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इस्‍लाम और मुसलमान को गाली देने के लिए बना है यह ब्‍लॉग

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अपनी बातें दूसरों तक पहुंचाने के लिए पहले रेडियो, अखबार और टीवी एक बड़ा माध्यम था। फिर इंटरनेट आया और धीरे-धीरे उसने जबर्दस्त लोकप्रियता हासिल कर ली। हजारों और लाखों की संख्या में वेबसाइटस बन गई और लोग इस से लाभ उठाने लगे और उस पर लिखने लगे। चूंकि वेबसाइट चलाते रखने का कुछ खर्च भी आता है इसलिए नेट पर भी हर किसी के लिए लिखना आसान नहीं रहा। ऐसे लोग जिन्हें लिखने का शौक है मगर न तो वह अखबार में लिख सकते हैं और न ही उनका लेख इस लायक होता है कि वह किसी वेबसाइट पर प्रकाशित हो सके। ऐसे लोगों के लिए "ब्लॉग" एक ऐसा वरदान बन कर आया जिस पर जो जैसा चाहे मुफ्त में लिख सकता है।

ब्लॉग एक बहुत ही अच्छी शुरुआत थी और इससे लोगों को फायदा भी हुआ और जो लोग अच्छा लिख कर भी कहीं नहीं प्रकाशित हो पा रहे थे उन्होंने ब्लॉग बना लिया और जो चाहा लिखने लगे। बड़े अफसोस की बात यह है कि कुछ लोगों ने इस सुविधा का दुरुपयोग शुरू कर दिया और ब्लॉग में वह सब चीजें भी लिखनी शुरू कर दी, जो उन्हें नहीं लिखनी चाहिए।  ब्लॉग में गंदी बातें लिखना आम बात है, मगर मेरा हाल ही में एक ऐसे ब्लॉग से वास्ता पड़ा जिसमें केवल इस्लाम और मुसलमानों को गालियां दी गईं हैं। हुआ यूँ की हाल ही में दिल्ली में आयोजित सलट वॉक के बाद मैं ने नवभारत टाइम्स के ब्लॉग सेक्शन में "इतनी बेशर्मी भी ठीक नहीं" शीर्षक से एक लेख लिखा। इस लेख पर कई लोगों ने अपनी राय दी।

एक साहब ने अपनी राय में मुझे तो बुरा भला कहा ही हमारे रसूल (सल्ल) और इस्लाम को भी बुरा भला कहा। जब मैंने बीएन शर्मा नाम के इस व्यक्ति के ब्लॉग (http://bhandafodu.blogspot.com/) को देखा तो यह देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई। इस ब्लॉगर का उद्देश्य केवल इस्लाम, मुसलमान और उसके रसूल (सल्ल) को गालियां देना है। इस ब्लॉग में अब तक जो भी पोस्ट डाली गयी है उसमें इस्लाम के खिलाफ ही लिखा गया है। पता नहीं इस ब्लॉगर ने अपना सही नाम लिखा है कि नहीं मगर ब्लॉग पर जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक़ इस ब्लॉगर का नाम बीएन शर्मा है और उसने अपने परिचय में लिखा है कि उसे अरबी और फ़ारसी समेत भारत की सभी भाषाएं आती है। एक मुसलमान के लिए इस्लाम और उसके रसूल के बारे में कुछ भी गलत विचार करना पाप है, इसलिए इस ब्लॉग में लिखी गई पूरी बातें यहाँ नहीं लिख सकता और मुझसे इतना कुछ लिखते हुये भी गुनाह का डर भी लग रहा है, लेकिन चूंकि पाठकों को ऐसे लोगों के बारे में बताना ज़रूरी है इसलिए मैं यहाँ इस ब्लॉग के कुछ पोस्ट का केवल शीर्षक लिख रहा हूँ, जिस से  इस बात बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है कि लेख के अंदर कितनी बेहूदा बातें लिखी गई होंगी। ब्लॉग के कुछ पोस्ट की हेडिंग निम्नलिखित है:

* इस्लाम के दुश्चरित्र
* आयशा मुहम्मद को झूठा मानती थी
* सहबियों की नजर मुहम्मद की पत्नी पर
* पत्नी से गुदामैथुन (Sodomy) हलाल है
* वेश्यावृति हलाल है
* माँ के साथ सम्भोग जायज है
* आयशा सहबियों को सेक्स सिखाती थी
* आयशा सेक्स गुरु थी
* आपको मालूम है कि जन्नत की हकीकत क्या है?
* इस्लाम और कुरआन : शराब का गुणगान
* कुरआन में दोगलापन : और अंतर्विरोध
* क्या अल्लाह भी मुहम्मद की तरह अनपढ़ है?

यहाँ तो सिर्फ कुछ पोस्ट की हेडिंग दी गयी है। इस ब्लॉग में सिर्फ और सिर्फ इस्लाम को ग़लत ढंग से पेश किया गया है। हद तो यह है की ब्लॉग के शुरू में ही दुनिया को धोखा देने के लिए यह भी लिख दिया गया है कि इस्लाम सम्बंधित सभी लेख कुरआन और हदीसों पर आधारित हैं। भारत में हर किसी को अपने धर्म के प्रचार प्रसार कि अनुमति है, मगर किसी के धर्म को गाली देने की अनुमति नहीं है। अब देखना यह है बीएन शर्मा नाम के इस ब्लॉगर के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और मुसलमानों के नाम पर राजनीति करने वाले संगठन और उनके कर्ता-धर्ता इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और इस पर उनकी प्रतिक्रिया किया होती है।

लेखक ए एन शिबली हिन्‍दुस्‍तान एक्‍सप्रेस के ब्‍यूरो चीफ हैं. उनसे मोबाइल नम्‍बर 9891088102 या This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

Comments
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एन वाशिम 2011-09-15 20:16:59

इस ब्लाग को देखा। हेडिंग तो थोड़ा गड़बड़ लग रहे हैं, लेकिन उनके अन्दर जो दिया है वह विभिन्न किताबों को संदर्भित करते हुये लिखा है.।
आप इसका विरोध इन सज्जन के द्वारा लिखे गये तर्कों को अपने तर्कों से काट कर करें। वैसे अनवर जमाल, सलीम खान का स्वच्छ संदेश और कैरानवी के ब्लाग पर भी जाकर देखें, जो निरन्तर हिन्दुओं के विरुद्ध विष वमन करते हैं। इसके विरुद्ध भी लिखें.
A N Shibli 2011-09-15 21:20:31

किसी भी धर्म के खिलाफ लिखने वाला सही नहीं कहा जा सकता। लिखने वाला चाहे हिन्दू हो या मुसलमान। अपने अपने धर्म का प्रचार तो किया जा सकता है मगर गली देना किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता।
prashant 2011-09-15 21:47:05

shibli ji, vaise vashim ke comant par bhi dhnayan de. inlog ke blogs par bhi jakar dekhe aur sabhi ke bare me likhen. ek hi dharm kyon, sabhi ke against likho.
saleem akhter siddiqui 2011-09-15 21:00:19

शिबली इन लोगों के बारे में बताकर क्यों इनका प्रचार कर रहे हैं। इनको इग्नौर करना ही सबसे अच्छी बात है।
prashant 2011-09-15 21:48:23

agar kuchh bhi galat likha hai to use sahi udaharan se kaatna chaahiye.
aap log us blog par jaakar sahi baat ka hawala den aur likhen.
aslam 2011-10-03 23:49:07

phle apne dharam ke bare mi to jan phir bakwas karna
KUMAR GAURAV 2011-09-15 21:39:55

मैंने भी इस ब्लॉग को पढ़ा है , इसमें मुझे कहीं कुछ बुराई नहीं लगी ..वैसे इसमें जो कुछ भी लिखा है , उसमे विभिन्न किताबों को संदर्भित करते हुए लिखा गया है . वैसे बताएं इसमें गलत क्या लिखा है ?
असहमतियों से डरती इस्लामिक मानसिकता !!
varun 2011-09-16 06:46:22

ये है इनका असली चेहरा, अगर बात इस्लाम, मुहम्मद और पैगम्बर पर आ जाये तो जरा सी भी असहमति नहीं बर्दाश्त कर सकते वैसे एम एफ हुसैन के कृत्यों के बारे में बात करते ही इनको लोकतंत्र याद आ जाता है | यशवंत जी आप भी कैसे - कैसे जाहिलों के लेख छाप देते हैं ?

Anonymous 2011-09-16 09:02:08

वरूण जी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं. शिबली जी, तस्लीमा पर हमले करने वालों के खिलाफ आपने कुछ छापा है. डेनमार्क के कार्टूनिस्ट के खिलाफ कुछ लिखा है. अमरनाथ यात्रियों के लिये सु्विधा देने पर मचे बवाल के खिलाफ चंद पंक्तियां प्रकाशित की हैं. वैष्णो देवी यात्रियों पर टैक्स के बारे में कुछ कहा है. बताइये.
अगर दुसरे को आप गाली दे सकते हैं तो सहने की भी आदत
Harishankar Shahi 2011-09-16 08:38:38

जिस तरह चंद ब्लागर्स दुसरे धर्म के बारे में जाने क्या क्या लिखते हैं. वैसे ही इन्होने यहाँ यह ब्लॉग बनाकर इसके बारे में लिख दिया. साथ में पूरे किताबों का हवाला दिया है. अगर आप एक को बुरा कहते हैं वह भी इसीलिए की आपके धर्म पर बुरा लगता है. तो ऐसे ही दूसरों को भी बुरा लगता है ना अगर लिखना था तो उन लोगो को भी कोट कर देते. लेकिन आपको सिर्फ अपने से मतलब रहा है.
सच वही जो बुरा लगे
अनपढ़ 2011-09-16 11:45:50

देखिए पत्रकार साहब जो कहाँ,,,है वो सही है बहोत मामलों में खे़र लिख कर या पढ़ कर क्या मिलेगा सच तो आखिर सच है ना.......
विचारहीनता
sudhir awasti 2011-09-16 13:54:44

किसी के बारे में गलत कहना अच्छी बात नहीं होती अच्छी मानसिकता के साथ जिए मेरे दोस्त ........सुधीर अवस्थी (ग्रामीण पत्रकार) बघौली, हरदोई, उत्तर प्रदेश
सब धर्मों की इज्जत करें
imrose 2011-09-17 11:40:39

सभी को सब धर्मों का सम्मान करना चाहिए. दूसरों को जाहिल कहने वाले खुद सबसे ज्यादा जाहिल हैं. अगर आपको किसी धर्म की इज्जत करना नहीं आती तो उसके बारे में लिखना भी नहीं चाहिए.
Ved Quran
rajesh rai 2011-09-17 13:03:47

अगर वह मुसलमानों का बिरोध करती है तो आप बताएँगे की अब तक आपकी नजर इस ब्लॉग पर क्यों नही गई ब्लॉग एड्रेस है : http://vedquran.blogspot.com/2010/05/ved-and-quran-have-same-message.html जरा पुराने अंक भी देखिएगा
क्या इस तरह का बिरोध बनाम गुंडागर्दी बनाम आतंकवाद क्या सिर्फ एक वर्ग बिशेष के लोग ही कर सकते है
सच कड़वा होता है बेटा
Rajesh Rai 2011-09-17 13:04:55

अगर वह मुसलमानों का बिरोध करती है तो आप बताएँगे की अब तक आपकी नजर इस ब्लॉग पर क्यों नही गई ब्लॉग एड्रेस है : http://vedquran.blogspot.com/2010/05/ved-and-quran-have-same-message.html जरा पुराने अंक भी देखिएगा
क्या इस तरह का बिरोध बनाम गुंडागर्दी बनाम आतंकवाद क्या सिर्फ एक वर्ग बिशेष के लोग ही कर सकते है
such to kadva hota hai
raja 2011-09-17 20:44:10

yah vahi desh hai jhan sita ko ram ki patni kha gaya. islam me halala kaya hai. talak ke bad dusri shadi karne ke liye tisre mard ke sath sona kis dhrm me likha hai lekin islam me sb jayaj hai.
सर आपने उसका लिंक देकर गलती की है.............
अभिषेक पुरोहित 2011-09-18 11:47:42

नमस्कार सर,
मेनें आपके दिये गए लिंक को खोल कर पूरा का पूरा पढ़ा है इस को लिखने वाला व्यक्ति इसके हदीस व पवित्र कुरान से लिए गए आयतों का प्रमाण देता है उसका हिन्दी अङ्ग्रेज़ी व अरबी भी देता है इससे कम से कम ये तो पता चलता है की ये व्यक्ति ज्ञानी तो है जिसको आपके मजहब के खिलाफ तर्क शक्ति मे इस्तेमाल कर रहा है जहा तक आपकी आलोचना की बात है तो इससे काही ज्यादा घटिया व अप्रामाणिक जानकारिया जाकिर नाईक जैसा स्व्यंभू सर्वज्ञ देता ही रहता है उस समय तो वो ही सब से ज्यादा ज्ञान रखने वाला होता है ?????श्री श्री को बुला कर भी अपमानित करता है अपनी मन मर्जी की व्याख्या को हिन्दुओ पर थोपता है तब किसी को आपत्ति नहीं है उसको मिडीया वाले बुलाते भी है पर अगर कोई हिन्दू विभिन्न इस्लामिक ग्रंथो का अध्ध्य्यन करने का दावा कर उनसे ही प्रमाण देने लगते है तो वो गलत सिध्द हो जाते है आप्क जैसो की नजर मे ,क्यो????आप कह सकते है की इसकी व्याख्या गलत है या आयाते भी गलत है व उद्देश्य भी आपके मजहब का विरोध करना है पर ये सब वो वैचारिक रूप से तर्क देकर कर रहा है आप चाहे हो उसका खंडन कर दे जैसे अनेक विद्धवानों ने वहा किया भी है
भारत मे शास्त्रत की बहुत लंबी परंपरा रही ही है एक समय था जब आर्य समाजी सनातनी इस्लाम मत अनुयायी आदि बंधु मिल बैठ कर एक दूसरे की बहुत छीछालेदारी करते थे अपने अपने मतो को श्रेष्ठ बता कर दूसरे मतो का खंडन मंडन करते ही रहते थे लेकिन ये परंपरा विभाजन के साथ गर्त मे चली गयी है आप बात करते है इस्लाम की मेने तो हिन्दुओ मे ही विभिन्न सम्प्रदायो की बहुत ही गंभीर मार्मिक शष्ट्रात की पद्धति पढ़ी है वैचारिक आदान प्रदान होना ही चाहिए हा ये अवश्य है की हम सबका आदर अवश्य करे
इतना चाहूँगा की आपने इसका लिंक देकर बहुत बड़ी गलती की है आपके मत की आलोचको को एक हथियार ही दिया है आपने ,आप चुप रहते ये अपेषा नहीं है पर यहा पर लिंक देकर इसका बहुत ज्यादा प्रचार ही हौवा है वरना कम से कम मेने तो नहु ही सुना था इस ब्लॉक के बारे मे........................अत: एसी अच्छी जानकारी देनी के लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार...............
अच्छा लगा
मिर्च नमक 2011-09-18 17:36:06

जानकर अच्छा लगा कि आप को अपने धर्म की बडी चिन्ता है पर ये चिन्ता तब भी करनी चाहिये जब आप के लोग धर्म की आड लेकर धर्म परिवर्तन जेहाद के नाम पर कत्लेआम करते है क्या आप बतायेगे उस समय आप ने इन लोगो का कितना विरोध किया है क्या किसी विद्वान को आप लोगो ने कभी मौका दिया कि वो आप्अके धर्म के बारे मे कुछ भी सही सही बता सके तो फिर आप किसी को कैसे रोक सकते है अपने लोगो से बात करने मे कि आप के धर्म मे क्या सही है और क्या गलत वो तो सिर्फ अपने लोगो को आप के धर्म की मानसिक्ता से बचाने का काम कर रहा है जो काम आपके रसूल ने भी किया..
हिन्दुओ कुछ सीखो
अशोक गुप्ता 2011-09-18 21:16:54

श्री बी एन शर्मा ने कुरआन हदीस वैगेरा ध्यान से पढ़ई हैं .

पर यह भी सच है कि हम हिंदू अपने ही धर्म ग्रन्थ पढ़नआ बेकार समझते हैं .

आज कोई भी हमारे धर्म को बुरा भला कह देता है , और हम सुन के रह जाते हैं .

बचपन से हम सरिता मुक्ता पढ़ रहे हैं , जो हिंदुओं के विरोध में उल्टा सीधा छापती रहती हैं , और कोई विरोध , या बहिष्कार , प्रदर्शन , भी नहीं होता.

दासानुदास
अशोक गुप्ता 2011-09-18 21:25:05

बात में दम है
हरे रंग का चश्मा
पगलू बाबा 2011-09-19 00:59:19

ऐसा लगता है कि इस ब्लॉग को लिखते समय लेखक महोदय ने हरे रंग का चश्मा पहन लिया था |
यदि इसी तरह की बातें हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ लिखी हुई होती तो जनाब कान में सरसों का तेल डाल कर सोये रहते|

अभी तो खूब बोलेंगे क्योंकि इन्हें खुद को प्रगतिशील/सभ्य समाज का प्रतिनधि/सेकुलरिस्म का प्रणेता जो बनना है|
आप के जवाब आप की मानसिकता दर्शाते है
Nasir 2011-10-29 08:31:36

आप सभी के जवाब से आप की मानसिकता का पता चलता है | बहुत ही अछा लेख था | ए एन शिबली साहब बधाई के पात्र है | किसी को भी ऐसा करने का अधिकार नहीं है की कोई किसे के धर्म के बारे में उल्टा सीधा लिखे | शर्मा की तरह बेशर्मी भरा लेख लिखने वाले गन्दी मानसिकता के रोगी है जैसे रोग का प्रदर्शन कुछ लोगो ने आप के जवाब में भी किया है | क्या कभी किसी मुस्लिम ने एम एफ हुसैन की हिन्दू देवी देवताओ के खिलाफ चित्रकारी को सही ठहराया है | मै ने तो नहीं सुना है अगर किसी ने किया हो गा तो वह भी शर्मा जैसी बेशर्मी कर रहा है |
Ab ye blog is pate pr milga
Alok Mohan 2012-01-12 18:49:09

http://bhaandafodu.blogspot.com/

wo blog delete ho gaya ghau
धर्म
kp 2012-06-14 11:22:54


धर्म का उद्देश्य - मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता (सदाचरण) की स्थापना करना ।
व्यक्तिगत (निजी) धर्म- सत्य, न्याय एवं नैतिक दृष्टि से उत्तम कर्म करना, व्यक्तिगत धर्म है ।
सामाजिक धर्म- मानव समाज में सत्य, न्याय एवं नैतिकता की स्थापना के लिए कर्म करना,
सामाजिक धर्म है । ईश्वर या स्थिर बुद्धि मनुष्य सामाजिक धर्म को पूर्ण रूप से निभाते है ।
धर्म संकट - जब सत्य और न्याय में विरोधाभास होता है, उस स्थिति को धर्मसंकट कहा
जाता है । उस स्थिति में मानव कल्याण व मानवीय मूल्यों की दृष्टि से सत्य और
न्याय में से जो उत्तम हो, उसे चुना जाता है ।
धर्म को अपनाया नहीं जाता, धर्म का पालन किया जाता है ।
व्यक्ति के कत्र्तव्य पालन की दृष्टि से धर्म -
राजधर्म, राष्ट्रधर्म, प्रजाधर्म, पितृधर्म, पुत्रधर्म ।
धर्म सनातन है भगवान शिव (त्रिमूर्ति) से लेकर इस क्षण तक ।
राजतंत्र होने पर धर्म का पालन राजतांत्रिक मूल्यों से, लोकतंत्र होने पर धर्म का पालन
लोकतांत्रिक मूल्यों के हिसाब से किया जाना चाहिए है ।
kp 2012-07-12 13:15:28

वर्तमान युग में पूर्ण रूप से धर्म के मार्ग पर चलना किसी भी मनुष्य के लिए कठिन कार्य है । इसलिए मनुष्य को सदाचार के साथ जीना चाहिए एवं मानव कल्याण के बारे सोचना चाहिए । इस युग में यही बेहतर है ।
patrikayen Sarita aur Mukta jaisi hi honi chahiye
vinod sirohi 2012-06-19 06:23:05

gupta ji ne Sarita aur Mukta par tippadi ki hai ki vo hinduon ka apman karti hain--baat sarasar galt hai-dono patrikayen (1) hinduon mein vyapt kurution ka virodh karti hain
(2) jati pratha ka virodh karti hain
(3) deshprem ko badhawa deti hain
(4)sharab aur sigret jua v samajik buraon ke ekdam virodh mein hai
(5) bhrashtachar ke ekdam virodh mein hai
(6) parivarik mulyon aur naitikta mein atut vishwas jagati hain
( 7) cricet ki kimat par anya khelon ki durdasha ka virodh karti hai
(8) pakhandi babaon aur bhoot pret ke andhvishwas ke ekdam khilaf hain
(9) kabhi sartita aur mukta mein nashe ya juye ya anaitik vigyapan nahin chhapte
(10) naitikta ko badhawa detin hai
CH. ANGREJ SINGH ADVOCATE 2012-06-25 15:58:20

sibli ji. ......... MAIN AAP JAISE PATRKAAR KO KYA KAHUN? YE AAP KO BHI PATA HAI KI AGAR AAP LOGO KI KITAAB KURAAN MESE HATYAVRITI, DOKHAVRITI,VAISHYAVRITI,BIKHSYAVRITI JHOOTHVRITI , LONDAAVRITI , BLAATVRITI , AADI -AADI VRITIYON KI AAYTE (AADESH) NIKAAL DI JAAYE TO YE 450 - 500 PANNO KI KITAAB MATR 20 - 25 PANNO KI CHAMPAK SAREEKHI YEK PATRIKA HI REH JAATI HAI. AAPKI KITAAB KA JAB BHI HINDI ANUWAAD HOTA HAI AAP JAISE PARE-LIKHE DARMANTRITO KI REPORT KI VAJAH SE HAR BAAR KORT ME AAP LOG GALAT SIDDH HUVE AUR ANUVADAK SAHI SIDD HUVE. YE AAP KO BHI PATA HAI HAME BHI. PARANTU AAP SAB KI AANKHO MEIN WAHI BAAL HAI. HAI NAA? APNE AAP KO SUDAARO WARNA AAPKI PARI-LIKHI MUSLIM AURTE HI AAP JAISO KI SAJJANTA KE MUHN PAR JOOTE THUK LAGAA-LAGAA KE MAARNE WALI HAI. SAMAJH JAAO, SUDAR JAAO . SALAH HAMARI MARJI TUMHARI.
इस ब्लोग मे ऐसी कौन बात है जो कुरान या हदीस मे नही
T.P.SHUKLA 2012-10-22 20:29:58

इस ब्लोग मे ऐसी कौन बात है जो कुरान या हदीस मे नही लिखी गयी है,यदि ब्लोग मे लिखी बाते कुरान और हदीस मे भी है,तो विरोध करने का कोइ मतलब नही है,क्यो कि बी.एन.शर्मा ने उन आयतो का भी उल्लेख किया है,यदि कोइ भी व्यक्ति सच्चायी लिखता है तो विरोध नहि होना चाहिये.आप चाहे तो कुरान /हदीस कि उन अयतो का विरोध करे जो गलत लिखी गयी है.और मानवीय मूल्यो के खिलाफ है.
AN Shibli 2012-10-22 20:38:21

शुक्ला साहब आपको ऐसा लगता होगा कि इस वैबसाइट पर कुछ गलत नहीं है। सच्चाई यह है की यहाँ सबकुछ गलत है। कुरान का झूठा हवाला देकर वह बात लिखी गयी है जो कुरान में नहीं है या फिर कुरान की किसी बात का गलत मतलब निकाल कर पेश क्या गया है। चूंकि वैबसाइट पर आयत नंबर भी दिया गया है इसलिए आपको सब कुछ सही लग रहा है मगर गलत मतलब निकाल कर इस्लाम को बदनाम करने की यह एक कोशिश है।
मुसलामानों का सेकुलरिज्म
Yogi Dixit 2013-02-06 22:50:22

जो लोग मुसलमानों की इस मौलिक बात को नहीं समझेंगे वे हमेशा भटकते रहेंगे. मुसलमान केवल तब तक ही धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक होता है जब तक वो अल्पमत में होता हैं. ये दोनों सिद्धांत उनके लिए आस्था के बिंदु नहीं बल्कि एक हथियार हैं. वास्तव में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और इस्लाम का ३६ का आंकड़ा है. दुनिया का एक भी मुस्लिम देश लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष नहीं है. इस्लामी गणतंत्र से ऊपर नहीं उठ सकते. जैसे ही मुसलमान बहुसंख्यक होते हैं, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता उड़ जाते हैं. जब ये अल्पमत में होते हैं, इनको सारे अधिकार चाहिए, बहुसंख्यक होते ही कट्टर इसलामी बन जाते हैं जो अल्पमत को जीने का भी अधिकार नहीं देना चाहते. सारी दुनिया और भारत में कहीं भी नज़र डालिए, मेरी बात समझ आ जायेगी. दुःख ये है की बहुत से हिंदू भी इस असलियत से आँखें मूंदे रहते हैं.
मुस्लिम युवक जाग रहे हैं.
Nida Nabeel 2013-02-08 22:40:30

मैं खुद एक मुस्लिम नौजवान हूँ. घर का माहौल एकदम कट्टर नहीं था. जब नौवीं क्लास में हिंदी और संस्कृत में से एक भाषा चुनने की बात आई तो मैंने संस्कृत ली. अब्बुने कोई एतराज़ नहीं किया. जैसे-जैसे एजुकेशन बढ़ेगी, हिंदू-मुस्लिम नौजवानों की दोस्ती और समझदारी बढ़ेगी. मेरे समाज में हमेशा ये सिखाया गया कि हिंदुओं के साथ दोस्ती मत करो. मगर मेरे बहुत से हिंदू दोस्त हैं. ये मेरा तजुर्बा है कि हिंदू लोग बहुत ज्यादा कट्टर नहीं होते. वक़्त के मुताबिक़ अपने समाज को बदल लेते हैं. मगर हमारे समाज में बदलाव लाने की कोशिश करना भी बहुत मुश्किल है. पर जैसे-जैसे तालीम बढ़ेगी बदलाव आएगा. हिंदू नौजवान अपने पंडितों कि इतना चिंता नहीं करते जितनी मुस्लिम अपने मुल्ला मौलवियों की करते हैं. मुल्लाओं का मफाद इस में है कि उनकी हुकूमत कम न हो जाए. हमें अब तालीम और रोज़ी रोटी की फ़िक्र करनी चाहिए, न कि मज़हब के नाम पर लोगों को बरगलाते रहें.
Waah
Yogesh 2013-06-28 18:19:25

Point ki baat boli hai aapne
हिमवंत 2013-03-31 00:47:58

पृथ्वी पर वर्तमान में विद्यमान धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराए अपनी वास्तविक अर्थो से भटक गई है अतः वे अपने शुरुवात के मूल उद्देश्यों के अनुरूप मानवता की सेवा नहीं कर पा रही हैं. इसके परिणामस्वरूप मानव पुराने धर्मग्रंथो का सत्यार्थ नहीं समझ पा रहे हैं, वे मशीनी मानव की भाँती बनते जा रहे है, ऐसे मशीनी मानव जिनका प्रयोग दूर बैठे कोई आत्मघाती कामों के लिए कर सकता है. अब एक नए रसूल की, नए अवतार की जरुरत आ पडी है.
islam aur sanatan dharm
s.kumar 2013-06-10 18:04:45

islam me jab koi jyada dharmik ho jata hai to kattarvadi ho jata hai kuchh aur dharmikta barhi to aatankvadi ban jata hai kyonki islam me use khud maanane jagah dusron se manvaane par jyada jor diya gaya hai, kintu sanatan dharm me jab koi jyada dharmik hota hai to woh deen duniya alag Ishwar ke dhyan me kho jata hai.
NIMESH 2013-08-08 13:05:29

ABE TUMHARI BUDDHI BHRAST HO GAI HAI...
PEHLE APNE DIMAG KA ILAJ KARVAO

BINA KISI K DHARMA KO JANE USKE DHARAM KA MAJAK UDANA EK PAGAL...MAND BUDHI....INSAN I KAR SAKTA HAI...

AUR TERA DHARAM HI KYA HAI...TU BHI TO AADAM KI HI AULAD HAI NA...

AUR AADAM (A.S) EK MUSALMAN HI THE...
SAMJHA
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