शिवदान सिंह ने दोहे पढ़ने से पहले अपने कवि बनने तक के सफ़र को व्‍यंगात्‍मक लहजे में बताया. कुछ गहरी समझ और कुछ नए नवेले श्रोताओं को ये काव्य पाठ अलग अलग स्तर पर प्रभावित करता रहा. मूल रूप से भीलवाड़ा जिले के कारोई के महाराजा होते हुए भी फुटपाथ की सी रचनाएँ करते हुए शिवदान सिंह ने जीवन की अनुभूतियों को बहुत गंभीरता के साथ अपने साहित्य कर्म में समेटा है. सतहत्‍तर सालों की उम्र पार कवि सिंह बेहद सरल और मृदुभाषी है. राजस्थानी के साथ-साथ वे मूर्तिकला और चित्रकारी में भी महारथ हासिल है.

उनकी प्रकाशित किताबों में 'कुण दूजो कोई न, जो सुगमाना जीवणा औरमैं मन हूँ' हैं. महाराज शिवदान सिंह को कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित भी किया जा चुका है. ख़ास तौर पर सोरठा दोहों की रचना करने वाले शिवदान ने जो दोहे पढ़े उनमें- ईश्वर, मन, मेहमान, राह, प्रकृति, ब्रमांड, जीवन, रोग, दवाई आदि विषय को समेटा. डॉ.व्यास और डॉ. ओम आनंद सरस्वती ने शिवदान के व्यक्तित्व पर कहा कि वो गाय द्वारा पांतरे दिए जाने वाले देशी घी की तरह हैं. मेवाड़ के इस गौरवशाली कवि को पहली बार चित्‍तौड़ में ढंग से सुना जा रहा था.

उनके दोहे बहुत क्लिष्ट नही होकर कई रूप में लोक जीवन से जुड़ाव वाले हैं. इस तरह की रचानाओं को समझने में लोक जीवन से जुड़ा आदमी सहज अनुभव करता है. सही मायाने में शिवदान का रचना कर्म और वे खुद अल्पज्ञात हैं. उनके दोहे में धारा प्रवाह और सम्प्रेषणियता विद्यमान है. सम्पूर्ण समूह ने ऐसी गोष्ठियों को सतत करने की ज़रूरत व्यक्त की गई. इस दौरान महाराज शिवदान सिंह का सम्‍मान भी किया गया.

गोष्ठी के दूसरे सत्र में नगर के आमंत्रित कवियों ने भी प्रतिनिधि रचनाएँ भी पढ़ी, जिससे माहौल पूरी तरह से सार्थक बन गया. काव्‍य पाठ करने वाले कवियों में शिव मृदुल, नन्द किशोर निर्झर, मनोज मक्‍खन, गीतकार रमेश शर्मा, अब्दुल जब्बार और श्रीमती व्यास शामिल हैं. गोष्ठी में डॉ.आर.के.दशोरा, रेणु व्यास, डॉ.कनक जैन, प्राचार्य एस.के.जैन, प्रो.एल.एस.चुण्डावत, डॉ.सीमा श्रीमाली, पत्रकार जे.पी.दशोरा, सरोकार संस्था संयोजक विकास अग्रवाल, प्राध्यापक गोविन्द राम शर्मा, चन्द्रकान्ता व्यास, सिंह शावक राणावत, शिव शंकर व्यास उपस्थित थे. अंत में आभार शिक्षाविद डॉ.ए.एल.जैन ने व्यक्त किया.

लेखक माणिक पत्रकार हैं और साहित्‍य में रूचि रखते हैं.

गाय से प्रेम, हूरों के सपने और सुसाइड बॉम्बर

Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

महाराष्ट्र की तरह उत्तर प्रदेश में भी पत्रकारों पर हमला गैर-जमानती हो : उपजा

लखनऊ। महाराष्ट की तरह उत्तर प्रदेश में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमला गैर जमानती अपराध हो। यह मांग उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के प्रान्तीय महामंत्री रमेश चन्द जैन और लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने कहा कि उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन व इसकी राष्ट्रीय इकाई नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स एनयूजे (आई) पिछले काफी समय से पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों पर हो रहे हमलों से...

सरकार के संरक्षण में युवा वाहिनी कर रही है ईसाइयों पर हमले!

उत्तर प्रदेश की पुलिस हिन्दू वाहिनी की लठैत बन गयी है.... दलितों पर हमले करने वाले सवर्णों को पता है कि मुख्यमंत्री उनके समर्थक हैं... लखनऊ : रिहाई मंच में महाराजगंज में हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं द्वारा धर्मान्तरण का आरोप लगाकर जबरन चर्च में प्रार्थना रोकने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हिन्दू युवा वाहिनी के लोग अल्पसंख्यक समुदाय के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे है जिसको बर्दाश्त नही किया जायेगा. मंच ने राजधानी लखनऊ में दलित परिवार के ऊपर हमले और आगरा,प्रतापगढ़ और फिरोजाबाद में पुलिसक...

नए रूप में महुआ प्लस, अब मिलेगा और ज़्यादा मनोरंजन

काफी कम समय में देश विदेश के भोजपुरिया दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने मे कामयाब रहा महुआ प्लस अब दर्शकों को एक नए कलेवर और नये रंग रूप में नज़र आएगा। महुआ प्लस पहले से ही अपने एक से बढ़कर एक बेहतरीन रिएलिटी शोज के लिए दर्शकों के बीच काफी प्रसिद्द है जिसके वजह से यह चैनल दर्शकों के बीच पहली पसंद के साथ हमेशा सुर्खियों मे रहा है। भौजी नं वन, सुरवीर जैसे रिएलिटी शोज, नए भोजपुरी फिल्म, हिंदी - भोजपुरी फ़िल्मी गाने , भक्ति भजन आरती जैसे उम्दा कार्यक्रम को दर्शकों ने हमेशा अपना प्यार दिया है।

तो 'आधार आधारित पेमेंट' सिस्टम के कारण उंगलीमार डाकुओं की होगी वापसी!

केंद्र की मोदी सरकार ने भीम एप शुरू कर दिया है| आधार पेमेंट का सिस्टम शुरू हो गया गया है| डिजिटल इंडिया का सपना जल्द ही साकार होगा| हमारा देश भी विकसित हो जाएगा| लेकिन इसी बीच एक और बात ख़ास होगी। वो ये कि अब चोरी और अपराध की वारदातों में कमी आएगी| साथ ही पुलिस को भी अब थोड़ी राहत मिलेगी| लेकिन शायद अब आफत गले पड़ने वाली है| क्यूंकि अब हर पेमेंट एक ऊँगली से हुआ करेगी। तो ऐसे में चोर या ऐसे आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग उँगलियाँ ही काटा करेंगे| फिर ऊँगली या अंगूठा ही उनकी तिजोरी की चाबी हुआ करेगी...

बालक भीम के बचपन के नायक कबीर थे

ज्ञान और कल्याण के प्रतीक बाबा साहब अंबेडकर... बाबा साहब अंबेडकर जैसे महापुरूष की जयंती मनाने से अपने आप में गर्वबोध महसूस होता है। अंबेडकर जयंती मनाने में हमें एकदम से डूबना नहीं है, बल्कि बाबा साहब द्वारा बताए गए मार्ग को अनुसरण करना है और उनकी विचारधारा को अनुसरण करने लिए आह्वान करना है। डॉ.अंबेडकर के आदर्शों को आत्मसात करने की जरूरत है। वर्तमान परिवेश में उनका जीवन, विचार और आदर्श अतिप्रासंगिक है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू छावनी कस्बे में 14 अप्रैल,1891 को भीमा बाई...

देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और कश्मीर की आग बेकाबू है

कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर नहीं लगता कि आग जल्दी बुझेगी। राजनीतिक नेतृत्व की नाकामियों के बीच, सेना के भरोसे बैठे देश से आखिर आप क्या उम्मीद पाल सकते हैं? भारत के साथ रहने की ‘कीमत’ कश्मीर घाटी के नेताओं को चाहिए और मिल भी रही है, पर क्या वे पत्थर उठाए हाथों पर नैतिक नियंत्रण रखते हैं यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय सुरक्षाबलों के बंदूक थामे हाथ सहमे से खड़े हैं और पत्थरबाज ज्यादा ताकतवर दिखने लगे हैं।

चचा शिवपाल ने तलाशा अलग रास्ता!

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केजरीवाल पर आरोप : सच की सभावनाएं

कविवर रहीम का कथन है - ''रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रकट करेइ। जाहि निकासौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ।।'' अर्थात् जिस प्रकार आँसू नयन से बाहर आते ही हृदय की व्यथा को व्यक्त कर देता है उसी प्रकार जिस व्यक्ति को घर से निकाला जाता है, वह घर के भेद बाहर उगल देता है। कुछ ऐसी ही आँसू जैसी स्थिति श्री कपिल मिश्रा की भी है जिन्होंने ‘आप’ के मंत्रिमंडल से बाहर होते ही दो करोड़ की मनोव्यथा जग जाहिर कर दी। रहीमदास के उपर्युक्त दोहे से इस प्रश्न का उत्तर भी मिल जाता है कि श्री कपिल मिश्रा ने दो करोड़ का रहस्...

सीखें, जानें, जुड़ें, जोड़ें और निडरता से खड़े हों लेखक

12 मार्च 2017 को इंदौर स्थित देवी अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय के अध्ययन कक्ष में प्रगतिशील लेखक संघ, इंदौर इकाई द्वारा एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रलेसं के प्रांतीय महासचिव, कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी ने हाल ही में मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल के साथ शहीद लेखकों डॉ नरेंद्र दाभोलकर, कॉ गोविन्द पानसरे और एम एम कलबुर्गी के गृह नगरों क्रमशः सतारा, कोल्हापुर और धारवाड़ की अपनी यात्रा के संस्मरण सुनाए। इस यात्रा का उद्देश्य लेखकों की शहादत के प्रति अपन...