वाराणसी। एक ओर जहां लाखों लोग एटीएम और बैंकों की लाइनों में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में भाजपा के दिग्गज नेता ने अपने बेटी की शादी शाही अंदाज में की। बनारस शहर के सबसे महंगे कैंट क्षेत्र के एक लॉन में आयोजित इस शादी में करीब तीन हजार लोग शामिल हुए। शादी में मेले जैसा माहौल था। दूसरी ओर, बनारस में एक दूल्हे को शादी करने के लिए बैंक के सामने लाइन में लगना पड़ा। यह बात दीगर है कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी के चलते अधिसंख्य बारातें फीकी रहीं। कुछ गिने-चुने लोग ही बारातों में शामिल थे। अच्छी बात यह रही कि शहर में कहीं जाम की समस्या पैदा नहीं हुई।

माइनिंग किंग कहलाए जाने वाले कर्नाटक के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता जनार्दन रेड्डी की बेटी की शादी भी बुधवार को हुई। जिस तरह इस शादी के लेकर देश भर में चर्चा गरम रही, वहीं बनारस में भाजपा नेता की शादी में जुटी भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि कितने रुपये खर्च हुए होंगे। शहर के एक नामी कैटरर्स ने मेहमानों के भोजन की व्यवस्था की थी। साथ ही विशाल स्टेज भी सजा था। गीत-गवनई का भी प्रोग्राम था। खास बात यह है कि भाजपा के जिस नेता की बेटी की शादी थी वह न तो कोई बड़ा उद्यमी है और न ही कोई धन कुबेर। सिर्फ एक विद्यालय के भरोसे इस नेता ने अपनी बेटी की शाही शादी करके यह दिखा दिया कि उसकी शान-ओ-शौकत किसी से कम नहीं है। इस शादी में पूर्वांचल का शायद ही कोई भाजपा नेता रहा होगा, जो शामिल न हुआ हो। इसके चलते सड़क पर करीब एक किमी तक लक्जरी गाड़ियों का रेला लगा था। शादी में शामिल मेहमान शहर के कई नामी होटलों में ठहरे थे। अगर सिर्फ कैटरिंग पर आने वाला खर्च ही जोड़ा जाए तो कम से कम 20-25 लाख हुआ होगा। 

भाजपा के एक नेता ने मौके पर ही तंज कसते हुए कहा कि पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए यह अच्छा नहीं है। खासकर, ऐसे समय में जब कालेधन को लेकर उनकी सरकार ने नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर बड़ी संख्या में भाजपा के नेताओं ने इस शादी में शिरकत की। इस नेता को हाल के दिनों में काफी तवज्जो दी जा रही है। हालांकि भाजपा नेता ने अपनी बेटी की शादी में होने वाले खर्च के बारे में कहा है कि वह पाई-पाई का बिल-वाउचर जनता के सामने रखेंगे।

दूसरी ओर, शहर के बड़े-बड़े धनकुबेरों के बेटे-बेटियों की शादियों की बुधवार को हवा निकल गई। शायद ही कोई शादी रही होगी, जिसमें भीड़ नजर आई हो। शादी तो हर लॉन में हुई, लेकिन यह पहला मौका था जब शहर में वैवाहिक कार्यक्रमों के चलते कहीं जाम नहीं लगा। सभी लॉन वीरान नजर आए। एक दूल्हे को बैंक की लाइन में देख लोग हैरान रह गए। भीड़ ने दूल्हे को सहूलियत देते हुए आगे कर दिया, जिससे उसकी मुश्किलें थोड़ी आसान हो गईं। फिर भी उसे घंटे भर नई करेंसी के लिए चकरघिन्नी काटनी पड़ी। बरातों की शहनाई न जाने कहां गुम हो गई। डीजे तो कहीं नजर ही नहीं आए। नोटबंदी के चलते जिले में सैकड़ों लोग इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके बेटे अथवा बेटियों के हाथ कैसे पीले होंगे?