बरेली । यशवंत जी, आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूँ कि कई चैनलों के स्ट्रिंगर्स को पिछले कई माह से भुगतान नहीं मिला है। इसके बावजूद भी चैनल के स्ट्रिंगर्स ने अपने अपने चैनलों के बैनर को ऊँचा रखकर यूपी में चुनाव कवरेज कर रहे हैं। किसी ने भी यह नहीं लिखा या कहा होगा कि भुगतान नहीं मिलने के चलते उनका परिवार मुसीबत में है फिर भी स्ट्रिंगर्स उधार मांगकर अपने अपने चैनलों को कवरेज देता रहा। यशवंत जी इसके बाद भी चैनल के मालिक अपने स्ट्रिंगर्स को वह मान सम्मान नहीं देते जिसके वह हक़दार होते हैं।

यह देश और मीडिया का दुर्भाग्य है जो दूसरों के हक़ के लिए लड़ते है उनके साथ केवल गिने चुने लोग खड़े होते हैं। यशवंत जी, जैसा आप जानते हैं कि मोदी जी के नोटबंदी ने जहां चैनल्स के मालिकों का दम निकाल दिया था वहीं चुनाव ने मालिकों को एक संजीवनी बूटी भी दे दी। मालिकों ने चुनाव में पार्टियों से करोडो बटोरे। उसके बाद भी अपने स्ट्रिंगर्स को एक पैसे का भुगतान नहीं किया। चैनल्स के मालिकों ने अपने कई स्ट्रिंगर्स को अपनी पहचान के रूप में बस एक प्लास्टिक की आईडी दे दी और अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।

ऐसे में अगर स्ट्रिंगर्स के साथ हादसा हो जाये तो चैनल यह कहकर आसानी से बच जायेगा कि यह व्यक्ति कुछ समय पहले उनसे जुड़ा था लेकिन अब वह हमारे लिए काम नहीं करता। महोदय आपके माध्यम से मैं मीडिया के जिम्मेदार लोगों से पूछना चाहता हूँ कि आखिर क्यों आप स्ट्रिंगर्स के मुद्दे पर ध्यान नहीं देना चाहते। क्यों आप लोग चैनल्स खोल लेते हैं जब आप भुगतान करने करने की स्तिथि में नहीं होते। हमारी सरकार भी मीडिया के मालिकों की ताकत के सामने झुक जाती है वर्ना हर लेन देन सरकार की नज़र में होता है।

आपका
स्ट्रिंगर्स