नोट बन्दी भविष्य मे अच्छी साबित हो सकती है। पुराने नोट , नकली नोटों पर पांबदी भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है। देश के मेहनतकश अधिकांश लोग इस निर्णय की प्रंशसा कर रहे है। यहा तक कि सभी राजनैतिक पार्टियों अध्यक्षों ने इस कदम को देश हित मे बताया था। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद लोगों को नोट बदलने मे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मे लोगों, खासतौर से समाजसेवियों को चाहिये कि वे लोगों की मदद करे। बैंकों मे जाकर देश की तस्वीर बदलने वाली व्यवस्था को लाईन मे लगे लोगों को चाय, पानी आदि देकर मदद करने बजाय कुछ लोग भारत बंद करने का एलान कर रहे है। नोट बंदी के पहले दिन से जहा लगभग भारत बंद जैसे हालात शुरू के दिनों मे रहे।

कुछ दिनों बाद जैसे - तैसे हालात समान्य होने लगे है। ऐसे मे फिर समस्या का समाधान के बजाये कुछ चुनिंदा लोग भारत बंद का एलान कर रहे है। जो फिर आमजनमानस के लिये समस्या बनेगा। अभी लोग नोटों को लेकर परेशान है, देश बंद से सभी चीजों के लिये परेशान होगे। पूर्व मे किये गये बंद से कभी समस्या का समाधान निकला होता, तो मैं भी इस बंद का समर्थन करता और लोगों को इसके समर्थन करने की बात कहता। लेकिन मीडिया से हूं, मुझे तो खबर मिल जायेगी। उनका क्या होगा जो आम है। क्योंकि खास और ज्यादा खास की लड़ाई मे पिसना तो जनता का तय ही है। बंद करने वालों कुछ अच्छा सोचों।

हां एक बात और कहंूगा कि जब आप की सरकार थी, तब उन्होंने बहुत शोर मचाया था, सरकार और उनके लोगों द्वारा किये गये कृत्यों से दुनियाभर मे हमने शमिन्र्दगी झेली। हमारे देश का नाम विदेशी मजाक के तौर पर लेते थे, अब सरकार बदली कुछ कृत्य ऐसे हुये कि देश-विदेश मे रहने वाले हर एक भारतीय अब गर्व महसूस कर रहा है। विपक्ष का काम सरकार को आईना दिखाना होता है। देशवासियों के लिये समस्या बनना या बनाना नहीं। भारत बंद करने वालों कुछ अच्छा सोचो। आप सबका भूपेन्द्र रायकवार झांसी

Bhupendra Kumar Raikwar
journalist
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