प्रदीप अपने समय सीमा के भीतर ही पृथक तेलंगाना राज्य के लिये गठित श्री कृष्ण समिति ने गुरुवार की दोपहर बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी.चितम्बरम  को  अपनी रिपोर्ट सौंप दी. जिसमे कमेटी ने पृथक राज्य के लिये चार से पांच सुझाव दिए हैं. रिपोर्ट लेने के बाद गृह मंत्री ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा की सरकार रिपोर्ट के सन्दर्भ में पांच जनवरी को आन्ध्र प्रदेश की सभी 6 प्रमुख राजनितिक पार्टियों की बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे, उसके बाद 6 जनवरी की शाम तक इस रिपोर्ट को सार्वजानिक कर दिया जायेगा. आंध्र प्रदेश में अचानक तैनात किये गए सुरक्षा सैनिकों के जवाब में कहा कि यह केवल एहतियात के तौर पर ऐसा किया गया है. गृह मंत्री ने यह भी कहा कि मुझे आन्ध्र प्रदेश के लोगों पर पूरा विश्वास है कि वे शांति व्यवस्था बनाये रखेंगे. उधर, दूसरी तरफ रिपोर्ट सौपने के बाद विज्ञान भवन से बाहर आने के बाद कमेटी के अध्यक्ष अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति श्री कृष्ण ने कहा कि रिपोर्ट दो भागों में है, जिसे सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार के बाद तैयार किया गया है. अब सरकार के हाथ में है कि वह उसे किस तरह से लागू करती है.

राजेन्‍द्र जोशीउत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर राज्यवासियों ने केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर कर खुली जंग लड़ी, लम्बी लड़ाई लड़ी व कई शहादतों के बाद राज्य तो मिला लेकिन राज्यवासियों की लड़ाई अब भी जारी है। कभी रोजगार को लेकर तो कभी पलायन की समस्या को लेकर। जहां एक ओर सड़कों पर अपने हकों के लिए खुली जंग लड़ी गयी, वहीं अब राज्यवासी व प्रवासी उत्तराखण्डी एक बार फिर अपने हकों के लिए सड़कों के बजाय संचार माध्यमों के जरिये लड़ाई लड़ रहे हैं। यह लड़ाई न तो पलायन की समस्या को लेकर है और न ही रोजगार व राजधानी के मसले पर है। यह लड़ाई प्रदेश की तीन प्रमुख बोलियों गढ़वाली, कुंमाउंनी व जौनसारी को लेकर हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने अपनी बोलियों के प्रति भलमानुषता दिखाते हुए समूह ग की प्रवेश परीक्षा में शामिल किये जाने को लेकर एक शासनादेश जारी किया, लेकिन हमेशा की तरह यह मैदानी व पहाड़ीवाद की भेंट चढ़ गया।

बाबा स्वामी रामदेव ने भारत स्वाभिमान यात्रा के माध्यम से संघ परिवार के सभी एजंडों पर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं बाबा के संग आरएसएस के अनुशांगिक संगठन भी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे है। बाबा ने चुनाव में भी अपना राजनैतिक दल बनाकर कूदने की घोषणा कर दी है। जिससे संघ परिवार की दिक्कतें बढ़ती नजर आ रही है। संघ परिवार का झुकाव सदैव ही भाजपा के पक्ष में रहा है। संघ परिवार के राष्ट्रवाद के एजेंडे को बाबा रामदेव ने पूरी तरह से कब्जा लिया है। इतना ही नहीं इन एजेंडों को लेकर बाबा ने राजनीति के मैदान में भी जोर आजमाईश करने की घोषणा कर डाली है। उनके संग आरएसएस के सहयोगी माने जाने वाले संगठन स्वदेशी जागरण मंच व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता बढ़ चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। इन दिनों तो बाबा ने रामजन्म भूमि और विदेश से काला धन वापस लाने तथा साथ ही घरेलू रोजगार को पुनः स्थापित करने हेतु मल्टीनेशनल कंपनियों का भी विभिन्न मंचों से विरोध करना शुरू कर दिया है। जिससे संघ परिवार भीतर ही भीतर परेशानी महसूस करने लगा है। उसके बाद संघ बाबा के नेटवर्क को तोड़ने की जुगत लगा रहा है। इसलिए उत्‍तराखण्ड में आरएसएस की गतिविधियां लगातार बढ़ती दिख रही हैं।

भारत में बाल आरोपी, जो खतरनाक ना हो, को सार्वजनिक रूप से हड़कड़ी लगाने की मनाही है. परन्‍तु मध्‍य प्रेदश के सीहोर में इसका खुलेआम उल्‍लंघन किया गया. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 1991 में रविकांत पाटिल और महाराष्‍ट्र सरकार के मामले में निर्देश दिया था - “A Division Bench of the High Court of Bombay having exonerated the Superintendent of Police and other respondents, held that respondent 4 Shri Prakash Chavan, Inspector of Police, who is one of the appellants before us, has subjected the under trial prisoner to an unwarranted humiliation and indignity which cannot be done to any citizen of Indian and accordingly directed him to pay the compensation and he was also censured as mentioned above”.

चंदौली के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जिला मुख्यालय से लगभग ४५ किमी दूर घुरहूपुर की पहाड़ी पर एक पौराणिक गुफा मिला है. पहाड़ी के ऊपर स्थित गुफा के भीतर मौजूद गौतमबुद्ध की भित्ति चित्र इस स्थान पर किसी प्राचीन सभ्यता के होने के संकेत देती हैं, जिसकी खोज पुरातत्व विभाग कर रहा है. वैसे तो नक्सल क्षेत्र की पहाडियों में कई रहस्य अब भी दफ़न हैं,  मगर समय के साथ एक के बाद एक रहस्य परत दर परत खुलने लगे हैं. कुछ ऐसी ही कहानी घूरहू पुर की पहाड़ियों की है. लगभग तीन वर्ष पूर्व हिन्‍दुस्‍तान के वरिष्ठ पत्रकार सुशील त्रिपाठी की कवरेज के दौरान इस स्थान पर दुर्घटना में हुई मौत के बाद यह गुफा पुरातत्वविभाग के संरक्षण में दे दी गयी.  अब हर वर्ष श्रद्धालुओं का हुजूम यहाँ दर्शन पूजन के लिए उमड़ता है. इस पहाड़ी के ऊपर गुफाओं में मिले गौतम बुद्ध, पञ्चशील, कन्याए व जानवरों के भित्ति चित्र ने इस स्थान को पूरे विश्व में ख्याति दिला दी है. अब श्रीलंका, नीदरलैंड, चीन, नेपाल, भूटान आदि देशों के बौद्ध धर्मावलम्‍बी यहां भारी संख्‍या में पहुंच रहे हैं.