अजय कुमार, लखनऊ
समाजवादी पार्टी का पारिवारिक विवाद क्या थमा, बसपा सुप्रीमों मायवाती की दिल की धड़कन बढ़ गई। सपा में कलह का फायदा उठाकर और बीजेपी का डर दिखा कर मुसलमानों को अपने पाले में खींचने का अभियान चलाये हुए मायावती को जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि सपा उसकी मुस्लिम वोट बैंक की सियासत में रंग में भंग डालने वाला है तो वह मुस्लिम वोटों के लिए अपनी रणनीति को और भी खूबसूरती के साथ अमलीजामा पहनाने में जुट गई है। मुसलमान वोटर सपा से दूरी बनाये रखें इसके लिये बसपा ने एक पुस्तिका तक प्रकाशित करा दी है। इस पुस्तिका के माध्यम से बसपा की तरफ से 2017 के लिए जो रणनीति तैयार की जा रही है उसमें मुसलमानों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि है कि वे जिस समाजवादी पार्टी को अब तक अपना सबसे बड़ा हितैषी समझकर वोट करते रहे हैं, दरअसल, वह उनकी सबसे बड़ी दुश्मन है? उसने मुसलमानों का बहुत नुकसान किया है। इसकी वजह से बीजेपी कितनी मजबूत हुई है, यह बताने के लिये बसपा ने ‘मुस्लिम समाज का सच्चा हितैषी कौन, फैसला आप खुद करें’ शीर्षक से यह पुस्तिका तैयार की है।

समय-समय पर राजनीति हमें एक से बढ़कर एक मुद्दा देती है चाहे वह नोटबंदी का हो, चाहे सर्जिकल स्टाइक का हो। और पत्रकार साथी भी आम लोगों के समान इन मुद्दों पर उलझकर रह जाते हैं। लेकिन मुख्य समस्या ये नहीं बेरोजगारी है। कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो आंखें खुली की खुली रह जाएगी।  दरअसल आगामी 10 वर्षों में देश की आधी से अधिक आबादी बूढ़ी हो जाएगी। यही समस्या अन्य देशों के साथ आने वाली है जिसमें चीन, जापान, डेनमार्क जैसी विकसित देश शामिल हैं। अब इसका असर यह होगा कि भविष्य में भारत के पास लगभग 35 प्रतिशत आबादी ही युवा होगी। जिसमें 10 प्रतिशत युवा विभिन्न वजहों से रोजगार नहीं करते। (हालांकि यह आंकड़ा वर्तमान में 50 प्रतिशत है अर्थात् 50 प्रतिशत युवा रोजगार से नहीं जुड़ पाते)।

-श्यामसिंह रावत-

विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका इन तीन स्तभों पर टिका देश का लोकतंत्र समाजवादी व्यवस्था के अंतर्गत सबके लिए समान अवसर, समान न्याय, समान दर्जा, स्वतंत्र मतदान, अभिव्यक्ति की आजादी आदि जैसे तमाम नैतिक आदर्शों की गारंटी तो देता है लेकिन क्या व्यवहार में ऐसा है भी?  विधायिका का हाल यहाँ तक आ पहुँचा है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत के 535 निर्वाचित सदस्यों में से 241 दागी निकले और संसद में पैसे लेकर सवाल पूछे जाने लगे। सरकारी खर्च पर इनके ठाट-बाट, वेतन-भत्तों और अन्य सुविधाओं में बेतहाशा वृद्धि और वहाँ पहले की अपेक्षा अधिक डिग्री वालों के होने के बावजूद चालू सत्र में बैठने वालों का टोटा और सदन में काम के घंटों में गिरावट साफ देखी जाती है। जनप्रतिनिधियों का काम जनसेवा नहीं बल्कि सरकारी धन की लूट और देश के संसाधनों पर डाका डालना भर रह गया है। ऐसी ही तमाम बातों से पता चलता है कि विधायिका के स्तर में गिरावट आई है।

वाराणसी। एक ओर जहां लाखों लोग एटीएम और बैंकों की लाइनों में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर में भाजपा के दिग्गज नेता ने अपने बेटी की शादी शाही अंदाज में की। बनारस शहर के सबसे महंगे कैंट क्षेत्र के एक लॉन में आयोजित इस शादी में करीब तीन हजार लोग शामिल हुए। शादी में मेले जैसा माहौल था। दूसरी ओर, बनारस में एक दूल्हे को शादी करने के लिए बैंक के सामने लाइन में लगना पड़ा। यह बात दीगर है कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी के चलते अधिसंख्य बारातें फीकी रहीं। कुछ गिने-चुने लोग ही बारातों में शामिल थे। अच्छी बात यह रही कि शहर में कहीं जाम की समस्या पैदा नहीं हुई।

नवादा : बिहार के नवादा जिला में एक दैनिक अखबार के एक वरिष्ठ पत्रकार ने अपने पुत्र के लापता होने को लेकर नगर थाना में आज शिकायत दर्ज करायी है. पुलिस उपाधीक्षक संजय कुमार पाण्डेय ने बताया कि एक दैनिक अखबार के नवादा के ब्यूरो प्रमुख साकेत बिहारी ने अपने 12 वर्षीय पुत्र श्याम साकेत के गत 24 घंटे से लापता होने को लेकर लिखित शिकायत की है. पिता साकेत बिहारी के अनुसार उनका पुत्र कल डेढ बजे दिन में घर से निकला था लेकिन अभी तक वह घर वापस नहीं लौटा है. साकेत ने बताया कि अपने पुत्र के बारे में खोज बीन वे सभी रिश्तेदारों के घर कर ली है और परिवार के लोग श्याम के साथ किसी अप्रिय घटना हो जाने को लेकर आशंकित हैं. पाण्डेय ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है.

संजय सक्सेना, लखनऊ

उत्तर प्रदेश की समाजवादी सियासत एक बार फिर करवट ले रही है। अब साढ़े चार मुख्यमंत्री वाली बात खत्म हो चुकी है। अखिलेश अपना ही ‘सिक्का’ चला रहे हैं। सही-गलत का निर्णय स्वयं लेने के साथ ही अखिलेश अपने आप को भावी सीएम और नेताजी मुलायम का उत्तराधिकारी भी घोषित कर चुके हैं, लेकिन बाप-चचा भी अपने अधिकारों और पार्टी पर वर्चस्व छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसके चलते एक समय तो पार्टी में बगावत की स्थिति बन गई थी। चचा-भतीजे के बीच नोंकझोंक से शुरू हुई लड़ाई मेें  दोंनो के बीच ‘तलवारें’ खिंचते देर नहीं लगी।  अखिलेश ने ‘पंख’ फैलाये तो शिवपाल खेमा उनके पंख काटने में जुट गया। पार्टी में हालात बदल गये और ऐसा लगने लगा कि समाजवादी पार्टी में नेताजी का अशीर्वाद पाये  सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव खेमे की ही चलेगी। ऐसा हुआ भी। पहले विधान सभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होने के बात कहकर और उसके पश्चात अखिलेश की मर्जी के बिना अंसारी बंधुओं की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय करके शिवपाल ने पहली बार अखिलेश को सीधी चुनौती दी थी। चचा-भतीजे की लड़ाई में  सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल के पक्ष में खड़े नजर आ रहे थे। चाहें अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये जाने का मामला हो या फिर उनके समर्थन करने वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का मसला। यहां तक की प्रोफेसर रामगोपाल यादव की सपा से विदाई भी इसी से जुड़ा मामला बन गया था।

देहरादून। तमिल और हिंदी फिल्मों में काम कर चुकी अभिनेत्री अलीशा खान इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई हैं। वह बीते दो दिनों से उत्तराखंड पुलिस के लिये सिर दर्द भी बनी हुई हैं। अलीशा इस बार अपनी फिल्म या अपने अभिनय को लेकर नहीं बल्कि अपने पति लव कपूर के कारण चर्चा में हैं। अलीशा फिलहाल हरिद्वार के थाना कनखल में अपने पति के खिलाफ शिकायत लेकर पहुंच गयी हैं। अभिनेत्री का आरोप है कि लव कपूर ने उसे इस्तेमाल करने के बाद उसे अपनी जिंदगी से कुछ इस तरह निकाल फेंका है जैसे दूध में से मक्खी।

करौली : बिहार में गत दिनों पत्रकार की हुई हत्या व आए दिन पत्रकारों पर हो रहे हमले की घटनाओं के मामलों में विरोध जताते हुए सोमवार को राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला करौली की ओर से प्रधानमंत्री के नाम एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपकर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर विशेष कानून लागू किए जाने की मांग की गई है। श्रमजीवी पत्रकार संघ जिला अध्यक्ष अजय शर्मा के साथ संरक्षक जयप्रकाश पाठक, सुरेश शर्मा, जिला प्रवक्ता विशाल चतुर्वेदी, पुनीत भारद्वाज, मुरारी शर्मा, विजय पाण्डेय, चंद्रशेखर सहारिया, सौरभ गोयल, टीकम गुप्ता, धर्मेन्द्र चैधरी, मनीष बंसल, अशोक शौकी सहित कई पत्रकारों ने एसडीएम निवास पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम हिण्डौनसिटी एसडीएम मुकेश मीणा को एक ज्ञापन दिया।

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में सियासी भगदड़ मची हुई है। तमाम दलों के नेता सुरक्षित ‘ठिकानों’ की तलाश में सुबह-शाम अपनी निष्ठा और चोला बदल रहे हैं। बस एक ही चाहत है 2017 में वह या उनके परिवार अथवा चाहने वालों की विधान सभा में तादात ज्यादा से ज्यादा बढ़ जाये। एक दौर ऐसा भी था जब नेताओं की विचारधारा ही उसकी पूंजी हुआ करती थी,लेकिन आज के समय में अधिकांश नेताओं ने अपनी विचारधारा ‘खूंटी’ पर टांग दी है। सत्ता का सुख पाने के लिये अब नेतागण राजनैतिक बयार का रूख भांप कर पाला बदलते हैं। पहले समय में सफेदपोश चुनावी बेला में पाला बदलते थे, लेकिन जब से तमाम दलों में चुनाव से काफी पहले (साल-डेढ़ साल पूर्व) प्रत्याशी घोषित करने का चलन बढ़ा है तब से नेताओं के पाला बदलने की ‘गति’ में भी परिर्वतन हो गया है।

जस्टिस राजेंदर सच्चर ने आतंकवाद के नाम पर फसाये गए बेगुनाहों को रिहा कराने वाले रिहाई मंच के अध्यक्ष अधिवक्ता मोहम्मद शोऐब को लखनऊ में सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन गंगा प्रसाद मेमोरियल हॉल अमीनाबाद लखनऊमें हुआ। सम्मान समारोह में भाई वैध ,पन्नालाल सुराना, प्रेम सिंह ,गिरीश पांडेय ,अखेई अचुनी,सतीश अग्रवाल ,तारकेश्वर सिंह,माधवराम, रेणु गम्भीर, राजिंदर कौर,बर्षा गुप्ते ,संदीप पांडेय आदि ने माल्यार्पण कर सम्मानित किया।

हाथरस के चंदपा कोतवाली इलाके के गांव कुम्हरई के पास बदमाशों ने एक दंपति को जबरन रोक लिया और उनके साथ मारपीट कर जेवर व नकदी लूट कर ले गए। महिला ने बलात्कार का भी आरोप लगाया है पुलिस ने दो आरोपियो को पकड़ा है जिसकी महिला ने थाने में पिटाई कर दी। हाथरस के थाना हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव सुजान का फजर मोहम्मद पुत्र असगर अली अलीगढ अपनी बहन उसके पति गुड्डू खा और उनके बेटे के साथ गाँव वापस लौट रहा था। जब यह लोग गाँव कुम्हरई के पास पहुंचे तभी इनको बाइक सवार तीन बदमाशों ने रोक लिया।

अर्पण जैन 'अविचल'

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में देश के दूसरे बड़े राजनैतिक दल 'भारतीय जनता पार्टी' ने काला धन वापस लाने को चुनावी मुद्दा बनाया और सत्ता पर काबिज हुए नरेंद्र मोदी| भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग 400 लाख करोड़ रुपये के "काले धन" को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए योगगुरु बाबा रामदेव भी मैदान में थे, उन्होने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। चूँकि कालाधन का मुद्दा देश की जनता से जुड़ा मुद्दा होने के साथ-साथ देशवासियों के हितार्थ मुद्दा था इसलिए मोदी को इस बात का भरपूर समर्थन मिला था| विगत दो वर्षों से लगातार पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी जनता की इसी सवालों को झेल रहे है क़ि 'काला धन वापस कब आयेगा?'|

ठीक किया कुलाधिपति महोदय यानि राज्यपाल जी ने। किसी भी समारोह का आतिथ्य, एक शख्स की अन्तरात्मा या सम्मान से बढक़र नहीं हो सकता इसलिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में गवर्नर बलरामजी दास टण्डन नही पहुंचे। संत तुलसी सही कह गए कि तुलसी तहां ना जाइए, कंचन बरसे मेघ। भगवान शिव का तीसरा नेत्र तभी खुला था जब वे अपनी ससुराल में बिनबुलाए पहुंच गए थे। उसके बाद क्या हुआ था, बताने की जरूरत नहीं। इसी के समानांतर देखिए कि असीमित शक्तियों से घिरे होने के बावजूद टण्डन साहब ने अपनी शक्तियों के पिटारे को कभी नहीं खोला अन्यथा कुलपति प्रो. एस.के. पाण्डे दूसरे कार्यकाल का सुख नहीं भोग रहे होते!

Om Thanvi : बहस छिड़ी है कि सबूत हैं कि नहीं, सबूत दिखाए जाने चाहिए कि नहीं? ये बातें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हैं, इसलिए हम मान लें कि राष्ट्रहित में कुछ चीज़ें गोपनीय रहनी चाहिए। लेकिन यह भी सच है कि भारत एक लोकतन्त्र है। और लोकतंत्र में राजनैतिक नेतृत्व को न सिर्फ़ फ़ैसले करने का अधिकार है, बल्कि उठने वाले सवालों का जवाब देने की जवाबदेही भी उसकी है। सवाल उठाने का माहौल ख़त्म करने की चेष्टा, सवाल उठाने वालों को अपराधी, देशद्रोही आदि क़रार देने की प्रथा नाज़ी दौर में रही होगी - लोकतंत्र में वह नहीं चल सकती।

गुजरात में दलित आन्दोलन की शुरुआत ऊना में चार दलितों की गोहत्या के नाम पर की गयी निर्मम पिटाई के प्रतिरोध के तौर पर हुयी थी. इसका प्रारंभ दलितों द्वारा धरना, जुलुस और सुरेन्द्र नगर कलेक्ट्र के कार्यालय के बाहर मरी गाय फेंक कर हुआ था. इसी सम्बन्ध में 31 अगस्त को अहमदाबाद में एक महासम्मेलन किया गया था. इस सम्मलेन में जो मांगें रखी गयीं उन में मुख्य मांग तो ऊना काण्ड के दोषियों को दण्डित करने की थी. परन्तु इस के साथ ही जो अन्य मांगें रखी गयीं वे भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. इनमे सब से महत्वपूर्ण मांग है दलितों को भूमि वितरण. इस के साथ अन्य मांगें हैं प्रत्येक जिले में दलित उत्पीडन के मामलों के लिए विशेष अदालतों की स्थापना और 2012 में धनगढ़ में पुलिस फायरिंग में मारे गए तीन दलितों के मामले में दोषी पुलिस वालों को सजा. इसके साथ ही दलितों ने जो घोषणाएं की हैं वे भी बहुत क्रांतिकारी प्रकृति की हैं. इनमें एक बड़ी घोषणा है मरे जानवरों को न उठाना और चमड़ा न उतारना. दूसरी बड़ी घोषणा है हाथ से मल सफाई का काम न करना और गटर और सैप्टिक टैंक की मानव द्वारा सफाई का बहिष्कार. इन दोनों मुद्दों को लेकर दलितों ने इन कामों को न करने की शपथ भी ग्रहण की है.

भोपाल ! भारत के प्रधानमंत्री के समक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती पर अमेरिका निवेशक और पुस्तकों "रिच डेड पुअर डेड" सीरीज के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने अपने बेंगलुरू में वक्तव्य में कहा कि नरेंद्र मोदी एक तेज तर्रार प्रधानमंत्री हैं, लेकिन उन पर भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का विलक्षण काम है और उनकी नई पहल से कई लोग परेशान भी हो सकते हैं ! उन्होंने मीडिया को भी बताया कि यह बहुत कठिन काम है, कि मैं उनकी जगह कभी नहीं होना चाहूंगा ! जब रेगिस्तान में बदलाव आ सकता है तो हमारे यहां क्यों नहीं ?