Home देश-प्रदेश सरकार नहीं वीसीपी का हुक्म चलता है बिहार की जेलों में

सरकार नहीं वीसीपी का हुक्म चलता है बिहार की जेलों में

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विनायक विजेता: सुशासन का हाल-1 : गोपालगंज जेल के डाक्टर भूदेव की हत्या के बाद सरकार की कुंभकर्णी नींद तो खुली है पर सरकार और कारा विभाग के आलाधिकारियों की नाक के नीचे ही जेल का जो खेल चल रहा है उस पर सरकार की नजर नहीं है। यह एक तल्ख और चौकाने वाली सच्चाई है कि बिहार की जेलों पर एक तरह से एक खास व्यक्ति का अघोषित साम्राज्य बीते बीस वर्षों से कायम है। इस शख्स का नाम है वीरचंद प्रसाद सिंह। लालू-राबड़ी सरकार में सरकार और कई नेताओं के काफी करीबी माने वाले व कई वर्षों तक बक्सर सेंट्रल जेल में उपाधीक्षक रहे वीसीपी सिंह को 1992 में प्रमोशन देकर उप-निदेशक जेल उद्योग बनाया गया। तब से लेकर अबतक वह इसी पद पर विराजमान हैं। कारा विभाग में विभागीय गुरु के नाम से जाना जाने वाले वीसीपी सिंह के बारे में यह चर्चा है कि बिना उनकी सहमति के विभाग का पत्ता भी नहीं हिलता।

बिहार तो क्या देश के प्रशासनिक इतिहास में एक ही पद पर लगातार 20 वर्षों तक जमें रहने का शायद ही कोई दूसरा उदाहरण सामने आए। सूत्रों के अनुसार कारा विभाग मे एक जबरदस्त लॉबी काम करती है। यह लॉबी इतनी सशक्त है कि इसी लॉबी के इशारे पर जेल अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग होती रही है। अच्छे और कर्मठ अधिकारी जिसे यह लॉबी पसंद नहीं करती उन्हें एक तरह से डिमोशन पोस्टिंग की जाती है जबकि लॉबी वाले अधिकारियों की मनचाही पोस्टिंग होती है, चाहे वह दागी ही क्यों न हों। इसी लाबिंग का नतीजा है कि कई दागियों को प्रमोशन देकर जेलर बना दिया गया। डाक्टर भूदेव हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया गोपालगंज जेल के जेलर कृष्णा सिंह का नाम भी ऐसे ही दागियों में से है। कृष्णा सिंह जब वर्ष 2002-03 में हाजीपुर जेल में सहायक जेलर के पद पर तैनात थे तभी उनपर जेल से कई कुख्यात बंदियों को भगाने का आरोप लगा था। इस मामले में तब कृष्णा सिंह को जेल में भी बंद रहना पड़ा था। कोर्ट ने उनके प्रमोशन पर रोक लगा दी थी पर मुख्यालय की सशक्त लॉबिंग के कारण बाद में उन्हें सशर्त प्रमोशन देकर जेलर बना दिया गया।

सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि जिस दिन गोपालगंज जेल में डा0 भूदेव की हत्या हुई थी, कृष्णा सिंह ड्यूटी से अनुपस्थित थे। 27 मई को वह पटना में एक विभागीय बैठक में भाग लेने आए थे पर उसके बाद वह ड्यूटी पर नहीं गए। इसी तरह सिपाही से जेलर बनाए गए रामाधार सिंह भी दागी है। वर्तमान में दरभंगा जेल में तैनात रामाधार सिंह पर जेल में रहते हुए जेल में बंद पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को मोबाइल पहुंचाने में मदद का आरोप लगा था। गोपालगंज जेल मे चिकित्सक की हत्या के बाद विवाद तो काफी मच रहा है पर सरकार, कारा विभाग और पुलिस विभाग का ध्यान बीते 4 मई को बक्सर केन्द्रीय कारा के लिपिक हैदर इमाम वारसी की हत्या मामले की ओर नहीं गया है। हैदर की हत्या ड्यूटी ऑवर में ही बक्सर के चरित्रवन बाइपास पर उस समय कर दी गई थी, जब वह जेल के काम से ही ट्रेजरी जा रहे थे। हैदर जेल फैक्ट्री में लिपिक थे और लेखा-जोखा रखते थे।

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार हैदर ने फैक्ट्री में काफी अनियमितताएं और घोटाले पाए थे। आशंका है कि इन्हीं घोटाले को दबाने के लिए हैदर की भाड़े के हत्यारों से हत्या करा दी गई। पर आश्चर्यजनक और खेद वाली बात तो यह है कि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले हैदर की हत्या पर सरकार और पुलिस दोनों चुप्पी साधे है। जानकार सूत्र बताते हैं कि अगर हैदर मामले की गंभीरता और गहराई से जांच हो तो जेल में हो रहे घोटालों के कई राज खुलेंगे। बहरहाल पूरे बिहार की जेलों की स्थिति जब दयनीय हो तो बुरे की कल्पना लाजिमी ही है। जेल अधिकारियों का भी टोटा झेल रहे बिहार की जेलों में वर्तमान में जेल अधीक्षक के 28 पद खाली हैं वहीं सहायक जेलर के 211 सृजित पदों में से मात्र 46 पद पर ही जेलर कार्यरत हैं।

लेखक पटना से प्रकाशित दैनिक 'सन्मार्ग'  में बतौर विशेष संवाददाता कार्यरत हैं.

Comments
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Anonymous 2011-06-03 21:45:21

गजब का जुगाड़ू आदमी है...
reporter
mukesh 2011-06-28 15:44:01

:D reporter sahab ap ko koi aur kahani nahi dikhti kiya bihar ke vasi hokar bihra ke bare mai likhte ho pakistani ho kiya ya tumare bahan ko udha liya bihar wale no achi kahani likho jo kam tumara hai wah karo jo sarkar ka use dear sh.nitish kumar ko karne do
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