खामोश क्यों है वोटो की तिजारत करने वाले उलमा!

मौलाना साहब। आप तो सर्जन हैं सर्जरी करिये, दातों के इलाज में ही मत उलझे रहिये! शरियत की हिफाजत करियेगा तो अवकाफ, कौम, मुसलमान और उनके हुकूक खुद महफूज हो जायेंगे। जिस्म तनदुरुस्त रहेगा तो दन्त, केश, नाखून खुदबखुद चमकेंगे। रूहानियत को संवारये... इसका ख्याल रखियेगा तो जिस्म गलत काम करना छोड़ ही देगा।

तमाम उलेमा, धार्मिक विद्वान और इस्लामी संगठन चलाने वाले आलिमो, आप सम्मानीय है। आप लोग चुनावी मौसम मे हराने-जिताने की अपील मे खूब एक्टिव रहते है। मुसलमानो के हुकूक (अधिकारों) की बात करते हो। अवकाफ की हिफाजत, अवकाफ मे भ्रष्टाचार, और मुसलमानो की असुरक्षा की बात करते हो। ऐसे मे आप सब बतौर मुस्लिम नेता अपने फरायज बखूबी निभाते हो। आरोप लगते है कि इस तरह की आवाजो के पीछे कौम की भलाई नही आपके जाति मफाद ( पर्सनल फायदे) छिपे रहते है। सियासी दलो से दोस्ती-या दुश्मनी निभाने के लिये ऐसे शोर बरपा होते है। हो सकता है आप लोगो पर लगाने वाले ये इलजामात गलत हो।

आप जौहरी हो लेकिन किसी छोटे कबाडी की तरह गली-गली लोहा और टीन खरीदने-बेचने मे ही क्यो अपना वक्त बर्बाद कर रहे हो । जबकि आपका हीरा-जवाहरात और बेशकीमती कोहेनूर लुट रहा है। तमाम टीवी चैनल्स किस किस तरह से शरियत को बदनाम कर रहे है। कथित अमेरिका के एजेन्ट शरियत के विशेषज्ञ बनकर फतवे दे रहे है।

किस सियासी दलो को वोट दे - किसे ना दे, किस हुकुमत की हिमायत करे किस हुकुमत की मुखालफत करे। इन मामलो मे आप लोगो के खूब बयान आते है। खूब प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करते है आप लोग। लेकिन क्या आपने कभी " फतेह का फतवा, टीवी शो के खिलाफ आवाज उठायी। किन-किन दलालो, फसादियो, कठमुल्लाओ , शरियत के अनाडियो/जाहिलो से शरियत की के फतवे मांगे जा रहे है। तमाम मुस्लिम मसायल और सामाजिक/राष्ट्रीय मुद्दो पर इनकी राय को इस्लामी नजरिये के तौर पर पेश किया जा रहा है। एक नेशनल टीवी पर सीआईए का कथित एजेन्ट फतवा देने के लिये बैठाया जाता है। कुछ दाढी और टोपी वाले जाहिल और कुछ तथाकथित मुस्लिम जाहिल औरतो के बीच शरियत के मसाइल पर जूतमपैजार किया जाता है।

इस तरह के टीवी शो के जरिये टीवी चैनल्स इस्लाम को बदनाम करने का टारगेट पूरा करके जबरदस्त टीआरपी लाते है। अरबो रूपये और करोडो डालर से मालामाल हो रहे है। और आप लोग शरियत की द्रोपदी का चीरहरण होता देख रहे है। इस्लाम के दुश्मन मुल्को के कथित एजेन्ट शरियत, कुरआन और हदीस के झूठे हवालो के साथ फतवे दे रहे है और शरियत के असली जानकार उलमा .. वक्फ बोर्ड .. आजम खान ... वसीम रिजवी ... सपा- बसपा- काग्रेस- भाजपा .... मे ही उलझ कर रह गये है। यानी एजेन्ट शरियत के अधिकृत उलमा बनकर फतवे दे रहे है और शरियत के सचमुच के जानकार उलमा सपा, बसपा,काग्रेस,भाजपा की एजेन्टगीरी पर उतर आये है।

मजाक नहीं कर रहा, इस्लाम सचमुच खतरे में है।

नवेद शिकोह
09918223245