मूल रूप से नईधान मण्डी, कोटा के रहने वाले संजय कुमार जैन चित्‍तौड़गढ़ के गांधीनगर में राजकीय विद्यालय में शिक्षक हैं. इन्‍हीं की बेटी है दिव्‍या। दिव्‍या जब अपने गाय वाली घटना के बाद अपने भावी कदम से अपने पिता को अवगत कराया तो वे अपनी पुत्री का हर संभव मदद करने के लिए तैयार हो गए. यही से इस पवित्र अभियान की शुरूआत हुई और दिव्या ने निश्चय किया कि वह घर-घर जाकर लोगों से सम्पर्क कर उन्हे पालिथीन के बजाय कपड़ों के थैलों का इस्‍तेमाल करने का अपील करेगी। पुरानी साड़ी से बने थैले वितरित करेगी। प्रारम्भ में दिव्या ने अपनी जेब खर्च से थैले सिलवाए तथा वितरित किये। बाद में इसने अपने पापा की मदद से इस अभियान के सिलसिले को आगे बढ़ाया, जो बिना किसी भी बाहरी आर्थिक सहायता लिए लागातार चल रहा है । दिव्या अब तक 15000 से अधिक थैले वितरित कर चुकी है। उसके कार्य को सब सराह रहे हैं। आकाशवाणी चित्‍तोड़गढ़ के साथ-साथ समस्त दैनिक समाचार पत्र एवं पत्रिकाए व न्यूज चैनलों ने भी अपने तरीके

से दिव्‍या के अभियान की सराहना की। दिव्‍या ना सिर्फ कपड़े के थैलों का वितरण कर रही है बल्कि पर्यावरण के लिए स्‍वयं पेड़ लगाने के साथ आम लोगों को भी पेड़ लगाने के लिए जागरूक कर रही है. दिव्या के अभियान को सराहा जा रहा है, साथ ही जनप्रतिनिधियों व शिक्षाविदों द्वारा उसके अभियान को सम्बल भी दिया जा रहा है। थैला वितरण के साथ दिव्या लोगों से पालिथीन का प्रयोग ना करने के लिए शपथ पत्र भी भरवा रही है। जिसमें तत्कालीन कलक्टर सुमित शर्मा एवं अन्य लोगों ने शपथ-पत्र भर कर उदाहरण प्रस्तुत किये तथा विद्यालय के हजारों बच्चो द्वारा सामूहिक शपथ ली गई। दिव्या कहती है, 'उसके लिए यह एक मिशन है जिसमें वह सफलता प्राप्त करके रहेगी।'

दिव्या को कई संस्थाओं द्वारा प्रशस्ति पत्र व सम्मान देकर सराहा गया है । दिव्या के द्वारा किये गए प्रयासों को व्यापक प्रभाव पड़ा है। आज उसकी अपील, लिखे गए पत्र व संदेशों से राजस्थान के अधिकतर हिस्सों में पालिथीन मुक्ति अभियान प्रारम्भ हो चुका है। जनता के साथ, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों द्वारा जगह-जगह अभियान प्रारम्भ किया जा रहा है। अन्त में यह कहा जा सकता है कि इतनी छोटी उम्र में इस प्रकार का ऐतिहासिक कार्य करने वाली दिव्या को जितना सराहा जाए उतना कम है। इसका कार्य सम्पूर्ण धरती के पर्यावरण को बहुत बड़ा योगदान है। जिसे सदियों तक याद किया जाता रहेगा। दिव्या द्वारा राजस्थान के कई हिस्सों में स्वयं जाकर भी चेतना जगाई जा रही है, जो उसके साहस को प्रदर्शित करती है।

नन्ही बालिका दिव्या के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि राज्य सरकार ने 1 अगस्त से पालिथीन की थैलियों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का निर्णय किया है। सरकार द्वारा पालिथीन पर रोक लगाने के बाद तुरन्त ही दिव्‍या ने मुख्यमंत्री, मृहमंत्री व अन्य कई लोगों को पत्र लिखकर धन्यवाद दिया। इस विषय पर सरकार ने दिव्‍या से सुझाव भी मांगा। जिस पर दिव्‍या ने उन्‍हें कई उपाय सुझाये। जिसमें-

1. पॉलिथीन के स्थान पर उपयोग में लिए जाने वाले कैरी बेग के लघु उद्योग के लिए बेरोजगारों को प्रोत्साहित कर सहायता दी जाए (कम से कम 6 माह तक)
2. पॉलिथीन पर रोक की सख्ती की जाय। इसका उपयोग करने वाले दुकानदार व ग्राहक दोनों पर जुर्माने का प्रावधान हो।
3. मात्र थैली पर ही नही वरन डिस्पोजल पर भी रोक लगे।
4. प्रत्येक कर्मचारी, अधिकारी, जनसेवक हाथ में कैरी बेग लेकर कार्यालय जाए और ऐसा करने में वे शर्म नहीं बल्कि गर्व का अनुभव करें । (इससे कम से कम 20 लाख थैलों का रोजाना प्रदर्शन होगा)
5. जेलों में बन्द कैदियों को भी कपड़े, जूट, कागज के थैले बनवाने में उपयोग लिया जाए, जिससे वे भी पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें एवं समय का सदुपयोग कर सके ।

इसके बाद दिव्या अब घर-घर सम्पर्क के साथ-साथ सार्वजनिक स्थान, धार्मिक समारोह, शिक्षण संस्थाओ आदि स्‍थानों पर जाकर मंच से सम्बोधन कर सबसे अपील कर रही है। दिव्‍या के कार्य करने की इस लगन से तो यही कहा जा सकता है कि - 'कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्‍थर तो तबीयत से उछालों यारों।' दिव्या अपने अभियान की सफलता और लोगों की जागरूकता के लिए महामहित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी, बाबा रामदेव, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, गृहमंत्री सहित तमाम स्‍वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अखबारों को लगभग 1100 से अधिक पत्र लिख चुकी है।

उसका कहना है कि यह सिलसिला लगातार चलता रहेगा। अब जब कि इस पर रोक लगाकर राजस्‍थान सरकार ने अपना कार्य कर दिया है। दिव्या का सपने को नई ऊंचाई मिली है तो अब हमारा दायित्‍व बनता है कि अब हम भी दिव्‍या के इस अभियान में शामिल होकर जन जन को प्रेरित करें। अब दिव्या वृक्षारोपण के अभियन में लगी हुई है । वह पौलिथीन के कार्य के साथ-साथ पूर्ण सुरक्षा की भावना के साथ वृक्षारोपण के लिए अपील कर रही है , क्यों कि बिना सुरक्षा की भावना के वृक्ष लगाना बैकार हे । साथ ही दिव्या जल बचाओं, वृक्ष लगाओं, पौलिथीन हटाओ के नारे के साथ अपनी व सामाजिक सरोकारों को निभा रहीं है।

लेखक मानिक चित्‍तौड़गढ़ के रहने वाले हैं तथा  स्‍वतंत्र लेखन करते हैं.

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