कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर नहीं लगता कि आग जल्दी बुझेगी। राजनीतिक नेतृत्व की नाकामियों के बीच, सेना के भरोसे बैठे देश से आखिर आप क्या उम्मीद पाल सकते हैं? भारत के साथ रहने की ‘कीमत’ कश्मीर घाटी के नेताओं को चाहिए और मिल भी रही है, पर क्या वे पत्थर उठाए हाथों पर नैतिक नियंत्रण रखते हैं यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय सुरक्षाबलों के बंदूक थामे हाथ सहमे से खड़े हैं और पत्थरबाज ज्यादा ताकतवर दिखने लगे हैं।

अजय कुमार, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार तेजी से फैसले ले रही है। उम्मीद है कि जल्द इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। बात आज तक की कि जाये तो फिलहाल  कानून व्व्यवस्था को छोड़कर अन्य फैसलों का अभी जमीन स्तर पर कोई खास असर नहीं दिखाई पड़ रहा है और यह उम्मीद भी नहीं की जा सकती है,इतनी जल्दी किसी सरकार के फैसले जमीन पर उतर सकते है, लेकिन जनता में योगी सरकार को लेकर विश्वास है। यह बड़ी वजह है। गलत काम करने वालों के हौसले पस्त पड़ रहे हैं। सरकारी धन की लूट पर शिकंजा कसा जा रहा है तो समाज में व्याप्त भेदभाव और भय के माहौल को कम करने के लिये भी योगी सरकार प्रयत्नशील है।

21 वीं सदी के शुरुआती वर्ष 2002 में विक्रम भट्ट निर्देशित हिन्दी फीचर फिल्म ‘राज’ के एक गीत, ‘यह शहर है अमन का, यहां की फिजा है निराली, यहां पर सब शांति-शांति है,यहां पर सब शांति-शांति है’ ने खूब शोहरत बटोरी थी। यह गीत आजकल उत्तर प्रदेश पर काफी फिट बैठ रहा है। यूपी में सत्ता परिवर्तन होते ही एक गजब तरह की खामोशी ने पूरे राज्य को अपने आगोश में ले लिया है। इसका कारण है योगी सरकार का अपराधियों पर कसता शिकंजा, जिसके कारण यूपी में योगी सरकार का इकबाल बुलंद है। पूरे प्रदेश में जिस तेजी के साथ माहौल बदल रहा है, उसने प्रदेश की अमन प्रिय जनता काफी सुकून महसूस कर रही है। शहर की सड़के और चौराहे इस बात के गवाह हैं। बात-बात पर मारपीट पर उतारू दबंग किस्म के लोग अब कहीं नहीं दिखाई देते हैं। बड़े-बड़े मॉल और पार्कों में अब शोहदे लफंगई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

कश्मीर के अलगाववादी संगठनों से प्रेरित और पाकिस्तानी कूटनीतिओं की अमानवीय षडयंत्रकारी मानसिकता से पोषित पत्थरबाजों के विरुद्ध आदिवासी युवाओं की आवाज राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। राष्ट्रीय आपदा के समय राष्ट्र की अस्मिता और गौरव की रक्षा के लिए ; अपने देशवासियों के लिए हम क्या कर सकते हैं ; प्रगति और विकास के इन सोपानों में हमारी रचनात्मक और रक्षात्मक भूमिका क्या हो सकती है, इसका उत्कृष्ट उदाहरण देकर आदिवासी जनसामान्य ने देश के उन बड़े कर्णधारों को आईना दिखाया है जो मानवाधिकारों के नाम पर कश्मीर की आतंकवादी और अलगाववादी शक्तियों के साथ खड़े हैं; उनके पक्ष में बयानवाजी करते हैं।

इंदौर: इन दिनों जिहालत के दिन इंदौर में कट रहे हैं। पर अपन भी पक्के पत्रकार हैं, कुत्ते घाई। जहां रहेंगे खबर सूंघना और खोदना न छोड़ेंगे। जिस अपार्टमेंट में रह रहा हूं वहां से आने जाने के कई रास्ते है। और उन्हीं रास्तों में हर दूसरे दिन कोई न कोई लड़का-लड़की गुजरते हैं। चंद दिनों में मुझे रेड लाईट एरिया के रहवासी वाली फिलिंग आने लगी है। शुरुआत कुछ ऐसी होती है कि पहले लड़का आयेगा क्योंकि फ़्लैट उसके दोस्त का है। फिर आयेगी लड़की... मुंह ढाँककर बिलकुल प्रोफेशन स्कॉट जैसे।

अजय कुमार, लखनऊ

उत्तर प्रदेश में 100 नंबर पर डायल करने पर पुलिस भले ही घटना स्थल पर पहुंचने में देरी कर दे, लेकिन राज्य के मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 100 दिनों के एक्शन प्लान में कहीं किसी तरह की कोताही की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। गत दिनों योगी ने जैसे ही 100 दिनों के एक्शन प्लान पर अंतिम मुहर लगाई पूरी सरकारी मशीनरी सक्रिय हो गई है। भूमाफिया से लेकर सरकारी योजनाओं में सेंधमारी करने वाले तक योगी के निशाने पर हैं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही पहले दिन से ही योगी आदित्यनाथ ने सख्ती से नियमों का पालन कराना शुरू कर दिया था। किसानों का कर्ज माफ हो चुका है। एंटी रोमियों स्क्वायड ने लड़कियों पर फब्तियां कसने और छेड़छाड़ करने वाले आवारा किस्म के लोंगो के हौसले काफी हद तक पस्त कर दिये हैं।

अरुणाचल के लोगों को चाइनीज़ बताकर अपमानित करने की बढ़ रही घटना पर घोर नाराजगी है यहाँ के लोगों में... 26 जनजातियां आपस में संवाद करने के लिए हिंदी भाषा का करती हैं प्रयोग... अरुणाचल के लोग जय हिन्द बोलकर करते हैं अभिवादन

ईटानगर : 'स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज' का सन्देश लेकर पहुचे स्वस्थ भारत यात्री दल का ईटानगर में नेशनल यूथ प्रोजेक्ट ने जोरदार तरीके से किया स्वागत. यात्री दल ने एनयूपी द्वारा चलाये जा रहे महिला उद्यमिता कार्यक्रम से जुडी महिलाओं से स्वास्थ्य चर्चा की. इस अवसर पर आशुतोष कुमार सिंह, प्रसून लतांत और एनयूपी के अध्यक्ष एच पी विश्वास ने अपनी बात रखी. अरुणाचल की महिलाओं की तारीफ करते हुए स्वस्थ भारत के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि यहाँ आकर मालूम चला कि यहाँ की महिलाएं कितनी सशक्त हैं...यहाँ पर बेटियां दहेज़ लेकर शादी करती हैं. बरात लेकर बेटियां शान से लड़के के घर जाती हैं. उनके जन्म होने पर खुशियाँ मनाई जाती हैं.

C/o- D 404 Hateem 1, Sonal Cinema Road, Juhapura, Ahmedabad, M-9328416230

Press Note

Minority coordination committee Gujarat is formed on 18 December 2016 on Minority rights day to advocate issues of minorities. We see that minority in Gujarat is more underprivileged than others.

We see that No any additional classroom between 2013-2016 is allotted in districts with substantial minority population,  under JNNURM Basic Service to the Urban Poor (BSUP) cities/towns having a substantial minority population No any project is sanctioned, Operationalization of anganwadi centres under Integrated Child Development Services (ICDS) in Blocks having a substantial minority population No any target is framed during 2012-2015, Infrastructure Development for Minority Institutions (IDMI) only 6 institutions got around 17.68 lacs, Number of minority beneficiaries assisted for setting up of Individual and Group micro-enterprises under DAY-NULM (erstwhile SJSRY) no data available, Multi-sectoral Development Programme (MsDP) during 2014-2017 no project approved no fund released.

देश की चौथे नम्बर की सबसे बढ़िया जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की रिसर्च की सीटों में भारी कटौती के बाद अब TISS (Tata Institute of Social Sciences) पर सरकार हमला कर रही है। इस संस्थान के 25 टीचर्स को यूजीसी द्वारा अनुदान कटौती के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। TISS के शिक्षकों और छात्रों द्वारा सरकार की कई नीतियों की आलोचना होती रही है। मुम्बई में कुछ महीने पहले आयोजित 'मुम्बई कलेक्टिव' कार्यक्रम के आयोजन में TISS के छात्रों और कुछ शिक्षकों का बड़ा हाथ था। JNU और रोहित वेमुल्ला की आत्महत्या पर हुए विरोध प्रदर्शन में यहाँ के छात्रों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। अब पर कतरने के लिए इस संस्थान के 4 केंद्रों- 1.सेंटर फॉर एक्सेलेंस ऑफ़ ह्यूमन राइट्स एजुकेशन, 2.स्कुल ऑफ़ लॉ, राइट्स एंड कांस्टीट्यूशनल गवर्नेंस, 3. एडवांस्ड सेंटर फॉर वुमन्स स्टडीज, और 4. सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ सोशल एक्सकलुशन एंड इंकलुसिव पॉलिसीज को निशाना बनाया गया है।

उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से चुनाव जीतने के बाद भातीय जनता पार्टी (भाजपा) को यह अहसास हुआ है कि इस चुनाव में उसे सबसे अधिक आरक्षित सीटें मिली हैं क्योंकि दलितों का एक बड़ा हिस्सा उसकी तरफ आ गया है. इस सफलता में उस द्वारा पिछले कुछ वर्षों से आंबेडकर के प्रति दिखाए गए प्रेम का भी काफी बड़ा हाथ है. दलितों को आकर्षित करने के लिए उसने दलित नेताओं को भाजपा में शामिल  करने के साथ साथ आंबेडकर को भी हथियाने के गंभीर प्रयास किये हैं. एक तरफ जहाँ उसने इंग्लॅण्ड में डॉ. आंबेडकर के पढ़ाई के दौरान रहने वाले मकान को खरीद कर स्मारक का रूप दिया है वहीँ दूसरी तरफ बम्बई में उनके रहने के  स्थान पर एक भव्य स्मारक बनाने हेतु भूमि का अधिग्रहण भी किया है. पिछले साल मोदीजी ने दिल्ली में बाबासाहेब के निवास स्थान पर एक भव्य स्मारक बनाने का शिलान्यास भी किया था. 

हाल में उत्तर प्रदेश के चुनाव ने दर्शाया है कि दलित राजनीति एक बार फिर बुरी तरह से विफल हुयी है. इस चुनाव में बहुमत से सरकार बनाने का दावा करने वाली दलितों की तथाकथित बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 403 में से केवल 19 सीटें ले कर तीसरे नंबर पर रही है. यद्यपि 2009 (लोक सभा) और 2012 (विधान सभा) चुनाव में इस पार्टी का अवसान बराबर दिखाई दे रहा था परन्तु 2014 के लोक सभा चुनाव में इसका पूरी तरह से सफाया हो गया था और इसे एक भी सीट नहीं मिली थी. इसी तरह 2007 के बाद बसपा के वोट प्रतिशत में भी लगातार गिरावट आयी है जो 2007 में 30% से गिर कर 2017 में 23% पर पहुँच गया है। यद्यपि बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ी चतुराई से इस विफलता  का मुख्य कारण ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी बता कर अपनी जुम्मेदारी पर पर्दा डालने की कोशिश की है परन्तु उसकी अवसरवादिता, भ्रष्टाचार, तानाशाही, दलित हितों की अनदेखी और जोड़तोड़ की राजनीति के हथकंडे  किसी से छिपे नहीं हैं. बसपा के पतन के लिए आज नहीं तो कल उसे अपने ऊपर जिम्मेदारी लेनी ही पड़ेगी.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने न जाने किस झोंक में कह दिया कि "सिंधिया परिवार" ने अंग्रेजों से मिल कर भिण्ड के लोगों पर बहुत ज़ुल्म किये... शायद वे भूल गए कि जिस पार्टी ने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया उसकी रक्त मज्जा में राजमाता विजया राजे सिंधिया का खून पसीना लगा है...और तो और उसी सिंधिया परिवार की वसुंधरा राजे राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं और खुद उनकी कैबीनेट में यशोधरा राजे मंत्री हैं...!

संत परंपरा का निर्वहन करते हुए राजनीति में आए योगी आदित्‍यनाथ पर यह आरोप सदैव से लगते रहे हैं कि वे हिन्‍दुत्‍व की राजनीति करते हैं, चुनावों में एक वर्ग विशेष, धर्म-संप्रदाय से जुड़े वोटों का ध्रुवीकरण करते हैं और जरूरत पड़े तो वे तीन तलाक, लव जिहाद, मदरसा, कब्रिस्‍तान जैसे धर्म आधारित विवादित बयान देने से पीछे नहीं रहते । उनके तमाम पुराने बयानों को एक बार में देखने पर यही लगता है कि वे अल्‍पसंख्‍यक समाज खासकर मुसलमानों के धुरविरोधी हैं। सीधेतौर पर इसका प्रभाव भी समुचे यूपी में योगी के विरोध में देखने को मिलता है तो वहीं प्रशंसकों की कोई कमी भी इसी कारण नहीं है कि वे सीधे-सीधे बोलते हैं। फिर उनके कितने भी विरोधी लोकतंत्र, सेक्‍युलरिज्म और कट्टरता की आड़ लेकर खड़े हों जाए लेकिन योगी अपनी कही बात से पीछे नहीं हटते हैं। अभी हाल ही में यूपी चुनावों के दौरान जब उन्‍होंने कुछ मीडिया संस्‍थानों को अपने साक्षात्‍कार दिए तो उनकी सही में मंशा क्‍या है और वे राष्‍ट्र, राजनीति एवं समाज को लेकर किस प्रकार से सोचते हैं, यह बात व्‍यापक स्‍तर पर उजागर हुई। जिसका निष्‍कर्ष यही है कि यूपी के वर्तमान मुख्‍यमंत्री आदित्‍यनाथ योगी राजनीति को सेवा का मध्‍यम मानते हैं और उत्‍तरप्रदेश को खुशहाल विकसित बनाने का वे स्‍वप्‍न देखते हैं।

देहरादून । प्रकाश पन्त माननीय वित्त, पेयजल, आबकारी, संसदीय कार्य, व विधाई मंत्री उत्तरारखण्ड सरकार द्वारा कल दिनांक 8 अप्रैल 2017 को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगीजी से लखनऊ स्थित उनके कार्यालय में शिष्टाचारपूर्ण भेंट की गई। सौहार्दपूर्ण वातावरण में मा0 मंत्री श्री पन्तजी द्वारा उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री जी के सामने उत्तराखण्ड से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई और उत्तराखण्ड की परिसम्पत्तियों को हस्तांतरित करने का अग्रहपूर्ण निवेदन किया गया।

योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति में अब तीसरे नंबर के सबसे ताकतवर नेता बन गए हैं। पहले नंबर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। उनके बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह। और अब योगी। उत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी को कट्टर हिंदुत्व एवं प्रखर राष्ट्रवाद का प्रतीक माना जाता हैं। मोदी व अमित शाह को और खासकर उनकी बीजेपी व संघ परिवार को ऐसे ही नेता की तलाश थी। गुजरात के सीएम के रूप में मोदी ने भी अपनी कुछ कुछ इसी तरह की छवि के जरिए खुद को और बीजेपी को अधिक मजबूत किया था। राजनीति में मोदी के एजेंडे क आगे बढ़ाने ते लिए इसी तरह के सीएम की जरूरत भी होती है। वैसे भी, यूपी वह प्रदेश हैं, जहां किसी राष्ट्रीय पार्टी के मजबूत सीएम होने का देश भर में इसलिए भी बहुत मजबूत संदेश जाता है, क्योंकि केंद्र में भी उन्हीं की सरकार है। राजनीति बदल रही है और दमदार नेता देश का दारोमदार संभालें, यह पहली दरकार है। क्योंकि अब आगे बदलाव का यह रास्ता सिर्फ विकास या फिर धर्म निरपेक्षता के लबादे को ओढ़कर तय नहीं किया जा सकता।   
जीवन भर मुसलमानों के खिलाफ आग उगलनेवाले योगी आदित्यनाथ मुखिया ने शपथ ले ली है और अब वे यूपी के मुखिया हैं।

वैसे तो आस्था इतिहास एवं कानून की जटिलताओं में दीर्घकाल से जकड़ी अयोघ्या नगरी के लिए 30 सितंबर 2010 का दिन स्वतंत्रता दिवस के समान साबित हो सकता था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना फैसला सुनाकर वह रोशनी दिखाने का प्रयास किया था, जो सम्पूर्ण राष्ट्र को अतीत के अन्धेरे से बाहर निकाल सकती थी। मालूम हो कि भारत के इतिहास में अयोध्या का यह मामला पिछले 500 - 600 वर्षो से धार्मिक विवादों में फंसा है एवं गत 67 वर्षो से न्यायालय में चल रहा है। देखा जाए तो यह समय अपने आप में राम के वनवास से भी काफी लम्बा है। साल 2010 से उच्चतम न्यायालय में लंबित पड़ा ये मामला एक बार फिर फ़रवरी 2016 में सुब्रमण्यम स्वामी के इस विवाद को लेकर काफी सक्रिय हो जाने के बाद  मीडिया की सुर्ख़ियों में आ गया था।