Home मीडिया मंथन अगर इतने ही पाक साफ हैं तो लड़कियों को देखकर लार क्‍यों टपकाते हैं

अगर इतने ही पाक साफ हैं तो लड़कियों को देखकर लार क्‍यों टपकाते हैं

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यशवंत जी विप्लव जी का आर्टिकल ढिबरी चैनल का घोषणा पत्र भाग चार पढ़ा. पढ़कर मन इतना दुखी हो गया कि अपने आपको व्यक्त किये बिना नहीं रह सकी। उनका यह विचार दर्शाता है कि मीडिया में काम करने वाली महिलाओं के प्रति उनके विचार कैसे हैं। चूकि मैं भी मीडिया पर्सन हूं, और अच्छी तरह जानती हूं कि मीडिया मे काम करने वाले कुछ पुरुष संकुचित विचारधारा के होते हैं। मुझे लगता है कि विप्लव जी भी कुछ इसी तरह की मानसिकता के शिकार हैं। सब जानते हैं कि आप किसके बारे में बात कर रहे हैं। एक औरत का बहाना लगाकर आप न जाने कितनी औरतों के बारे में गलत बात कह रहे हैं। अगर आज लडकियां वो काम कर रही है, जिसे बडे़ से बड़ा पत्रकार नहीं कर सकता है तो इसमें गलती किसकी है।

आप जैसे कुछ पुरुषों ने ही इन महिलाओं को ऐसे रास्ते सुझाए हैं ना। अगर आज वो औरत किसी राजनेता,  किसी उद्योगपति का बिस्तर गरम करके पैसे कमा रही है तो ऐसे रास्ते इन पुरुषों ने ही उस औरत को बताए हैं। लेकिन एक औरत के कारनामे की वजह से आपने न जाने कितनी लडकियों को आपने इस कतार में शामिल कर लिया।

अगर पुरुष इतना पाक-साफ़ चरित्र का है तो क्यों देश के हर कोने में रोज़ाना कई लडकियों की अस्मत लूटी जाती है, क्यों राह चलती महिलाएं सुरक्षित नहीं है। अगर आज समाज में वेश्‍यावृत्ति है तो उसका जिम्मेदार सिर्फ़ और सिर्फ़ पुरुष है। पुरुष इतना साफ़ है तो उन बदनाम गलियों में जाना छोड़ क्यो नहीं देता। आप बहुत समाज सुधार की बात करते हैं, तो क्यों न पहली शुरुआत पुरुषों की तरफ़ से हो। राह चलती महिलाओं को देखना बंद कर दो, बदनाम गलियों की तरफ़ देखना बंद कर दो, फ़िर देखना कैसे समाज में सुधार आता है। जिन लडकियों से आपको शिकायत है कि वो सारे काम आसानी से कर लेती है तो तुम पुरुष एक पहल करो कि उन लडकियों को भोगने की वस्तु न मान कर अपने दफ़्तर की सिर्फ़ एक कर्मचारी मानो। उस में पात्रता है तो आगे बढ़ने दो। नहीं है तो उसे आगे बढ़ाने के लिए अपने रुतबे का इस्तेमाल मत करो। अगर तुम पुरुषों मे ऐसा करने की हिम्मत है तो फ़िर देखो तुम्हारी शिकायत कितनी जल्दी दूर होगी।

तुम पुरूष ऐसा कर ही नहीं सकते, तुम में इतनी हिम्मत ही नहीं है। लडकियां देखी नहीं कि लार टपकाने लगते हो। कोई लड़की इंटर्नशिप  के लिए किसी मीडिया संस्थान में जाती है, तो तुम उसे नौकरी का लालच देकर उसका शोषण करना चाहते हो, अगर यहां किसी तरह बच गयी, तो जब वह नौकरी के लिए जाती है तो तुम वहां भी उसका शोषण करने से नहीं चूकते हो। अगर लड़की तुम्हारे जाल में नहीं फ़ंसी तो तुम उसको परेशान करते हो, उसे चैन से रहने नहीं देते हो। वही लड़की अगर तुम्हारा फ़ायदा उठाती है तो फ़िर तुम उसे गलत और चरित्रहीन कहते हो। यह किस शास्त्र में लिखा है कि सिर्फ़ पुरुष ही महिला का फ़ायदा उठा सकता है। इसमें गलती किसकी है। उस लड़की कि या फ़िर तुम जैसे पुरूषों की। जब तुम किसी लड़की से हारते हो तो तुम्हें उसमे चरित्रहीनता नज़र आने लगती है। तुम तो खुलकर किसी लड़की के मेहनत की तारीफ़ नहीं कर सकते हो। दरअसल तुम महिलाओं को आगे बढ़ता हुआ देख ही नहीं सकते हो। अगर देख सकते तो आज संसद में महिला आरक्षण बिल ऐसे अधर में लटका हुआ नहीं होता। जब तुम अपना वर्चस्व हिलता हुआ देखते हो तो आगे बढ़ रही महिलाओं मे ऐब ढूंढ़ने लगते हो।

जहां तक बात मंत्री और उद्योगपतियों की कमजोरी जानने की है तो, जब तक कोई अपनी कमजोरी किसी को बताएगा नहीं तो मुझे नहीं लगता है कि किसी की कमजोरी कोई जान पाएगा। तुम पुरुषों का चरित्र इतना कमजोर है कि तुमने अपनी कमजोरी महिलाओं को बना रखा है। आज देखा जाए तो कुंवारे से लेकर शादी शुदा पुरुष तक लड़कियों को देखकर लार टपकाने लगता है। बल्कि शादी शुदा पुरुष ज्यादा ही चरित्र के मैले होते हैं। जिस महिला का आपने जिक्र किया है,  उसने दलाली शुरू की, क्योकि समाज में उसे दलाल मिले। अगर दलाल नाम का प्राणी न होता तो, दलाली का सवाल ही नहीं उठता है। इस आर्टिकल के जरिये महिलाओं के बारे में आपने जो विचार रखे है, मुझे लगता है कि बहाने से ही सही आपने महिलाओं के बारे मे अपनी सोच बता दी। कहीं न कहीं एक तरह के आप भी दलाल ही हैं, जो उस दलाल महिला के जरिए अपना काम निकाल रहे हैं।

लेखिका अंतरा संतोष तिवारी विजन 2020 मैगजीन में रिपोर्टर हैं.

Comments
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Anonymous 2011-04-27 20:02:07

:ooo: :ooo:
Anonymous 2011-04-27 20:02:30

:no-comments: :no-comments: :no-comments:
ladkiyon ko dekhkar laar kyon tapkate hain
s chandra 2011-07-07 09:43:13

aapne bilkul sahi kaha....yah lady killer manchale majnu hi inhen rah se bhatkane ke anekon pralobhan dete hain.....aur vah inke changul mei fans jati h to yah use bebkoof aur badchalan manne lagte hain,,,,,,,,,agar ham bhi ladki hote to kisi bhi media sansthan me achchi post hansil kar li hoti...chunki kaanta hu foolon ke sath kaun rahne ki izazat deta...mere ek mitr hain jo cnbc awaz channel me internship kraate the lekin mujhe nahi karayi..unhen is baat ka dar tha ki mere vaha rahne se ladkiyon ke shoshan ka khulasha ho jayega,,is badanami se bachne ke liye unhone mujh kaante ko foolon ke pass bhatkne ka mauka hi nahi diya....tab se lekar aaj tak kabhi kisi ke samne naukari ki bhikh nahi mangi,,,, khud hi apne news papers publish kiye huye hain,,,aur swatantra aur nishpaksh lekhan se santusht bhi hain....khushi hai aapne mahilaon ke dard ko samjha h..awaz uthai h....mahilaon ka ek shoshan hamne bhi dekha h jo dahej pratha ke mamlon me aksar nazar aata h...sas bahu ko pratadit karti hai,,,,nanad apni bhabhi ko pratadit karti h,,,,,apke sarahniye kadam me ek aur kadi jodne ki kucheshta ki h,,,aur apki koshish me meri koshish bhi jude to achcha lagega....





लडकियां भी तो टपकाती हैं
मदन कुमार तिवारी 2011-04-27 20:03:55

हा हा हा खैर मनाओ मैं तुम्हारे नाम का सिर्फ़ संतोष तिवारी पढकर लडका समझ बैठा था और एक कडी टिपण्णी करने जा रहा था। टिपण्णी तो अब भी करुंगा लेकिन तुम जिसे मर्यादित का नाम देती हो उस तरह की । अन्यथा न लेना। " तुम पुरुष ऐसा कर हीं नही सकते , तुम मे इतनी हिम्मत ही नही है , लडकियां देखी नही की लार टपकाने लगे " वाह - वाह किसी सेमिनार में बोलती तो तालिया बजती लेकिन बोल रही हो भडास पे, जहां महा संत टाईप के विशुद्ध भडासी आते हैं। उनके लिये क्या महिला और क्या पुरुष सब एक हैं , हिजडों को भी वो समाज का हिस्सा मानते हैं। खैर तुमने कभी किसी महिला को देखा है पुरुष को देखकर लार टपकाटे ? एक बात तो तुमने स्विकार किया है कि मीडिया में काम करने वाले कुछ पुरुष संकुचित दिमाग के हैं। अब यह पूर्वाग्रह कब खत्म होगा ? किसी ने महिला के बारे में लिखा तो पड गई कलम लेकर पिछे , किसी ने पुरुष को गाली दी तो शुरु हो गया । खैर थोडी व्यापक्ता लाओ विचारो में । मुझे वैसे ढिबरी चैनल में मजा आ रहा aै अच्छा व्यंग है .
antra tiwari 2011-04-27 20:45:41

yah vyangy nahi sach hai jo tum jaise purusho ko kabhii nahii dikhaii degaa. jara apni aankhe kholo,aur sach ka samana karo.
विचारो में गहराई लाओ
मदन कुमार तिवारी 2011-04-27 21:54:42

आंख - कान सब खुला हुआ है। इस तरह की वाहियात वाते संकरी सोच को दर्शाती है । चलो इसी बहाने बहुत सारे महिलाप्रेमी शाबाशी देंगे। आंनद करो और लिखती रहो । वाहियात बाते।
antra tiwari 2011-04-28 13:48:08

aapko is article me kharab kya lag raha hai. maine purusho ke baare me likha ye, ya phir sach likha ye. dekhiye jinhe sach sweekar nahi hota hai unhe har baat wahiyat hi lagti hai. is aarticle me ek bhi jhooth ho to bataiye.
नजरिया व्यापक बनाओ
मदन कुमार तिवारी 2011-04-28 17:50:21

अंतरा दोस्त, बेटी, बहन जो समझो , एक बात बताओ , क्या महिलावादी या feminist बनना जरुरी है ? अरुंधती , किरन बेदी बनना चाहती हो ? अब इन चीजों का कोई मायने नही रह गया , सामान्य लोगों के नजरिये से देखने पर तु्म्हारा लेख शाबाशी के लायक है , लेकिन भेड के नजरिये से देख नही पाता मैं , यही समस्या है । मैने ढिबरी का घोषणा पत्र पढा है बडा मजा आया हसी आई अच्छा व्यंग है। अंतरा तुम्हे यही तकलीफ़ है न की उसमे महिला पत्रकारों के बारे में लिखा है कि नेता उन्हे ज्यादा पसंद करते हैं , अंतरा यह एक अच्छा कटाक्ष है नेताओं पर और उन लोगों पर जो महिला को अभी तक सेक्स की मशीन से ज्यादा कुछ समझ हीं नही पाये हैं , बल्कि यह कह सकती हो कि इतनी विकर्‍त मानसिकता है उनकी कि महिला देखा नही बिस्तर की चादर बनाने के लिये बेचैन हो गयें। अंतरा लिखो खुब लिखो लेकिन लीक से हटकर । वैसे मेरी टिपण्णी खराब लगी हो तो माफ़ करना भाई जो मन मे था सो लिख दिया ।
antra tiwari 2011-04-29 14:37:51

mai nahi samajhati ki likhne ke liye arundhati roy ya phir kiran bedi babane ki jarurat hai. meri apni pahchan hai.maine wahi likha jo maine practically dekha hai.
taruna niryal 2011-07-29 23:45:59

Joo loog naari koo sex kii machine samajhte hai woo shaid yee bhool jaate hai kii aise hee ek sex kii Machine see unhoon nee bhi janam liaa hai . Agar yee Sex Machine naa hooti too naa yee sharishti hooti naa yee purush . I think aise loog joo naari koo sex kii machine samajhte hai pehle Apni Maa Koo Yaad kar leena chaahiaa........
Tiwari ji bahut khub
sushil Gangwar 2011-04-29 19:41:42

Tiwari ji aapne bilkul sahi kaha ?

www.sakshatkar.com
Bhaartiya naagrik 2011-04-27 20:03:59

sabhi ki kami hai, lekin ladkon ki adhik hai.... phir bhi mahilaayen aasan shikar hoti hain, isliye unhen adhik saavdhani rakhni chahiye...
arvind 2011-04-27 21:55:05

apne bilkul sahi likha ha antraji. Vinod Viplav darasal Dayanand Pande banne ki koshish kar rahe ha lekin lekhni me wo bat nahi. Dayanandji se sirf ashlilta hi pakad paye ha.
Anonymous 2011-04-27 22:10:54

:ooo: :ooo:
Ye soch aur suvidha ka mamala hai ...
SUMEET DUTT DWARY 2011-04-27 22:22:27

Samaj main jab ladakon ki sankhya jyada thi to ladakiyan unka istemal karati thin... aaj ladake adhik hain to ladakiyon ke liye avsar hain...Mere vichar se is vishhay main bat ko kheenchane ka koi khas fayda nahin hai... Jab shiksh,roop aur gyan ko gun mana gaya hai to isko bhi yogyata man lene main kya harz? usape tippani kyun?

Swayam ek bahut bade TV patrakar ( jo..RAJ bhi karate hain to SAR pe sawar hokar samajhe aap ? unhou) ne sare aam press club,Mumbai main kaha tha 98% tv journo vaishya hain...vo boss ko subdues karke aage badh rahin hain... Ek bade rajneta ki janmapatri par kam karate huye Star News ki ek reporter ka interview karane ki zaroorat VICHAR - MIMANSA ke Mumbai Bureau Pramukh ke tour pe huyee ,maine usase bat ki ..vo boli mere office se bat kar lo main on camera confess karoongi.... to udayshankar ne mere 16 FAX requests ka jabab nahin diya...vahan ki legal cell main karyarat AEKATA namak legal advisor ne 15 roz tak 80 bar fax karvaya par us reporter ka interview nahin lene diya... Duryog se us neta ki hatya ho gayee to vo ladaki reporter Star se nikal dee gayee...abhi pata nahin vo kahan gum hai
2-3 Anya TV News ke namcheen Managing editors ne bhi kaha tha Yahan noukari ka rasta Prabhu- kripa se 5-7 tara hotel se guzarta hai.
Ek Film main batour Chief Asst kam kar raha tha...Director hi producer the,unhoune ek ladaki ko heroine banane ke nam pe koi prastav diya ...Ladaki ne vah kheench ke tamacha mara ki Film ka title vah ravan se AAH -RAVAN ho gaya... Vo ladaki Ek Restaurent chala rahi hai Fame Adlab ke pas, Jisamain 50-60 staff kam karate hain,us property ki keemat kam-se -kam 10 crore to hogi hi, jo 3 hazar rozana yani lagbhag 2 lakh main poori film karane( jisamein 7 rape ka scene bhi shamil tha) ja rahi thi achanak itane paise usake pas kahan se aaye ? Vo Producer Director ek production house main 40 hazar ki tankhah pe 16-18 ghante rozana ki majdoori kar raha hai...
AAJ LADAKIYAN SWAYAM QUICK MONEY KE LIYE APNE KO BISTAR BANA RAHI HAIN... AUR LADAKON KE BARE MAIN BHI AESEE KHABAREN HAIN ....
kavita singh 2011-04-28 11:50:13

bilkul sahi lukhti hai aap aisa hi hota hai jo mahila media karmi job ke liye jati hai ya intren ke liye uske saath soshad hi hota hai ..
kavita singh 2011-04-28 16:16:27

yaar mene kuch galt likha hai kya.mene bhi is baat ko feel kiya hai.bcoz m bhi ek media person hu.
antra tiwari 2011-04-28 16:39:46

kavita maine aapko reply nahi kiya hai.ye reply to kisi aur ko tha
Pratykriya
Shailender Sehgal 2011-04-28 18:46:40

Behas Ka ant nahin hota. Magar sachayee upni jagah se tus se mus nahin hoty. Kabhi sooraj ki trah ugty hai to kabhi chand ki trah, badlon main jyada der chhup nahin sakty. Aourt our mard ek doosre ke pratipurak hote hain our brabar ek doosre ko akarshit karte hain. Kabhi pursh pehal karta hai to kabhi aourat bhi mook nimantran deti hai. Wasna dono main hoty hai is liye kissi ek ko dosh dena hi galat hai.Purash taqatwar hota hai is liye zyadty bhi zyada kar jata hai magar aourat upni ayee pe aa jaye to atyachari ko uske unjaam tak le jane main der nahin lagaaty itna hi nahin upna badla lene main purash se 10 guna zalim ban jaty hai. Burayee uchhayee bhi dono main hi hoty hai.
वो करें तो रासलीला, मैं लिखूं तो कैरेक्टखर ढीला।
Vinod Viplav 2011-04-29 06:22:56

अंतरा ने अच्‍छा लिखा है, बधाई कि उसने कलम चलायी। अंतरा के लेख को पढ कर मैं भी कुछ और लिखने को प्रेरित हुआ। लेख का शीर्षक कुछ इसी तरह का होगा - वो करें तो रासलीला, मैं लिखूं तो कैरेक्टखर ढीला। जब यह लेख आये तो पढेंगे/पढंगी ऐसी उम्‍मीद हैा
- विनोद विप्‍लव
antra tiwari 2011-04-29 14:39:37

dhanayabad apko. is baar jab likhe to pakshapat ko door rakhkar likhe.
Vinod Viplav 2011-04-29 06:23:45

वो करें तो रासलीला, मैं लिखूं तो कैरेक्टर ढीला।
ram milaye jodi
dipak raja 2011-04-29 11:07:10

jisne jo likha sab apne hisab se thik hi likha hai. mera manna hai jo jis swabhav ka hota hai, use uska jodi mil jata hai.

Rahi bat mazboori ki to, kaun kahta hai ki mazboori men kam karne ke liye.

Jo man gawara na kare wo kam mat karo, samjhauta kis liye. agar samjhauta kar liye to matam kyun. doshi dono hai

jaldi pahunchane ki kosis karne wale bhee aur lift dene wale bhee....

rahi bat mansikta ki, wo to pahchan hai vyaktitva ki
reply
manish 2011-04-29 12:31:59

if sweets comes directly in a person's mouth, why he should not eat unless he has sugar problem????? haha ha
antra tiwari 2011-04-29 14:41:26

i think u r sick personality, otherwisre u d never give this type of feedback.
लडकियां उन लोगों पर लार टपकाती है जिनके पास पद, पै
Manoj Sinha 2011-04-29 15:33:01

लगता है अंतरा तिवारी ने ढिबरी चैनल पर इस व्यंग्य को लेख समझ लिया। दरअसल लेख और व्यंग्य में अंतर होता है। जब कोई पुरूषों पर इल्जाम लगाता है या लगाती है तब लोग उसे सच मान लेते हैं, लेकिन जैसे की कोई महिला पर सवाल उठाता है तो उसकी बीमार मानसिकता का बताया जाता है। क्या आज के समाज में महिलायें और लड़कियां पाक साफ है और क्या लडकियां उन लोगों पर लार नहीं टपकाती जिनके पास पद, पैसे और शोहरत है। अंतर केवल यह है कि महिलायें चालाक एवं बुद्धिमानी से काम लेती हैं जबकि पुरूष जहां भी लडकियां देखता है फिसल जाता है। सच तो यह है कि महिलायें आगे बढने के लिये सुंदरता एवं देह का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करती जबकि पुरूष के पास ऐसे हथियार नहीं होते हैं - इसलिये उसे आगे बढ़ने के लिये मेहनत, प्रतिभा एवं क्षमता दिखानी पड़ती है। जो एक पुरूश पत्रकार अपनी काबिलियत से कई साल में हासिल करता है, वही चीज, चाहे पद हो या पैसा, कुछ दिनों में हासिल कर लेती है। यह सच है कि इस मौजूदा परिस्थिति के लिये पुरूष समाज ही दोषी है।
09450124041
Ajmer Singh 2011-04-29 16:40:56

yah jo aapne likha kaduwa satya hai. mai aksar dekha hai ki sadishuda log laskiyo par kuchh jyada tippadi karte hai.
Anonymous 2011-04-29 16:56:37

:evil: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate:
हर सफल औरत के पीछे एक औरत का हाथ होता है
राजीव 2011-04-29 17:02:29

मीडिया हो या कोई और क्षेत्र, औरत हमेशा सफल पुरुषों से अपना संपर्क बढ़ाती है। चूंकि पुरुष का दिल औरत को देखते ही कोमल हो जाता है, इसलिए ऐसे पुरुषों से इन औरतों की दोस्ती जल्दी हो जाती है। इसी दोस्ती की आड़ में औरत अपना सारा काम निकालती है। अगर जिस्म देकर काम निकलता हो, तो भी कोई बात नहीं।

मेरी नजर में ऐसे कई पुरुष हैं, जिनकी नौकरी औरतों ने अपने जिस्म के दम पर छीन ली।

आज की दुनिया में औरत मर्द से भी गिरी हुई चीज है।
हर सफल औरत के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है
राजीव 2011-04-29 17:16:50

हर सफल औरत के पीछे एक पुरुष का हाथ होता है
लार टपकाती है
sushil Gangwar 2011-04-29 19:40:52

Bhai agar kahu sab naraaj ho jayege . Girl ko dekhkar sabki laar tapakti hai magar boys ko dekhar bhi ladkiya लार टपकाती hai. chaliye ..

sushil Gangwar
www.sakshatkar.com
Manoj Kumar 2011-04-30 18:18:10

ळह
लड़कियां कितनी जाहिल और मूर्ख होती है और कितनी मूर्खता के साथ बात को बतंगड़ बनाती है यह अंतरा के लेख से पता चल जाता है। खुद अपना षरीर खोले हुये घुमती रहती हैं और कोई नजर भर कर देख ले तो बबाल हो जाता है। अगर इतनी पाक साफ हैं तो षरीर को दिखाने वाले छोटे-छोटे कपड़े पहन कर क्यों सार्वजनिक जगहों पर जाती हैं। अगर कोई मालदार और हैंडसम हो तो खुद लार लपकायेंगी
sanjai swadesh ko to bhagaya gaya ..mujhe hadtaliy
saliendra dixt 2011-05-02 09:32:48

sanjai swadesh ko to bhagaya gaya ..mujhe hadtaliyo ne bhaga diya..mujhe mara mere gale me juto ki mala pahnai..aurmera muh kala kar ke mujhe bhaga diya ..mujhe mera bakaya 800 rupya bhi nahi lene diya..ab main kanpur brrra aaakar yahi soch raha hu kaha naukri karu ...bhaskar gaya tha lekin waha saha ji ne mujhe peoun se bahgwa diya ...sochta hu daro piyoon ...lekin lagta hai bhiikh mangni padegi kyoki mere bap ki .. koe aukat hi nahi .....meri ma hi ghar chalati hai ....jane kase kasise paresani sah kar aurto ke kapde seeiti hai....ab mujhe kaha naukri milegi....bahut paresan hu
shailesh dixt brrra kanpur
yaswant wa madan kumar tiwari hai cutieye no 1
sanjaiswadeshas 2011-05-06 10:14:00

:angry-red:
ye 1 no. ka chutia aadmi hai madan kumar tiwari isko main and band comment karte hi dekhta hu ..koe decent bat nahi karta ...aur yaswant to kewal mirch mashala wali khabar hi chapta hai....wo bhi 1 no ka chutiya hai...
sanjai swadesh
Shyam Hardaha 2011-05-30 19:59:51

Antraji ji ke wichar sahi hai. unke wicharon ko wyapak sandarbh me samajhne ki jaroorat hai
साहित्यिक व्यंग में मानसिकता पर प्रश्न|
प्रेम 2011-06-17 21:15:05

मैं अभी हंसता रोता विनोद विप्लव के आलेख, "जो बड़े से बड़ा पत्रकार नहीं कर सकता, ये लड़कियां झट से कर सकती हैं" से लौट कर आ रहा हूँ| मैं हंस इस लिए रहा हूं कि यह भारतीय मानसिकता ही है जहां "चोली के पीछे क्या है? चुनरी के नीचे क्या है? पूछते जूते पड़ सकते हैं, वहां इस कथन को गला फाड़ फाड़ नगाड़े की धुन में नाचते गाते आप बधाई के पात्र बन सकते हैं| रोता हूं कि यह घिनौनी मानसिकता साहित्यिक व्यंग को भी चार चाँद लगा रही है| चिरकाल से नारी को अपनी शक्ति मानते आज उसे अपनी दुर्बलता का शिकार बना दिया है|

एक लघु कथा को संक्षिप्त में सुनाता हूं| एक युवा राजा ने दो पीढ़ियों से राज्य की सेवा में लगे अपने बूड़े प्रधान मंत्री से कहा कि आपने मेरे दादा और मेरे पिता का राज्य देखा है और उनके इस अभ्यास पर आधारित उनसे स्वयं अपने राज्य की स्थिति के बारे में पूछा| बूढे प्राधान मंत्री ने जान माल की खैर मांगते हुए हाथ जोड़ कर राजा के दादा के राज्य में घटित एक घटना का वर्णन किया| आभूषणों से सजी लदी अपनी अति सुंदर नई नवेली दुल्हन को लेकर तड़के सवेरे दुल्हा बाजे गाजे समेत बारात के संग अपने गाँव की ओर जा रहा था| सफर के आध बीच एक भयंकर तूफ़ान आया और उसके रुकते वहां केवल आभूषणों से सजी लदी बेहोश दुल्हन रह गई थी| बाकी लोग अपनी जान बचा इधर उधर भाग गए थे| पास ही के एक गाँव के किसानो ने अपने खेत में बेहोश दुल्हन को पा उसे तुरंत गाँव के मुखिये के घर ले गए| घर की औरतों की सेवा तीमारदारी से बेहोश दुल्हन को होश आने पर पूछ ताछ के बाद स्वयं मुखिया ने गाँव के कुछ आदमियों को साथ ले आभूषणों से सजी लदी दुल्हन को उसके ससुराल पहुंचा दिया| बूढ़े प्रधान मंत्री ने युवा राजा के पिता के राज्य काल में एक ऐसी ही घटना का वर्णन करते बताया कि दुल्हन तो ससुराल पहुंचा दी गई लेकिन आभूषणों का क्या हुआ इसका आज तक किसी को पता नहीं लगा| आज युवा राजा के राज्य में दुर्भाग्य से वैसी ही घटना होने पर बूढ़े प्रधान मंत्री ने बताया कि आभूषण और दुल्हन दोनों का कहीं पता नहीं लग रहा है|

पिछले बीस पच्चीस वर्षों में वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद में अकस्मात धकेले गए आधे अधूरे विकसित भारत में जीवन की उथल पुथल ने पहले से विस्तारित परिवार के टूटने पर मूल परिवार में भी भारतीय जीवन की सुदृढ़ मान्यताओं को बुरी तरह प्रभावित किया है| भारत के पुरुष वर्चस्व समाज में इन्हीं मान्यताओं के अभाव के कारण उत्पन्न उद्विग्नता भारतीय पुरुष में संकीर्णता और घिनौनी मानसिकता को जन्म देती है| लोकप्रिय भारतीय सिनेमा और धारावाहिक रूपकों में हिसां और अशलीलता ने मानो इस मानसिकता को सामाजिक अनुमोदन दिलवा दिया है|

विनोद विप्लव के तथाकतित व्यंगात्मक आलेख के शीर्षक में “लड़कियां” शब्द का प्रयोग कर लेखक ने अपने मन की संकीर्णता दिखाई है| चिरकाल से विदेश में एक साधारण जीवन व्यतीत करते मैं भारतीय पत्रकारिता और पत्रकारों को ले कर चिंतित रहा हूं| भ्रष्ट भारतीय राजनीति में जाने अनजाने सहयोगी पत्रकारिता और पत्रकार “भारत पहले, जनता पहले, अनैतिकता पहले” की अवहेलना कर मनो मन संतुष्ट हो इन्होने सामान्य जीवन को ही परिहास बना छोड़ा है| अंतरा के साहस और अपने लेख में शर्मनाक स्थिति को विस्तृत रूप में प्रस्तुत कर लेखिका ने विनोद विप्लव को और उनकी विचारधारा को चुनौती देते हुए उन्हें अच्छे आचरण की सीख दी है| अंतरा तिवारी को मेरा साधुवाद|
साहित्यिक व्यंग में मानसिकता पर प्रश्न| संशोधन
प्रेम 2011-06-17 21:29:18

पाठक, कृपया मेरी उपर्युक्त टिप्पणी में "अनैतिकता" को "नैतिकता" पढ़ें| त्रुट्टी के लिए मुझे बहुत खेद है| क्षमा प्रार्थी हूं|
हिंदी देवनागरी में ही लिखें|
प्रेम 2011-06-17 22:03:05

हिंदी भाषा में पढ़ना व कभी कभी लिखना (टिप्पणी) हाई स्कूल के लगभग पचास वर्षों बाद शुरू किया है| विदेश में रहते मुझ पंजाबी को हिंदी भाषा के प्रयोग का कभी अवसर ही नहीं मिला| १९८० के दशक में हरिद्वार से आए जाने माने उच्च कोटि के संत ने न्यू-यार्क स्थित गीता मंदिर में श्री रामायण पर शुद्ध हिंदी भाषा में टीका-टिप्पणी कर मानो मुझ पंजाबी को हिंदी भाषा का प्रशंसक बना दिया है| मेरा पूर्ण विश्वास है कि सभी प्रांतीय भाषाएँ अपने में महत्वपूर्ण होते हुए भी हिंदी ही ऎसी भाषा है जिसके द्वारा समस्त भारत को एक डोर में बाँधा जा सकता है| यहां टिप्पणीकारों से मेरा अनुरोध है कि हिंदी को रोमन शैली में लिख भारत और हिंदी भाषा का अपमान न करें| कोंकणी व अन्य देशी भाषाओं की लिपि इस रोमन शैली के बलि चढ चुकी हैं| हिंदी भाषा को देवनागरी लिपि में ही लिखे अन्यथा भाषा की आत्मा ही समाप्त हो जायेगी| कियोंकि रोमन शैली में लिखी भाषा को ठीक से लय में पढ़ने में कठिनाई होती है, समय आने पर अंत में इसे भी फैंक अंग्रेजी भाषा को अपनाना होगा| घर का न घाट का, हम हिंदी भाषा को ही मिटा देंगे और उस पर भी अंग्रेजी में दक्षता कभी न पा सकेंगे|
मैंने यहाँ कुछ प्रचलित साफ्टवेयर्स की सहायता द्वारा हिंदी में लिख सकने का सुझाव दिया है| निम्नलिखित कदम उठाएं|
१. हिंदी भाषी और जो अक्सर हिंदी में नहीं लिखते नीचे दिए लिंक को डाउनलोड करें: http://www.google.com/ime/transliteration/. आप वेबसाईट पर दिए आदेश का अनुसरण करें और अंग्रेजी अथवा हिंदी में लिखने के लिए Screen पर Language Bar में EN English (United States) or HI Hindi (India) किसी को चुन (हिंदी के अतिरिक्त चुनी हुई कई प्रांतीय भाषायों की लिपि में भी लिख सकेंगे) आप Microsoft Word में हिंदी में लेख का प्रारूप तैयार कर उसे कहीं भी Cut and Paste कर सकते हैं| वैसे तो इन्टरनेट पर किसी भी वेबसाईट पर सीधे हिंदी में लिख सकते हैं लेकिन पहले Microsoft Word में लिखने से आप छोटी बड़ी गलतीयों को ठीक कर सकते हैं और इस प्रकार इन्टरनेट पर कीया खर्चा कम होगा| HI Hindi (India) पर क्लिक कर आप Google पर सीधे हिंदी के शब्द लिख कर Internet पर उन वेबसाईट्स को खोज और देख सकेंगे जो कतई देखने को नहीं मिली|
२. नीचे का लिंक शब्दकोष है जो आपको अंग्रेजी-हिंदी-अंग्रेजी की शब्दावली को प्रयोग करने में सहायक होगा| इसे आप अपने कम्पुटर पर Favorites में डाल जब चाहें प्रयोग में ला सकते है| http://www.shabdkosh.com/ हिंदी को सुचारू रूप से लिखने के लिए अंग्रेजी में साधारणता लिखे शब्दों का हिंदी में अनुवाद करना आवश्यक है| तभी आप अच्छी हिंदी लिख पायेंगे| अभ्यास करने पर हिंदी लिखने की दक्षता व गति बड़ेगी|”
Antara ji, taali ek haath se nahi bajti...
Atul Kushwah 2011-06-19 23:12:08

Antara, Apne to purush ko purush kya kuch bhi nahi rakha.Dekhiye ye jo baat aap kah rahi hain ki veshyavratti ke liye purush hi jimmedaar hain aur purush raah chalti ladkiyon ko dekhna band kar de..! mama ki ladke ladkiyon par najarein inayat na karein lekin ladkiyan man chahe vaise angreji style ke short kapde pahne isme koi dosh nahin..aaj mahilayein jis mukaam par pahunch rahi hain usme sirf aur sirf purushon ka yogdaan hai, sahyog hai..Ghar ki dehri ke bheetar hi rahne wali patthar yug ki soch se aadhunikta ke patal par lakar apne ko proof karne ka mauka dene wala purush hi hai...jisko aap ghinauna aur charitra par sawal khada kar rahi hain..kai desh to aise hain jahan mahilaon ke mamle me ab bhi patthar yug ki vichardhara hawi hai...Thande Dimag se Sochiye fir jawab deejiye Antara ji...
antra tiwari 2011-06-20 23:46:47

mauka dene wale purush kaun hote hai.samaj me sabhi ka barabari ka haq hai.ham mahilaye khud ke dum par aage badhi hai.
Anonymous 2011-06-21 01:53:01

हिंदी को रोमन शैली में लिख भारत और हिंदी भाषा का अपमान न करें|
SANJAY RAWAT 2011-06-23 14:35:45

ANTRA G NAMASKAR, BATTING TO DHUVAN DHAR HAI, PAR PAR SHAYED SAMNE WALE KA SAR NHE FUTA. AB BAT HE SAR PAR MARNA PDEGA......................
SANJAY RAWAT 2011-06-23 14:45:06

YUN TO EK DUSRE KO DEKHNA (LAR TAPKANA) NETUREL PROSES HAI, PAR SAMNE WALE KE THPPAD ESA MARO KE YAD RKKHE KE PALA KISSE PDA THA.
SUBHKAMNAYE.............................
SANJAY RAWAT
HALDWANI (NAINITAL)
"JANPAKSH AAJKAL"
09759800123
dinesh singh 2011-07-11 15:00:27

bilkul sahi hai aap ka kehna .

लेखिका अंतरा संतोष तिवारी
i m with u
taruna niryal 2011-07-29 23:02:52

Aap nee bilkul sahi kaha .Aagar yee purush pardhaan sammaj kii soch achii hoo jai too sammaj main ladkioon kee sath hoone wale
crime hi khatam hoo jain. Naari koo sammaj main jis jangali jaanwar see sabse jyada khatra hoota hai woo purush hi hai . Agar is jangali jaanwar koo lagaam lag jain too hammare desh kaa sudhaar hoo jaee . Sudhrnee kii jarrurat naari koo nahin purshoon koo hai .
taruna niryal 2011-07-29 23:27:51

kuch logon ki yee galat sahmi hai ki yee galat sahmi hai kii purushoon nee naari koo protsahit kia . Shaid unhain yee pata nahin kii hindu sabhiata main naari koo purush kee baraaber adhikar dyaa gai hai.... use study, uddha aure kai aur tarhaan ki shikshaon kaa haak thaa .Woo purshoon kee baraber adhikaar thee . Joo ki samiaa chalte purshoon nee cheen lya aaj jab naari purush see aage nikal rahi hai too Ahasaan kaisa ? yee too naari kaa haak hai woo koi jaanwar nahin joo Ghar kee khoonte see bandhi rahe.
Jahan taak sawaal kapdoon kaa hai too agaar saamne waale insaan kii sooch aagar achee nahin too aap culturel dress main bhii safe nahin .
Hamaari sabhiata main sabse pehle insaan sirf patton see apna taan dhakta thaa ......tub too kapdoon ki taraf dhiaan nahin jata thaa ...per aaj ager woho patte koi pehan lee too ashaliltaa hoo jati hai.....
Main hammare desh kee purshoon koo aur kuch mahilaaon koo yahi kehna chaahun gii i apni soch koo uunchaa uthaaoo..
taruna niryal 2011-07-29 23:56:33

Koi baat nahin aap apni galat sahmi barkarrar rakhiaa kion kii kuch saalon main woo wakat aani wala hai jab har teraf Aurat kaa hii haath hooga aur purush kahin dikhai hii nahin deega............. :ooo: :ooo:
Mera Vichar
Vivek Sharma 2011-08-18 11:18:26

Try to understand Ki agar hum ek boy friend se behave karte hain thik waise hi ek girl se v kar sakte hain.
aur maine eh maansikta apnai but kahin na kahin problem hui hai khd larkiyo se hi
to hume apne aaspas ka mahol change karna chahiye jisse ki larki aur larke aaj ka mahol aur aaj ki IT GENRATIONS MAHUL KO SAMAJ SAKE :D
nutan 2011-08-25 18:04:58

apane sahi muddo ko uthaya h lakin hame pakchh pat se upar uth kar sochana chahiye,apaka gussa jayaj h lakin wo ek vyang tha,aap mujhase behatar janti aur samajhati h...mujhe lagta h vyang aur lekh me bahut antar hota h...hame tark karne ke bajaye pehale bato ko samajhane ki koshish karni chahiye fir sayad vicharo me matbhed na rahe
laar tapakti hai
Asmi 2011-09-07 00:48:18

Aapne jo bhi likha hai shi likha hai,is article k madhyam se apne un gandi maansikta waale purusho ko aaina dikhaya hai jo is dhrti pr arajaktatv hain tatha jinhone apni giri hui soch se pure samaaj ko ganda kr rakha hai.....
Kuchh Logo ki wajah se sabhi mardo ko doshi thahra
Rupesh Kumar 2011-10-05 00:01:50

Antra Ji,
Aap ne jo likha hai wo to thik hai aur isse samaj ki gandagiyo ko door karne ki jo apne sochi hai shyayd kafi had tak apko safalta bhi mile, main god se yahi pray karung lekin Antra Ji agar samaj me kuchh doost prakrit ke logo ki wajah se sabhi mordo par kichad uchhalana to thik nahi hai aur rahi baat road par ladkiyon ko dekh kar laar tapkane ki to is sandarbh me mai kuchh kahna chahuga aur wo ye ki isme purn roop se ladko ko doshi thahrana galat hai kyunki purn roop se to nahi lekin kuchh na kuchh to isme ladkiyo ka bhi dosh hai aur agar aap journalist hai to itna to samajhati hi hogi ki wo kamiya kya hai. Next Antra Ji main ye kahna chahuga ki thode se lalach ke liye kisi ki baato me aa jana bhi kaha ki samajhdari hai, kya is mamle me ladkiyon ke mind kam karna band kar dete hai. Agar ladkiya thodi si samajhdari se kaam le to shayad aisa waqt hi na aaye.
Medam
virendra singh 2011-11-06 20:58:32

medam ji yesa nahi h ki purush hi suruat karte h mahilaye b suruat karti h. but unko koi galt nahi kahta kyoki wo mahilaye h. or ap dusro ki nahi balki apni chinta karo. m b press riportar hoo.
ap mujhse ek war milo medam yakin dilata hu ap jarur mujh se impress ho jaogi. ok
Jayadater Mardo Ki Vichaar Dhara Ko Badla Nahi Ja
Hasan 2012-11-27 18:11:25

Aapka ye vyang rup me likha hua lekh, seedhe-seedhe mardo ki vichaar dhara ko spast karta hi, ha me manta hu ki 80% ya u kahe ki lagbhag 90% mardo ki mansikta me oorat ek esa prani hi jo ki sirf mardo ke man ko bahlane or mard ko sukh rakhne ke liye bana hi.
Per kahi na kahi kuch log to ese hi, jinke dilo me mahilaao ka ek uccha sthaan hi, chahe vo dhram ke karan se ho ya phir pavitra mahol ke karan.
Jab aap logo ki maa ya bahan apne ghr se bahar jaaye to kya aapke dil or man me dar peda hota hi ya phir aap unke saath jaate hi is dar se ki unke saath kuch na ho.
Mera sawaal hi ki kyo, jab ham hamari hi maa or bahno ke ghar se bahar jane me chintit hote hi to phir hame sharm kyo nahi aati jab ham kisi or ki bahan ko dekh ker citi bajate hi ya koi comment karte hi.
Aaj yadi hame aage badhna hi to kuch kathor kadam uthate huye kanuno ko kathor banana ho, kyo ek mard kisi masoom 16 saal ki ladki ka rape karke azaad ghum sakta hi ?
sawaal to hazaro hi magar sudhaar to hamse hi shuru hoga. Jab me apne dosto ke saath apni colony me betha hota hu or jab ko collage ki girl nikalti hi to ham me se kuch comment karne lagte hi, kuch citi bajate hi or kuch to sharmnaak kaam kane ki dil hi dil me sochne lagte hi, or ek din jab mere dil me khayal aaya ki jab meri bahan isi raaste se collage jayegi to koi us per bhi comment kare ga, use bhi chedhege kuch badmaas.
Kya hum yahi chahte hi ki hamari vajah se ham khud apni bahno ko pareshaani me daal rahe hi. To soch kya rahe ho, khud ko sudhaaro to apne aap hi samaj sudharne lagega.
Apne vichaar rakhe.....
santosh 2013-03-25 10:08:39

आप ने सही लिखा है :D
vichar
ravi 2013-04-08 18:08:56

purush ho ya mahila sab ke apne -2 vichar hai...apne aap ko koi nahi dekhata ..ham kaise hai...dusro pe ungli sab uthate hai...apne ander ghaank ke to dekho..,,,aaj ladkiya har chetra me aage hai...to is chetra me kaise piche rah sakti hai..?
ek najar
vishnu sondhiya 2013-05-01 17:13:34

samaj me ho rahe ladhkiyo ke khilaf aprah me puri jimmedari hum jaise logo ki hai jo sirf apni bahan beti ko surksha dena janta hai dusre ki nhi karodhpati aadmi do banuk wale ke sath pariwar ko ghar se nikalta hai garib aadmi kya kare lisliye nayi pidhi ko apni andar ke shaitan ko maar kar jishse sirf jab tak wo nhi badlega samaj nhi badlega


sahi
vishnu sondhiya 2013-05-01 17:16:22

aapne bilkul thik kaha hai aise logo ko to jinda jamin me dafan kar dena chahiye
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