद रखता हूं और वायदा करता हूं कि मैं एक साल के भीतर आपके चैनल को देश का नम्बर वन चैनल बना दूंगा और अगर मैं ऐसा करने में विफल रहूं तो आप मुझे सौ जूते मारकर तत्काल नौकरी से निकालने के लिये स्वतंत्र हैं।

मुझे पक्का विश्वास है कि आप मेरे आवदेन एवं मेरी योग्यता पर विचार करते हुये अपने चैनल में काम करने और अपनी योग्यता को साबित करने का एक मौका अवश्य देंगे।

आपका भावी सेवक

विनोद विप्लव

(नोट : अगर आपको ढिबरी न्यूज चैनल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो इसे जानने के लिए इस लिंक पर जाएं... जल्द लांच होने वाला है ढिबरी न्यूज)

लेखक विनोद विप्लव पत्रकार, कहानीकार एवं व्यंग्यकार हैं। वह प्रमुख संवाद समिति 'यूनीवार्ता' में विशेश संवाददाता के तौर पर काम कर रहे हैं। विज्ञान, स्वास्थ्य एवं सिनेमा जैसे विषयों पर वह लिखते रहते हैं। उन्होंने महान गायक मोहम्मद रफी की जीवनी (मेरी आवाज सुनो) भी लिखी है जो चर्चित हुयी। उनसे संपर्क करने के लिये 09868793203 पर फोन कर सकते हैं या This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर मेल कर सकते हैं। उनके ब्लॉग हैं -www.angare.blogspot.com  www.vinodviplav.wordpress.com

Comments
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bahut shandar
yashwant 2009-12-11 11:15:50

Vinod bhayi, Shandar Vyangya hai. Maza aa gaya padhkar.
Yashwant
sach hai
pramod kumar 2009-12-11 14:57:32

Vinod ji

Acchca laga .lejin jis padake AAp Awedan kaer rahi hai usme ek Khas yuogyta bhi honi jarrooee hi ki potambri saprday ka hona.yahi karan hai ki ho sakata hai ki aap ki aarrzi khariz ho jai.kyoanki haare samprday me potmbri sampraday birahmin ki tarah hai jo doosre samprday ke logo ko nnech kuil ka mante hai.baharhal Aaap ko shubhkamnaye aap channel head bane
jor ka jhataka
vedprakash 2009-12-11 14:51:51

:) :) :)
dhansu bole to
nanga sach
ऐसे लोग जूतों से लतियाये जाने के काबिल हैं।
Rupes sharma 2009-12-11 15:23:38

Vinod ji
आपने चैनलों एव उन्हें चलाने के नाम पर लाखों रूपये लेने वाले हरामी चैनल प्रमुखों के गोरखधंधों एवं मानसिक दिवालिया पन का बिल्कुल सच्चा तस्बीर खींचा है। चैनलों में शीर्ष पदों पर बैठे कितने अयोग्य एवं नैतिकताहीन हैं यह किसी से छिपा नहीं है, आपने उन्हें पदाफार्श किया है जो काबिले तारीफ है।
इसे पढ़ कर ऐसा लगा मानों आपने मेरे दिल की बात कह दी। ऐसे लोग जूतों से लतियाये जाने के काबिल हैं।
मैं भी ऐसे लोगों का सताया हुआ हूं, लेकिन मैं अपना असली नाम नहीं बता रहा हूं, लेकिन समय आने पर मैं सामने आकर इनका कच्चा चिट्ठा खोल दूंगा।

Anonymous 2009-12-11 15:26:50



gud n gr8
Vivek Kumar 2009-12-11 16:13:36

gud n gr8,,, interesting writing
jaise ham vaise patrakar
krishna murari 2009-12-11 19:05:26

viplav bhai shandar lekin ye bhi sochna hoga ki aisi sthiti kyo hue. sach kahun to mujhe sara bhartiya samaj dogla najar aata hai. hamlog muh par sare siddhant rakhte hai lekin karte vahi hai. ghuskmori chori dalali. mujhe to 90 pratishat aise hi log milte hai. jaisa samaj vaisa neta aur vaisi hi media.
salim 2009-12-11 19:36:30

padh kar bada maja aaya.
SANJEEV SHARMA 2009-12-11 19:59:08

Sir ... Chotta muh BADI BAAT hogi ....aapne media ko AAINA dekhane ki koshish ki hai koi es sachai se nahin bach sakta ........ pata nahin kab tak patarkariyata ka samuhik BALAATKAAR Hota rahega ......
arun kumar Tripathi 2009-12-11 22:08:20

Channels ke booses ko bhi yah vyang padhwana chahiye, taki unhe kuch sharm lajja mahsoos ho aur wo channels mein sudhar ke bare mein sochne lagen.
स्वाति 2009-12-11 22:26:49

मैं चैनलों के इन दरिंदों को बहुत नजदीक से देखा है। कई बार लगता है कि इन दरिंदों के कारण ये चैनल ये भोली-भाली लड़कियों की इज्जत लूटने के मकसद से ही चल रहे हैं। एक तो पैसे बहुत कम मिलते हैं, दिन रात काम करो और उपर से इन दुश्टों की हरकतों को भी बर्दाष्त करो।
मैं इन्हीं दुश्टों के कारण चैनल की नौकरी छोड़ दी और आज मुझे लग रहा है कि मैं नर्क से बच कर निकल आयी।

Sahmat
Pooja saini 2009-12-12 16:02:46

Vinodji,


Aapka vyangya sahi mayne me kabile tarif hai.
अनुराग पाण्‍डेय 2009-12-13 06:02:46

भाई विशेश विशेष तो कर लीजिए
vinay 2009-12-13 17:51:03

yeh latkhor logon ko isase koi phark bhi nahin padega bhai sahab ! yeh news chanel kam horer chanel banate ja rahe hain.Ek din darshak hi inhen latiyayenge. :grin
vyang ka baap
sanjay singh 2009-12-16 16:21:46

AMUMAN LOGO KI AADAT HOTI HAI KHUBSURTI KO BADA-CHADA KAR PESH KARNE KI,PAR SACH KO KOI USKE MOOL SWAROOP ME HI NAHI PESH KARTA, BADAKAR KEHNA TO AUR BAAT HAI. BUT AAPNE HANSI-HANSI ME SUB KEH DIYA..............BADHAI.
vyang ka baap
sanjay singh 2009-12-16 16:22:53


AMUMAN LOGO KI AADAT HOTI HAI KHUBSURTI KO BADA-CHADA KAR PESH KARNE KI,PAR SACH KO KOI USKE MOOL SWAROOP ME HI NAHI PESH KARTA, BADAKAR KEHNA TO AUR BAAT HAI. BUT AAPNE HANSI-HANSI ME SUB KEH DIYA..............BADHAI.
very good
madan jha 2009-12-17 12:22:43

very good story.You have presented real picture of media.
Madan jha
Hanged them publically
kamal kishore vyas 2009-12-18 08:54:32

some channels and channel heads are enemy of society and humanity. they should be hanged publically.
harami ke aulad hain
kunal kundan 2009-12-18 08:59:21

sahi kaha hai. aaj hamare desh mein media khas kar electronic media loktantra ka chautha khambhba nahi, loktantra ke liye ghatak hai. unpar total ban kiya jana chahiye aur channel heads ko public ke samane 1001 joote lagaye jane chahiye. ye saale haraami ke aulad hain.
bhadas4media apney kertavoo kaa nirvah kerr haa h
danish azmi 2009-12-22 16:14:29

yashwant ji media in dinoo soshad kaa madhyaam hoo gyaaa hai ,aur ab too kuch media pertishthaan shosan kerne ki trening bhi dete hai , sahi khaa jayee too petrkar koo ab samaj main licence dhari bhikari ki sangyaa di jane lagi hai ....mujhee yee kehne main zraa bhi hichak nahi hoo rhai hai ki media pertishtan main bhi reportroo aur stringroo ka khule aam shoshan hoo rhaa hai fir bhi beroozgaroo ki eak lambi chaudi team licence dhari bhikhari banne ke liyee muh khole hue khade hai.........kyaa hoga aaj ki petrkaritaa kaa ye too sabse ke samne hai ,,wahi wali baat hue naa

padhe farsi bechey teel
yee dekhoo qudrat kaa kheel
123
neeraj'ambuj' 2010-01-18 19:41:22

mujhe aisa prateet hota hai ki aap ko vyangya me maharath haasil hai, joki bejod vidha hai.

guruji ko mera khade hokar dandvat charan sparsh aisa ghatiya evam sada hua dibhri vidyalaya kholene ke liye.
neeraj'ambuj' 2010-01-18 19:41:53

:ooo: :pirate: :?: :0 ;)) ;) :) :evil: :angry-red:
virendra jain 2010-01-19 13:51:46

यह व्यंग्य पढवाने के लिये धन्यवाद ऐसे मीडिया वाले ही मीडिया को मीडियेटर की उपाधि दिला रहे हैं
आज की पत्रकारिता को आईना
विनोद पाराशर 2010-01-23 20:12:48

विनोद जी,
फेस-बुक पर आपका संदेश पढकर-कि आपका नया बायोडाटा आया हॆ-दॊडा-दॊडा यहां तक चला आया.बायोडाटा पढना शुरू किया-शुरू शुरू में थोडा आश्चर्य हुआ-लेकिन धीरे-धीरे सब समझ में आ गया.पत्रकारिता के नाम पर आज जो नंगा नांच हो रहा हॆ-उसकी सच्ची तस्वीर आपने पेश की हॆ.मेरे कई पत्रकार मित्र हॆं-जो कई नामा-गिरामी अखवारों से जुडे हॆ.जब उनसे उनके पेशे के बारे में पूछता हूं-तो बडे असंतोष ऒर अपराधबोध का भाव उनके चेहरे पर स्पष्ट नजर आता हॆ.मुझे भी कभी पत्रकार बनने का जनून सवार हुआ था, लेकिन इसे पेशे के रुप में नहीं अपना सका.बस शॊकिया तोर पर स्वतंत्र रुप से लिखता रहा.मेरे एक पत्रकार मित्र का तो यहां तक कहना हॆ कि-अब वॆश्यावृति ऒर पत्रकारिता में कोई खाश अंतर नहीं रहा.
व्यंग्य नहीं प्रहार है आत्माओं पर-लक्ष्य को चूके न
Sudhir.Gautam 2010-04-13 13:32:02

विनोद भाई आपका ये व्यंग्य एक घातक प्रहार है कुंठित मालिकों और लीचड़ आत्माओं वाली पत्रकार बिरादरी पर जो "चरण वंदना" से "चरण चाटन" तक हर ब्रह्मास्त्र समेटे हुए है अपने लक्ष्य की तरफ अग्रसर है, मुनाफा जिसका एकमात्र ध्येय है, वो चाहे तनख्वाह हो, तरक्की हो, या आमदनी.
लेकिन एक कमीं है, वे इसे पढ़ते ही नहीं, या फिर पठते भी हैं तो अव्यवहारिक करार देते हुए संवाद को वहीँ ख़तम कर देते है ताकि उनकी आत्मा पर इसका किंचित भी फर्क न पड़े, ऐसे में इस व्यंग्य रुपी अचूक प्रहार वाले शश्त्र को इसके असंख्य लक्ष्यों तक पहुँचाने का समुचित प्रबंध होना आवश्यक है.
यशवंत भाई ने भी संस्तुति की है तो आशा करते है, वरन पूर्ण विस्वास है की वे इसे भड़ास4MEDIA के होम पेज पर इस विचार को स्क्रोल के रूप में चलाकर हाई लाइट करेंगे ताकि विज्ञापन की तरह इस व्यंग्य की टी आर पी भी बढे और ये अपने लक्ष्य को चूके नहीं.
एक पुराना प्रासंगिक मुहावरा याद आ रहा जो की अपभ्रंश हो गया दीखता है पर प्रासंगिक तो है ही
मत चूको यशवंत !!!
GOD BLESS TEAM bhadas4media for providing appropriate platform for people who still hold "Fire in Belly"


amit 2010-05-24 18:38:06

Amit.........

gud hai ji .........sahi sab bilkul sahi aaj kal ye sari yogyta ho to admi kha se kha phuch jata hai............or phuche hue namune bhi samne hai ...........yro socho ..........aane wale time me ye yogyta sabhi ko hasil karni padege ......agar patrkarita karni hai ............g8
rakesh sharma 2010-07-22 18:44:30

aadarniy bhaisahab , aapne sabhi ki pol khol di. bahet satik likha hai . dhanyvad.
Anonymous 2011-08-07 21:15:47

:0 ;)) ;) :) :sleep: :x :no-comments: :ooo: :pirate: :?: :idea: :evil: :angry-red: :angry: :D
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