Prashant Rajawat : - मैं दिल्ली एनबीटी सिर्फ प्रसून जोशी के स्तम्भ पेपर वेट के लिए खरीदता हूँ। फ़िलहाल। और लम्बे साक्षात्कारों के लिए।

- दैनिक भास्कर सन्डे जैकेट की खबरों और टाइम्स से करार के तहत प्रकाशित पेज और रसरंग पढ़ने के लिए। रसरंग मेरा दशकों से फेवरेट है। पर अब उतना प्रभावी नहीं रहा।

- एक समय दिल्ली में दैनिक भास्कर सिर्फ और सिर्फ खुशवंत सिंह के स्तम्भ के लिए खरीदता था। जो मंदिरा प्रकाशन से साभार छपता था।

- राष्ट्रीय सहारा एक समय सिर्फ हस्तक्षेप पढ़ने के लिए खरीदता था।

- और जागरण सी उदयभास्कर के रक्षा संबंधी स्तम्भ के लिए।

- टाइम्स ऑफ़ इंडिया मैं सिर्फ स्पीकिंग ट्री के लिए खरीदता हूँ। और मेरे कुलपति रहे मेजर जनरल एस एन मुखर्जी भी टीओआई स्पीकिंग ट्री के लिए खरीदते थे और फिर रद्दी में डाल देते थे।

मेरा यहाँ अपनी पसन्द बताने का मकसद ये है की अख़बारों में सम्पादक बेहद सजग हो जाएँ कोई एक छोटा सा कालम भी आपके अख़बार के बिक्री, आकर्षण और पाठक बढ़ोत्तरी का कारण हो सकता है। इसलिए फौरी तौर पर कोई स्तम्भ हटाने की चेष्टा न करें।

हो सकता है इंडियन एक्सप्रेस कोई सिर्फ पेज वन एंकर के लिए पढ़ता हो। जैसे इंडिया टीवी सिर्फ और सिर्फ आपकी अदालत के लिए देखा जा सकता है। पाठक के टेस्ट किसी एक विंदू पर होता है। जैसे एनबीटी का सेक्स कॉलम, एकदा, साप्ताहिक साक्षात्कार श्रृंखला या नवोदय टाइम्स का झूठ बोले कौवा काटे या नथिंग पर्सनल भी सिर्फ पूरे अख़बार में पाठकों की पसन्द हो सकता है।
आज एनबीटी में पेपरवेट नहीं मिला लगा कुछ छूट गया। एनबीटी सन्डे सम्पादक राजेश जी ध्यान दें हम जैसे पाठकों पर।

शुक्रिया

युवा मीडिया विश्लेषक प्रशांत राजावत की एफबी वॉल से.