: बाड़मेर के डाक्‍टरों ने किया कमाल :  खबर बुरी हैं लेकिन चौकाने वाली। बाड़मेर कलक्टर गौरव गोयल 24 अप्रैल से बीमार चल रहे हैं,  वे 28 अप्रैल को स्वस्थ होकर कलक्टरी करने पहुंचेंगे। बाड़मेर के डॉक्टर ने कलक्टर को बकायदा 'बेड रेस्ट'  की सलाह दी हैं। इसी तरह बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन भी वायरल बुखार से पीडि़त हैं। इसी तरह 'भगवान'  माने जाने वाले एक डॉक्टर ने तो ऐसा करिश्मा कर दिखाया हैं कि वर्षों पहले स्वर्गलोक पहुंच चुके दो जनों को तो बीमार घोषित करते हुए जीवित कर दिखाया। उक्त खबरें कोई 'अप्रैल फुल'  के मध्य नजर मूर्ख बनाने वाली नही हैं बल्कि दस्तावेजी हकीकत और प्रमाणों से जुड़ी तथ्यात्मक खबरें हैं। इन दस्तावेजों को जारी किया हैं बाड़मेर के राजकीय अस्पताल के डिग्रीधारी चिकित्सा अधिकारियों ने।

शेषजीभ्रष्टाचार की चर्चाओं से घिरे देश में विकीलीक्स के संपादक जूलियन असांज ने एक और आयाम जोड़ दिया है. फरमाते हैं कि स्विस बैंकों में जमा काले धन के खातेदारों में बहुत सारे नाम भारतीयों के हैं. इस देश का मध्य वर्ग लगातार भ्रष्टाचार की कहानियां सुन रहा है. टूजी, कामनवेल्थ और येदुरप्पा के घोटालों के माहौल में जब अन्ना हजारे का आन्दोलन आया तो वे सारे लोग मैंदान में आ गए जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. ज़ाहिर है यह किसी भी सत्ताधारी पार्टी के लिए बहुत बड़ी खतरे की घंटी है.  भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सारे मामले में जो सबसे दिलचस्प बात रही, वह यह कि राजनीतिक पार्टियों के सदस्य अपने हिसाब से भ्रष्टाचार की व्याख्या करते रहे, अपने विरोधी को ज्यादा भ्रष्ट बताते रहे लेकिन अखबार पढ़ने वाले देश के उस जागरूक वर्ग ने नेताओं की  बातों को गंभीरता से नहीं लिया.

नूतन ठाकुर: वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अशोक पांडे ने सोनिया के नाम को लेकर रिट दायर किया : लखनऊ के एक वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक पांडे ने एक बिलकुल अलग किस्म के मुद्दे पर रिट याचिका दायर किया है. इसमें उन्होंने सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो को प्रतिवादी बनाया है. इस रिट में पांडे का कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए अपने नाम से अलग नाम का इस्तेमाल कर रही हैं. इसमें उन्होंने उनके अलावा भारत के चुनाव आयोग तथा कैबिनेट सचिव को प्रतिवादी बनाया है. उनका कहना है कि सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो, पत्नी स्वर्गीय राजीव गाँधी, तत्समय निवासी एक, सफदरजंग रोड, नयी दिल्ली ने गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग में नागरिकता अधिनियम की धारा पांच में इसी नाम से अपना पंजीकरण कराया और भारत की नागरिकता प्राप्त की, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर सोनिया गाँधी कर लिया और इस बारे में गृह मंत्रालय के सम्बंधित विभाग से नागरिकता अधिनियम के अनुसार अनुमति नहीं ली. इस प्रकार पांडे के अनुसार सोनिया गाँधी उर्फ अंटोनिया मैनो का नाम बदलना अवैध है.

भास्‍करनजमा परवीन नहीं रही। 21 साल की इस लड़की जला जिस्म भले ही छित्तनपुरा के फखरूद्दीन बाबा क्रबिस्तान में मिट्टी के ढेर के नीचे बेजान दबा पड़ा हो लेकिन उसकी रूह तो इंसाफ चाह रही होगी। यकीन मानिए बीते शुक्रवार तक नजमा हमारी ही दुनियां का हिस्सा बनी हुई थी अपने तमाम सपनों और हसरतों के साथ। लेकिन शनिवार की सुबह तक वो इस दुनियां को अलविदा कह चुकी थी। वो घर जिसमें से उसे डोली में विदा होना था उसकी अर्थी निकली। घर जैसी महफूज जगह नजमा के लिए जन्न्त नहीं जहन्नम साबित हुई उसे मौत देने वाले कोई गैर नहीं थे उसके घरवाले ही थे। सूत्रों का कहना है कि उसके घरवालों ने उसे जलाकर मार डाला।

रिजवानजिस प्रदेश में गरीब के पेट से घास निकले, बच्चे रोटी और कपड़े के मुफ्त वितरण में यूं झपट पड़े कि अकाल काल के ग्रास बन जाएं, उस प्रदेश के किस नेता को हम धन्यवाद दें और किस देवी-देवता को हम अपना नैवैद्य अर्पित करें, किस मजार पर जायें हम चादर चढ़ाने? जहां भुखमरी, कंगाली और बदहाली बच्चों से उनका हंसता खेलता बचपन छीन ले और बूढ़ों को फुटपाथ पर मरने के लिए छोड़ दे, हाड़तोड़ मेहनत के बावजूद किसान भूखे सोएं, गुण्डे-माफिया सरेआम अबला की अस्मत लूटें और कालर चौड़ा कर खुलेआम घूमें।  प्रदेश्‍ावासी ऐसे तमाम समाचारों से आये दिन रुबरु हो रहे हैं कि कुशासन के चलते कहीं इंजीनियर आत्महत्या कर रहा है, तो कहीं मुआवजे की मांग पर किसान को बदले में मौत मिल रही है, कोई आर्थिक तंगहाली के चलते असमय मौत को गले लगा रहा है, तो कहीं पूड़ी के लालच में बच्चों की असामयिक मृत्यु हो रही है।

बिहार का सहरसा जिला पिछले तीन-चार दिनों से छावनी में तब्‍दील हो गया है. बिजली के लिए चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप ले लिया है. आंदोलनकारी अब हिंसा पर उतारू हो गए हैं. कई जगह सरकारी सामानों को क्षति पहुंचाई गई. आंदोलनकारियों ने कई चीजों को आग लगा दी. सहरसा में बिजली को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है.  आन्दोलनकारियों का कहना है कि पहले सहरसा में छह माह से 2 से 4 घंटा रहती थी,  लेकिन कई दिनों से 1 से 2 घंटा ही रह पाती है, वो भी आधा-आधा घंटा. जिससे आम जनता और व्यापारियों को काफी परेशानी हो रही है. इनका कहना है कि इन लोगों कई दिनों तक यहां वहां तमाम लोगों से इस समस्‍या के बारे में बताया परन्‍तु न तो नेता और न ही अधिकारियों ने इस तरफ ध्‍यान दिया, जिसे लोगों में काफी आक्रोश था.

देश और दुनिया में योग से निरोग रहने का गुर सिखाते सेलिब्रिटी बन चुके बाबा रामदेव हफ्ते भर से छत्तीसगढ़ के दौरे पर थे। अलग-अलग शहरों में उनके योग शिविर आयोजित हुए, इसके अलावा प्रेस कांफ्रेंस के जरिए उन्होंने अपनी बात आम जन तक पहुंचाई। इस दौरान कई बार उन्हें असुविधाजनक सवालों का भी सामना करना पड़ा। मसलन, जांजगीर में हुए कार्यक्रम में बैनर पर वीडियोकॉन नजर आया। दरअसल यह कंपनी इस क्षेत्र में अपने एक पावर प्लांट की वजह से विवादों में आ गई है। ऐसे में बाबा को जांजगीर में तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह नवागढ़ और बेमेतरा होते हुए दुर्ग-भिलाई पहुंचे। बाबा रामदेव का योग शिविर भिलाई के सिविक सेंटर स्थित विशाल मैदान में 31 जनवरी 2011 की सुबह 5 बजे से था। बाबा खुद पौने पांच बजे मंच पर पहुंच गए थे और उनके पहले हजारों की तादाद में लोग उनसे योग सीखने की लालसा लिए वहां मौजूद थे।

हरिवंश भारत में राजनीति या राजनीतिज्ञ, चैन से रहते हैं. कारण वे मानते हैं कि लोग, समाज या मतदाता भुलक्कड़ हैं. आज तूफ़ान उठा, कल सब शांत. इसलिए भ्रष्टाचार पर अण्णा का आंदोलन हो या कहीं किसी सवाल पर लोग बेचैन हों, राजनीतिज्ञों (खासतौर से सत्तारूढ़ पक्ष) की कोशिश होती है कि मामला सलटा लिया जाये. हां, अगर किसी पक्ष या दल को लगता है कि उसे ऐसे आंदोलन से गद्दी मिलने वाली है, तो वह चुप नहीं बैठता. पर जिन सवालों से राजनीतिक बिरादरी पर खतरा लगता है, उसे बुझाने में सब जुटते हैं. जो सवाल राष्ट्रहित में निर्णायक होते हैं, पर जिनसे तात्कालिक लाभ नहीं मिलनेवाला, उन पर भी सब मौन रहते हैं.

गोलघरराज्य सरकार राजधानी के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। पटना में जहां देखिये पार्कों का निर्माण हो रहा है लेकिन दूसरी ओर पटना की पहचान बन चुका गोलघर फिलहाल अपनी पहचान बचाये रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। राजद सरकार के कालखंड में चमचमाते गोलघर पर वर्तमान सरकारी उपेक्षा के कारण अस्तिव का संकट मंडराने लगा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण गोलघर की दीवारों पर बनी दरारें हैं। दरारें इतनी स्पष्ट हैं कि एक बार देख लेने पर शायद ही कोई व्यक्ति इस पर चढ़ कर गंगा का नैनसुख प्राप्त करने की नादानी करेगा। इसके अलावे गोलघर के दक्षिणी द्वार के मुहाने पर लगी ईटें खिसकने लगी है।

अरविंद त्रिपाठीगणेश शंकर विद्यार्थी की कर्मभूमि रहे कानपुर में भ्रष्टाचार के विरुद्ध आमरण अनशन पर बैठे अन्ना हजारे के समर्थन में पत्रकारों का धरना आयोजित हुआ. इस धरने को "चौथा कोना" ने आयोजित किया था. ये कोई संस्था नहीं है बल्कि कानपुर के प्रमुख साप्ताहिक समाचार पत्र 'हेलो कानपुर' का एक स्थायी स्तम्भ है. नवीन मार्केट के शिक्षक पार्क के इस धरने में कानपुर के सभी अखबारों और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के पत्रकारों और छायाकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. धरने का नेतृत्व शहर के जाने-माने कवि एवं पत्रकार प्रमोद तिवारी जी ने किया.

गिरीशजीआज 26 जनवरी है. हमारा 61वां गणतंत्र दिवस. लेकिन यह बात हमें ही नहीं, बहुतों को सालती होगी कि 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्‍ट्रीय दिवसों को होली-दिवाली-ईद की तरह क्यों नहीं मनाया जाता? इन राष्‍ट्रीय दिवसों को लोग उन त्यौहारों की तरह क्यों नहीं मनाते, जिनसे पूरा समाज और उसकी इकाई यानी कि हर व्यक्ति जुडता सा प्रतीत होता है? महीने भर पहले से जो उत्साह आम जनता के स्तर पर सामाजिक और सामुदायिक त्यौहारों के प्रति दिखता है वो पहल, लगाव, अपनत्व और जिजीविषा इन राष्‍ट्रीय दिवसों के प्रति क्यों नहीं? ऐसा क्यों है कि ये राष्‍ट्रीय दिवस 365 दिनों में बस एक दिन आकर चले जाते हैं? हम इनके साथ सामाजिक स्तर पर वैसा तादात्म्य क्यों नहीं स्थापित कर पाते, जैसा कि महाराष्‍ट्र में गणेशोत्सव, बिहार-उत्तर प्रदेश में सूर्य पूजा या छठ, मकर संक्रांति, पंजाब में लोहडी और दक्षिण में पोंगल के साथ रिश्तों की आम लेकिन सघन बुनावट देखने को मिलती है?

पिछले छह वर्षों से सूखे और तंगहाली से त्रस्त रहा बुंदेलखण्ड का गौरहरी गांव के लोगों के सामने अब एक और नया संकट खड़ा हो गया है। संकट है उनकी जिंदगी का, जिसे दैवीय आपदा ने नहीं बल्कि पहाड़ के माफियों ने इस स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। बुंदेलखण्ड का चित्रकूट हो अथवा बांदा हमीरपुर हो या महोबा। सभी जगहों पर पिछले छह वर्षों से गरीबी और भूख से तड़प रहे किसानों की इस वर्ष भगवान ने सुन ली। इस वर्ष देश के अन्य हिस्सों के साथ साथ बुंदेलखण्ड में भी अच्छी बारिश हुई, लिहाजा फसल की पैदावार भी अच्छी होने के आसार हैं। लेकिन पहाड़ माफिया बुंदेलखण्ड की खनिज सम्पदा का दोहन करते हुए अपनी अमीरी बढ़ाने में लगे हुए हैं। माफियाओं की मनमानी तो देखिए एक आबाद गांव के नीचे खोद डाली है लंबी सुरंग।

शेषजीकेंद्र सरकार ने महंगाई की एक और खेप आम आदमी के सिर पर लाद दिया है. आलू प्याज सहित खाने की हर चीज़ की महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए पेट्रोल की बढ़ी कीमतें बहुत भारी हमला हैं. हालांकि फौरी तौर पर गरीब आदमी सोच सकता है कि बढ़ी हुई कीमतों से उनका क्या लेना-देना लेकिन सही बात यह है कि यह मंहगाई निश्चित रूप से कमरतोड़ है. 1969 में जब इंदिरा गाँधी ने डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों में मामूली वृद्धि की थी तो साप्ताहिक ब्लिट्ज के महान संपादक, रूसी करंजिया ने अपने अखबार की हेडिंग लगाई थी कि पेट्रोल के महंगा होने से आम आदमी सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, सबसे बड़ी चपत उसी को लगेगी. उन दिनों लोगों की समझ में नहीं आता था कि पेट्रोल की कीमत बढ़ने से  आम आदमी कैसे प्रभावित होगा. करंजिया ने अगले अंक में ही बाकायदा समझाया था कि किस तरह से पेट्रोल की कीमत बढ़ने से आम आदमी प्रभावित होता है.

“आज़मगढ़ के निर्दोष मुस्लिम नौजवान ही नहीं सरकारी मशीनरी के निशाने पर छत्तीसगढ़ के ग़रीब आदिवासी भी हैं। वहां पर 650 गांवों जलाकर आदिवासियों को बेघर कर दिया गया। सैकड़ों की संख्या में लोग लापता हैं। मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएं कहां हैं? नए हिन्दुस्तान की लड़ाई छत्तीसगढ़ के आदिवासियों और संजरपूर के निर्दोष नौजवानों को मिलकर लड़नी है।” ये बातें वरिष्ठ मानवाधिकार नेता हिमांशु कुमार ने संजरपूर में आयोजित विशाल राष्ट्रीय मानवाधिकार जनसम्मेलन में कही। दिल्ली से आई मानवाधिकार नेता शबनम हाशमी ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद में विस्फोट करने वाले असीमानंद और सुनील जोशी का योगी आदित्यनाथ के साथ गहरा संबंध उजागर हुआ है, बावजूद इसके आजतक योगी को गिरफ्तार करना तो दूर पूछताछ तक भी नहीं की गई।

देहरादूनविदेश शक्तियां भारत को कमजोर करने की साजिश रच रही हैं। ऐसी शक्तियों की साजिशें कहीं आतंकवाद कहीं नक्सलवाद और कहीं माओवाद के रूप में सामने आ रही हैं। ऐसी शक्तियों में चीन प्रमुख है। चीनी ड्रैगन आज हमारे देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है। चीन हमारी सीमाओं पर बसे जनजातीय और आदिवासी समाज में घुसपैठ कर उनकों देश के खिलाफ बरगला रहा है और उन्हें भारत के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। ये कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश राव उपाख्य भैयाजी जोशी का। श्री जोशी शनिवार को राजधानी देहरादून के झांझरा स्थित बनवासी कल्याण आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजाति सम्मेलन एवं युवा महोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

 

राजेंद्र हाड़ा : अजमेर से खदेड़ा गया : तिरंगे का किया अपमान : प्रदर्शन पर बोला - यह तो गुंडागर्दी है : जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नेता यासीन मलिक अजमेर में भी अपनी अलगाववादी हरकतें करने से नहीं चूका। उसने भेंट स्वरूप दिए जा रहे तिरंगे झंडे को यह कहते हुए लेने से इनकार कर दिया कि यह उसके देश का झंडा नहीं है। इस्लाम में पवित्र माना जाने वाला जुम्मा यानी शुक्रवार का दिन इस अलगाववादी नेता के लिए काफी बुरा साबित हुआ। उसे अहसास हो गया कि एक शांत शहर भी उसकी मौजूदगी से कैसे उबल सकता है और उसे वहां से खदेड़े जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है। बुधवार 9 फरवरी को अपनी पत्नी मुशाला के साथ अजमेर पहुंचे यासीन मलिक पर शनिवार की सुबह जूते, चप्पल बरसाए गए। जिस होटल में ठहरा था वहां प्रदर्शन हुआ। माहौल इतने उबाल पर पहुंचा कि अजमेर पुलिस ने सोलह घंटे पहले शुक्रवार की रात 12 बजकर दस मिनट पर उसे निजी कार में बैठाकर भारी पुलिस लवाजमे के बीच अजमेर से चलता कर दिया।