ये प्रश्न आज बहुत से लोगों के मन में उठ रहा है और कईंयों के दिलो दिमाग में तूफ़ान पैदा कर रहा है! तथाकथित ‘सेक्युलरिस्टों’ की जमात ने अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमानों के मन में भगवा रंग और भाजपा के प्रति जैसी धारणा बनादी है,उससे उस समुदाय में यूपी की सरकार और खासकर उसके मुखिया योगी आदित्यनाथ को लेकर आशंकाओं का पैदा होना लाज़मी ही है.हालांकि इस बार के यूपी चुनावों ने अल्पसंख्यकों की इस अवधारणा को ध्वस्त किया है,क्योंकि उन्होंने  भी इस बार भाजपा को वोट किया है,फिर भी ‘छद्म सेक्युलरिस्टों’की जमात मीडिया में अपनी छाती कूट कर भाजपा के खिलाफ एक भय वाला माहोल बनाने में सक्रीय है.

आईये अब विचार करते हैं कि आदित्यनाथ अगर सचमुच एक ‘योगी’ की तरह यूपी की सरकार को चलादें तो क्या होगा? क्या यूपी के अल्पसंख्यक,खासकर मुसलमानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट जाएगा? क्या यूपी साम्प्रदायिक आग में झुलस जाएगा? क्या हिन्दू-मुस्लिम सड़कों पर तलवारें भांजने लग जायेंगे? क्या खून की नदिया बह जायेंगी? जी हाँ,दिग्विजय सिंह,आज़म खान,मायावती,औवेशी और उन जैसे ही अनेकानेक ‘छद्म सेक्युलरिस्टों’ के हिसाब से बिलकुल ऐसा ही होगा, अगर आदित्यनाथ ने बिलकुल ‘योगी’ की तरह सरकार चलादी तो!

लेकिन यहाँ सिक्के का दूसरा पहलु भी है,और ज्यादा मजबूत भी है! अगर आदित्यनाथ वाकई में एक ‘योगी’ की तरह सरकार चला देते हैं तो माननीय दिग्विजय सिंह, आज़म खान, मायावती और औवेशी जैसे अनेकानेक ‘छद्म सेक्युलरिस्टों’ के सपने कभी पुरे हो ही नहीं सकते! इसलिए नहीं हो सकते क्योंकि एक ‘योगी’,का अपना कोई स्वार्थ नहीं होता, उसके लिए सभी लोग, बिना किसी भेदभाव के,एक सामान होते हैं,उनके संस्कारों में प्रेम, दया, करुणा, अहिंसा, समता, मानवता का वास होता,और वे एक बेहतर ‘रामराज्य’ के अलावा लोगों को कुछ दे ही नहीं सकते! माफ़ कीजिए,वैसा ‘रामराज्य’ नहीं, जैसा कि ‘छद्म सेक्युलरिस्टों’ ने, अल्पसंख्यकों,खासकर मुसलमानों के मन में बिठाया है,जिसमें कि नफ़रत, भेदभाव, हिंसा का भाव है!

किसी ‘सच्चे योगी’ का रामराज्य बिलकुल भगवान् श्री रामजी के राज्य जैसा ही हो सकता है,जहां कि सिर्फ और सिर्फ प्रेम, दया, करुणा, अहिंसा,समता,मानवता का भाव ही था,और जहांकी प्रजा खुशहाल थी.एक ‘योगी’,निरंकुश,जल्लाद,नफ़रत से भरा हुआ,धर्म और जाति के नाम पर भेदभाव करने वाला शासक भला हो भी कैसे सकता है? दशकों से ‘भगवा’ और ‘रामराज्य’ के नाम पर,अल्पसंख्यकों,खासकर मुसलमानों में,‘छद्म सेक्युलरिस्टों’ द्वारा फैलाई गयी भ्रांतियों को तोड़ने का यह सही वक़्त है. योगी आदित्यनाथ को सचमुच अब ‘योगी’ की तरह ही सरकार चलानी चाहिए और सही अर्थों में रामराज्य की स्थापना पर दृढ़ता से आगे बढना चाहिए.वैसे भी एक ‘योगी’ को कौनसा अपनी सात पुश्तों के लिए धन इकट्ठा करना है,या अपने नाते रिश्तेदारों के लिए राजनीति की ज़मीन तैयार करनी है! एक ‘योगी’ के पास आखिर खोने के लिए है ही क्या?? पाने और देने के लिए पूरा ‘रामराज्य’ है,जिसे वे ही पा सकते हैं और वे ही दे सकते हैं.

आखिर एक ‘योगी’, भ्रष्ट राजनीति और राजनेताओं की कतार में बैठना क्यूँ पसंद करेगा? ‘राजनीति’ को ‘रामनीति’ बनाकर एक योगी ही प्रदेश,देश की दशा और दिशा बदल सकता है.योगी आदित्यनाथ ऐसा कर पायेंगे,ये उम्मीद रखी जा सकती है,क्योंकि सत्ता में आने के दिन से ही योगी आदित्यनाथ ने अपनी सकारात्मक सोच को क्रियान्वित करना शुरू कर दिया है!

लेखक
अशोक पुनमिया
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