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मैं मर्द हूं, तुम औरत, मैं भूखा हूं, तुम भोजन!!

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मैं भेड़िया, गीदड़, कुत्ता जो भी कह लो, हूं. मुझे नोचना अच्छा लगता है. खसोटना अच्छा लगता है. मुझसे तुम्हारा मांसल शरीर बर्दाश्त नहीं होता. तुम्हारे उभरे हुए वक्ष.. देखकर मेरा खून रफ़्तार पकड़ लेता हूं. मैं कुत्ता हूं. तो क्या, अगर तुमने मुझे जनम दिया है. तो क्या, अगर तुम मुझे हर साल राखी बांधती हो. तो क्या, अगर तुम मेरी बेटी हो. तो क्या, अगर तुम मेरी बीबी हो. तुम चाहे जो भी हो मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता. मेरी क्या ग़लती है? घर में बहन की गदरायी जवानी देखता हूं, पर कुछ कर नहीं पाता. तो तुमपर अपनी हवस उतार लेता हूं. घोड़ा घास से दोस्ती करे, तो खायेगा क्या? मुझे तुम पर कोई रहम नहीं आता. कोई तरस नहीं आता. मैं भूखा हूं. या तो प्यार से लुट जाओ, या अपनी ताक़त से मैं लूट लूंगा.

वैसे भी तुम्हारी इतनी हिम्मत कहां कि मेरा प्रतिरोध कर सको. ना मेरे जैसी चौड़ी छाती है ना ही मुझ सी बलिष्ठ भुजायें. नाखून हैं तुम्हारे पास बड़े-बड़े, पर उससे तुम मेरा मुक़ाबला क्या खाक करोगे. उसमें तो तुम्हे नेल-पॉलिश लगाने से फ़ुरसत ही नहीं मिलती. कितने हज़ार सालों से हम मर्द तुम पर सवार होते आये हैं, क्या उखाड़ लिया तुमने हमारा? हर दिन हम तुम्हारी औक़ात बिस्तर पर बताते हैं. तुम चुपचाप लाश बनी अपनी औक़ात पर रोती या उसे ही अपनी किस्मत मान लेटी रहती हो. ताक़त तो दूर की बात है, तुममें तो हिम्मत भी नहीं है. हम तो शेर हैं. जंगल में हमे देख दूसरे जानवर कम से कम भागते तो हैं पर तुम तो हमेशा उपलब्ध हो. भागते भी नहीं. बस तैयार दिखते हो लुटने के लिये. कुछ एक जो भागते भी हो तो हमारे पंजों से नही बच पाते. पजों से बच भी गये तो सपनों से निकलकर कहां जाओगे.

पिछले साल तुम जैसी क़रीब बीस बाईस हज़ार औरतॊं का ब्लाउज़ नोचा हम मर्दों नें. तुम जैसे बीस बाईस हज़ार औरतों का अपहरण किया. अपहरण के बाद मुझे तो नहीं लगता हम कुत्तों, शेरों या गीदड़ों ने तुम्हे छोड़ा होगा. छोड़ना हमारे वश की बात नहीं. तुम्हारा मांस दूर से ही महकता है. कैसे छोड़ दूं. क़रीब अस्सी-पचासी ह़ज़ार तुम जैसी औरतों को घर में पीटा जाता है. हम पति, ससुर तो पीटते हैं ही, साथ में तुम्हारी जैसी एक और औरत को साथ मिला लिया है जिसे सास कहते हैं. और ध्यान रहे ये सरकारी रिपोर्ट है. तुम जैसी लाखों तो अपने तमीज़ और इज्ज़त का रोना रोते हो और एक रिपोर्ट तक फ़ाईल करवाने में तुम्हारी…. फट जाती है. तुम्हारे मां-बाप, भाई भी इज्ज़त की दुहाई देकर तुम्हे चुप करवाते हैं और कहते हैं सहो बेटी सहो. तुम्हारे लिये सही जुमला गढ़ा गया है, “नारी की सहनशक्ति बहुत ज़्यादा होती है.” तो फिर सहो.

मैं मर्द हूं और हज़ारों सालों से देखता आ रहा हूं कि तुम्हारी भीड़ सिर्फ़ एक ही काम के लिये इक्कठा हो सकती है. मंदिर पर सत्संग सुनने के लिये. तो क्या अगर तुम्हारा रामायण तुम्हे पतिव्रता होना सिखाता है. मर्दों के पीछे पीछे चलना सिखाता है. तो क्या, अगर तुम्हारी देवी सीता को अग्नि-परीक्षा देनी पड़ती है. तो क्या अगर तुम्हारी सीता को गर्भावस्था में जंगल छोड़ दिया जाता है. तो क्या अगर तुम्हारा कृष्ण नदी पर नहाती गोपियों के कपड़े चुराकर पेड़ पर छिपकर उनके नंगे बदन का मज़ा लेता है. तो क्या अगर तुम्हारी लक्ष्मी हमेशा विष्णु के चरणों में बैठी रहती है. तो क्या, अगर तुम्हारा ग्रंथ तुम्हारे मासिक-धर्म का रोना रो तुम्हे अपवित्र बता देता है. हम मर्द तुम्हें अक्सर ही रौंदते हैं. चाहे भगवान हो या इंसान, तुम हमेशा पिछलग्गू थे और रहोगे. तो क्या, अगर हरेक साल तुम तीन-चार लाख औरतों को हम तरह तरह से गाजर-मुली की तरह काटते रहते हैं. कभी बिस्तर पर, कभी सड़कों पर, कभी खेतों में. तुम्हारी भीड़ सत्संग के लिये ही जुटेगी पर हम मर्द के खिलाफ़ कभी नहीं जुट सकती.

राहुल कुमारतुम्हे शोषित किया जाता है क्युंकि तुम उसी लायक हो. मर्दों की पिछलग्गू हो. भले ही हमें जनमाती हो, पर तुम बलात्कार के लायक ही हो. तुम्हारी तमीज़ तुम्हारा सबसे बड़ा दुश्मन और हमारा हितैषी है. जब तक इस तमीज़ को अपने दुपट्टे में बांध कर रखोगे, तब तक तुम्हारे दुपट्टे हम नोचते रहेंगे. जब तक लाज को करेजे में बसा कर रखोगे तब तक तुम्हारी धज्जियां उड़ेंगी. मैं भूखा हूं, तुम भोजन हो. तुम्हे खाकर पेट नहीं भरता, प्यास और बढ़ जाती है.

लेखक राहुल कुमार बिहार के बेगुसराय ज़िले के निवासी हैं. पांच साल से दिल्ली में हैं और दो महीनों से पत्रकारिता के पेशे में.

Comments
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bakbas
sanjeev 2010-05-05 18:33:09

bakarchodi hai es tarah ki bate do mahine ka ptrakar hi likh sakata hai kyoki uski mansikata abhi yahi tak hai
afsos hai...
anju singh 2010-05-22 13:16:49

Namaskar rahul ji..
kamal ki hai.. aap ki maansikta .
hairani wali baat hai ki aap ek patrakar hune ke baad bhi is tarah ki baat karte hai..
mai to pure lekh mai intjar hi karti rahi ki ab aap ki baat sabit hogi..
par afsos ki aap apni baat kahne mai theek se sabit nahi hue.
rahul ji aap ne mahila ke saalon pahle ki halat to bata di par uska ilaj nahi bataya.. waisa aap ke lekh ka matlab samjh na pane ke karan aap ke soch par vichar karna pad sakta hai..?
aaj ki ladkiya
pari 2012-03-01 19:54:23

agar aap bhi ek ladki hai toh rahul ko ji se sambodhit na kare....
mr. rahul aap k liye ek baat batade hum
ki aaj ladkiya bhut aage jaa chuki hai or woh police mai bhi hai. jo ladka aisa karta hai unko hatkadhi bhi lagati hai
mera kahna
sharad mishra banda 2013-02-26 15:24:39

jis tarah ka kaam delhi me lakdi ke satt hua us tarah nahi hona chahiye

yesharad kahtanhai
Aam aadmi 2013-01-05 11:02:02

Kya insaiyat hai
journalist 2010-09-02 23:12:38

rahul ki lekhni bhatak gayi or jo khud bhatak jaye wo mahilaon ko rasta kya dikhlayega.
helo.........!
Goutam Mali 2010-10-13 14:37:49

rahul ne jo likha he usse aaj ki janresion ko svak lena chahiye khin na khin aesa ho rha he yhe me manya hun.
bat nari ke bare me kucha glat ward nhin likhna thaa.
post about rahul kumar
suman 2010-12-27 15:53:31

:angry: sharm aati hai yeh dekhkar ki media per adharit blog per manohar kahanio aur sasta ghriit upnayas ka ek hisha apne apni TRP barhane ke liey diya hai.apki najar me bhi ourat sirf sharir hai . apne ise kyo publish kiya hai.kya batan chahte hai. ap mardo ke man ki kuntha hi to hai yeh.isse koun si dunia dikhana chahte hai.
aj se apko apne ko media ka blog kahlana band kar den yedi thri bhi sharm bachi ho.bahut se manorigi dunia me hai .unki baate na to patrakarita ki seema me aati hai our na hi kanoon unka tab tak trail chalata hai. aise longo ke liey bahut se mansit asptal khule hue hai.unki jagah uahi hai.
Soch thik karo mere priya
Prakash Shukla 2011-01-27 13:12:28

kas bhai kya likhte ho, wah !tum likhna band kar do smaj ganda mat karo.
wah kya baat kahi hai yaar
vikas 2011-03-03 18:45:09

tumane to dil garden garden kar diya dost.
namskar rahul jee
puja 2011-12-15 13:44:13

lagta hai aap ko mard hone ka bada gurur hai.
apka adhur gyan hai
nitin pandya 2012-02-15 11:40:55

rahul ji
Mansikta badlo.
Itihas pado.
ourat hi ourat ki dushman
sudesh poswal 2012-07-01 19:14:23

ओरत ही ओरत की सबसे बड़ी दुश्मन है! नही तो आदमी की क्या मजाल की ओरत पर जुर्म कर जाए इसके लिए भी कहीं न कहीं ओरत ही जिम्मेदार होती है चाहे वह माँ , बहन , या दूसरी ओरत किसी भी रूप में क्यों न हो ! जब हम खुद ही एक दुसरे के दुश्मन बने रहेंगे तो परिवर्तन कैसे ला सकते है हमे अपनी सोच बदली होगी और ओरत के हक़ की लड़ाई मिलकर लडनी होगी !हमे अपने अधिकार समझने होंगे और समझाने भी होंगे हमारे आस- पास ऐसी कितनी महिलाएं है जिन्हें अपने कर्तव्य मालूम है पर अधिकार नही ऐसा क्यों?...यह जागरूकता हम सब को लानी है ! जागरूकता के साथ- साथ हमे अपनी संस्क्रति, अपनी मर्यादा , अपने सम्मान अपनी परम्पराओ को भी बचाना है जो देश हित और समाज के लिए जरूरी हैं ! ............सुदेश पोसवाल

Apni soch badaliye Mr.Rahul ji !
Madhu ojha 2012-12-22 09:58:50

Aap aisa kaise soch sakye hai?Aap bhul rahe hai ki aap jis aurat ke baare me aisi ulti sidhi baate kar rhe hai........aap ko janm bhi ek aurat ne hi diya hai......agar aurat n hoti to aapka koi astitva n hota aur aap itni bari bari baate n kar paate,aap ki maansikta bahut sankuchit hai...use bistrit kare anyatha jee nhi paayenge.......aap hi ke jaise agar har purush sochne lage to duniya tabaah ho jayega.........
meri samaj sharad
sharad mishra banda up 2013-02-26 20:31:24

Vartaman samay main aurat aur mard ke beech seema rekha kheechana nainsaphi hogi. Bhartiya samvidhan main dono ko saman darja mila hai.Balki yon kahen ki aurat ko adami se adhik adhikar prapt hai to atishayokti nahi hogi.Aj aurat kisi bhi mamale main admi se kam nahi hai.Naukari,dhandha,vyapar,khel aur Prashasan main unaki hissedari hai.21wee shatbdi main abla ab sabala banane ki oor badi tej gati se aage badh rahi hai.Aise samay main purushon ko apani soch main badlaw lana hoga.tabhi jeevan ki naiya sucharu roop se chal payegi.
afsos bharat ma ki pawan dharti pr tum jaisa dana
liyakat 2013-07-19 21:54:10

aaj ghar jaaakr sabse phke apni maaa bahan se ye line bolna teri mardangi pta chal jayegi ki tu mard hai kuch aur
विवेक कहाँ गया?
कन्हैया कोष्टी 2013-08-14 17:42:44

बस एक विचार है... एक व्यक्ति का विचार... जो शायद हर पुरुष पर लागू भी हो सकता है, परंतु आखिरी ईश्वर ने हमें विवेक नाम की कोई चीज भी तो दी है। उसका इस्तेमाल करने पर ही तो हम अपनी इस योनि को मानव कहलवा सकते हैं... वर्ना योनियाँ तो 84 करोड़ है और एक हमें छोड़ कर कोई भी तो मानव नहीं कहलाता। एक हम ही हैं जो स्वयं को व्यक्त कर सकते हैं, तभी तो हम व्यक्ति कहलाते हैं। एक विवेक ही मानव के पास अतिरिक्त गुण है। बाकी तमाम गुण तमाम योनियों में उपलब्ध हैं। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार। हर प्राणी में उपलब्ध है। तमस-रजस-सत्व तीनों गुण सभी प्राणियों में उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल हम विवेक से करते हैं और बाकी के प्राणियों में विवेक नहीं है।
me bhukha hu.
kishan 2013-08-28 20:13:57

muje bhojan har rat ko chahiye.
orat par mardangi dikhane se koi mard nahi ho jata
Anonymous 2010-05-05 18:38:08

wo mard nahi hijde hote hai jo orat ko ek saman samjhte hai yaswant ji aap to orat ki ijjat karte hoge kam se kam aise artical to na nikale
brajesh nigam
मर्द बनने के लिए ओरत का सम्मान करना पड़ता है
brajesh nigam 2010-05-05 18:46:37

मुझे शर्म आती है की हमारे भारत जैसे महान देश मे जहा ओरत को देवी का दर्जा दिया गया है वही आप जैसे गन्दा इन्शान भी है जो ओरत को एक सामान और बलात्कार करने की मशीन समझता है राहुल कुमार जी आप को शर्म आनी चाहिए की आपको पैदा करने वाली आपको अपनी कोख मे नो माह तक खून से सीचने वाली एक ओरत ही है जिसको आप इतना गन्दा समझते है
और रही बात मर्द बन्ने की तो ओरत के शरीर से खेलने से कोई मर्द नहीं बन जाता है मर्द बनने के लिए ओरत का सम्मान करना पड़ता है आप जैसे इंसानों को न मैं मर्द समझता हू और न ही इन्सान आपको तो हैवान का दर्जा देने मैं शर्म आती है
बृजेश निगम
सम्मान
sushil Gangwar 2010-05-12 09:23:06

Aapne Nigam ji sahi kaha hai ki hame samman dena aana chahiye chahe vah kowi ho. Aaj samman ki bhavana dar kinar karti jaa rahi hai . Upar likht lekh se ye prateet hota hai .
www.sakshatkar.com
गजब है
rajiv pandey 2010-10-25 00:02:34

लगता है भाई की समझ में कुछ नहीं आया
brajesh nigam nigam samajne ke liye dil chahiye...
Dhananjay Kumar 2012-04-20 13:50:01

Ye aap ke samaj me na aayega...
brajesh nigam 2010-05-05 18:53:54

mr. rahul.... agar aap delhi me rahte hai toh open challenge kar rha hu...... jish din milna hai.. ush din apni puri tagat or back support ke sath milna....... me bhi dekhta hu kitna bada mard hai tu..... tu aise admiyo me se ho jinki ma malikka sehrawat jaisi hoti hai.....
तभी भारत की ये हालत है...
राहुल कुमार 2010-05-05 20:31:10

तुम लोगों को बस चिल्लाना आता है, समझने-वमझने से वैसे भी क्या मतलब है. सच कहूं तो आना गुस्सा चाहिये.. लेकिन क़सम से... हंसी आ रही है... और तरस भी!!
rajan 2010-05-09 11:21:12

brajesh bhai, tum bhi to dhoodh ke dhule nahi... tum bhi to uski maa... tak pahunch gaye... rahul ne to kewal samaj ki mansikta batlaai hai, halanki wo bahut jyada kathor ho gay,,,,
rajan agrawal
rahul ne mardo kebare me likha hai aapne bareme na
viru 2010-08-30 13:49:44

मुझे ऐसा लगता है कि राहुल जो कहना चाहते थे उसे कोई नहीं समझा।
Yes No one understood.
Dhananjay Kumar 2012-04-20 13:52:28

Ye lekh main sahaili ki ak vayang hai...
Am I right?
mardunga
muktinath verma 2011-09-29 10:13:17

main dellhi me aaya hoon sirf tujhe khojne jis din tu mil gaya usi din tujhe goli markar jail chala jaunga saale kutte rahul
jara inhe bhi samjho
alka sharma 2010-05-05 19:14:17

kuch padte he bokhla jaane walo rahulji ki baat ka matlab samjho,wo apni pyas bujhane k liye nahi balki un bhedio ki niyat ke vishay main likh rahe hain jo aurat ko bhojan samajhte hain.jo comment unhone kia hai aajkal ke yuva naujavano par kripya unke is tark ko samjhe or bhadakne ki bajay un bhedion se apni ma bahan ya betiyon ki raksha kare jo aapke sath bus me rail me ya sadak par is anyay ko sah rahi hain
jai hind.
journalist 2010-09-02 23:16:31

alka jee mafi chahunga agar aap swasth aalochana sunne ki aadi na hon to plz batayengi kya aap kitne bar bhediyon se nuch chuki hai or aapke bhai ya pati ne kitno ko nocha q ki rahul ne 100% mahilaon or 100% puruson ki bat kahi hai.
samjho
ravindra singh tomar 2010-12-21 12:52:40

bakai rahul ji aapane narion ke prati jo likha hai usase lagata hai ki aap nari shakti ko badawa dene ki kosish kar rahe hai aapake is mahila jagrukta abhiyan ko har koi nahi samajh sakta 9 [ravindra tomar gwalior]
alka sharma 2011-02-21 19:23:33

aap bhi seedhi baat fir sun hi loijiye benaam ji aapki maa or behane bhi kitni baar nuchi hongi aap batane main sharmaye to meri galti nahi
aurat raaj
KUNWAR SINGH RAJPUT 2010-10-18 15:17:25

RAHUL BHAI APNE JO BHI KAHA HAI NO DOUBT AAP GUSSE AUR BYANG MEIN KAHA HAI LAKIN AAP KO BATANA CHAHTA HOON KI AAJ KI DUNIYA MAIN AURATAIN ITNI AAGE JA CHUKI HAIN KI AAP JAISE LOG KHUD UNKE HATHON BALATKAR KE SHIKAR BAN JA RAHE HAIN, RAHI SHAKTY KI BAT TO MAINE APNI ANKHON KE SAMNE EK AKELI LADKI SE CHAR LADKON KO PITTE DEKHA HAI JAGOOOOOOOOOOOOOOOO MR. RAHUL AAP SO RAHE HO.
muktinath verma 2011-09-29 10:22:31

kitni badi samajh dar re alka
teri maa ki chut
pratap 2012-08-30 20:27:13

madarchoodo tum aisa hi kar sakte ho
Pahle Rahul Ke Lekh (vyang) Ko Samjhe
Deepak Sharma 2013-05-23 16:10:26

Alkaji aap bilkul sahi kah rahi hai. baki ke log jo rahul ke peeche latth lekar pade hai wo darasal unke lekh ko samajh hi nahi pa rahe hai. darasal rahul apne is lekh ke madhyam se mardo ki mansikta aur aurto ki sahansheelta ko akramak shabdo evam lekhan shally se jhakjhorna chahte hai. parantu afsos ki samjhdar log bhi unki bat ko samjh hi nahi pa rahe hai.
बिजली का करंट छुडवा दूँ.
Deepak Agarwal 2010-05-05 19:16:46

हे मनोरोग के साक्षात् रूप राहुल. मैं डॉक्टर हूँ और तुममे एक पागल दिखलाई देता है. क्या हो जायेगा अगर तुम्हे पागलखाने पंहुचा दूँ. तुम्हारे हाथो में हथकडिया डलवा दूँ. फिर थोडा सा बिजली का करंट छुडवा दूँ. बुरा मत मानो प्रिय मुझे ऐसे ही सुख मिलता है.
हे राहुल मैं एक जल्लाद हूँ तुमको फांसी देना चाहता हूँ. मेरी ख़ुशी की खातिर तुम इतना नही कर सकते. लेकिन मुझे तो ऐसे ही मज़ा आता है. अब यह मत कहना मैं कौन होता हूँ तुम्हे फांसी पर लटकाने वाला. या पागल खाने पहुँचाने वाला. अरे तुम तो मन करोगे ही. लेकिन मेरे को पता है तुम हो इसी लायक. की तुमको गरम तबे पर लेटने का मौका दिया जाए. और क्यों दूँ तुम्हे कोई प्रमाण क्यों करूँ परवाह की तुम भी एक इंसान हो मुझे तो बस ऐसे ही मज़ा आता है.
भैया राहुल, यह जो तुमने गटर जैसे निर्मल विचार लिखे हैं न. और यह जो मैंने अपने विचार लिखे हैं न. इनसे एक बात समझलो. लड़का हो या लड़की. या शबनम आंटी. सबसे पहले एक इंसान हैं. और इंसान के साथ कैसे बर्ताब किया जाता है. अपने सिवा किसी से भी पूंछ लेना. बता देगा. और फिर तुम्हे खुद भी तो एहसास होगा दर्द क्या होगा. कडवे बोल क्या होते है. इनका असर क्या होता है. तुम तो अपनी यों कुंठा में यह ही भूल गए की पूरी एक बिरादरी को बैएज्ज़त कर रहे हो. मेरी मानो किसी मानो चिकित्षक को दिखाओ सब ठीक हो जायेगा. देर मत करो वर्ना रोग बढ़ता ही चला जायेगा.
और यशवंत जी कम से कम विचार पोस्ट करने से पहले देख लिया करें की किसी को मंच चाहिए यह हॉस्पिटल.
मैं तो मनोरोगी हूं, संदेह नहीं है मुझे..
राहुल कुमार 2010-05-05 20:34:52

मुझे तो लगता है डॉक्टर साहब.. आपको इलाज़ की ज़ुरुरत है!!

जितनी मिहनत से इतना लंबा-चौड़ा कमेंट ठूंस डाला उतनी ही मिहनत पढ़ने में करते तो शायद अर्थ अर्थ हे रहता अनर्थ नहीं.
मैं तो मनोरोगी हूं, संदेह नहीं है
Ravi Jindal 2010-05-12 09:32:58

Aub ye pagal khud hi sweekaar kar raha hai मैं तो मनोरोगी हूं, संदेह नहीं है Yaswant ji es bhadas me jagah nahi do Pagal khane me ek bister dila do .Etni mahbani to kar sake hai hai rahul par .
मंच or हॉस्पिटल
J P Gangwar 2010-05-12 09:29:34

Es naye lekhak rahul ko pagalkhane jana padega kyo ki ye hakikat me pagal hai . Bhavnaoo ke sath kilwaad kar raha hai.
journalist 2010-09-02 23:08:14

aap koi bhi hon journalist nahi ho sakte rahul kumar ye bat apke vad vivad se sabit ho gayi hai. aapka lekh kuchh nahi samjhaya paya isliye aap sabko alag alag samjha rahe ho he na.
naari teri yehi kahani..aankhon mein aasoo, aancha
dharmendra sharma, gaya, bihar 2010-05-05 20:05:03

:( rahul bhai, aapne jo likha, woh to pahele se likha jaa raha hain, lekin tathakathit samajik dayre mein, matlab log gud kaate hain aur gugulle se parhej karte hai. apne to puri parat hi khol kar rakh diya, is tarah ki lekhani kuch hi likh paate hai, maine abhi tak jitne lekhakom ko pada, usme manto ne bhi naari ki kuch isi dard ko bayaan kiya tha. aaj samaj ke jhandabardaron ne apni aankhon par gandhari ki tarah paatti bandh rakhi hai, adhunikta aur tathakathit sabhya banne ke chakkar mein, restoon ki tilenjali aam baat ho gayi hai, kabhi durga ke roop mein prakat ho kar usne asuron ka sanghar kiya tha, to kabhi aavitri ban kar yamraaj se pati ko wapas maan liya tha. na jaane kitne udaharan hai... jab tak naari ko purn shikshit aur adhikaroon se lais nahi kiya jaata, tab tak purush shashit samaj unki dasha aur sthiti sudharne wali nahi hai.
केवल रटा न लगाइए
विकास कुमार 2010-05-05 20:19:45

मेरे ऊपर के सभी पाठक महोदय, (अलका जी और धर्मेन्द्र शर्मा जी को छोड़कर).
इनदोनों को इसलिए बाहर कर रहा हूं क्योंकि इन्होंने राहुल के कहने का मतलब समझा है.
अगर लेख को पढने के बाद, लिखे को समझने के बाद कोई बहस या विरोध हो तब तो समझ आता है.
लेकिन यहां तो ऐसा लग रहा है कि ज्यादातर लोगों को हिन्दी समझ ही नहीं आती. अगर आती तो ऐसी बातें न लिखते जिसका इस लेख कोई लेनादेना नहीं है.

एक तरफ से सब के सब राहुल के पीछे पड़ गए हैं. कुछ तो राहुल को गरिया भी गए. भाईयों, कुछ भी कहने से पहले लेख को समझिए. अगर आप ऐसी बा्तें करेंगे तो लोग आप सब को अव्वल दर्जे का मुर्ख समझेंगे. आपके कहे पर हंसेंगे. जैसे अभी कुछ लोग हंस रहे हैं.
अन्त में डाक्टर साहब, आप डाकटर है...?.विश्वास नहीं होता. हो सकता है कि आप झोला छाप हों.
प्लीज, किसी मरीज का ईलाज न कररिएगा क्योंकि आप तो समझ ही नहीं पाएंगे रोग क्या है?
journalist 2010-09-02 23:10:20

lagta vikash kumar ji bhi apni bahan ki gadrai jawani se baichain hain lakhak ki hi tarah.
ये तो पत्रिकारिता की भाषा नहीं
Ashutosh Mishra 2010-05-05 20:35:36

राहुलजी, आपने यंहा जो अपने पवित्र विचार प्रकट किये है! क्या कभी अपने घर पर अपनी माँ बहन या बीबी के सामने भी रखे है अपने पत्रिकारिय बिचार! उन्हें कितना फक्र होता आप पर! अरे लक्ष्मी और सीता के अलावा क्या कभी माँ दुर्गा, काली माँ, रानी लक्ष्मी बाई, माँ सरस्वती, रानी दुर्गावती, रानी पद्मावती, इंदिरा गाँधी, मायावती, रुकसाना कौसर आदि के नाम भी सुने है अरे सीता को रावन ६ महीने तक कैद में रखने के बाद भी छू नहीं पाया था और जंगल में छोड़ने के बाद भी सीता की मूर्ति का सहारा लेना पड़ा था भगवन राम को! राहू से अमृत कलश लेने के लिए विष्णु को भी नारी का रूप रखना पड़ा था! अरे बचपन में पापा की डाट से बचने के लिए मम्मी के पल्लू के पीछे कितनी बार छिपे थे ये भी याद है आपको! कभी लिखने के बाद अपना लिखा हुआ पड़ भी लिया करो और भाई कलम को कलम की तरह इस्तेमाल करो पिस्तोल की तरह नहीं! एक आदमी मर्द है या नहीं ये भी एक औरत ही बताती है!
काली आलोचना किसी के समझ नहीं आई....
gajendra singh 2010-05-05 20:37:17

मुझे ऐसा लगता है कि राहुल जो कहना चाहते थे उसे कोई नहीं समझा। ये ठीक उसी तरह है, जैसे नीरू की मृत्यु के बाद की तस्वीरें उसकी एक मित्र ने फेसबुक पर लगा दी थी और दर्जनों की मिन्नतों के बाद भी उसे वहां से हटाया नहीं।

उसका उद्देश्य यह था कि लोगों को एहसास हो कि सांस्कृतिक और भेद की क्रूरता क्या होती है। ताकि लोगों की आखों में खून उतरे। उन्हें हमारे रंग-बिरंगे समाज का क्रूर और असली चेहरा मालूम चले। हम हमेशा जिंदगी की घटनाओं को जी-मेल के स्टेटस मैसेज की तरह बिला-नागा नहीं बदलते रहें।

कुछ ऐसी ही मंशा यहां राहुल की रही होगी। उन्होंने एक एक शब्द में सभी मर्दों मुंह पर थूका है, उन्हें दु्त्कारा है। उन्होंने जहां-जहां औरत को नोचने की बातें लिखी है, वहां लिखते वक्त खून के आंसू रोए हैं। उनका काली आलोचना किसी भी टिप्पणीकार के समझ नहीं आई। यह समस्या है हम सभी से साथ कि हम बस चेहरा देखकर, अखबार का शीर्षक पढ़कर और कहीं से कोई घटना सुनकर फैसला सुना देते हैं। जहां आपको सदियों के अपने अन्याय के लिए शर्मिंदा होने को राहुल आईना दे रहे हैं, वहां आप उसकी ओर पीठ करके आसमान में ताक रहे हैं।

जैसी प्रतिक्रिया इस लेख की आप सभी ने दी है, कुछ वैसे ही नासमझी भरे लेख वेब-माध्यम के कबाड़ को बढ़ा रहे हैं। इतनी गंदगी कुछ लोग फैला रहे हैं कि बताया नहीं जा सकता है।

किसी का रोना और समाज का बदलाव लोगों के लिए इंटरनेट पर लिखने का सुख बना हुआ है। आशा है कि आप सभी गौर करें। और अब इस नजरिए से इस लेख को पढ़ें। कोशिश करें कि वेब पर फैल रही गंदगी पर डिटॉल डालें।


sab pagal
saleem akhter siddiqui 2010-05-05 21:11:57

rahul ko pagal kahne wale khud pagal hein. in logon ko padhne kee tameez hee nahin hasi.
gyan gun sagar 2010-05-05 22:56:43

abe chootiye pehle seekh, samajh aur phir likh....lekin usse pehle manochikitsak se elaz kara....chootiye do saal hue nahi, baaten bakar-bakar kar raha hai..pagle...
gurdev singh 2010-05-08 18:16:53

aapne thik kha h, apni bhavna ko vyekt krne ke liye shabdon ka paryog bhi thik hona chahiye
भावना ठीक, पर भाषा नहीं
शुभचिंतक 2010-05-05 23:22:49

राहुल की भावना ठीक है, पर भाषा ठीक नहीं है। एक सही बात को कहने और लोगों तक उसे पहुंचाने के लिए उसकी भाषा भी ठीक होनी चाहिए। राहुल औरतों पर हो रहे अत्याचार से आक्रोशित है और वह मर्दों पर तीखा व्यंग्य कर रहा है, लेकिन उसकी भाषा की अशालीनता और अभद्रता उसकी बात को लोगों तक नहीं पहुंचने दे रही। मेरे दोस्त, तुम्हें अभी काफी सफर तय करना है। आने वाले दिनों में तुम अच्छा कर सकते हो, लेकिन भाषा से खेलना सीखो, उसके अलग-अलग आयामों को जानो। दुनिया की किसी किताब में नहीं लिखा है कि चीख-चिल्लाकर या गले के ज़ोर से अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर कोई लड़ाई जीती जा सकती है। बी सेंसिबल बेबी, बी सेंसिबल।
fanstastic article....
sanjal 2010-05-06 00:25:33

rahul ji , shuru mai jin logo ne kuch comments aake article ke against diye hain...shayad un logo ka dimaag aviksit hai kyun ki wo aapke kehne ke tarike ko samjh nahi paye...but man i tell u one thing....maine apni aaj tak ki life main apni baat ko kehne ka itna shandaar tarika nahi dekha....patrakarita main aapka bhavisya nishchit hi ujjwal hai....keep it up...
sach kadwa hota hai
seema 2010-05-06 01:06:06

aapka artical pad kar bharosa ho gaya ki such kadwa hota hai.....ise acche shabdo me lapet kar pesh karte to tarif pate....bhadde shabdoo se sajaya hai to gali kha rahe ho.....likin rahul tum such bol rahe ho
lovey 2010-05-06 01:51:36

राहुल औरत के बारे में एसे लिखने से अच्छा है कि मीडिया में औरतो का शोषण रोको ..एसे कुत्ते बांस लोगो को यहां नंगा करो न कि औरत को .....god blessu...
Ok
Rupesh 2010-05-10 16:13:43

Pls close this chaptor
Chor Chor Chilaney se CHOR hi dartey haiii
Rupesh Sharma 2010-05-06 11:22:51

Mujhey bas etna kehna hai ki chor chor kehney sey asli chor hi jayedaaa react karta hai
Maini lakho mard dekhey hai. Yeha to wahi emandaar hai... Jisey mauka nahi mila
Ham sab ko ye vish ka ghut pina hi hoga
Narendra singh shekhawat 2010-05-06 13:06:50

chahe jo bhi ho.... parantu Rahul ji ne asliyat samne rakhi hai... ise bahane sahi par hame mahilaon ki ijjat karna sikh lena chahiye....
hha
surendra 2011-03-17 00:09:27

gjhs shjdjd sjjd
vivechana
Kapil Pandey 2010-05-06 14:03:44

:ooo: Rahul ji ..... Aap ka lekha achcha tha . Pratham bar mene pada to , mujhe bhi ajeeb saa laga . Fir baad me samjh me aya ki aap aaj k bahut se un logon ki manodasha ko darsa rahe hai . jo aaj k samaaj me dabba hai . Jinaka dimag vastivakta me kisi rog se grashit hai . mujhe jo thodi si kami lagi vo thi . Aap is lekh ko aankhiri manjil tak pahuncha dete . Aap ki bat sayad mere vichar se poori nahi huee . Aap ko apane lekh me ye sapst karna tha ki aap kisi ki manodasa ko dikha rahe hai . varana itana babal nahi hota .agar is lekh ko lekar ugr ho rahe hai is me thodi si kami ki vajah se ho raha hai . ye to bharti samaj ki mano varty hai ki vo log aisa vichar dhara ko sweekary nahi karte hai . parantu uk ko karne me bharosa karte hai. aap apane lekh me sapst kar dete to sayad itana vicharon me vividata dekhane ko nahi milati.... aap ka lekha achcha hai , par is ko sampooran kijiye......
कपिल भाई, विवेचना के लिये आभारी हूं..!!
राहुल कुमार 2010-05-06 14:16:18

संभव है आपको लगा हो कि मैं कुछ वहशी पुरुष मनोदशा के बारे में बता रहा हूं. सही है. लेकिन बात सिर्फ़ पुरुषों तक खत्म नही होती है. मेरा असल ध्येय ये नहीं था. मेरा मानना है कि आप जानवर को बदल नहीं सकते. और अगर बदल नहीं सकते फिर भी उसके चरणों की दासी बनकर क्यूं रहा जाये. क्यूं ना उसके थोबरे पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ा जाये. शोषित वर्ग सिर्फ़ इसलिये शोषित नहीं होता कि कोई उसका शोषण कर रहा है बल्कि इसलिये भी होता है कि वो खुद भी बहुत हद तक शोषण के लिये तैयार है. बजाय इसके कि कुछ घटिया पुरुष मनोवृति को बदला जाये, ज़रूरी ये है कि औरतें कमर कस लें.. कि आओ... मैं तुम्हे मज़ा चखाती हूं..!!

पढ़ने और टिप्पणी करने के लिये धन्यवाद!!
aksharo ko meet banate to achchha lagta.
ABhishek sharma 2010-05-06 16:34:09

:x rahul jee patrakarita me aap jyada din se nahi hai par shabdo ka prayog bakhubi jante hai.....bawjud iske jin shabdo ko maryadit dhang se likha ja sakta hai wo aapne nahi kiya jane kyu? par aap ye jaan le ki ek patrakar tabhi safal ho sakta hai jab wo shabdo ki maryada jaan le, sahitya ka arth sa+hit hota hai. ashleelta ka bhaw aapke lekh ki kamjori hai...kripya maryadit shabdo ka pryog karke patrakarita ko samridhdha banaye.... shubh kamnaon ke saath.
Rahul ne sahi likha
Anand Tripathi 2010-05-07 09:27:07

:) Rahul mai nahi jaanta ki Delhi me tum kis channel ya paper me kaam karte ho ..lekin itna jaroor kahunga ki tumhe shabdon ka gyaan hai...bhasha par pakad hai..media me itni jaldi aaya insaan itna achha likh sakta hai..mujhe nahi pata tha...good work..keep it up...ek aur baat ,kabhi ye mat sochana ki aap ka kaam kise pasand nahi aaya ,hamesha ye socho ki aap ne jo kuch bhi kiya usse kisne pasand kiya....tumhe bhasha seekhne ki naseehat dene walon ne kis tarah ki zuabaan ka prayog kiya hai..ye bhi maine dekha...mai journalist hoo..iss liye aap ko support nahi karta,balki aap me dum hai..iss liye sath denge..good bye...
Bhavnayo ko samjho
Rahul Trivedi 2010-05-07 12:10:25

The people who have given their valuable comments against what Rahul Kumar has written show that they might be in the field of journalism from many years but they don\'t know about journalism at all. It also shows that people against this article are men with no balls. They don\'t respect women if they had any respect they would have understood the article and then written the comment. So my dear aggressive journalist friends please have some knowledge about the language and the way of writing then give your comments otherwise don\'t waste your time just for the sake of giving comments.
patarkar ko samjhane ka tarika aana bhi jaruri hai
arvind saini 2010-05-07 13:09:59

aap patarkar hai, isliye ye baat rahul ji aapko samjh me aani chaiye ki achha patarkar wahi hota hai jo apni baat pathak ko samjha sake. itne comments padhne ke baad ye baat aapko samjhni chahiye ki aap samjhne me vifal rahe hai.
or koshish karo, gussa nahi

thanks
ye salah hai, jo beena mange di ja rahi hai, kyonki main bhi patarkar hoon
LAGTA HAI AAP UORTO KO HONSALA DE RAHE H
ARJUN 2010-05-07 14:59:44

SRI MAN JI AAP KE LEKH KO PAD KAR LAGTA HA KI AAP MAHILAO KI KO HONSALA DE RAHE HA
shabdon par nahi bhawna par jao
alka sharma 2010-05-07 18:59:19

ek baar fir kahti hun rahulji ko samjho.is aawaz ko pahachano ye akele rahul nahi hain ye un sab mardo ki aawaz hai jo aurat ko is nazar se dekhte hain
najar ya najariya dusra mudda hai...
Abhishek sharma 2010-05-07 19:46:39

Rahul jee aapko samajha,bhavnao ko samjha par shabdo ki maryada nahi samajh saka.Aur is tarah ki amaryadit bhasha samajhna bhi nahi chahta.kshama prarthi hu.
बिना दहेज लिये शादी करना
हां, हां, हां, 2010-05-07 20:42:10

एक से एक गदहे भरे पड़े हैं।
लेख और कॉमेंट पढ़ कर अच्छा मनोरंजन हुआ।
अच्छा यह लगा कि कुछ दिनों से पत्रकारिता करने वाले ने कुछ तो लिखा।
बाकी तो कुछ लिखते नहीं है।
नवसिसिये ऐसे ही लिखते हैं।

बिहार ke राहुल!
माता-पिता की मर्जी से बिना दहेज लिये शादी करना, तब तुम्हारा लिखना सार्थक और कालजयी हो जाएगा।
लगे रहो, नहीं तो पिछड़ कर फरसटेट हो जाओगे।
comment
sumeet 2010-05-07 22:23:26

Dear Rahul
tumhare vichar to theek hain dost per presentation ka tarika behad ghatia hai
yahi baat aap positive angel se bhi likh sakate the.patrakarita aajkal balancing ho gayi hai. dekhana kahin kisi din ye balance na bigad jaye
Is tarah ke vichar apne blog per likho
yahan is platform per poore media ki najar rahati hai dost.kiyon aapne pair per kulhadi mar rahe ho
I hope you understand better
sumeet
sab anpar likh rahye hain...
dilzala 2010-05-07 22:25:49

rahul ne jo likha wo aaj ke marad ke sadion se chali aa rahee kunthit maansikta ka sach hai...... mujh ko gussa bohat aaa raha hai en anpar logon par jo rahul ko galian de rahye hain....... yashwant ji darasal ye sab ya to sarkari bhaand hain ya patarkarita ke naam par dhandha karnye waly. en ke jo rahul par teepani hai wo btati hai ke yahaan kai bhainse hain or hum been baja rahai hain........... ye sab asal main wo he daikh paye jo inho ne dekhna chaha ya en ke damit antarman me chalta rehta hai.....SEX........GIRL bus...... us se aagye en ke aankhain band ho gai............. pagal.....damit or orat ka chor rahul nahi tum sab ho........... pagal bhi aaj kal yahaan likh rahai hain yashwant ji es baat main ab shak nahi raha....en ko roko................
rahul
Madhup 2010-05-08 10:01:34

rahul ji namskar vah kya likha ha aap ne aaj aap jaise lekhk ki hi aavskta ha aaj se mai aap ka fan ban chuka hu agr aap samprk krna chahe to e-mail-madhupmedia@gmail.com
SAHI HAI
KAMAL.KASHYAP 2010-05-08 12:05:15

SAHI KO SAHI KHNE KA SAHASS KARNE WALO KO LOG AKSAR AALOCNA HI KARTE HAI.. RAHUL JI AAP KE BAVO KO LOGO NE SAMJA NAHI BASS APNE MUH KA GATER KOLA AUR APNE VICHAR DUSS DIYE YE LEKH SAMJNE WALA HAI.. LEKIN IN AALOCHKO KO KON SAMJYE KI YUVAO KO NA SAMJYE.... HUM SAB SAMJHTE HAI.. AUR JINHONE AAP KI BASHA KO LEKH KO GALATH BATAYA HAI UNKI MANODASHA HI ESHI HOGI TABHI UNHONE AAG UGALNA SURU KAR DIYA HAI... LAGE RAHO RAHUL JI BHUT ACCHA.............
tum mahan ho
satish 2010-05-08 15:22:24

ye tumhari hi mahanta hai ki tum is tarah likh sakte ho,.waise mujhe pura yakin hai jab tum paida hue hoge.. aur jab bare ho rahe hoge to kisi ne tumhare parivar ki kisi ladki ke saath aisa hi kiya hoga. ho sakta hai who ladki tumhari bahan ho hogi.,. jo aaj kal dhande par baith rahi hogi.. koi nahi hota hai jab apne kisi pariver walo ke saath ye hota hai.. mujhe tumse narajgi nahi hamdardi hai...
आपकी हमदर्दी के लिये तहे दिल से शुक्रिया!!
राहुल कुमार 2010-05-08 15:26:20

:D इस हमदर्दी के लिये हम आपके आभारी हैं सतीश जी.
kamal 2010-05-08 17:09:12

ye kon hai satish madar jaat jise jo apne aap ko bada patrkar samaj raha hai.. kisi ke upar ungli udane se phale apni girvan main jhank ke dek.. lagta hai ki teri maa ya bhan ke sath esa hi hua hola jo tu dusro ko khe raha hai
BHASHA PAR DO DHAYAN
SUNIL HANCHORIA 2010-05-08 17:47:05

RAHUL G APKA YE VANGY BHARA ARTICAL KO PADA HO SAKTA HAI AP APNI BHAVNA KO THIK TARIKE SE LOGO TAK NA PAHUCHA PAYE HO MERA TO SIRF ETNA KAHNA HAI AGAR AP BHASHA PAR DHAYAN DEKAR SAHI SHABDO KA CHAYAN KARTE TO KAFI THIK HOTA...THANKS
भाषा पर ध्यान दो :-
rajnish ranjan 2010-05-08 18:37:02

राहुल जो बताना चाह रहा है उसे उसने बहुत हाइपोथेटिकल तरीके से बताया है! विचार तो ठीक ही है लेकिन भाषा का इस्तेमाल बहुत हलके ढंग से किया है! मुझे लगता है दो-तीन महीने पुराना पत्रकार इतना परिपक्व नहीं हो सकता कि वो किसी संवेदनशील विषय पर अपना पक्ष रखे और वो सीधे पाठकों तक पहुँच जाए. इसलिए इसे राहुल का बचपना समझ कर उसको गंभीरता से नहीं लेना चाहिए..
रजनीश रंजन
Anonymous 2010-05-08 20:04:38

:angry-red:
ise wengya ki tarah likhe
sudhanshu kumar 2010-05-08 20:37:53

lakir ke phakiro ko aap ki baat samajh nahi aarahi
think on it
karn dev 2010-05-08 21:09:06

me apki bhavna ko samjhta hoon or aapke uddesh ko bhi kintu aap isme kuch sandesh dal dete to achha hota or aapko itni aalochnae sahni nahi padti .


or aapki tuk-bandi achhi lagi
rahul bhai reply jarur dena
ajeet kumar rai 2010-05-08 23:10:14

राहुल मेरे भाई आपने जो लिखा है उसके लिए तहे दिल से तारीफ करने का मन कर रहा है, परन्तु जिस तरीके के शब्द और वाक्य आपने प्रयोग किया है उसके लिये आपके साथ कैसा सलूक किया जाना चाहिए? वो आप के विचार से जानना चाहता हू। ऊपर मैने कुछ लोगों के विचार पढ़े, पढ़कर मुझे आश्चर्य हुआ क्योकि वे न तो आपके मनोभावों को समझ सकेे और न ही आपके शब्दो का सही ढंग के जबाब दे सके। मेरे भाईयों कोई उद्वेलित होकर गलत तरीके से अपनी बात कहे तो इसका मतलब ये नहीं की वो पागल या गलत है और यह भी कहूगा कि अगर कुत्ता आपको काट ले तो इसका मतलब यह नहीं की आप भी कुत्ते को काट ले।
राहुल जी मैं मुंबई से प्रकाशित जागरूक टाइम्स में वरिष्ठ उपसंपादक पद कार्यरत हूं और एक पत्रकार होने के नाते ये उम्मीद करूगा कि आप पत्रकारिता का मान रखते हुए थोड़ा शब्दों की गरिमा का ध्यान रखेंगें।
अंत में आपको हार्दिक शुभेच्छा सदैव अच्छा काम और अच्छे ढंग से ही करें।
alka sharma 2010-05-09 10:30:31

mumbai se prakashit jagrook times k varishth upsampadak ajeet kumar ji ko main yaha batana chahungi ki itne bade patrkar hone ke baad kya wo yeh bhi nahi samajh pa rahe hain ki yeh bhasha rahulji ki nahi balki ek wahashi mard k man main chal rahi wo gandi awaaz hai jo aaye din aurat ko gandi nazar se na sirf dekhte hain balki unko apmanjanak shabd kahne se bhi nahi chukte,yeh us mard ki bhasha hai jo aaye din aurat ko apni havas ka shikar banate hain.
Shukriyaa Alka
Rahul Kumar 2010-05-09 14:54:22

अजीत भाई.. ये है आपका जवाब,,,, जो कि अलका ने पहले ही दे दिया है.. उम्मीद है आप समझेंगे!! रही शब्दों की गरिमा और पत्रकारिता की मर्यादा... तो अजीत साहब मुझे नहीं लगता कि अगर आपको कचरे घर की हालत दिखानी है तो आप रोज़ गार्डन या नरीमन पॉइंट की तस्वीर दिखाएँगे... आशा है आप समझ रहे होंगे..
sharad 2010-05-09 16:10:46

राहुल भी एक मर्द हैं....एक मर्द के वहशीपने का खाका खीचते वक्त क्या उन्होंने खुद को भी मर्द की उस विकृत मानसिकता से जोड़ा है...देखिए हमारे कहने का मतलब सीधा है...वो ये कि हर इंसान की विचार धारा अलग होती है....ये ठीक है...कि औरत को लेकर काम और वासना की बातें की जाती हैं...या फिर उन्हें इसका शिकार भी होना पड़ता है....लेकिन ये मान लेना भी सही नहीं ठहराया जा सकता...कि हर इंसान की मानसिकता इस तरह विकृत होगी...कि उसे औरत में बस भोग-वासना ही दिखाई दे...खैर आपने जिस तरह से एक वहशी या पागल मर्द की वहशी मानसिकता को उकेरा है....उसे सौ फीसदी लोगों के लिहाज से जायज नहीं ठहराया जा सकता....राहुल जी आपको अगर अपनी मां में मां नजर आती है....तो और भी बहुत से लोग होंगे.....जिन्हें मां की ममता...बहन के प्यार...रिश्तों की मर्यादा से वास्ता होगा....एक बात और अलका जी के कई कमेंट्स हैं....जो आपके ख्यालों से सहमत ही नहीं...बल्कि उनको लेकर समर्पित हैं....उनके लिए सिर्फ इतना ही...कि किसी मर्द की व्याख्या करने के लिए अगर हम शरीर के अंगों का नाम लिखना शुरू कर दें...तो उसे भी पागलपन ही करार दिया जा सकता है....बात कहना बुरी बात नहीं....लेकिन बात कहने के सलीके का ख्याल नहीं रखना यकीनन अच्छी बात नहीं...खैर भावना अभिव्यक्त करने की आजादी है.....राहुल जी को भी...आपको भी...हमको भी....
joote khaoge
pankaj jha bhind mp 2010-05-09 16:25:57

phir to tum apni maa bahn ki bhi ijjat nahi karte hoge apni maa bahan ya kisi orat ke samne bol bhi mat dena nahi to joote khaoge kisane bana diya tumhe patrakar patrakar ka matlab samajte ho patrakar samaj ki va garib ki aavaj hota hai tum to ek hevan ho sab bakvas
यशवंत जी ध्यान दें!
ajeet rai 2010-05-09 18:13:24

अलका जी मैं आपके आक्षेप का स्वागत करता हूं और राहुल जी अगर आप वही राहुल हो जिसने ये बकवास लिखी है तो तुम सबसे पहले अपने नाम के आगे से \'पत्रकार\' शब्द हटाकर \'अश्लील साहित्यकार\' लिखो।
माननीय यशवंत जी मैने ये पोर्टल जब पहली बार पढ़ा था तो मुझे बेहद पसंद आया था और मैने अपने कई साथियों को इसके बारे में बताया। परन्तु जबसे आपने ऐसे सड़क छाप लोगों की बकवासें छापना शुरू किया है मुझे बेहद निराशा हो रही है। आपसे निवेदन है कि आप ऐसी बकवासें छापना बंद कर दीजिए या प्रचार की मजबूरी है तो फिल्मों की तरह \'ए-ग्रेड\' का लेबल लगा दिया करें। क्योकि पाठकों में आपकी छवि एक प्रखर एवं क्रांतिकारी पत्रकार की है परन्तु ऐसी बकवासों से आपकी छवि प्रभावित हो रही है।
अंत में अलका जी आपसे कहूंगा कि ऐसे सिरफिरों की बकवास पढऩे के बजाय भड़ास पर उपलब्ध उच्चकोटि के लेख व साक्षात्कार पढ़े। राहुल जी ये बात अच्छे से जान लो कि काठ की कड़ाही सिर्फ एक बार चढ़ती है और ऐसी बकवासों से सिर्फ बदनामी मिलेगी। अभी नये हो राह पर आ जाओ नहीं तो तुम्हारी बर्बादी तुम्हे मुबारक!
पत्रकारिता के सपूत या कपूत!
राजकुमार द्विवेदी, संपादक दिव् 2010-05-09 18:52:07

राहुल, जी पत्रकारिता की भाषा संयम की भाषा है, आपने अश्लीलता की भाषा को भावना के आधार पर लिखकर पत्रकारिता की भाषा को धूल धुसरित किया है। पत्रकारिता में नए नवेले हो, नाम कमाने की धुन में शायद अनाप-सनाप लिख रहे हो। नाम कमाएं कपूत या सपूत। राहुल जी नाम दोनों ही कमाते हैं, पर दोनों में होता है काफी अंतर। अब आपको तय करना है कि आप पत्रकारिता के सपूत हैं या कपूत। अश्लील साहित्य से तो पूरा बाजार ही भरा पड़ा है, क्या अपना नाम आप अश्लील साहित्य की दुनिया मेें बिखेरना चाहते हैं, यदि हां तो पत्रकारिता की दुनिया को अलविदा कह दें। अच्छा ही होगा!
राजकुमार द्विवेदी 2010-05-09 18:53:46

राहुल, जी पत्रकारिता की भाषा संयम की भाषा है, आपने अश्लीलता की भाषा को भावना के आधार पर लिखकर पत्रकारिता की भाषा को धूल धुसरित किया है। पत्रकारिता में नए नवेले हो, नाम कमाने की धुन में शायद अनाप-सनाप लिख रहे हो। नाम कमाएं कपूत या सपूत। राहुल जी नाम दोनों ही कमाते हैं, पर दोनों में होता है काफी अंतर। अब आपको तय करना है कि आप पत्रकारिता के सपूत हैं या कपूत। अश्लील साहित्य से तो पूरा बाजार ही भरा पड़ा है, क्या अपना नाम आप अश्लील साहित्य की दुनिया मेें बिखेरना चाहते हैं, यदि हां तो पत्रकारिता की दुनिया को अलविदा कह दें। अच्छा ही होगा!
राजकुमार द्विवेदी, संपादक दिव्य प्रभाकर
bhasha sahi nahi hai
rajesh patel 2010-05-10 11:25:12

rahul ne jo likha hai, wah ekdam sahi hai. ha use bhasha aur shabdo ka sahi prayog karane nahi aata hai. apani bat sabhya tarike se bhi kahi ja sakati hai.
EEi ta neek baat nai
Ravi Mishra 2010-05-10 16:45:50

Bhai Rahul, Tora sa eei ummid nai rahai, Begusarai k naam kharab ke delho to, Begusarai ka mait sa jaha Dinkar ka Veer Ras pravahit hoit rahai.. u jagah sa is kon ras pravaahit kair delho ki log tora gariai
dalkon ..aapan tej dhar ka simariya ghat k shudha jol sa jwala prakat karo aar ehan likho ki samaaj sa atyachar aar shoshan khatam bhe jaaye..
Shesh Shubh..
kaya tumhari maa ek mahila nahi - www.sakshatkar.
sushil Gangwar 2010-05-10 17:01:31

पत्रकारिता की भाषा संयम की भाषा है Abhi do mahine se journalism me aaye ho . Esa lagta hai bahut jaldi hi safalta haasil karna chahte ho . Kabhi ese lekh likh kar safalta nahi milti hai . Jara apni bhasha ko sudharne ki kowsish karo. uske baad aap kuchh likhe to aapki sehat achhi rahegi .
Sushil Gangwar
www.sakshatkar.com .
patrakarita ka Kaput
sushil Gangwar 2010-05-10 17:06:38

Aub ese log journalism me aa rahe hai jise likhne or sochne ki tameej tahjeeb tak nahi . Use kis bhasa ka prayog karna chahiye or nahi ? Ese hi log media ko barbaad karne par amada hai . aaj har dusri khabar media or patrakaar ki hai . Ese patrakaaro par ankush lagna chahiye .

www.sakshatkar.com
Ye bekaar log hai lekhak nahi
J P Gangwar 2010-05-12 09:18:38

Dear
Sushil Gangwar ji en logo ne Patrakarita ka majak bana kar rakh diya . Likhna aata nahi or likhne baith jaate hai . Jara likhne se pahle thoda socho .Kya or kis par likhne jaa rahe ho . Es tareeke se kowi lekhak nahi ban jaata hai. Barbaad ho jaata hai.
Comment.
pande ji 2010-05-10 18:21:45

Rahul, Rahuul. Do mahine me, hi apni sari javaani ko vya karne me lage ho. Are dhary rakho, kalam ghasitane se tum mahan nahi ho jaoge. Aise bhi, tumhari baurai writing par kisi ki gadrayi javani phida na hogi.!!
bhenchod
vijay 2010-05-10 18:26:48

bhenchod rahul saale mujhe lagta hai tune apni bhen ko jarrur choda hoga bhenchod saale jis maa ne tujhe paida kiya hai kabhi us ma se ab pouch hi lena ki ma mere sath yoon sambandh bnaogi.
saale tumhare jese hi haram khoro ki wajha se media badnaam ho raaha hai
aur kahrab to tab lagta hai jab yashwant je jese aadmi ne aese article ko apni mehtvporn site p jagh diya .beta yashwant je bhi tere is article se khub trp bator rahe hai
agli bari koi article likhega to us p apni ma ki aur behan ki nangi photo jarru dal dena ma lode.
Acha Hai Par Ganda Hai!!!!
Shekhar 2010-05-10 19:16:34

Me Rahul Ji Se Puchana Chata Hu ki .Media Me Aap ni Isi Bhasa Me Patrkarita Kari thi?????
feedback
vikram shah 2010-05-10 19:57:48

राहुल भाई कईयों ने आपकी भाषा पर आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन मैं आपका कायल हूं। दरअसल भाषा में जब आवेग समा जाय। तो मर्यादा का ख्याल नहीं किया जाता। बल्कि बस उसकी भावना देखी जाती है। ऐसा ही कुछ आपके आलेख मे दिखा। वाकई आप औरतों का दिल से सम्मान करते हैं। और उनकी वर्तमान स्थिति केलिए चिंतित भी हैं। लेकिन जहां तक मैं समझता हूं। औरत अब अबला नहीं। स्त्री पुरुष सहवास में जितना मज़ा मर्दों को मिलता है। उससे कई गुणा मज़ा औरतें भी तो लेती हैं। सच पूछिए तो अब पुरुष भी बलात्कार का शिकार हुआ करेंगे। वो दिन दूर नहीं है। अब मामला बराबरी का आ गया है। इसलिए अब अबला का समानार्थी पुरुष शब्द चुन लें। मेरी मंशा महिलाओं के प्रति गंदी कतई नहीं है। बल्कि आज भी महिलाओं पर जमकर अत्याचार होते हैं। बस मैं कहना सिर्फ इतना चाहता हूं कि अब अत्याचार पुरुषों पर भी शुरू हो चुका है। साहनुभूति जताने के साथ, चेतने की भी ज़रूरत है।

साभार
sabko samjjao
ASHOK CHAUDHARY 2010-05-16 02:00:06

vikram ji aap poore lekh ko jaise samajh gaye kaash sabhi samajh paate......
Teerth Gorani 2010-05-11 16:44:15

are bhai rahul aap bhi kahan likh bethe ye sab.? ye setrire nahin samajhaat? Shabdo se khelate khelte bhawna samajhana bhool gaye>
keep it up
rahul kotiyal 2010-05-11 17:43:35

:love: rahul dear well done. hamaare desh may sach sweekarne walon ki sankya bht kam hai, isliye jo upar bakwaas comments likhe gaye hain un par dhyan mat dena. ek lekhak ki bhawna ko samjhe bina kisi bhi lekh per apni pratikriyaa dena sabse badi bewkoofi hai, jo ki jadatar logon ne ki hai. aur karenge bhi kyunki bachpan se bhedchaal jo seekhte aa rahe hain. may bhi patrakaarita ka student hun aur doon university se M.A. (communication) kar raha hun. maine aapka is mahiney ki tehlka may article padha. apne bht khubsoorti se ek-ek bhawna aur bhaav ko vyakt kiya hai. i really appreciate ur work . well done.
rahul kotiyal 2010-05-11 17:44:16

:love:
chuha 2010-05-11 18:51:02

patrakaar bhaiyon ek nivedan hai, main is mahaan lekhak ko bahut pehle se janta hoon aur aapko bhi inke baare me batana chahta hoon. ye atyant pratibhashali khandaan se hain. inke pitaji begusarai ke badahiya ke ek prathmik school ke chaprasi hai, sabse bade bhai pure jila me mastram bechte hai, (stockist) hain ek aur bhai uthaigiri ke chakkar me darzano baar jail kaat chuke hain aur apne rahul g patrakaar ban jaane ke liye jee tod koshish kar rahe hain, badi jimmedari hain inke patle aur kamjor kandho par, inko yen ken prakaren yadi ek naukri mil jayegi to ye is tarah ke lekh likhna band kar denge. aapse anurodh hai ki aap inke maansik awastha ko samjen aur inke lekhon ka anand le kyonki agar naukri nahi milege to khane ke abhav me dimaag kaam nahi karega aur is tarah ke lekh aapko padhne ko milenge.yashwant g se kehna chahunga k aap dildaar to hain, thore jimmedar bhi ho jaiye,bhadas ki image india tv wali ban jaye is se pehle savdhaan ho jaiye, patrakarita ka matlab ye nahi hota jo ye jaruratmand mahashay kar rahe hain
yashwant ji khud samajhdar hain
Alka Sharma 2010-05-11 19:27:13

yashwant ji ko kuch sikhane se pehle chuhaji apni mansikta ko badle.yeh jo yashwantji ne bhadas ki online site banai hain na,iska matlab hai bhadas nikalna,to nikalne do sabko bhadas.kyo baar baar yashwantji ko beech main laate ho.jo rahulji ko sahi laga unhone likha jo apko sahi laga wo apne likha to fir yashwant ji kaha se aa gaye.
Bhadas par Bhadas ese mat nikalo
sushil Gangwar 2010-05-12 09:13:39

Bhadas nikalne ka matlab ye nahi ki aapke lekh me gandapan -nagapan jhalkane lage . Agar aap bura likh sakte ho to achha Likhe ?
www.sakshatkar.com
chuha 2010-05-12 11:17:39

alka g, maine kisi ko nasihat dene ka kaam kabhi nahi kiya hai aur na yashwant g ko diya hai, aapme ye aadat hai ! mujhe aap jaise logon ki salaah nahi chaiye, ise saadar wapas le lijiye, mujh par anukampa hogi, aapko nasihat nahi de raha par bina maange logon ko apni chiz baanta mat kijiye. yashwant g se baat ho rahi thi meri bich me aakar apne udta hua teer apne usme (haath) me le liya hai, itna anurag hai yashwant g se, itni sahanubhuti rahul se. mujhe is par bhi koi aitraaz kyon ho, main to salaah deta hi nahi lekin tajjub to kar hi sakta hoon. mere lekh se koi purwagrah na paalein main apni seema me rahkar dusron ki seema batane wala ek practical insaan hoon.
manohar 2010-05-12 13:09:01

veer good mind
rahulji
manohar 2010-05-12 13:11:07

verry good mind
sunil 2010-05-12 15:30:12

koi itna vikshipt bhi ho sakta hai.pata nahi tha.jo maa aur bahan ko bhi gandi najar se dekhta hai. aaj wo srarmsaar ho gai hongi.
lafango ki bhasha hai. ghatia hai.
BIJAY SINGH 2010-05-12 22:02:12

bahut hi ghatia lekh hai.
puri tarah se lafango ki bhasha hai.patrakarita ki bhasha ye nahi ho sakti.swambhu patrakar kahlane ke liyev thik hai.
Mahilawo ko anyay ke khilaf aawaj uthane wala lekh
Anil Gupta 2010-05-13 09:34:18

Rahul bhai,
aapne gjb ka lekh likha hai,.aapne smaj ke bure logo ki krtut ko apne upr lekr bhaduri ka kam kiya hai..aapke pryas se jis din mhilaye drindo ke khilaf uth jayengi bhai mja aa jayega.aapka virodh krne wale nhi chahte ki mhilaye khud mjbut ho.taki ye log unka shoshan krte rhe..ha,bhasha bs thodi si achchhi honi chahiye thi..lge rho bhai..
Pain and anguish behind the essay
vineet 2010-05-13 11:38:03

Most of the people have failed to read the pain and anguish behind the words and lines that you have written in your essay. I guess those people are the ones who treat women in much the same way that you have mentioned. The article is good. And now we know that in this field we are among low men.
Kafi kareeb se vishay ko samjha hai
Atul Sinha 2010-05-13 12:08:08

Rahul ji aapka lekh padha. Dil ko chookar chala gaya.Aisa laga jaise aapne kafi kareeb se is vishay ko samjha hai. Achha laga yeh jankar ki aise log bhi hain jo is had tak kisi samasya me doobker apni lekhni se samaj ko jhakjhorne ka madda rakhte hain. Saath hi afsos hota hai khud ko journalist kehne wale un logon par jo lekh ko samjhe bagair hi tippari karna apna dharm samajhte hai.Agar aapko journalism me aaye hue sirf do mahine hue hain to yeh lekh bahut achha hai or samaj ke liye tamacha hai. umar jyada hone se kisi ke tajurbe jyada nahin ho sakte. Kabhi kabhi chota sa bachha bhi bujurg ko nai baat sikha jata hai. Gud going Sir keep it up..................
rahulji
sudhanshu 2010-05-13 12:09:21

bahut accha laga jan ke ki aap apni jawan behan ki gardai jawani dekhte hain. bhai 2m ye soch ke kush mat hona ki chalo badnam hue to kya nam to hua kynki 2m unme se ho jo sochte hain ki agresive likhne se main bhi bada patrakar ban jaunga. bhai mujhe sirf ye kehna hai ki 2m patrakar to kisi janam me nahi ban sakte aur ek insan to kabhi nahi asal me mujhe 2m se koi sikayat nahi hai 2mhari bhasha se saaf ho jata hai ki 2mhara backgrnd kya hai galti 2mhare ma baap ki hai pehli to 2mhe paida karke aur doosri aur antim bhi 2mhe paida karke. GET WELL SOON

YASHVANT JI MUSHE APSE BHI SIKAYAT HAI APJAISE ADMI NE IS BAKWAS KO KAISE CHAPA MUJHE APSE YE OMEED BILKUL NAHI THI
please send your mother or sister
vijay 2010-05-13 19:13:04

mera land khada ho rahaaa hi please send you mother or sister
kripya dhyan dain
alka sharma 2010-05-13 19:46:26

yashwantji or rahulji k prati meri sahanbhuti ko dekh kar shayad kisi ko bahut jalan ho rahi hai to un logo se anurodh karti hun ki kripya is jalan ko tyag kar rahulji k kuch or naye lekh pade taki aapki soch bhi unki tarha mahan bane
or fir bhi samajh nahi aata to vikas kumar ka agla lekh.....KYA YEH PATRKAAR KAHE JAANE LAYAK HAIN? pade shayad aap ka kuch gyan bad jaye
jai hind
nari devi sman hoti hai
ramesh garg 2010-05-14 10:38:13

mujhe ye dekh kar badi ghrina hui ke bharat ke patrakaron ki soch kahan tak kam karti hai........aap soch sakten hain ki journalism ka future kis tarah khatre me hai .......
deepak ambastha 2010-05-14 14:58:43

Rahul bat pte ki khi hi apne.shbd aur bhasha per bhas bemani hi jrurat hi to marm ko smjhne ke.jo ise smjh sken to jan payenge kha hi hum.
hi
ashish goswami 2010-05-14 16:04:33

yasvantji, aapki website bahut badiya hai.....jo bhi patrkar sathi apni bhadas aaki website par nikalte hai....mere nivedan hai...is type ke aakekh ko sampdit kar diya kare..hindustan ki sabse jyada padi jaane wali website hai....vichrotajak lakh ke sath shistta purn bhasa ka upyog ho to bahtar hai...
Anonymous 2010-05-15 17:15:22

:)
agree
bhoodev sharma 2010-05-15 20:38:31

maine kafi comment pade jazatar log yeh samz rahe hai ki aapne mahilao ki bejjati ki hai par darsal aisa nahi hai...
dosto rahul kehna chahte hai ki hm log itna gir jaye hai ki hm mahilao ki bilkul bhi izzat nhi karte hai....
chahe wo bahen,beti,bahu,ma jo bhi ho har kisi k sath aap rape case sun sakte hai....
main purus barg se apeel karta hu ki mahilao ki izzat karna sikho......
comment
Dr.Hari Ram Tripathi 2010-05-15 21:05:28

This is a satire on our society.Most of the readers could not unerstand its real sense .It should have been published with editorial comment to avoid mis-understanding.==H.R.T.
शाबास राहूल मै तुम्हारे साथ हूँ .....
कलम वाला गुंडा 2010-05-15 21:30:17

राहूल डरने का नहीं ये पुरूष प्रधान समाज ओरतों को हमेशा नोचता रहना चाहता है ! साथ ही ये ओरतें भी अपनी सहन शीलता की झुन्टी दुहाई देते हुए बस हमेशा लुटते ही रहना चाहती है ! मै तुम्हारी हीम्मत की दाद देता हूँ जो तुमने इस ब्रहमांड की माँ बहनों सहित पूरी ओरत जाती को संभलने की और इशारा किया है ! राहूल ये लड़ाई इतनी आसान नहीं है इसे लड़ने के लिए पूरा जोश और होश होना बहुत जरूरी है ! मै १२ साल पत्रकारिता कर रहा हूँ आज मेरा एक पाक्षिक राजस्थान-मेघदूत १६ अंक निकल चुके है ! जल्द ही rajasthan2day.com आवाम को समर्पित करने वाला हूँ ! इस लेख के लिए कोटि-कोटि आभार ......
asli sant/ harish chandrr
ASHOK CHAUDHARY 2010-05-16 01:54:30

RAHUL JI DHANYAWAD AAPNE SACH KEHNE KE LIYE KHUD KO DHONGI LOGON KE SAAMNE ITNA GIRA LIYA, TAARIF KE KAABIL HAI.......
ghatia bhasha!!
Anonymous 2010-05-16 11:59:19

भाषाई मर्यादाओं को ताक पर रख कर कहानी लिखने वाले ऐसे तथाकथित पत्रकारों की लेखनी पर सवाल तब खड़े होते है जब स्त्री विमर्श क नाम पर सार्वजनिक मंचों से खोखले और वाहियात लेख लिख कर अपने आप को प्रगतिशील और जनवादी लेखक कहते है,साथ ही साथ संवेदनशील विषयों पर अगंभीर टिपण्णी देकर हास्य का पत्र बनते हैं !


शर्म आती है ऐसे लोगो पर जो अपने आप को पत्रकार कहते है .......
kam or achhe shabdo mein vichar pesh kro
Lata Mishra 2010-05-16 12:22:27

Mr. Rahul, aap ne jo likha vo sabhi aap ya hm jaise repoter ke jari pad lete hai, pr eh likh ek orat ko kamjor krne vali baat e, aaj ki orat majboot hai, so plzz dont write again this topic
comment
Dr.Hari Ram Tripathi 2010-05-16 16:11:56

Most of readers are confused.
mard
tarun 2010-05-16 17:02:22

main mard hu or writer chutiya
Aadmi ki nigah me aurat
aditya chaudhery 2010-05-17 13:26:09

lagta hai aap Rajendr yadav ki kitab ..aadmi ki nigah me aurat se prabhavit hai...shali achi hai
elizabeth 2010-05-17 20:54:10

mr. whatever and whoever you are but remember if you cant respect fair sex you can never respect anyone in this world

anyway there is a good message for us.............and definitely we women will try to identify our potential and will prepare ourselves to answer you males.
such fucking male like you......
go to hell.............
फिल्म क्रांतिवीर के नायक नाना पाटेकर से प्रेरित-अच
Nitish Raj 2010-05-18 12:55:49

क्रांतिवीर की तरह ही इसमें औरतों को औरतों की नजर से ही ऊंचा उठाने की कोशिश है। अच्छा प्रयास है पर शायद ऐसे प्रयास होते हैं तो शब्दों में कुछ अशोभनीय हो जाते हैं पर ऐसा तो कुछ भी नहीं है जिस पर इतना बवाल मचा रहे हैं लोग। मुझे लगता है कि अधिकतर लोगों ने इस लेख को पूरा पढ़ा ही नहीं है। प्रयास और भी अच्छा हो सकता था पर कोशिश अच्छी है।
dikha diya na aayna..
Mitali 2010-05-18 13:05:02

rahul ji, samaaj mein base huye bhediyon ke chehre se sabke samne naqaab utarne ke liye baho-bahot shukriya..shayad aapki aalochna karne wale wo log hain jo is sacchayi ko apna nahi pa rahe hain..itni himmat dikhane ke liye shukriya..aisi aalochna se apna hausla aur badhana..or sabhi sammanit logo ko unke bhadde comments ke liye shukriya kyoki unke comments ne unki pol khol di..
ptrakar ho ?
chandra kant 2010-05-18 16:40:34

wah kya bat hai
tum akalband to nahin ho,
baten to bahut kar tey ho,
patrakar ki ptrakarita ka jabav nahin, lekhani main dum hai lekin disha thik nahin hai, dasha thik hai. itna samaz lo prani - roundane ke bad hi aata roti bnaney layak hota hai aur roti ko nochaney se hi pet bharta hai tumahrey liye aurat ek subject ho sakti hai lekin ristey ki dor nahi. jis khubsurti se savdon ko prastut kiya hai woh sirf tumaharey hi layak hai kisi aur ke layak nahin
ek patrakar ki bhaddi bhasha
rohit 2010-05-18 18:41:53

sharm ati hai un logo pe jo apni hi maa aur behan pe itni gandi najar rakhte hain aur unse bhi jyada unpe jo aise aadmi ka samarthan karte hain..... dikh raha ki ek aadmi kitni tarraki kar raha hai jo usko janam dene wali maa, rakhi bandhne wali behan ka aur ek aurat ka samman ni kar sakta
YE PARTRAKAR HAI ?
VINAY ROY 2010-05-19 13:23:03

YE PATRAKAAR HAI YAA ASHLIL SAHITYAKAAR....RAHUL BHAI AAP KO LIKHNE KAA AUR PATRAKARITA KARNE KAA SHOUK HAI TO ACCHE ACCHE ISSUES KO UTHIYE...AAP KO LOG SEER PER LENGE..
sarjana 2010-05-20 09:44:20

yashwant keep up the dignity of the portal and tell rahul to gift this \'beautiful\' creation to his mother on mother\'s day , to his sister on rakhee . they may be proud of him .
you are to be blamed for encouraging such sick writers .
Anonymous 2010-05-20 10:56:40

:angry: :idea: :evil: :love: :D :x :no-comments: :ooo: :?: :no-comments: :0 ;)) ;) :) :sleep:
prabhakar 2010-05-20 10:57:40

rahul bhai, lekh achha laga, mai v begusarai me patrakarita karta hun] aap begusarai me kahan k rahne wale ho] add aur cell no dena chahege
my id - prabhakar_bgs@reddifmail.com
What's the meaning?
Parisha Agarwal 2013-02-07 01:07:41

Kya kehna chahte hain?? I tried to find the real meaning but i didn't got it..
great article sir
pratibha 2010-05-20 22:41:03

:D sir mujhe garv hai ki hamare samaj mein aap jaise patrakar hai jo sahi mayino mein samaj ki kamiyo ko ya kahe mahilao ki kamiyo ko bejhijak samne rakh rahe hai or baat rahi kuch logo ki jo is article per reply ker rahe hai unke liye ek muft salah hai kripya pehle article ko samjhe ki rahul ji sahi mayane mein kya kehna chahte hai ....
YE SAALE GADHE
pn_kuttariya 2010-05-21 14:15:52

TUZE PATRAKARITA KARNAA ATTA HAI KYA KOUNSE COLLEGE SE JOURNALISM KIYA HAI JIS BHI COLLEGE SE KIYA HAI VO PATRAKARITA SANSTHAN CHUTIYA HAI TUZE DEGREE DEKE PATRAKAR BANAAYA
ek dum sahi hai boss
vaibhav mishra 2010-05-21 22:30:15

ye sabhi nahi jantehabd chubhte hai vahi aalochak tak sabse pahle pahuchte hai aur ye jin bhi ligo ne uper comment dene wale hai agar ye patrkar hai to ye sab keval filma star ko hi cover karte honge
rahul sir jab aapki itni aalochgna ho to samjh lena kiaap bahut aage jaoge
BUS LAGE RAHNA
भाषा और भावना में अंतर...!
चन्द्रमोहन द्विवेदी 2010-05-23 06:35:34

राहुल जी की भाषा भले ही अश्लीलता लिए हुए हो....और पत्रकारिता में स्वच्छ भाषा की श्रेणी में न आता हो...लेकिन भावना में मुझे पवित्रता लगी. हो सकता है कि कुछ महाशयों को इसे पढ़कर घृणा हुई हो, लेकिन कभी जो दिखता है वो होता नहीं.......
Main sirf itna kahoonga
tarun kumar srivastava 2010-05-25 13:59:07

rahul ji AAP nePATRAKARITA KO DIL SE LIYA HAI. waise bhi aaj k jamane me dil ki baat log samajhate hi nah. Patrakarita k nam par kuch log Koop Mndook hi kahe ja sakte hai jo aap k vichar se asahemat ho. Shayad inhe ye hi nahi pata ki iis Lekh me kaon sa ALANKAR hai. ye log shayad Patrakar ka THAPPA lagane k liye patrakarita karte hain. Jahan tak baat hai AMRYADIT bhasha ki to shayad BALATKAR likhana bhi iisi bhasha ka roop hai.Shayad duniya me kuch hi log hote hain jo KISI DOOSRE KI ATMA APNE ANDAR SAMAHIT KAR Lekh likh skte hain. jo aap ne kar dikhaya hai. log aisa lekh likhane k liye sonchte hai aap ne likh diya. so unhe ab JALAN ho rahi hai ki vo aisa kyon nahi likh paye. to ab ulte comment to karenge hi. main aap k lekh padhane k liye betab hoo.agar aap ka koi aisa lekh aaye to PLZ mujhe jaroor bataiye ga.
tarun_vivacious@yahoo.co.in
regard & thanku
kamina
ranchi 2010-05-29 16:44:38

kamine sale, tete ko pagalkhana jana chiye. harmjada tere ko yahi sab lkihna hai. ja apni sister ko chod be :D
not good
hrishikesh tripathi 2010-05-30 13:02:19

jise jagane ki bat kar rahe ho usko kya karna chahiye ye bhi bata hi dalte mere SHER
waah
s kumar 2010-05-31 15:54:00

waah kya soch hai aap ki. jis thali me khaya usi me peshab kiya. waah pahchan banane ke liye kuch bhi likh diya. waah us rakhi ki bi ijjat nahi rakhi jise har saal apni kalayi par bandhte ho. waah rahul waah bichar prakat karne ke dusre bhi tarike hote hai par tumne to had kar di. Khud ko reporter kahte ho tum to mujhe bhadwe lagte ho jisne apne parivaar ki saari mahilaon ko kathe par bitha diya waah. waah rahul waah keep it up....
bhasha ki gahrai har kisi ke lie samajhna aasaan n
sarika jha 2010-06-05 17:49:29

rahul ji, aapne jo likha uske saar ko har koi samajh nahi sakta, islie agar aalochnaen mili hain to ghabrana nahi sach hamesha sach hota hai kyunki aaj bhi samaj me mahilaen yun hi dekhi jati hain, aapke lekh ko agar sahi tareeke se samjhen to samaj ka aaina samne hai, aur ye sach hai ki mahilaen khud bhi iske lie doshi hain kyunki unhone kahin na kahin khud ko bhojan banakar parosa hai, aur ye kahavat bhi sach hai ki julm karne vale se bada gunahgaar us julm ko sahne vala hota hai, islie aapke lekh se virodh ki aawaj uthni jaruri hai magar shabdon ke khilaf nahi balki mahilaon ko bhojan samajhne valon ke khilaf.
Patrakarita ka Sarokaar
sushil Gangwar 2010-06-06 22:15:51

Tarun Tejpal ji ne Tehelka ke jairye puri duniya me tehelka machaya tha. Tehelka ka naam aate hai Sarokari Patrakarita saaf saaf jhalkti hai. Aaj kal ki patrakarita ka sarokaar hi nahi hai Jo man me aata hai likh dete hai . Patrakarita ko samya –samya par kowi na kowi patrakaar apni gandi soch se kalankit karta raha hai. Ambedkar Today Naam ki patrika me Bhagwan Brahma ko gali likhi gayee, bahi Sahara akhbaar me bhaddi gaali betichod tak likh diya gaya . Sahara akhbaar ka Editor bhag khakar baitha th jo gaali ko sudhaar nahi kar saka . Us reporter ko daad deni hogi jisne bhaddi gali likhne ki himagat ki ?Mai pichhle 9 saal se likh raha hu. Kabhi kabhi apne aap ko kosh leta hu. Aakhir kyo journalism me career banya . Aaj Media ka sarokaar Aameerjaado or netaoo se hai . Media Rahisho – netaoo ki dehleej ki juthan ban chukka hai. Neta or ameerjade janta hai ki Patrakaar to juthan chatne ko taiyaar rahta hai. Kya media ka star etna gir gaya hai. Patrakarita ko choutha stambha kaha jata hai . Har news site or Blog Patrakaaro ki pol khulkar khol rahe hai. Esa lagta hai ,Safal hone ki hod si mach gayee hai . Kown kitna ganda likh sakta hai, or prashidha ho sakta hai . Jab Veer sanghvi – Barkha dutt ka naam Neera radia se joda gaya to matha thank gaya . Kal tak jo aarop chhote chhote patrakaaro par lagte the. Vah Aarop hamare aadarsh Patrakaaro par lag rahe hai . Thoda sa bura laga . Fir socha chalo kowi baat nahi .Ensaan hai bahak jaata hai . Patrakarita ko barbaad badnaam karne me ham patrakaaro ka haath hai. Kabhi hum kisi neta ko dosh dete hai to kabhi kisi Businessman ko nishana banate hai . Hame samya samya par apne garemaan me jhaak kar dekhna hoga . Tabi patrakarita ka sahi mayane me sarokaar ho sakta hai.
www.sakshatkar.com
satya hai,,,par log nkr rhe hai samajhne mai bhool
ankur lamaniya 2010-06-07 18:34:57

is lekh mai, jo ap logo ko laga ki galat hai, darasal wo mahilaon ki chhavi hai, rahul g ne bhot hi paripaktta se ise shabdo mai utara hai,,zaroorat hai ise samajhne ki or iske vipreet prayaasrat hone ki
Mard Benakab : Satya Bachan
Vinaya Singh 2010-06-11 14:28:21

Stya hai Aapka Lekh..
Ise samajane kee Jaroorat hai..

Samaj ko Aaina
Sushil Dubey, Indore 2010-06-11 17:59:56

Bhai Rahul,
Aapki bhasha bevajah mastishk se takrati hai. yahi baat aap saral shabdon me kahte, toh shayad adhik prabhawi lagta. samaj ko Aaina dikhane ke lie sadhuwad.
socha to haota
k.p.pushpak 2010-06-11 18:25:45

Rahul mahila zis desh may devi mani jati hai us kai baray may bhasha sanayamit honi chahiya thi
theek hai lekin sharm aati hai bhasha par
Syed Mazhar husain 2010-06-12 17:10:21

rahul ki aapne jo likha agar uspar thoda sa zahar kendrit kiya jaye to sab samajh me ajata hai apne lekh bahut achcha likha hai aapne samaj ko aina dikhane ka kaam kiya hai..lekin mujhe bhi kucha bate buri zaroor lagi..aapne jis bhasha ka istemaak kiya wah galat hai..kuch shabd bahut hi gande hai jise sonch kar sharm aati hai..lekin aapne is samaaj me is daur me aurat ke mukaam ko bata diya hai...bas zera bhasha par dhyan de..Controll rakkhe yah sahi nahi hai bahut hi galat hai
KYA AAP LOG PATRAKAR HO?
Anand Tripathi 2010-06-17 10:24:20

Rahul media me naya hai ,koi baat nahi lekin upar jo bhi naam likhe hai unme se kitne ptrakar hai ye kaun jaanta hai..aap log bhasha ko lekar shor kar rahe hain ..kya hai media ki bhasha ?kya sirf achhi bhsha se article acha ho sakta hai?kya galat hai MAHAN PATRAKARON iss bhasha me?mai aap sab se ye sawal karna chahunga ki kya hum aisi bhasha ka upyog nahi karte ?aap logo me se kitno ne saaf sutri patrakarita ki hai?sir agar rahul ne hamaare samaj ka sahi chehra likha toh kya bura kiya ?kya aap log khawbon ki zindagi jeete hain..kai logo ne toh upar comment me apne sahi naam tak nahi likhe hai...kya ye bhi patrakar hain?
Ramesh 2010-06-17 20:46:36

Rahul ji,

Hats Off.
hud kar dee aap na
vimlesh tiwari 2010-06-18 18:56:09

हद कर दी आपने
मॉ, ममता, प्‍यार, मौहब्‍बत, और भारतिय सस्‍ंकार सभी को भुलाकर सिर्फ और सिर्फ आपने वासना को प्रमुखता से अपने शब्‍दो के जरिये प्रस्‍तुत किया है। कटाक्ष करने के लिए अच्‍छा मसाला जुटाया है। पर हमेशा यह याद रखना जरूरी है की हम सभ्‍य समाज मे जिते है। शब्‍दो की शालिनता बरकार रहे।
विमलेश तिवाडी
you are a reapist !
dinesh 2010-06-19 18:43:36

you are reaping to whole journalistic attitude by your longuage. please try to use the languge, which any want and can read
pahale lekh ko sahi se samjho tab comment karo
shailendra singh total tv 2010-06-19 19:32:19

jin logo ne bhi rahul ji ke lekh ke khilaaf comment kiye hai unhe mai bata dena chahta hu ki sachchai hamesha kadvi hoti ,,,,,,,,,use sahan karna kayaro ke bus ki baat nahi hai ,,,,,,,,,,,, unhone to keval samaaj mai ghatit ho rah rahi sachchai waya ki hai ,,,,,,,,i
Anonymous 2010-06-22 20:45:49

:ooo: :ooo: ;)) ;)) ;))
jo bhi ganda likhega kaha jayega
Syed Mazhar Husain 2010-06-25 18:59:29

Anand ji Rahul ji ke lekh par mujhe etraaz nahi lekin ya sahi hai ki bhasha aur khaas kar shabdon ka chunao galat hai main bhi 10 Varsh se Patrkarita ke Chhetra me hoon lekin aisi gandi Bhasha ka Istemaal na to maine kabhi Patrkarita me kiya hai aur na hi aam bolchaal me hi gali ya gandi bhasha ka itemaal karta hoon..aur jo bhi galat bhasha ka istemaal karega to wah zaroor kaha jayega..ye aapko bhi maanna padega.. agar rahul ji ki bhasha aapko pasand hai to aapko bhasha par ho rahi bayaanbazi par bura lagna chahiye..aapke comm. se aapki maansikta ka pata chalta. hai..rahi baat raul ke cooment ki to wah bahut achha hai sach mein rahul ne samaaj ko aaina dikhane ka kaam kiya hai isme koi shak nahii
good written
Pooja Batra 2010-06-27 22:01:41

राहुल आपकी सोच से पूरी तरह सहमत। सही कहा आपने पुरूष चाहे जितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर लें लेकिन मानसिक उपज एक ही होती है शोषण। आपके लेख पर दिए गए कटाक्ष भी पढ़े, पढ़ कर हैरानी भी हुई। अगर आपने गलत कहा है तो सही क्या है। क्या सच है पुरूषों का। रूढ़िवादी सोच,ऑनर किलिंग,बलात्कार,घरेलू हिंसा,शोषण...पहले अपने गिरेबान में तो झांके तब बात करें। अच्छा लेख...लिखते रहिए..
gggg
mukeshsharma 2010-06-27 23:02:08

lagta hai ki tunay apani maa ki kok say janam nahi liya chut say liya hai lagta hai ki tuzay tary bap nay nihi kisi dog nay paida kiya hai saly harmi ki olad
rahul ne atirek me sab likh dala
mukesh sen 2010-06-30 16:30:41

mere anusar rahul patrkarita me abhi naye hai or we iski seema nhi jante. agar we ise bhalibhati jante or isse hone wale prabho ka andaja laga lete to sayad ye sab likhne ki himmat nhi karte. ab to unke samne ye hi wikalp he ki nari samaj or desh ki bhonaon ko thes pahuchane ke liye mafi mange. kyoki ab teer to kaman se nikal hi chuka he. agr unhe patrakarita hi krna he to iska mahatwa samajhkar desh hit me iska upyog kare. inki tippni agar sahi najariye se likhi jati to wah nari ki wartman dasha ko ujagar karti par unki mansa ye sab mkehne ki thi to bhi unhone apne hi per pe kulhadi mari he..........
mukesh sen
sub editor
raj express bhopal m.p.
baat shi par tarika galat
vaibhav nayak 2010-07-05 21:57:22

sir baat shi hai per tarika galat hai,or sayad kuch bate purani v hai jo aaj syd nhi hai,mera manna hai ki hme apne sbdo ko dhardene k liye aisi bhasa use nhi karni chahiye.................
ronak shukla
ronak shukla 2010-07-08 14:01:32

मैं मर्द हूं और हज़ारों सालों से देखता आ रहा हूं कि तुम्हारी भीड़ सिर्फ़ एक ही काम के लिये इक्कठा हो सकती है. मंदिर पर सत्संग सुनने के लिये. तो क्या अगर तुम्हारा रामायण तुम्हे पतिव्रता होना सिखाता है. मर्दों के पीछे पीछे चलना सिखाता है. तो क्या, अगर तुम्हारी देवी सीता को अग्नि-परीक्षा देनी पड़ती है. तो क्या अगर तुम्हारी सीता को गर्भावस्था में जंगल छोड़ दिया जाता है. तो क्या अगर तुम्हारा कृष्ण नदी पर नहाती गोपियों के कपड़े चुराकर पेड़ पर छिपकर उनके नंगे बदन का मज़ा लेता है. तो क्या अगर तुम्हारी लक्ष्मी हमेशा विष्णु के चरणों में बैठी रहती है. तो क्या, अगर तुम्हारा ग्रंथ तुम्हारे मासिक-धर्म का रोना रो तुम्हे अपवित्र बता देता है. हम मर्द तुम्हें अक्सर ही रौंदते हैं. चाहे भगवान हो या इंसान, तुम हमेशा पिछलग्गू थे और रहोगे. तो क्या, अगर हरेक साल तुम तीन-चार लाख औरतों को हम तरह तरह से गाजर-मुली की तरह काटते रहते हैं. कभी बिस्तर पर, कभी सड़कों पर, कभी खेतों में. तुम्हारी भीड़ सत्संग के लिये ही जुटेगी पर हम मर्द के खिलाफ़ कभी नहीं जुट सकती.

मर्द या कुछ और
Soni .... 2010-07-13 18:08:21


तारीफ करनी होगी आपकी और आपके लेखनी की लेकिन अफ़सोस आप भारत में समय से पहले ही पैदा हो गए. ऐसे विचार तो उन विदेशियों के मन में भी नहीं आते जिनको हम भारतीय बेशर्म कहते हैं .या यूँ कहें की वो बहुत modern होते हैं उनमे शर्म नाम की चीज़ नहीं होती ,एक जानवर भी अपने कोख से जन्म लिए बच्चे को इस नज़रिए से नहीं देखता होगा जैसे आपकी नज़र ..है
राहुल जी तब तो आपने अपनी माँ का दूध पीते वक्त उनके उरोज को खूब काटा होगा या फिर उसका मज़ा लिया होगा.क्यूँ की आपके निगाह में माँ ,बहन, बेटी बीवी का रिश्ता सिर्फ एक है ,,और वो है ..औरत का.जिसका जिस्म आपको हमेशा उत्सुकता से भर देता है .और आप रिश्तों की पवित्रता को नहीं समझ पाते.शायद आप जैसे विचार वालों के होते हुए ही आज हमारे देश में बाप अपनी ही बेटी का बलात्कार कर रहा है .आखिर आप अपने इस लेख से दर्शाना क्या चाहते हैं....
NARI
nari 2010-07-15 09:44:46

realy wonderful
kitni sachi bat kahe hai
sach bolne ka sahas aap jase kuch log he kar sakte hai ...

ap ko sadar prnam gur ji


Wah.
Sanjay 2010-07-16 19:07:13

Rahul
Tum ek Baar Gwalior Aao,Tumko World Ka Number Patrakar Nahi Banaya Tou Humara Naam Bhi Sanjay Nahi.Hum Aapko Aisa Samaan Dengay Ke Saray Patrkaar AAP JAISA Bannay Ke Liye Carodo Baar Sochengay......Bus Ab Raha Nahi Jaa Raha Tumhare Jaisi Socj Aour Likhne Wale Ki Shakal Dekhe Bina.....
namard hai rahul gandu sala
ankit srivastava 2010-07-27 22:22:19

rahul sale tere jaisd gandu aajtak nahi dekha aur ek baat ye apni bhauna kabi public ke samne mat kehna nahi to teri gand marlegi.sale randiya bi tujhse achi hai....mahagandu doucbj douale khm
aur ye a satish bhavna alka jo sath de rehe hai in
ankit srivastava 2010-07-27 22:31:52

gandu
Anonymous 2010-08-04 17:02:12

faltu bakwas
bahas ke liy kuch nahin hai
ashutosh yadav 2010-08-05 13:18:37

es kahani me easa kuch nya nhi hai ki etne sare comments bheje jya. hairani wali bat yah hai hai ki es tarah kai kahaniya prakishit ho chuki hai. usme etna ho halla nhi tha kyonki uska sabse bda karn tha ki likhane wale sabhi varishth the. aur rahul young hai.
lekh koi bhi galat nahi hota. galat hota hai apna najriya. ki hum kisi cheej ko kis tarah se dekh rhe hai. for example ek ladki kisi ki beti hai, kisi ki bahan to kisi ki patni. usi ladaki ko sub alag-alag nagriye se dekhte hai. APNA APNA KHAYAL
Apne To Nari Ko Nanga Karke Logon ko Chaddar Dalne
Brijendra Pratap Singh,Lucknaw 2010-08-08 12:04:40

Rahul, Samaj ko aapne jis najriye se dekha aapka Najriya hai!

Aapne to Pahle Nari ko nanga kar diya fir logon se kahte ho es prkar log nari ka utpeedan kar rahe hai

soch sahi thi parntu tareeka galat,

aap patrakar hai
our Bhi maryadit tareeke se is burayee ke bare me logo ko jagrook kar sakte ho.
wah wah
shekhar soni 2010-08-11 20:16:04

rahul ji mujhe nai lagta ki aap dilli jase sahr me ptrkar ho . mere dil aur dimag me bahs chidi hai ki ki mai aap ke lekh ki dad du ya fir aapko gali du . ak bat aur kahna hai ki aap ne to likha sahi hai pr is lekh me aapke man me dabi bhwnao ko hi batane ki koshish ki hai lekin us ke liye apne ........... GALAT ......... sbdo ka chayn kiya hai jise padh kar nasamjhne wale apko gali dene ke sath jute bhi mar sakte hai ,,,,,, pr chalo koi bat nai aapke is lekh ko galt to nai pr sahi bhi nai kah sakte hai
yah sahi nahi hai auar agar hai to galat karna hog
prabhat kumar sharma 2010-08-13 17:13:40

mera manna hai ki aap ek sankuchit vichardhara ke ensan hain. abhi auar sochane ki jarurat hai. nari bahut pavitr hai aap agar sahi bhi hain to ese badalne ka prayas kijiye.
vah rahul jee
manish raj 2010-08-23 15:13:14

:D :angry: :evil: :love: :x :no-comments: :?: :( :) ;) ;)) :0 kya baath hai rahul jee
satish upadhyay 2010-08-24 17:06:04

rahul kya tum mujhse wardha me mile the . reply jaroo karna mera mobile gayab ho gya hai
satish upadhyay 2010-08-24 17:09:25

Rahul kuch kahne ke liye himmat chahiye ye sare apne aap ko saccha patrakar kahte hai . are jab inse inki jeewani likhne ke liye kaho to ye sale apne aap ko gandhi ke charit wala batayenge . lekin aapni kamio ko koi nahi dikhayega is lekh ko wahi ganda samajh sakta hai jo nari ko mahaj ek use karne wala saman samjhta hai . dont worry rahul hum badlenge samaj ko . hum hai na. i am satish upadhay , student of iimc.
जी नहीं
राहुल कुमार 2010-08-24 17:09:27

सतीश जी माफ़ कीजिएगा.. मैं कभी वर्धा गया ही नहीं
likho pr had tak
banshilal choudhary 2010-08-24 23:13:57

rahul bhai aapne apni bhawnao ko vaykt kiya hai pr is tarh ke ek sarwjnik portal pr nahi karna chahiye tha likhne ke bat ek bar padh kar bhejte to appke is wyngy me sudhar aata or samast midia jagat appka kayal hota pr ab to padh ka ghayal ho gaye hai ki patrkar bhi apne aise vichar parkat kar sir jhuka dete hai...........
banshi choudhary
reporter.......UJALA BHARAT (DAILY) JODHPUR
बीमार मानसिकता को इतना बढावा ना दे
anju singh 2010-08-25 11:42:55

सतीश उपाध्य जी ,
नमस्कार, आप IIMC ke student hai... मगर आप एक बात तो बताओ के राहुल जी ने आखिर नारी के लिए ऐसा क्या कह दिया जो इतना महान है. बेवजह किसी कि बीमार मानसिकता को इतना बढावा ना दे... हमारा समाज अब मे जो नारी के प्रति गन्दी सोच पैदा ho रही उसे सुधारने कि कोशिश की जानी चाहिए... ना कि माँ - बहन को लेकर छोटी सोच का दिखावा करना चाहिए...
अरे समाज तो वैसे ही इस सोच का शिकार हो रहा है.. और आप जो समाज और सोच को नया नजरिया दे सकते हो, आप भी उसी मानसिकता मे शामिल हो जाओगे तो सोच मे बदलाव होने कि जगह हालत और बिगड़ जाएँगे... main bhi isi sach manti hun par aap कष्ट करके सच को मानते manene ke sath sath us सच को बदलना जायदा जरुरी है ना की उसपर बोलवचन करना.

saarthak lekhan
jenny shabnam 2010-08-25 12:56:03

rahul ji,
aapke is aalekh ka shirshak dekh yahan pahunchi. bahut hin gambhir vishay par bahut spasht aur sarthak lekhan hai. streeyon ke prati aam purush ki maansikta jo sadiyon se aaj tak nahin badli, par aapne bahut sateek likha hai. bahut kam purush hote jo aisi baate likhna to door sochne ki takat bhi rakhte. udaahran aapke is aalekh par aai pratikriyaaon se spasht hai.

aapke lekh par logon ki pratikriya padhi. bahut bahut aashcharya aur dukh hua. aapne auraton ki naarkiye sthiti, uska karan aur sath hin niwaran bhi diya hai. fir kaise ye sabhi kathit buddhijiwion ke dimag mein nahin aa saka. aapke lekh ke shabd tak hin sabhi pahunch paaye jiske hisaab se unhe lag raha ki ek purush hokar purush ko gaali likh raha.
kya aise mein stree ki sthiti mein badlaav ki ummid ki ja sakti? ye pura yug bhi bit jaaye par kahin kuchh hona nahin. hum aam log hin jawaabdeh hain streeyon ki aisi sthiti keliye, kuchh purush aur kuchh stree bhi.

logon ki pratikriya padh kar yahi laga ki jaise ya to logon ko hindi samajh nahin aati ho ya fir aapse koi vyaktigat dushmani ho jo aapko vikshipt tak kah gay aur dikha dete hain jaise shabd kah gay. bahut dukhad laga padhkar.

bahut kam logon ka aapki baaton se sahmati iska pramaan hai ki logon ki soch kitni ghrinit hai. aap apna lekhan jaari rakhein aise logo ki asahmati se ruke nahin. sambhaawna to nahin par aap jaise logon ki soch se ummid zarur jagti hai ki kabhi to dunia badlegi.

saarthak lekhan ke liye bahut badhai aur shubhkaamnaayen.
satish upadhyay 2010-08-25 19:02:48

anju ji mai aapki bhawnao ki kadra karta hu lekin maine aaisa to kuch nahi likha jisse rahul ko bhadwa mila ho mai to sirf lekh ko samjha aur apni pratikriya di hai waise dekhiye ganda likhne se kisi insan ki mansik sthithi bhi waise ho ye aap nahi kah sakti . accha thik hai agar mere comment se aapko dhakka pahucha ho to mai iske liye sorry bolta hoo.
comment for this
GMalik 2010-08-27 21:48:19

Rahul
jo en logon ne tumhare against itna likh diya hai sayad unhone tumhari baat theek se padhi nhi hai.... ye sare kam buddhi wale insan hai....
en logon ne ye to padh liya ki tumne ladies department k bare mai kitna bura likha hai par en logon ne ye nhi samjha ki wo kyo likha gya hai.......
khair itna mind kisi kisi mai hi hota hai

tumne jo likha hai bilkul theek likha hai.... aaj ki nari k sath yahi sab ho rha hai... aur vah ye sab chup chap sahan kiye ja rhi hai..... par iske against uthkar jawab nhi de rhi hai.... tumne nari ki yahi soch badlne ke liye unhe jakhjhora hai ya gussa dilaya hai jisse unhe en sab k against ho jane ki motivation milegi.....
very good
tum ek achhe patrkar banne ki kabiliyat rakhte ho.......
readers ki liye
GMalik 2010-08-27 21:51:10

soch samajhkar comment karo
rahul ka mean samjho ki usne etna ganda ladies dipartment k bare mai kyo likha hai
wo galat nhi hai
chandrabhushan 2010-08-29 19:57:54

jo bhi likhe hai thik to hai lekin ab is dharna ko badala hoga vah ham jaise patrakaar hi kar sakte hai .
sandeep kumar 2010-08-31 16:41:05

Rahul ji jo kuchh b aapne likha h; vo sb aaj ki is \"mdern society\" ka kadva sach h. Lekin mahila or ladkion ke parti hamari niranter badlti soch ke liye kon jimmedar h? Agar main kahu to bazar or aaj ka media hi to iske liye jimmedr h. Aapne is katu sachai ko bebaki se rkha h ye to theek h lekin aapne iska solution nahi bataya.
Anonymous 2010-09-01 19:34:44

:ooo: :angry-red: :0 samaj nahi lga
Anonymous 2010-09-01 19:35:42

bahut hi ascha likha hai.............
Anonymous 2010-09-01 19:36:09

:D :idea: :) ;) ;)) good job........
Anonymous 2010-09-01 23:50:31

Mr. rahul, i really don\'t understand what exactly u wanna say. the way u write is not a decent one. If u think by writing such story u would fetch popularity,than believe me u have won it but the bad one. do u have sister if not than better make one, to understand,what is the sanctity of such relationship...

Try to write using y\'y sane.....

Dr.Pramod Shanker soni
free advise
journalist 2010-09-02 23:00:15

tell me first what is this.. ye lakhan ki kaun si shaily hai. isse aap kya sabit karna chahte hain aap aap ko duniya ne aurton ke halat ka ata pata nahi hai or aap india ki naari par comment kar rahe hai. amerika ke halat hamse badtar hai. aapne khud ko patrakaar likhkar patrkarita ko sharminda kar diya hai kripa kar apne vyavshay me wapas laut jaye aapki bhaduye ki mansikta wale insaan lagte patrakaar katai nahi. khud ke vicharo ko duniya par thopna journalism nahi hai iske mayne aapki soch ke pare hain. or apni bahan ki gadrai jawani ko dekhkar uncontrol hokar aise lekh dobara na likhe warna mahilaye ghar me ghus kar peet daingi

dhanyabad
Anonymous 2010-09-04 09:29:59

bachhe ko kadvi davi cheeni mein milakar deni padti hai rahul ji. I hope u will understan will not react like your most of the reader and critics.
negative way of writting i.e. negaitve feedback
dr nutan \" amrita \" 2010-09-06 15:54:35

ye aik negative tareeka hai likhne kaa ..baat batane kaa ...samaaj ko ..aur aurto ko jagane kaaa jo shaleen nahi lagta par kaam kar jata hai.. .. umda .. laikin aaj stithi badal chuki hai.. n b positive .. ab mahilaye samaaj me kandhe se kandha milaa kar apnaa yogadaan de rahi hain..
samajh.
sandeep 2010-09-06 21:51:07

mujhe to lagta hai ki tum sab comments karne wale ullu ke pathe ho khud ko bahut bada smart samajh rahe ho are sb kuch vahi samjha dega to fr tmare mind ka kya fayda jo mind upar wale ne diya hai uska bi to use kro kuch.kuch khud bi samajhne ki kossis kro ya sb kuch rahul ji hi samjhayenge .aur khud samajhne ki bjay rahul ji ko dosh de rahe ho.ek ne galat comment kiya to sare bhed chaal chl diye.aur agr khud ni soch skte to comment mt kiya kro kyoki tum is layak ni ho abi pahle common sense lgana seekho.
Anonymous 2010-09-11 00:00:30

Rahul hats off to you for writing such a wonderful piece.We as a civilised society must condemn violence against women.However,I would also like to mentioned that you have copied rajendra Yadav in toto.Even then you ad covered a very sensitive subject.Kudos to you
Anan 2010-09-11 00:10:14

Bhasha ki chori pakri jaati hai bachu Yadav je to pura teep liya tipu sultan.Ye sach hai auraton par zulm ek bara dhabba hai is sabhya samaj par aur is liye tumahi ye tipne ki khata maaf hai.Aur auratein sirf balatkar hi nahi jhel rahi jab ye muqadme court me jaate hain to wo har roz ek balatjar jhelt hai.Ek baari hi majun kahani hai.Rajasthan meek aurat ke saath balatkar hua.Jab wo thane rapat likhane pahunchi to Munshi ne kaha Byabn do aur uska rape kiya.Ye silsila SP tak chale.Mahila jab Judge ke samne pahunchi to Judge ne kaha byan do to usne apna ghaghra utha diya aur kaha aap bhi kar lo.Ye sachmuch ek Rhapar hai hamari poori sabhyata par.Aur rahul tumne sirf unke baare me likha hai jo vcases report ki jaati hain,Un se kahin jyada unrported cases hainispar ab bahash nahi solid action ki zaeoorat hai
Anan 2010-09-11 00:24:12

Chor Chor chor Bhasha ka chor,Bhavna bhi udhar ki.auraton ke zulm par likhte ho lekin tumhari purush satta waha bhi hawi hai chor maharaj kyonki rajendra yadav ki chori ki tumne to wo rajendra ka sthayi bahav hai.Tum kahte ho auron par zulm hot ahi boori baat satya vachan maharaj lekin isme bhi auraton ka dosh isme kahan ki satyata hai prabhu.
Vaise tumhara maqsad kamyab hua tumne ek controversy kahri akr di ab tumhe ek naukri mil zayegi tumhe kisi refrence ki zaroorat nahi paregi.Poori duniya zanti hai tum bhi ki you are a product of sex between your mother and father sez zise sudh hindi me kya kahte hain you know better.Now tell me can you write that.No, so please use the language which is apt for the society.CHOR CHOR CHOR CHOR chor........
ramesh raj 2010-09-11 08:26:59

duniya jab jalti hai...hay re bada maja aata hai.....bakne do duniya ko...bahut achchha likha..lage raho....
ramesh raj 2010-09-11 08:27:17

duniya jab jalti hai...hay re bada maja aata hai.....bakne do duniya ko...bahut achchha likha..lage raho....
ramesh raj 2010-09-11 08:28:26

hakikat hai ye
lajawab
saumya pandey 2010-09-12 16:55:23

behatarin likha hai,lage raho
aaena
c.k.gzr 2010-09-16 21:15:41

samaj ko jo aaena aap ne dikhaya hai ve babile tarif hai. hakikat ko svikar karna hame nahi aata. hum arop ptyarop me ulaj kar rah jate hai. solution nahi nikalte. itni hi himmat hame solution nikalne me bhi dikhani chahia.
jaisa thobra hai vaisa hi lekh likha hai
ashish 2010-09-25 15:59:44

jaisa thobra hai vaisa hi lekh likha hai
Comment
Lila Dhar Sharma 2010-09-26 18:56:50

patrkar bhaiyon jahan tak bhadas4media ke bare main janta hun ki ye website jyada patrkar hi dehte hain aur rahul g ke lekh par jin logo ne comment kiya hai wo Bhi patrkar honge . en comment karne walon me agar koi patrkar nahi hai to unke like commet ka koi mere paas zawab nahi he ya main unhe zawab dena nahi chata . aur jin patra karo ne rahul g ke leekh ki alochna ki hai aur kaiyom me toh bhut bhura bhala bhi kaha hai to main un patrkaron par patrakar hone par hi sak karta hun . main yeh toh manta hun ki rahul g ne is lekh main achi bhasa ka istemal nahi kiya hai jiski patrkaron se aasa ki jaati hai par is lekh ka galat matlab nikalna aur kuch logo ka unko challenge karna behad hi sarmnak hai .muje taras aata hai un sansthano par jinme aise patrkar kaam karte hai ... jinki kuch socne samjne ki shakti hi nahi hai .. mera manna ye hai ki ek patrkar ko sanyam se baat karni chaiye aur soch samaj kar kuch likhna chahiye kyunki uski likhi baat puri public padhti hai.. rahul g naye hai toh wazib hai ki unki bhasa patrkarita ki garima me nahi hai par jin logo ne comment diye hain wo to purane patrkar hai ....main pahli baar kuch comment de raha hun aur wo sirf isliye ki mere kapatrakar bhaiyon ke comment rahul g ke leekh ko bina samje kiya hai ya wo khud kisi khuntha se grast hai .... ho sakta hai ki meri is baat se mere kai bhai sahmat nahi honge khaskar un dr.sahab ke baare me ahna chunga ki wo apna ilaaz kisi ache dr. se karwaen..kyunki aisi bimari ka ilaz agar samay rahte nahi karwaya toh aage muskil ho jayegi.....aur rahul g se ye kahna chaunga ki aap aise leekh likhen par patrakarita ki bhasa main .....
स्त्री का दर्द...............
Avinash Vishwakarma 2010-09-27 01:41:55

वाह राहुल कुमार जी क्या लेख लिखा है आपने, आपकी सोच और समझ की मे दाद देता हू, कुछ लोग आप के लेख को समझ नही पाए,क्योकि उनकी मानसिकता गंदी है. धन्यवाद....................... :D
राहुल की मानसिकता जानने के बाद यह लगा कि
rajeev kumar 2010-09-28 20:29:57

राहुल ने मर्दों को पुरी तरह से नंगा किया हैृ राहुल जैसा व्‍यक्ति इतना गंदा नही हो सकताृ राहुल को और समझने की जरूरत हैृ हां ये सत्‍य है कि राहुल ने गंदे शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर पूरे गंदे समाज के मुंह पर तमाचा मारा है यहां राहुल को सामने मत रखें बल्कि उस गंदे समाज को सामने रखें जो औरत को बेटी और बहन को इस नजरिये से देखता हैृ इसमें राहुल उस तरह के लेख मानों साक्षात उस द़श्‍य को सामने ला दिया होृ
बहुत गहराई से ये लेख अध्‍ययन करना चाहियेृ
judgement
judgement king 2010-09-29 16:51:33

vaise mai rahul tumhri tumhari bat se agree krta hun.hmare desh me females ko aishi hi nigahon se dekha jata hai,pr hum desh ke young genration ko ye soch badlani chahiye.aaj hame male and female ko equaly dekhana chahiye. Aurat agar sita hai toh kya aurat Kali bhi toh hai, chaardiwali mai kaid agar ek aurat hai to kya aurat Rani Laxmi bai bhi toh thi ,jinhone goro ka samna mardo jaise kiya. So agar kahin bhi aurto ki condition kharab hai toh hame usse shudharna chahiye. MAI MARD HUN, TUM AURAT,BUT HUM DONO EQUAL HAI,n mai shikari aur n tum shikar.
judgement
judgement king 2010-09-29 17:06:09

upar jitne logo ne article k against comment kiye hai shayd vo gwar hai ya unki budhhi ghutno tk pahuch gayi,unko fruit ki quality dekh kar khane me koi intrest nhi unhe bas uper se fruit achha dikhana chahiye,chahe andar se jitna bhi kharab ho, meaning toh smjhe nhi ,comment dene me bahaduri dikha rahe hai,so cheap thinking...

But Rahul ur article is very nice,
MIND KO SAHI KARO
pooja kaintura 2010-11-18 13:44:36

AYE OYE BHOSDI KI AULAD JUDGEMENT KARNE WALA HOTA KON HAI TU SUKAR KAR YE ARTICLE NEWS PAPER MEIN NAHI AAYA NAHI TO ABHI DELHI MEIN HOTA BIHAR PAHUCH GAYA HOTA AUR AAGE SE AISE BADKAU BHASAN LIKHNE KI BAJAYE AAPNE DIMAG KO SAHI KAR AUR LIKHNA SIKH YE JO LOG RAHUL KA SUPPORT KAR RAHE HAI SAB KE SAB AAPNI MAA OR BEHAN KE SATH KARTE HAI TABHI TO EK NARI KI RESPECT KARNI NAHI AATI JO AISA LIKH SAKTA HAI WO TO ITNA GANDI SOCH RAKHNE WALA INSAAN HAI
bhasha aur bhavnayo par adhikaar
Sunil Ruddra 2010-10-03 14:08:38

एक अच्छे पत्रकार को भाषा के साथ साथ भावनायो पर भी अधिकार होना चाहिए . एक पत्रकार की असयन्मित टिपण्णी समाज में भयावह रूप भी अख्तियार कर सकती है .अपने आवेश को विअकत कर पाने की आपकी क़ाबलियत अच्छी है . पर पतरकारिता के लिहाज से ये लेख अपना औचित्य साबित करना तो दूर एक हानिकारक श्रेणी में रखा जाने वाला लेख है .आपकी मानसिकता को सही दिशा की जरुरत है . पर नए बने पत्रकार अक्सर ऐसे काम कर जाते हैं .खैर आपकी भड़ास को भड़ास का मंच मिल गया और आपक इतनी टिपन्नियाँ पाकर शायद यशवंत जी की तरह ही खुश हुए होंगे .यशवंत जी की ख़ुशी तो जायज है किओंकी उनके माध्यम का मकसद कामयाब हुआ पर आप अगर स्वै मंथन की बजाय खुश होने में समय नष्ट करेंगे तो भविष्य में हानि जरुर उठाएंगे .अपने बराह साल के पत्रकारिता के तजुर्बे में मैंने आपसे दसियों बर्बाद होते और जिलो में जाते देखे हैं और समय पर सही दिशा लेने वाले कामयाब भी होते देखे हैं . सो समय पर चेत जाईये ,किसी अच्छे पत्रकार की सोहबत कीजिये या फिर सिर्फ अच्छे औरपतरकारिता है ना की अपनी भड़ास निकालना धीर गंभीर इंसानों की ही .आपका मकसद नजर आ गया पर मकसद हर किसी को नजर आये ऐसे भाषा का उपयोग करना ही पतरकारिता है. जन सन्देश देना पत्रकारिता है न की भड़ास निकालना..
EK DAM KADWA.....LEKIN EK DAM SACCHA
RAVINDRA TIWARI 2010-10-06 09:49:13

MR. RAHUL,
BAT SAHI... LEKIN...... BAHUT KHI KADVE TARIKE SE KAHI APNE..... SAHI KIYA ... AISA NA KARTE AUR SACH MEETHI JUBAN MAI KAHTE TO YE BHASAN BAJI LAGTA AUR KOI NAHI PADHTA. BAS APNE GALTI YE KARDI KI APNE APKO HI HAIVAN KE ROOP MAI DIKHA DIYA ..... ISSE LOGON KO LAG RAHA HAI KI APP KI MANSIKTA AISI HI HAI....AUR LOG SAMAJH NAHI PA RAHE HAI KI AAP SAMAJ KI SACCHI TASVIR DEKHNE-DIKHANE KI KOSHIS KAR RAHE HAI.. NA KI APKI MANSIKTA .
BAT 90% SAHI HAI ....PAR AJJ BHI SAMAJ MAI ACCHE LOG HAI JO DUNIYA KO CHALA RAHE HAI. TO HAR MARD BURA HAI JAROORI NAHI .....AUR HAR NARI MAHAN HAI JAROORI NAHI.....YE TO BACHPAN ME MILE SANSKAR , AUR KHUD KI SOCH-SAMAJH PAR NIRBHAR HAI. MUJHE SCHOOL MAI SIKHAYA GAYA KI SCHOOL JATE SAMAY PARENTS KE PAIR CHHUKAR JANA. MAI AAJ KAM PE NIKALTA HOON TO BHI WAHI KARTA HOON......
mahilaon ki ijjat karna sikho
Nitish Kumar 2010-10-07 18:33:51

:angry-red: mujhe malum hi nahi chala ki aap kahana kya chahate ho aur ye critik najar kis pe..
ek patrakar hote hue bhi aishi manshikta hai.. mujhe ye kahte bara dukh ho raha hai ki aapko abhi samaj ko aur read karna chahiye..
agar aaj mahilaon ki ye haal hai to kyu????
kuch alag socho tabhi bade banoge..
fist give respect only than u will be respected
Nangi Aurat
chandrakant 2010-10-10 20:53:17

Wah Rahul ji aap bahut aacha likhtey hai. I like your matter :love: :love:
baap sabka
papa sabke 2010-10-11 17:49:42

kya rahul bhai bahut gariyaye gaye..hmmm..waise likha bilkul shi hai yaar. par thoda language na gadbad si hai...jo unko kharab lagi jo ki isme involve hain..darne ka nhe..bahut log milenge dhamki wale..aage bhi bas ek baat yaad rkhna ki koi bhi bade se bade gunda bane khud ko jab uske muh mein revolver thoonsi jati hai na to sari dadagiri pichwade se bahar nika jati hai.... sab baton ke sher hote hain bade bhai..dimag kahrab ho to tapka dena nhe to mujhe bata dena isi pr ..ek goli marunga pichwade mein salon ka aaga peecha sab band ho jayega chahe dilli mein ho ya pakistan mein..... bas dimaag acha rakho apna..saaf ..nek kahayal..dusre ki izzat ka khayal aur sabs ejyada apni izzat ka kahayal..baaki sab farzi hai..sab sale duniya ke thekedar bante hain bade aaye dhamki wale...dimag sanka na to bas...
Very Good Rahul
Dr Rahul kumar Srivastava 2010-10-23 01:36:30

:?: Hum Sabo Ko Ye Sochna Chahiye ki Kya ye Galat Likha Hai ya Sahi Aur agar ye sahi hai to hum aisa kar sakte hai ki ye naa hoye apne society mai.

Good Rahul
LAGE RAHO RAHUL BHAI..
jyotika 2010-10-23 16:16:00

:D rahul ji aapne bahut acha likha. shayad kuch log aapki baat to gehraai se samajh nahi paae.
RAHUL YOU ARE.......... FIRE
sunil bansingh 2010-10-26 02:38:52

mujhe sayad aap ki talash thi...bhad mein jayen woh log jo aapki kavita nahi samajh payen...MAIN jaan gaya ki aap kya kehna chahete hain.....MUJHE AAP JAISE VIDROHI LOGON KI HI ZAROORAT HAI.....plz reply soon. ....MAIN AAPSE BAAT KARNA CHAHATA HOON.
sahil 2010-11-02 22:23:29

:D veri good rahul
pagal frusted chora
shaktiputra 2010-11-05 20:53:42

rahul ji mai ek shaktiupasak hu aur aapke vicharo sai ahat mehsus kar rha hu ..mujhe bahaut thais lagi hai...apni ptrakarita chamkane ko maa betiyo ka topic hi mila kya..tum pariwar mai rahe ya phir janvaro ke kisi bade mai pale ho...ek chetawani bhi hai rajasthan mat aana nahi to?????
Jagaane walo ko thoda tekleef sahni padti hai
Amitabh Gupta 2010-11-07 21:50:20

Rahul bhai title mei jo likhna tha kilh diya hu.
दे और दिल उनको ....
उमा 2010-11-16 15:01:30

भाई,
लोग नहीं समझ सके राहुल को। कबीर की उलटबांसी भी तो उनके जमाने में लोग कहां समझ सके थे। और विशेषकर जब भाषा की बात हो तो शब्दशक्तियों को जानना ही होगा। लाख समझाने-बताने पर भी जब किसी को समझाना मुश्किल होता है तो सहज ही जबान पर आ जाता है - गदहा कहीं के या फिर आप तो पंडित हैं। दोनों ही स्थितियों में आशय तक सरलार्थ से नहीं पहुंचा जा सकता है। जब हम किसी को गदहा कहते हैं तो यह होता है जानवर में गदहे की स्थिति से मनुष्य में उसकी स्थिति का साम्य और यह होता है लक्षणा। दूसरी स्थिति में यह व्यंजना है। जब हम कहते हैं कि पंजाब खेल रहा है या बच्चे के खेलते बहुत देर हो गई और हम कहते हैं क्या अभी बारह नहीं बजे हैं या ऐ सब्जी इधर आओ तो हमारा आशय न तो पूरे पंजाब राज्य से होता है और ही स्थूल सब्जी से। एक पंजाब की टीम को व्यक्त करता है तो दूसरा सब्जीवाले को इंगित करता है। तो जब बात रची (बनाई, हम कहते हैं न कि बड़ा रचकर बोल रहा है ) जाए तो यह एक रचना ही होती है। कविता, कहानी, उपन्यास आदि क्या हैं? तो मेरे भाई मर्दवादी खोल को जिस निमर्मता से उधेड़ा है राहुल ने, उसमें लेखक का सरोकार और दृष्टि दोनों ही साफ है। मर्दवाद को लेकर जितनी भर्त्सना की जा सकती है, गुस्सा-गाली दिए बिना वह सबकुछ है। गाली और गुस्सा का अनुवाद नहीं हो सकता। समतुल्य अभिव्यक्ति की जा सकती है। 'आपकी आंखों में पानी नहीं है' की जगह हम कहें 'आपके नेत्रों में जल नहीं' तो क्या इसका प्रभाव वही पड़ेगा जो मूल हिकारत भरी भाषा में है?
पूरी टिप्पणी में कहीं भी, मर्दवाद की प्रतिष्ठा नहीं की गई है। जब हम चीजों को नहीं समझ सकते तो उसपर बोलकर परिप्रेक्ष्य को और धुंधला कर देते हैं। रौशनी मलीन हो तो चीजें और भी धुंधली दिखेंगी। राहुल की इस व्यंजना का हाल यही हुआ है। जिन्हें नहीं समझ आई उनके लिए तो जिगर का यह शेर समझना जरूरी है - या रब, न वो समझे हैं न समझेंगे मिरी बात,
दे और दिल उनको न दे मुझको जुबां और। जहां समझदारी के लिए संवेदना की जरूरत है, वहां भाषा की क्या जरूरत? उसे स्पष्ट करने का जितना ही प्रयास होगा वह उतना ही उलझता जाएगा। आस्ट्रियन दार्शनिक ल्यूडविग विटगेंस्टाइन ने ठीक ही कहा है - which we can't speak, we must pass over it in silence. तो जिन सुधी जनों को राहुल की टिप्पणी ने दुखाया मैं साष्टांग दंडवत करता हूं।
www.aatmahanta.blogspot.com
AMITABH GUPTA 2010-11-16 18:43:08

Sahi hai janab. jiagr ka sher baakhubi istemal kiya saheb apne.
rahul tumhare liye to pura bharat ki aur ki randi
Ela Kaintura 2010-11-18 13:14:32

look mr rahul tum ek achha lekhak ho hi nahi sakte mana ki tum ek aurat ke uper ek lekh likh rahe ho to usko likhne ki bhi tarika hota hai lekin mujhe to tumhari baato se aisa lagta hai ki tune aapni maa ko ki chhod ke aapne aap ko peda kiya hoga aur aapni maa or behan ke sath roj karta hoga kyu ki jo ek achha insaan hoga hai chahye ko kisi bhi field mein ho wo itna ganda to soch ki nahi sakta jo ganda insaan hota hai wo hi ye sab karta hai aur sochta hai tum ek nari ke liye bol raha hia na samne khade ho kar dikha mein kehti hu tum mere samne aa kar dikha to mein tujhe batati hu ki ek nari sakti kya hota hai nari najuk hoti hai kamjor nahi jo aisa sochta hai wo tum jese bhediye hote hai tera land tere samne kaat ke tere hath mein na diya na to mein ek ladki nahi samjha
bihar ka gaand delhi mein
pooja kaintura 2010-11-18 13:26:11

bihari kii oolad saala tum bihariyoo nai too gandh macha rakha hai, sala naa baap kaa pata na maa kaa naa khud kaa bhusdi ke jyaad raipe karna kaa sokh hai too ladhkoo kee gang bulwaa kar tera itna raipe karwa denga kii tuu lekhak likhna kai layak bhi nahi rahega fir apna upar likhiyoo samjha bihari pahle bihar koo sudhar jaa kar bukhaa mar rahe hoo bihariyoo kanjarooo fir aurtoo ke liyaa booliyoo bhokna wala kuttaaa jyaad boolega too aise saangat khathi karega kii tera upar nicha sab ek hoo jayega saala tum bihariyoo koo too pit pit kee marna chaiyaa saala kanjari bihari bharti hoo rakhe hai jyaad hee daam hai naa too dubara khud paida hoo kar dikha fir bhookiyoo tum bihariyoo koo too maharasth se pit pit kar bhagaya gaya tha tabhi lagata hai sab jagha gand felana kaa kaam bihari hee karta hai gadhar mai rahta hai aur gadhar hee sochta hai bhosdi kaaaaa HIV positive chal bhaag jyaaad karega too tujhe HIV HOO jayega

BIHARI NAALI KEE KIDHAA CHAL PHUT
pooja thank u...
boby sahu 2011-02-01 08:51:05

thank u pooja jo aapne ise itna gali diya sals bahut gandi soch rakhta hai apne use bahut acha kaha mai bahut khus hu ki aapki tarah ki nari jo is trike se kehti hai bahut acha laga ouja realy thank u.... :D
AMITABH GUPTA 2010-11-18 13:29:18

राहुल भाई बचके रहना . हो सके तो बहनजी से माफ़ी मांग लेना . आपके लिए दुआ करता हु आप इनके हत्थे न चढ़े |
AMITABH GUPTA 2010-11-18 13:32:47

अब ये वेब साईट कीड़े मकोडो से भर रही है| राहुल भाई इसमें लिखना छोड़ दो|
AMITABH GUPTA 2010-11-18 13:56:19

जानकर आश्चर्य हुआ की आप भी नारी हैं मै तो कुछ और ही समझ रहा था |
ela kaintura 2010-11-18 14:01:42

sukar kar jaan gaya mein nari hu kahi kali ka roop kar ke aa gayi na pata chal jayega ki nari kya hota hai
nari padegi tum sab kar bhari samjhe amitabh gupta ji
pooja kaintura 2010-11-18 14:05:05

koon kiskoo boolaa bai kida makooda tuuu aur rahul aur wo sab HIV POSITIVE JOO USKE SATH HAI
AMITABH GUPTA 2010-11-18 14:11:15

"sukar kar jaan gaya mein nari hu kahi kali ka roop kar ke aa gayi na pata chal jayega ki nari kya hota hai
जी मै समझ गया की काली का रूप भी नारी का है पर हर नारी काली नहीं हो सकती. इश्वर का अगर एक रूप हो तो उस लायक बनो| तुम्हारी बातो से तुम्हे कोई भी काली नहीं समझ सकता अलबत्ता नाली जरुर समझ सकता है जिसमे सब पेशाब करते है
ela 2010-11-18 14:17:28

tum jese gande logo ke kiye ganda band kar hi tum logo ko sabak sikhaya jata hai ek sarif ladki ko tum jese bhediye achha rehne nahi dete aur mujhe malum hai ki mein kya hu aur mein tum jese do paiso ke logo ke achhe se janti hu tum log gande nali ke kide hai aur aur logo ko bhi aapne jese samjhte hai aur tujh per saram hoti ho tu bolne ka tarik sikhta agar tu achha hota mujhe samjha raha hai to tu kya bol raha hai
ela 2010-11-18 14:19:34

tune to aapni aukat dikha di hai waha uper rahul ka sath de kar tum do paiso wale logo ki itni hi soch hoti hai aur bolte hai kuve ke medak kuve hi rehna pasand karte hai wahi medak ho tum
Taras aata hai logo par
Vinay Nayak 2010-11-21 22:29:18

Bhadaas par naya hoon | Mai nahi jaanta thha ki yaha bhi wahi murkho ki jamaat milegi jo saare desh me vyaapt hai | Lekh ki pratikriyao ko padh kar taras aata hai logo ki buddhi par ki na to ve lekh ki bhavna samajh sake aur na usme nihit teekhe vyang ko pakad paaye aur lage pratikriya dene | Mujhe is lekh ne bharosa diya ki abhi bhi aap ke jaise kuchh log hai jo morche par datey hain | Bahut badhiya, jutey rahiye, shubh kaamanaaye |
Reet 2010-11-22 16:06:33

Mai aapke lekh ke baare me jyada to nhi pr itna hi khti hu ki aaj naari ki jo halt hai us pr wo khud bhi jimeddr hai kaafi hd tk wo kyu nhi smjhti hai apni hi beti jaisi bhu ko auro ki betiyo ko apni beti ki trh jis se dekhna suru kr dengi us din jrur naari ki halat shudhrte njr aayenge.
Aapne jo tikha baan chalaya hai smaj pr wo sach me sochniy hai !
yah koi tarika nahi he
Firoj khan 2010-11-29 01:14:46

rahul baat kahne ka yah koi tarika nahi he. ek patrakar k liye to bilkul nahi. hamari aadhi aavadi ko yun avla v mat samjho.
tumhe lag raha hoga k bhavuk ho kar tum bahut achcha kah rahe ho. yadi yahi sochna he to patrakarita chod do mere bhai, yah jagah tumhare liye thik nahi he.
pratikriya
keshav sharma 2010-11-29 12:32:18

Aaurat ki vivshata aur mard ki mansikta ko kafi nange sabdo me akit kiya hai rahul ji aapane.
rajshekhar 2010-12-03 13:04:07

RAHUL JI ,AAP NI JO LIKHA HI TIK HI, AAJ JO BHI COMENTS AAP KO MILA VHO LOGONKA VICAHR HI,JO BATRUM MI BAITKAR GANA GATI HI.SACCHI DIK KAR DAR LAGTA HI INKO.AAJ KI HALAT MI ISHI HI KADVEN VACHANO KO KAHNA HI. SAYAD BOL AACHA NI HI PAR VICHAR AACHA HI
TO RAHUL JI
AASHU BANSAL 2010-12-03 19:31:55

RAHUL JI .....SHAYAD AAP JO KAHNA CHAH RAHE THE WO LOG SAMAJH NAHI PAYE.......................AAPNE NARI JEEWAN KA SATEEK VARNAN KIYA HAISHABDO ME JAAN HAI DAM HAI YAAR.................................................
zeeshan akhtar 2010-12-05 03:58:01

aashu bansal ji kya bata sakte hai ki BAHAN KI GADRAAI JAWANI bardast nhi hoti jaise shabdo me kya hai log samajh nhi pa rhe hai...
zeeshan akhtar 2010-12-05 03:50:59

hamesha se hi patrakarita samaj ko dasha aur disha deti rhi hai sabhya samaj ke nirmaad me media ka bada yogdaan hai lekin yakeen nhi hota ki aise log bhi patrakarita karne lge hai jo maa aur bahan ki gadraai jawani ko dekhte hai...agar kahi burai hai to patrkarita ka kaam use rokna hai is tarah se badawa dena nhi...
EK SAWAL hai mr rahul aapse aap parakarita me kis aim ko lekar utre hai??kya mission yhi batane ka hai ki bahan ki jawani aap ko bardast nhi hoti?? agar ye nhi h to kuch accha kijiye ya rasta badal dijiye...
zeeshan akhtar 2010-12-05 03:59:59

mere is question ka answer zarur dijiye...I AM WAITING..
ZEESHAN 2010-12-05 04:23:11

aur haa agar is subject ko lekar kuch accha karna chahte hai burai ko khatm karna chahte hai to me aapke sath hu...
Anonymous 2010-12-05 09:01:24

Sir ji likhne ki shaili ko dekhiye vyangya hai. Ab wo aap ka naam to nahi likh sakte the apni jagah isliye khud par likh kar samaj ke barey mein vyangatmak tippani ki hai.
hariom dwivedi 2010-12-13 18:39:54

bhai pahle khud padh liya karo ye language kisi patrakar ki nahi ho sakti ,aap bhi to kahin n kahi aurton ka majak hi uda rahe hai...
Aapki lekhani
Mamta 2010-12-15 19:49:11

hello
Rahul kumar ji
aapki najariya bahut hi pasand aya


Mamta
from jaipur
Aurat - Mard ki baat purani......
rajendra Upadhyay 2010-12-20 19:47:02

Vartaman samay main aurat aur mard ke beech seema rekha kheechana nainsaphi hogi. Bhartiya samvidhan main dono ko saman darja mila hai.Balki yon kahen ki aurat ko adami se adhik adhikar prapt hai to atishayokti nahi hogi.Aj aurat kisi bhi mamale main admi se kam nahi hai.Naukari,dhandha,vyapar,khel aur Prashasan main unaki hissedari hai.21wee shatbdi main abla ab sabala banane ki oor badi tej gati se aage badh rahi hai.Aise samay main purushon ko apani soch main badlaw lana hoga.tabhi jeevan ki naiya sucharu roop se chal payegi.Parivartan ,Prakriti ka Niyam hai.
nari awala hai
ravindra singh tomar 2010-12-21 13:07:57

rahul ji jis aurat ko aap awala samajhate hai [ usi aurat ne mardo ka baja diya tawala .ab ho gai nari sawala .ab mat kahana ise awala .pahale aurat pahanti thi blause ab aurat pahanti hai be lihaj pahale bhdra mahilaye pahanti thi saluka ab bhadr dikhane bali mahilaen pahan rahi hai jhawala ab mat kahana mahila ko awala
Kamaal ka karent chhuaayaa rahul bhai
Amitabh 2010-12-31 12:20:15

Maan gaye bhai. kuch desh bhakti ke barey mein aur kuchh bhrastachar ke barey mein bhi likh do to murde jaag jaye jaisa ki tumne apne is lekh se kuch murdo ko jaga diya. likh do kuch aisa ki log belagam gaadiyo ke khilaaf 279 IPC ka case darj karwane lage taaki sadko par in murdo ke rishtedar kutte ki maut na marey, likh do kuch aisa ki log seedhe collector se phone par yojnaao ke poore hone ke barey mein puchhne lage, likh do kuch aisa ki log bhrastachari netao ke ghar ke bahir jama hokar uski m... b..... karna shuru kar dein, likh do kuchh aisa ki log sadko ke khasta haal ke jimmedar afsaro ki roj unke phone par m.... b...... karein, likh do kuchh aisa ki log chunaavi wadon ko pura naa karne wale netaao ko roj ek post card likhkar unke namard hone ka ehsaas dilayen, likh do kuch aisa ki log sarkar se pay commission ki tarah price commission ki bhi maang karein, likh do kuch aisa ki bazaar mein 10 rupaye ka sarkari PSU mein bana CFL milne lage, likh do kuchh aisa ki ye murde hindustaan ko ek aisa kabristaan banane se baaz aayen jaha din mein murde chaltein ho aur raat mein apni kabragaah mein ghus jaatein ho :angry-red: .....................................................ye fehrisht sochoge to bahut lambi hogi kyonki pata nahi ye murde kin kin muddo par nahi bolte.
Kamaal ka karent chhuaayaa rahul bhai
Amitabh 2010-12-31 12:21:08

Maan gaye bhai. kuch desh bhakti ke barey mein aur kuchh bhrastachar ke barey mein bhi likh do to murde jaag jaye jaisa ki tumne apne is lekh se kuch murdo ko jaga diya. likh do kuch aisa ki log belagam gaadiyo ke khilaaf 279 IPC ka case darj karwane lage taaki sadko par in murdo ke rishtedar kutte ki maut na marey, likh do kuch aisa ki log seedhe collector se phone par yojnaao ke poore hone ke barey mein puchhne lage, likh do kuch aisa ki log bhrastachari netao ke ghar ke bahir jama hokar uski m... b..... karna shuru kar dein, likh do kuchh aisa ki log sadko ke khasta haal ke jimmedar afsaro ki roj unke phone par m.... b...... karein, likh do kuchh aisa ki log chunaavi wadon ko pura naa karne wale netaao ko roj ek post card likhkar unke namard hone ka ehsaas dilayen, likh do kuch aisa ki log sarkar se pay commission ki tarah price commission ki bhi maang karein, likh do kuch aisa ki bazaar mein 10 rupaye ka sarkari PSU mein bana CFL milne lage, likh do kuchh aisa ki ye murde hindustaan ko ek aisa kabristaan banane se baaz aayen jaha din mein murde chaltein ho aur raat mein apni kabragaah mein ghus jaatein ho :angry-red: .....................................................ye fehrisht sochoge to bahut lambi hogi kyonki pata nahi ye murde kin kin muddo par nahi bolte.
AAP NE JO LIKHA HE WO KYA LIKHA HE WO TO MEHI JAN
ABDULLA 2011-01-01 17:31:58

:love: mene suno tha k patra kar bhot danger hote he
magar aap to bahot achhe ho
iss koi jawwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwb
nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii
mera salam abdulla ke naam
Amitabh 2011-01-02 10:27:46

Abdulla ji aapko mera salam pahuche aur aagey ye hai ki maine wahi likha jo loktantra ki maang hai aur is maang ko hamare desh ki kamjor janata pura nahi kar paa rahi hai. waqt jhakjhor ke jagane ka hai.
zzzzzzzzzzz
khemchand ghirrey 2011-01-08 00:39:33

zzzzzzzzzzzzzzz
GHATIYA AUR GIRI HUEE SOCH
namrata 2011-01-13 21:57:51

:pirate: RAHUL tumhe kisi aurat ne bahut rulaya he isliye tumhare dil me saari naari jati ke liye nafrat bhari hui he isliye tumne is lekh me apne man ke saare gande vichron ko eksath likh diya............
amitabh 2011-01-13 23:44:07

RAHUL tumhe kisi aurat ne bahut rulaya he isliye tumhare dil me saari naari jati ke liye nafrat bhari hui he isliye tumne is lekh me apne man ke saare gande vichron ko eksath likh diya............
mai tere aansu pochhungi rahul. Baklol
amitabh 2011-01-13 23:45:31

hey rahul tumne kin baklolo ke desh mein janm liya tumhare jeewan ko dhikkar hai.
dard e bayan
ankur 2011-01-19 16:21:49

hi dost is lekh ko padkar sirf itna kah sakta hu tumne aurato ke us dard ki sacchai kah di jo khud aurao ki kahne ki himmat nhi
Dheeraj Sahu 2011-01-19 19:21:37

मुझे लगता है की यहाँ राहुल ने अपने बारे मे नहीं कहा है उसने तो समाज के कुछ वहशी लोगों का नजरिया बताया है, बस अंत मे यह बताना भूल गया। और आजकल हो भी तो यही रहा है चारों ओर , उसने तो बस सच्चाई बता दी है
कुछ समझने के लिये दिमाग की जरूरत होती है
नास्तिक 2011-01-20 03:54:34

मैं भी बिहार का हूं । राहुल आपने बहुत अच्छा लिखा है, अद्भुत !!!
व्यंग्य समझने के लिये अपनी पहुंच को घासलेटी सोच से काफी उपर लाना पड़ता है । काफी गलत कामेंट भी लोगों ने किये हैं। उन्हें खुद न तो कहने की तमीज है न ही भाषा का ज्ञान । हरिशंकर परसाई, राहुल सांकृत्यायन जैसे लोगों को पढ़ने के बाद पता चलता है कि लिखना क्या होता है । मैंने 21 साल की उम्र में अभी तक सैकड़ो किताबें पढ़ी होंगी । मेरे खयाल से न तो आपकी भाषा में 1% भी गलती है और न ही कहने में ।
लोगों ने जो कमेंट दिये हैं लगता है वो सब गलती से या तो पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गये हैं या इस वेबसाइट पर उन्होंने इस लेख को गलती से पढ़ लिया है । मनोविज्ञान भी किसी की समझ में नहीं आया है । सब तनोविज्ञान ही समझनेवाले लगते हैं ।
कुछ लोग भारतीय संस्कृति को भुनाना चाहते हैं । 18 पुराण और ॠगवेद(दशम मंडल) सिर्फ व्यभिचार से भरे पड़े हैं, जिन्होंने नहीं पढ़ा वो उसे अद्भुत ग्रंथ मानते हैं ।

समझ में तो यह नहीं आता कि जिनकी समझ में यह लेख नहीं आया, वे कैसे अखबारों में संपादकीय पेज समझ पाते होंगे । कैसे अपने आपको पत्रकार कह रहे हैं वो?

एक महान आत्मा ने बिहारी होने के मुद्दे को उठाया है । पता नहीं उनके दिमाग में कौन सा फितूर सवार है !
गाली-गलौज, अपशब्द सब कहे गये हैं आपको , कोई बात नहीं हाथी चले बाजार, कुत्ता भूंके हजार ।
एक डाक्टर महाशय हैं , लगता है मेरे गांव का दवा दुकानदार भी उनसे अच्छी डाक्टरी जानता है ।

ऐसे ही लिखते रहिए ।
Kadua Sach....
Suryansh 2011-01-22 22:30:44

Rahul yaar aapne is apang samaj ke samne itni unchi baat soch daali. yahan ke log sirf unchi kalar rakhne par vishwas karte hain. Ek baat to pachpan se hi sunte aaye hain ki sach kadua hota hai. Fir aise samaj ke thekedar aapne aapko uncha dikhane ke liye sach ko sunna nahi chahte. Maine to ab tak yahi dekha hai ki virodh woh bhi sach sunne ka wahi log karte hain jinki ghirhe baan khud saaf nahi hoti hai.... Yaar yahi kahunga ki aapki koshish bahut achchhi hai... Aise hi sach ko aap logo tak pahuchate rahiye aaj nahi to kal aisi soch walo par fark to pad hi jayega.
aisa kamina mard
boby sahu 2011-02-01 08:40:53

:evil: helllo rahul ji,tumne to okat kya apna kamjori dikhaya hai jis ma k pet se janma usi pe war karta hai,jo bahan tujhe rakhi bandhti hai usi pe war karta hai are dar upar ja k kya jawab dega sale tujhe bhukh hai.are tum aas pas ye sab hota dekh rahe ho aawaj uthane k bajaye uspe wang kar rahe ho ,sarm aati hai ek patrakar aisa likhta hai.jo ma khana kilati hai,bachpan se uske bade hote tak uska kyal rakhti hai ek chot us ma ko aahat pahucha deti hai wo beta aaj ma k bare mai ye soch rakhat hai,tum log kya nari ko rasta dikhaoge,gire huwe to tum ho jo ladkiyo ko istemal karne wali machine samajhte ho,tum logo ko to narak bhi nasib nahi hoga likho jo man mai aaye likho par sab jawab upar dena,ha hum ladkiya kamjor hoti hai par aaj k ug mai hum aage hai apni mardangi ko tum nari k samne vakhya kar rahe ho to soch lo tum kitne bade besaram insan ho,socha tha koi to mard hote honge jo aacha sochte hai nari k bare mai par jo ma ko nahi pujta ,bahan ko gandi najar se dekhta hai wo kya beta,kya pati kya bhai banega wo janwar hai or kuch nahi.
sun meri baat
boby sahu 2011-02-01 09:03:34

abe sale sach maitune to apni ma ko bahan ko sab ko bech kha gaya sale itna kamjor samajhta hai nari ko tu mere samne aa k dikha chhe mard le k aa black belt hu tujhe kya sab ko hijda bana dungi mar k sale ma ki ijjat nahi kar sakta bahan ki ijjat nahi kar sakta to sale mar ja,abe apne aap ko patrkar kehta hai tu hai hi nahi patrakar kyoki aisi soch patrakar rakhta hi nahi sale tu tu apni ma k sath apni bahan k sath roj karta hoga sale sex karne wali machine samaj rakha hai kya nari ko aa sale tujhe batati hu nari hoti kya hai aisa kar tu ye vang paper mai de tab tujhe pata chalega nari kya hai,isme likh k kya muh chupa raha hai sale kahi ka nahi rahega tu besaram sala teri jo santawana kar rahe hai na wo sale bhi apni bahan ma ko nahi chodte honge abe tu naga nachega road mai paper mai aa gaya to dar sale warna kide ki mout marega....
journalist
rddixit 2011-02-01 15:57:35

महोदय,
इस लेख का प्रस्‍तुतीकरण दोषपूर्ण लगा। लेख एक साधारण स्‍त्री और उसके प्रति पुरुष के वासनापूर्ण नजरिए से संबंधित है, किसी स्‍त्री विशेष से नहीं। स्‍त्री या अबला एक जाति वाचक संज्ञा है और वह किसी की बहन, पत्‍नी या मां नहीं है। जब कोई व्‍यक्ति यह कहता है कि वह सभी स्त्रियों से घृणा करता है तो इस कथन में वह अपनी पत्‍नी, मां या बहन को तब तक शामिल नहीं मानता जब तक वह उनका विशेष रूप से उल्‍लेख न करे। स्‍त्री भोग्‍या है, पुरुष उसके बारे में ऐसा सोचता है। घर में बहन की गदराई जवानी देखता हूं, पर कुछ नहीं कर पाता, यह अभिव्‍यक्ति अनावश्‍यक है। हम इस बात को सीधा लिख सकते थे जब पुरुष/मर्द किसी षोडषी या किसी युवती की गदरायी या उबाल खाती जवानी देखता है तो वासना उस पर हावी हो जाती है। बहन और मां का नाम लिए बिना भी लेखक का आशय स्‍पष्‍ट हो जाता है, स्‍त्री के प्रति पुरुष की हवस। ईडिपस ने अनजाने में अपनी मां से शादी की थी और जानकारी होने पर पश्‍चातापस्‍वरूप अपनी आंखें फोड ली थी और उसकी मां/पत्‍नी जोकास्‍टा ने आत्‍महत्‍या कर ली थी। प्रश्‍न यह है कि क्‍या ऐसी अभिव्‍यक्तियां इस लेख की प्राण हैं। सच पूछा जाए तो मां, बहन, लडकी, दोस्‍त की पत्‍नी, पोती, भांजी जैसे शिष्‍ट और स्‍नेह और स्‍वाभाविक प्रेम में सने इन रिश्‍तों पर कीचड उछाले बिना भी हम इस लेख को सजीव बना सकते थे। क्‍या ये पंक्तियां हटा देने से लेख मर जाता, तो इसका सिर्फ एक ही तर्कसंगत जवाब है नहीं, नही और नहीं। जब द्रुपद ने उत्‍तरा के साथ अर्जुन के विवाह का प्रस्‍ताव रखा था, तो अर्जुन ने शिष्‍या और पुत्रीवत होने के कारण इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था और उसका विवाह अपने पुत्र अभिमन्‍यु के साथ कर दिया था। अंत में एक ही पश्‍न-क्‍या हम इन रिश्‍तों पर कीचड उछाले विना हम भूखे रह जाते।
pashuvat soch
jiya 2011-02-02 20:31:51

:x : rahul ji aapne apne article ke madhyam se pashuwat purushwadi mansikta ko vyakt kiya hae, maen manti hoon aap shabdo ka aur achha pryog kr sakte the, pr aapne jo admi ke ander ka janwar dikhaya hae wo bakai sach hae, hm lagbhag roj hi newspaper maen aise janwaron ke karname padht rahet haen, aise logo ilaj ki jaroorat hae . keep it up pr shabdon ko thoda sabhya bana daen to pratikriyane bhi aachhi ane lagengi
Anonymous 2011-02-04 07:45:30

:pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate: :pirate:
Author should read the religious books in depth to
deb 2011-02-12 23:19:24

I read the article.
But I am surprised that how a person can post all these things without having sound knowledge.
For your kind information, Sita was sent to forest to give birth to two children Love- Kush ( For your kind information Ram- Sita were not common people, they had come to earth for special purposes).
It was important to teach the world importance of woman at time of sacred work(Rama had to keep statue of Sita to complete Ygya).

Krishna had picked the dupattas to make the girls learn and understand that it is not good to leave the clothes on shore without any girl looking after. In forest any animal or devil can pick the clothes.

Mr. Hindu religious books are full of teachings. Try to understand them in depth.
Read research work of some research worker on Krishna.

Foolish and idiot people put comments on Rama or Krishna in wrong ways.
good artical but combination of words are not okay
praveen kumar nagar 2011-02-13 15:12:46

Mr. Rahul.... Good artical but maximum people could not understand that what actually you want to highlighted in your artical. combination of your words are not so perfect that everybody can understand this. Some sentences on our sisters and on our mother must be removed from here. And then you should given some meaningfull sentences that how we can give confidence among our sisters and mother that they can fight with unsocial eliments.
ये पुरुष प्रधान समाज
Himanshu Agarwal 2011-02-13 19:02:30

:D यकीन नहीं इस पुरुष प्रधान समाज में नारी के लिए कोई इतनी गहराई तक सोच सकता है | आपने अपने लेख में नारी की असली कमजोरी का चित्रण किया है | नारी इसलिए कमजोर नहीं है की पुरुष उससे ज्यादा ताकत रखता है | नारी इसलिए कमजोर है क्यूंकि वह पुरुष को अपने आप से ज्यादा ताकत वाला और खुद को कमजोर समझती है | वो इसलिए नहीं दबती कि पुरुष उसे दबाता है | वह इसलिए दबती है क्यूंकि वह आक्रमण करना नहीं सीखना चाहती |
sahil 2011-02-14 14:43:01

rahul gi aaj ke jmane ki nari kamjor nhi he aaj ki oreat merd se aage he kise
bhi fild me dekh lo her jgeh ourt ki chelti he cchahe rasn ki dukaan ya bas me jeb kaatena
ya delhi ke serkar ya baart serkaar me kehtaa hu ki oreat ko uper
utane ke chekker me merd pichey reh gaye (ssnikkuis10@gmail.com)

rahul k pach wale sahi h
rai 2011-02-14 22:46:38

jab 1 purush apni ptni ko marta h to kya uska naam lekar bulata ? jab 1 purush ladki,beti w aort ka bltkar krta h to usko nochta to kya smjhata ? rahul ko galt batane wale pitsata k himayati h. juban h kam nhi apne ghar kitana saman tete h en bahrupiyon k kment se pata chaltah .dekho kya ho rha h smaj .wahi bahasi pan likha h rahul bhe. lage rho rahul
Anonymous 2011-02-21 19:28:36

:D good article
Mai mard hoon..........
Anil Srivastav 2011-02-27 12:29:58

Rahul, tumne khari bat kahi hai.Aurat jab tak izzat aur maryada ki bat karegi ,mard usko raondata rahega.Auraton ko is labada ko utar fakena hoga. Lekh ke liye sadhvad.
madhuri 2011-02-27 15:49:27

muje lagta he rahul ji ne aurto ko samja nhi he.ye un darindo ki badae kr rhe he ya aurato ka majak kr rhe he. aurat jukti kiske liye he. apne pariwar ke liye.apni samman ko bhulkar dusro ke liye jeeti he.dikkar he un puruso pr jo aurat ko sirf chara samajte he.aurat ko pani pr chada rhe he ap ya apke wahiyat tarike se apni ghatiya. mansikta ko jahir kr rhe he. patkar he ap samaj ka darpan he.aisa aaena mt dikhaye ki dekhne wale ko khud laj aaye.aurat ko hr pahlu se dekhega ye samaj tbi uski aabru bach payegi.vicharo ki duniya he ye.bhanti-2 ke vichar he lekin lekin vicharo ko etna khule rup me prakat krna it's really.vulgar.
itna
xyz 2011-03-05 23:56:19

hi
fgfgfgff
xyz 2011-03-05 23:57:01

:love: jkjkjnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn
manish 2011-03-06 15:28:56

लोगो की बुरी मानसिकता और कानून की स्थिति को बहुत अच्छी तरह pure गुस्से से कलमबद्ध किया है आपने
ab rahul jaise log bataenge ki mahila kya h
awadhesh mishra 2011-03-08 08:37:14

wah rahul ji wah, aapki lekhni m to jabardast mardangi h, aap n nari jati ko jis prakar s pribhasit kiya lagta h aap ke janm m sirf mardo ka hath tha,,,[chama kijiega]
is prkar k abhdra lekhan band kare aur khuch ache vichar llie apne man m,,
aap patrkar h aur aap n jo likha o navodit patrkar k lie nirasha ka bhav h,,,,
aap k ujjval jivan k lie subhkamna,,,,,
lekhan ki maryada samjhe
abhishak gupta 2011-03-11 01:31:38

Rahul ji app ke article main Samaj main mahila ki durdasa & kamuk mard ki mansikta ka accha chitran hai lakin kuch meaningfull sentences & langavge ke karan article ko best nahi kaha ja sakta app apni baat ko simple & effective langavge main rakh sakte hai app ka article padne wale samajhdar hai.
Reply
Devendra chuphal 2011-03-11 02:24:07

Rahul ji Bihar se taluk rakhte hai ..........? Tab to koi baat nahi ....Bihari ki soch ka level hi ye hai...
yuva 2011-03-11 21:10:09

आपका लेख अच्छा है, स्त्रियों के प्रति आपके सम्मानजनक नज़रिए, (जो आप कुछ ख़ास प्रकार के लोगो में न देख पाने के कारण क्रोधित हैं, व्यथित हैं), को दर्शाता है. स्त्रियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनने के लिए उत्तेजित करता लेख है. यथार्थ के करीब है, सार्थकता कम है(स्थान के कारण).

जहाँ तक धर्म ग्रंथो का हवाला दिया गया है, उसके विषये में मेरा मानना है, कि आप ठीक से समझे नहीं इसलिए अर्थ का अनर्थ हो गया. कोशिश कीजिये सकारात्मक सोचने की.
Oont ki tarah vyawahar mat karo
Babboo 2011-03-21 12:45:06

Rahul,ka lekh vicharottejak hai uttejak nahi aur ashleel to bilkul nahi. Kaya jo lekh mein likha hai woh nahi ho raha ? Registan mein jab aandhi aati hai to Oont Ret mein chupakar aandhi ke gujarne ka intjar karta hai; kintu Oonton Ret se muh nikalo aur dekho muh chipane se aandhi ne vinasleela nahi roki. Ek din aandhi ka vishal bavndar tumenh bhi uda le jayega phir----------.
Well said Rahul
Reply
aman sharma 2011-03-22 14:36:24

rahul ji aapka lekh aaj ke samaj ko ek aaina dikhata hai. hakikat me jo kuch aaj ho raha hai use dekh kar to aapka lekh 100% sahi hai... lekin yahan main ek baat kehna chahunga ke samaj me har kisi insaan ko ek hi najariye se dekhna sahi nahi hai.. aapke lekh me aapki maansik dasha ka bhi avlokan ho raha hai.. par ye lekh mahilaon tak to pahunchaiye ya sirf yahin par prakashit kar aapne apne kartvya se mukti paa li??
aapke lekh ko padne ke baad lekh ke dwara kiya gaya vyang to samajh me aaya par kahin kahin aapki vyaktigat bhavnayen bhi pravahit hoti dikhi.

overall aapke lekh ke liye aapko shubhkaamnayen.. par agla lekh likhne se pehle shabdon ke prayog par thoda sa dhyan de anyatha jis tarah ki pratikriyane abhi aapke lekh par mil rahi hain aage bhi milti rahengi....
dhanyavad
Anonymous 2011-03-22 16:25:07

apni maaa ko bhul gaya kya , ya bhi ki tu kaha se payada hua hai.soch raat bhar apni maa kooo aur naya kuch likh . tera jaisa hi samaj ko bigad raha haiiii ........
अच्छा लिखा !
विजय शुक्ला 2011-03-26 23:17:18

अच्छा लगा कि कम से कम कुछ लोग तो हैं जो असली बात समझ रहे हैं. वो बात समझ रहे हैं जिसे राहुल कहना चाहते हैं.

Anonymous 2011-03-29 12:27:47

BHUSDI KE APP TO SAMAJ KE LAYAK NHI HO MUSHE LAGTA HAI KI AAP APNE BETI KO NAHI CHODTA HAI ...........RAHUL TUM EK HINDUSTANI NHI HO SAKTE HO .............
amaryadit lekhan shailee
Dr Ajay Kumar 2011-03-29 20:50:40

mujhe lagta hai rahul mahilaoon ko kahan chata hai kee... jab tak aap khud apne liye nahee uthogee purush apke saath khilwaad karta rahega... purus uske uper apne fayde ke banaye niyam kanoon thopta rahega... kiyoonkee purus satta ke takatwar kadee hai.. kaheen na kaheen purus ne mahila ko political power se door rakha hai .. purus darta hai kee agar mahila ke haath satta lag gayee to wo usmain amool choo lparivartan karke purus ko apni janglee harkato se rok na de... kiyoonkee rahul ne kaha kee tum purus kee pichlaggu... ho sakta hai rahul ka parya ho kee utho jago aur apni apko sabit karo... parantu rahul ke lekhan shali kafee kathor aur amaryadit kahee ja saktee hai...
आप कहना क्या चाहते हैं...पहले इसका फैसला कर लीजिए.
SHIVAMM TRIPATHI 2011-03-29 21:54:22

1. भड़ास के पाठकों....ज्यादा गंभीरता से मत लीजिए इन्हें....ऐसा होता है... नए-नए पत्रकार हैं मित्र हमारे, कहना कुछ और चाहते थे....कह कुछ और गए....

2. आजाद भारत है...सो भाई ने अपने अधिकार का पूरा प्रयोग किया है....लिहाजा उन्होंने जो दाएं-बाएं समझ में आया लिख डाला...कोई बात नहीं...



Zara Sochen
Sanjeev 2011-04-01 21:32:40

Zara Sochen un kismat ke maron ke bare main, Jinke saath bilkul bipreet hua hai.
Unka kya zo bechare sirf patni ke gair mard ke saath sabandh rokne ki ekmatar wajah se jail main sad rahe hain. Sirf dahej pratadna aur maar peet ka jhuta case lagaya, aur sara parivar pati sahit jail bhijvaya.
Ek patni ne apne bhai aur pita ke saath milkar pati ko dhamkaya aur logon ke saamne usi ke upar maar peet karne ka ilzaam lagaya.
Pati ke maan baap par chori ka ilzaam laga kar ghar se bahar nikalvaya aue apne maan - baap ko hamesha ke liya apne saath rehne ka license dilvaya !

Abhi to kisse aur bhi hain doston, sunkar sab ki aankhon mein aansoon aa jayenge, isi liye unke k liye sahi manch ka hona jaruri hai !

Ye saab baten apni aankhon se dekhi hai, aur solah aane sach hain !!

Kya Mr. Rahul ki kalam in baton se anbhigaya hai Ya yun kahen ki Rahul ne jindagi abhi dekhi hi nahin hai !
अनुपम दीक्षित 2011-04-05 10:00:27

राहुल ने असल में पुरुष मानसिकता पर व्यंग्य कारना चाहा है साथ ही स्त्री को उसके आत्मसम्मान के लिए भी जगाना चाहते हैं पर चूंकि अभी नादान हैं ऐसा कर नहीं पाये हैं। भाषा एक पैना औज़ार है जिसे यदि सही दिशा और ताकत के साथ इस्तेमाल किया जाए तो भेद देता है पर अगर दिशा गलत हो तो धार कुंद हो जाती है। राहुल चूंकि 5 सालों से दिल्ली में हैं और केवल 2 महीने से पत्रकारिता में तो इस त्ररह की कुंद शैली के लिए फिलहाल माफ किया जा सकता है और अगर फिर भी ये ऐसे ही लिखते रहेंगे तो इनके ही शब्दों में हम इनका क्या उखाड़ लेंगे हाँ अपनी इसी पीत पत्रकारिता शैली के कारण ये आखिरकार उसी जमात में शामिल हो जाएंगे। पत्रकारिता के पेशे में आपकी सफलता के लिए शुभकामनाएँ।
अनुपम दीक्षित 2011-04-05 10:07:55

एक बात और राहुल जी यदि यहाँ कुछ लोग आपकी बात समझ रहे हैं तो फूल मत जाइएगा क्यूंकी इसमें आपकी नहीं उनकी बुद्धिमानी झलकती है। एक अच्छा लेखक वही है जो भाषा की संप्रेषणीयता का भरपूर प्रयोग करे। एक सफल पत्रकार वह है जो जनता की बात जनता की भाषा में कहे। तो आप जो कहना चाहते हैं और अधिकांश लोग उसे गलत समझ रहे हैं यह स्थिती एक पत्रकार के लिए बहुत बुरी है और खतरनाक भी।
Vikash Ranjan 2011-04-29 12:53:13

बहुत खूब...कई लोगों को इसकी भाषा तो समझ आई और उन्होंने आलोचना कर डाली...ऐसा इनलोगों ने इसलिए किया क्योंकि इन्हें आपके कहने का मर्म समझ नहीं आया...अगर आया होता तो आपकी तारीफ ना सही आपकी गंदी आलोचना नहीं करते...पत्रकार का अर्थ सिर्फ ये नहीं कि हम ख़बरों की ही बात करें प्लेन शब्दों में...पत्रकारों का रोल इससे कहीं ज़्यादा है समाज को सुधारने में...आपने अपनी अभिव्यक्ति से पुरुषों की कुटिल मानसिकता पर अच्छी चोट की है...
bakws
rahul 2011-05-02 17:55:41

:0 :pirate:
yeh galat bat hai
yeh ak nari ka apman hai.
aur likhane wale tu
gadha hai.
age se aise bakwas likhana nahi
A.Jain 2011-05-08 18:53:36

Rahul ji, This is the first time i am writing for any blog. I surely want to praise and give u shaabaashi for your daring approach. Jo mahaan vibhutiyan aapki bhaasha par kataksh kar raheee haen unhe ye jaanane ki zaroorat hae ki jo kadva sach unko sun ne/padhne me bhi bhaari lag raha hae, use saari naari jati sadiyon se apne bhavuk hriday aur komal tan par sahtee aa rahee hae. Jinko aaj ye sunane me sharam aa rahi hae,unhe auraton ke saath zyadtiyan karte vakt,apna vahshipana dikhate vakt sharam nahi aatee? Karm bura nahi lagta, aurton ko nanga karne/dekhne ka lobh bura nahi lagta par Rahul ji ki bhasha buri lag rahi hae !
Jo zyadtiyan tum purush aurton par karte ho uske ehsaas k liye bhasha bhi shaleen chahtiye ? !!! WAH ! SHAME ON SUCH PEOPLE .
dileep kumar 2011-05-14 19:39:02

as very good
dileep kumar 2011-05-14 19:40:44

pls sand by my mail
ahish arora 2011-06-06 15:17:13

:D a stupendofantabulous note bro
Anonymous 2011-06-28 10:54:55

:D :love: :idea: :evil: :angry-red: :x :ooo: :pirate: :?: :( :0 ;)) ;) :) :) :sleep:
Bahut Khub !
manish singh 2011-07-01 18:39:16

kya baat hai rahul ji, aapne ek dum sahi lekh likha hai. Sach thoda karwa hota hai lekin aapne jo samaj m phaili kuchh logon k mansikta ko bayan kiya hai aur stree ko jagane ka kaam kiya hai wo kabile tarif hai. Rahi baat upar kuchh likhi aalochnaon ki to, kahawat hai yadi aap aalochnaon s ghire ja rahe hai to samjho aap tarakki kar rahe hai.... Apki aawaz logon tak jarur pahunchegi....
tu gadha hai
vikaashwani 2011-08-02 14:22:10

tum kaisy paida huye ho main nahi janta per itna keh sakta hun ki tum....................koi shak nahi hai gadhy ho
nutan 2011-08-25 17:27:38

apaki bato se mai sehmat hu lakin agar language pe thora dhayan diya jata to behtar hota...ise padh kar aise lagta h jaise ki aap samajh ke logo pe apana gussa utarna chahte h aur bahut had tak utara bhi h apane.aaj life bahut fast ho gayi h,log bahut modern ho gaye h lakin chote sehro ya fir gawo pe mahilao ke halat ab bhi aise hi bane huye h.bahut se logo ko apaki bat pasand nahi aayi h ya fir aisa keh sakte h ki apaki language ko logo ne galat tarike se le liya h isliye agar aap next time likhane ke pehale is bat ka khayal rakhe to padhane wale logo ko sayad apaki bat jayada samajh aaye....
Really nice,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
Poisson 2011-08-26 01:59:54

very very gud lekh, dekho julam karna nhi julam sehna bhi paap hai, means ladkian julam seh k paap kar rhi hai, RahuL ji k iss lekh se kuch ladkian gusse mein bhadak jayengi, or kuch buree ladko se savdhan rhengi, and unka virodh kar k safal hongi, means rahul k leskh mein smjak k liye ek sabak hai,
Anonymous 2011-09-03 15:50:06

:angry-red:
shbdo ka glt prayog
Neha Mishra 2011-09-03 21:04:43

nmshkar rahul g lekh m likhi batey kuch hd tk nari ki khud s chl rhi ldai ko darshata h pr jha bat apke shbdo k pryog ki h wo ek mul udeshy dene mai asmarth rhe hai ....baki abi mai ptrkarita ki chatra hu aasha krti hu aap age bhi bejhijhk lekh likhte rhengey
Anonymous 2011-09-17 10:19:21

aapne kutte kamno ki harkate toh bta di lekin unko koi sabak nhi diya...yeh padh k ais akuch nhi lga...bt un sb kutto k liye jo aisa sochte hai aaj ki aaurtein sb ka verodh kr rhi aur safal bhi ho rhi hai....
average
Ramanuj 2011-09-17 15:25:31

aagar aap ki bhavana aisi hi hai to aap ke charo taraf vaisi hi urgaao ki anubhooti hogi. aap mai aur janvar mai koi antar nahi rah jayega. atah aap se vinamra nivedan hai ki kripya koi urja pradan karne wali cheezo ko likhe
Hindu nahi ho tum
nicky 2011-09-30 23:06:39

Naam tow tumhara Rahul hai par tum hindu nahi ho aur na hi aurat ke bare main kuch jante ho. Ho sakta hai tumhari sangat ka asar ho ya hinduon ke beech chup chap rahane wale suar ho.
Mashhoor hone ke liye to nahin...?
Sanjeev 2011-10-03 19:40:13

Rahul ji, main nahin janta ke ye aapne kya soch samajh kar likha.. ya aapke dil mein aisi kya baat hai jo apko ye sab likhne par mazboor kar rahi hai... par shayad hakikat mein dekha jaye to aap is ke dwara apni maa ko doshi bata rahe hain, jisne aapko is duniya mein laya...
Main nahin janta ke ye sab jo aap keh rahe hain yaa kar rahe hain,, sirf MASHHOOR HONE KE LIYE KAR RAHE HAIN YAA... par ye sockiyega ke aisi publicity paane se aap kya paayenge.....
Agar aap mein itna sab kehne ke baad thoda sa dimag bacha ho to phir ek baar is sab ke barre mein sochna... aur realise karna......
Shayad isi mein aapka kuch prayschit ho jaye........
Galat Shabdo Ka prayog kiya gaya, mardo ko bahut h
Rupesh Kumar 2011-10-04 23:23:03

wah rahul ji.
rahul ji apne jo likha use padhne aur samjhane ke baad mujhe laga ki apne jo kuchh likha hai wah kahi na kahi to sahi hai but apne likhne me bahut ghatiya shabdo ka prayog kiya hai aur sath hi sath apne 100% mard ko samil karke bahut galat kiya hai kyunki jis din sabhi mard is tarah se ho jayenge us din ye duniya hi nahi rah jayegi.
Mr. Rahul Ji aap journalist hai likhiye but is baat ka pur-2 dhyan rakhiye ki apke dwara jo shabd prayog kiye ja rahe hai wo hinsatmak na ho, nahi to kabhi lene ke dene pad jayege. :angry:
sorry
pooja 2011-11-01 21:33:48

Mr.rahul............bohot acchi baat ki hai kam se kam aap admiyo ko apne janvar hone ka pta to chala khud ko janwar btaya es k liy thnxxx....per aaj kal ki aurt agar badle per aajaye to tum admiyo ko 85 thousand ko nhi sari admi zat ko ghaseet kar wo hal kare ki tum soch bhi nhi sakte per hm abhi chup h..tum logo ko nokri karne m to kutto ki trha bna diya hai aage dekhte jao..
pooja 2011-11-01 22:35:26

rahul tum insan khne k layak nahi ho apne hath me kalam pakadne se accha h chudiya phn lo....etna ghatiya likha hai aur ha shyad tumhe doctor ki zrurat hai
achha bolana insan ka kaam hai
avanindra kumar 2011-11-03 14:47:03

aap 1 achhe insan banane ki koshish karen. logon ke khoon ko bharka ke unka keemati samay bachane ka punya uthayen

achha bolana insan ka kaam hai, bhook to kutta bhi sakata hai. please-------------thanks
ghatiya
Anoushka Agnihotry 2011-11-05 15:32:16

:angry-red: likhna hi tha to kuch accha likhte aisi vahiyad kavita likhkar sharam nahi aati.
भारत माता की जय
भरत अली सिँह भटेले 2011-11-11 16:35:45

राहुल कुत्ते तुमने ना जाने किस घटिया सोच के चलते इसे लिखा है... भारत माँ का अहसान भूल गया तू, अपनी माँ के दूध का कर्ज भूल गया तू, ... कमीने जब तक मैँ इस धरती पर हूँ तब तक तेरी इस घटिया सोच की धज्जियाँ उडाता रहूँगा. कमीने तू धरती माँ पर बोझ है. 9425738217 मेरा नंबर है, दम है तो बात कर लेना, अपने खून की आखिरी बूँद मैँ कहता रहुँगा, नारी शक्ति जिन्दाबाद. भारत माता की जय. वंदे मातरम्.
Rahul ka Ganda Lekh.
Dr. Aar S Dixit 2012-05-09 14:22:54

My Dear Bharat Ali Singh Bhatele,
मैंने आपका गुस्से में भरा प्रत्युत्तर पढ़ा, अच्छा लगा ।
राहुल जैसे तथाकथित पत्रकार को सही जवाब किसी ने नहीं दिया । आपने प्रयास तो किया, धन्यवाद । जो आदमी माँ के मान पर चोट करे उसे तो उसकी माँ ही जहर दे कर इस दुनिया से रुख्सत कर दे तो शायद धरती का भार कुछ कम होता । जिन शब्दों का प्रयोग इस कीचड़ के ढेर ने अपने \"महान\" लेख में किया है उस के लिए यह मामला भारत के उन महिला संगठनों को उठाना चाहिए था जो स्वयं को महिला हित की संर‍क्षक मान कर चल रहे हैं । यह मामला मात्र online बहस का नहीं है । इसे सरकार की सही संस्थाओं तक पहुँचाने की आवश्यकता है । यह मामला महिला, जो कि सर्वोपरि रूप में मातृशक्ति है, के सार्वजनिक अपमान का है । इसे 354 IPC में सीधे हवालात में बन्द होना चाहिए था । इसके साथ ही कानून के जानकार लोग यह बता पायेंगे कि कानून की किन अन्य धाराओं में इस आदमी के खिलाफ मामला दर्ज हो सकता है । इस आदमी ने भले ही शारीरिक रूप से किसी महिला का बलात्कार न किया हो फिर भी मानसिक रूप से महिला के पवित्र स्वरूप के साथ बलात्कार तो किया है । ऐसे आदमी को बख्शा नहीं जाना चाहिए ।
RAJANI 2011-11-14 14:36:17

HI ! RAHUL, TUM EK PAGAL ENSAN HO, ARRRRRRRRRRRE MUJHSE GALTI HO GAYI TUM TO ENSAN KAHLANE KE LAYAK NAHI HO, KYA TUM APNI MAA KE SATH AISA KARTE HO JO ES TARAH LIKHA HAI TUMNE, TUMHE TO NANGA KARKE, GARAM TEL ME TALNA CHAHIYE, TUM TO NAMARD HO, HARAMI KUTTE AURAT SE PAIDA HUE HO OR USI KO JANWAR SAMAJHTE HO SALE PAPI
lalit 2011-12-08 17:34:43

mr. rahul ne jo likha hai wo women ko nicha dikhane ke liye nahi likha balki purusho ke atyachar samne aaye aur aurte in atyachar ke khilaf aawaj uthaye, is aashay se likha hai. aur mujhe bhi yahi prerna milti h ki aurto ke upar atyachar khatm ho
bakwas
umesh 2011-12-11 00:58:16

:angry: bhai sahab ab se likhna band kar de......
puja
puja 2011-12-15 13:52:27

lagta hai rahul jee aap ko mard hone ka bada guman hai.aorat ke liye aap ki soch bahut galat hai. :ooo:
Anonymous 2011-12-27 15:17:31

:angry-red: what non-sense I hope you are the person who need help from your doctor to check up .........
katty 2011-12-28 16:14:21

Rahul kumar tu mard hai hi nahi tu hijda hai. Kyu ki asli mard wahi jo aurto ki ijjat aur rakhsha kare. tera paapo ka ghada jald hi bharega. Yaad rakhna jin aurto ki tune kamjor bataya hai unhe jis din gussa aagaya toh woh chandalini ka roop bhi le sakti hai. Aur itihas gawah hai aise paapiyon ka naash karne ke liye deviyon ne maa durga kaa roop dharna kiya hai. Tujhe toh narg mai bhi jagah nahi mil sakti kyuki narg ganda ho jayega. Ek din aisa aayega jab tu maut ke liye tarsega aur maut bhi nahi aayegi,tadap tadap ke marega aur us waqt naa teri maa aayegi naa biwi naa behen naa beti tujhe bachane ke liye. Kyu ki karodo aurto ki baddua tere saath hai. teri laash ko cheel kauke khayenge aur pikar kutte ki maut marega tu.
Rahul chuitya
Aalochak 2011-12-29 00:59:27

ye rahul kumar itne bade chituye hain... itna lamba lekh likhne ke baad bhi ani baat naih keh paye.. aur striyon ke liye matritv ya sewa ka bhav bhi hona chahiye,,, ye is betichod ne nahi likha kahin bhi....sorry that i am using abusing language.. par is haramkhor ke liye yahi sahi hai
sharm aane chahiye...
Rahul Rai 2011-12-29 14:42:39

Hey Rahul Kumar ji..
Aap Apne aap ko ek patrkar kehte hai aur is tarah ki ooche baaten karte hai..

bahut dukh hua yeh padh kr ki apne me, MAA, BEHEN, BETE, aur BIWI jaise pavitr rishton ko bhi nahi baksha

maine apke sadbudhi ki kamna karta hun ..

aur asha karta hun ki aap jaldi is lekh pr ek CHAMA patr bhi likh kr nari jate se MAAFI mangege..

Tum Dunia Ke Sabse Bade Madarchod,Bahanchod,Randic
V. K. Chandra 2012-01-11 21:33:18

:( Tum Madarchod Dharti Ke Bojh Ho :0
V. K. Chandra 2012-01-11 21:34:24

:0 Ye Madarchod hai
V. K. Chandra 2012-01-11 21:35:03

:0 :0
V. K. Chandra 2012-01-11 21:35:39

:ooo:
V. K. Chandra 2012-01-11 21:42:00

:ooo:
swapnil yadav 2012-01-23 06:57:57

:x aapne jo bhi likha wo sahi tha aaj ki mard adhiktar yahi sochte hai mai aapke khne ka mtlb samjhti hu aaur rahi baat jo sab kh rahe hai ki aapke baasha gandi hai tho kya wo aaj tak aishe baasha nhi bole hai kya wo kabhi gaali nhi diya hai kya wo kabhi kisi aaurat ko ess najar se nhi dekhe hai.aapne tho bas ye likhe ke bataya hai ki aaj aakhir ho kya raha hai jisse sun ke eeen logo ko bada bura lag raha hai kuki sayd kahi na kahi ye bhi essme bhagidar honge
swapnil yadav 2012-01-23 06:59:17

plz ha koi bura mat mannna bas ek baaar dimag se nhi dil se sochna phr aapko lagega ye kuch had tk sahi hai
swapnil yadav 2012-01-23 07:00:19

and i ammmmmmmmm sorrrrrry if i hurt any offfffff you.
Aarya
Amol 2012-01-26 16:27:52

:angry-red: Baat aisi likha karo jo log samaj sake.
aur rahi ladies ki baat to wo kudh hi samarth h aapni laj rakhne mein.

jo aurat tumhe janam de sakti to wo tumhe mar bhi sakti h.
ye baat kabhi mat bhulo !

please aesa na likho
zubair 2012-01-27 00:14:31

mr rahul insaniyet manvta aur sabhy sanskaar aapne sab ki dhajjiyan uda di izzat karna seekho ummid karta hun aap aesa nahi likhoge
deepak malik 2012-01-29 14:26:23

i like ur article
bt yr mard itne bhi gande nhi hote.
mai manta hu ki aaj bhi kch gaon me esa hota h bt aapne to desh k hr mard k sir pr ye baat daal di dats not fairrrrr.....
Anonymous 2012-01-30 15:59:45

rahul ji mai kewal sabaka lekh padhata hun lekin pahali baar camment hai mera jo kuchh aap ne likha SHAYAD SAHI HAI par karata kaun hai ham mard akhir kyon.....
isko rokie yadi kahin hota hai to...................
cvc
kamale rajkiran v. 2012-02-06 14:17:17

:angry-red:
Deep thinking
Arvind Singh 2012-02-10 03:54:03

Rahul Ji ke kahe hue shabdo se bahut logo ne shikayat ki par kisi ne unke shabdo me sachchai nahi talashi.... unhone jo kaha hai wo satya hai..or wo khud ke naam se samaj ko sambodhit kar rahe hai jai aurat ko ek daasi, ek jism samjha jaata hai.dhanya hain hum bhartiya jaha ek taraf aurat ko durga ka roop dete hai wahi dusri taraf unhi surato ko hawas bhari nazro se dekhte hai... hum chahe kahi par ho par aurat ko sirf hawas bhari nazro se dekhte hai...or isme dosh sirf humara nahi hai in aurato ka bhi hai... ye hume sehen karti hai...humara har jurm bardast karti hai...or ye tab tak hota rahega jab tak ye aurate khud ko laachar or bebas maanti rahengi...jaha aurat durga hai,kaali hai wahi ye aurate khud ko kamjoor maanti aa rahi hai... aisa kyun??????? :)
hi
satyendra 2012-02-13 23:23:16

hu
satyendra 2012-02-13 23:23:42

hi
achha bole soch kar bole
ratan 2012-02-17 01:36:36

mujhe lagta hain rahul ji ne likhna achha suru kiya tha lekin bhatak gaye aur apna lekh unhone las me pda nhi aur dal diya. jo aisa krte hain unko dosh na dekr aisa saja bhugtne wali ko hi doshi bna rhe he aap. jara apna lekh sahnt hokr pde apni galti samajh me aa jayegi aap ko.
SAMAJ SUDARK HO TO TUM JAISA
narendra kumar gond 2012-02-26 17:19:27

Dost mai aap ki bhawnaon ko smajh gaya nari jati ko aap ne jis tarah lalkara hai maja aa gaya bhai ab ispar bhee agar nari jati apne shakti ko na samjhen to kya hoga aap ne jis dhara prawah me unke dard ko bayan kiya hai mai smjh gaya sach dost jo schchai hai kah dia nari apne upar ho rahe attyachar ko samajh sakti hai wo jis tarah stsang ke liye ek jut ho kar jati hai apne uper ho rahe attyachar ke khilaf awaj utha saki hai aap ne unke dard ko smjha bas kahne ka andaj gajab ka nirala aap ki bhawnawon ki kdra karta hun dost aap ka ijhar itna jordar hai to aap ka ikrar kaisa hoga aap ek schche samaj sewk ban sakte ho aap ne to nari jati ko jhagjhor ke rakh dia yar good good very good mai aap ke dard ko smsjh gaya.gog blase you
raj gahlout 2012-03-04 18:08:33

tum likhte ache ho lekin bhul gaye nari ka wajud kewal competition se nahi hain balki purush our nari dono ek dushre ke purak hain adhikar dena our adhikar lena dono main antar hain isleye kahana chahta hun adhikar dene se pyar badhta hain our adhikar lene se nafrat. patrakar ho aise baton ko hawa mat do jisase nafrat badhe samjhe to thik nahi to GOD BLESS YOU ! :idea
AFSOS
Krishan Kumar Delhi Rajiv Nag 2012-03-16 21:59:01

Main yah soch Raha hoo Rahul Asaa kis Soch sai Likha hai Bhain Maa or bati kai US Insan Jo Desh Kai Liyai Khatra hai agar koi aisa Karaga To Maa Bhain Bati aurat Parivar Ki sabhi Ladis Par Sai Viswas Uth Jayiga Aisa Nahi Hona Chaheai
Dukh ki baat hai.
Tejesh Sharma 2012-03-18 19:33:03

Kisi ne mahilao ko nicha dikhaya to kisi ne khud ko ucha par kisi ki himmat nahi ki sach ka samna kar sake kya we log jo Rahul ko galat sabit kar rahe hai we log ladkiyo ke breast ko dekhne me maja mahsoos nahi karte kya bina chuye unhe aankho se nanga nahi karte par kya kisi ne khulkar sach kaha besahara ki madad ki agar ha to garv mahsoos karo ke hum sab bhartiya hai aur samna karo aur paap ka nash karo papiyo ka nahi.
keep continue
swayam 2012-03-27 16:59:33

acchchha likhte ho,likhte rehna.
Anonymous 2012-04-05 17:16:57

100% sachch baat kahi aapne bhale hi aapne bade katho sabdo me likha hai
bahut badi bakvaas hai a
sanjeev payasi 2012-04-11 23:21:44

:pirate: kya likhte rahte ho yaar kuch naari k prati samman to rakhna chahia
Anonymous 2012-04-21 15:32:30

rahul g ap apni lekhni sudhare fir ptrkar bne
wah!
sonia kanojia 2012-04-27 16:14:30

:evil: wah! aise ache shabdh kahan se mile
shabdon pe na jaiye.. Bhawnaon ko dekhiye
dhananjay kumar 2012-04-27 18:28:37

shabdon pe na jaiye.. Bhawnaon ko dekhiye
ladkiya
ankit 2012-05-14 11:08:28

ladkiya hot hoti hai chuche acche hote aur lund khada krnae mai muh ka prayug krti hai..
ladkiya
ankit 2012-05-14 11:10:04

chut madhu mast hoti hai lund ko chan milta hai ..sukun milta hai
shirshak galat hai
Najmaa 2012-05-15 15:44:08

achcha hot yadi shirshak dete \' main kutta hui\' oh nahi kutta to vafadar hota hai. shayad suar sahi hai. vaise aap khud mard shabd ko gali banane ki koshish kar rhe hai. kafi had tak kamyabi mili hai.
bhagvan apko sadbuddhi de...
Sahil 2012-05-20 16:35:34

Bhagvan apko sadbudhhi de. taki apke man me achhe vicharo ka janm ho. aur nek baton ka prachar karen.
Jago hamare Desh ke nariyo jago
Prem 2012-06-13 14:17:13

Thank Rahul ji , aap ne jo Samaj ke galat vicharo sudhar ne ki sms diya hai.
Bahut badi bakwas
Savita 2012-06-14 13:37:40

aap jaise gande log b is dunia me hain yakin nhi hota. Ja k kue me dub ja kutttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttteeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee :0
राहुल कुमार कहिन - बातों बातों में
Agyatkumar 2012-06-16 22:44:43

हमारे सविंधान ने वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी जरूर दी है लेकिन ऐसी आजादी नहीं दी है जिस से किसी वर्ग विशेष की भावनाओं को चोट लगे या जो देश की संस्कृति के विपरीत हो या जिसे सभ्य समाज स्लील ना समझता हो या जिससे देश से अशांति फैलने की आशंका हो.

राहुल कुमार जी ने जो जो लेख लिखा है वह साफ़ तौर से मानसिक रूप से विकृत आदमी की करतूत लगती है, ऐसे कई जुमले सार्वजानिक शौचालयओं में लिखे दिखते है जिन्हें जितनी जल्दी हो साफ़ करने में ही समाज की भलाई है.

इसलिए तुरंत इस लेख को भी website से हटाने में ही समाज और देश की भलाई है नहीं तो राहुल कुमार जी जैसी विकृत मानसिकता वाले लोग इस वेबसाइट को मस्तराम की खुली किताब बना देंगे.

अज्ञात कुमार
maro saleko
jivan 2012-06-25 10:46:29

rahule (lagtahe bihari he) ko jara side lake thoda bahut samjhana hoga.
for mr.rahul kumar
todays woman 2012-06-25 15:08:51

aapki mardo ki soch ketni gandi hoti he vo dikha rahe ho....
are sarm karo ladkiyo k bare me asa likhte ho
vo ek jamana tha jb ladkiya tum mardo ke julm saheti thi lekin ab vo din nhi rahe samje....
or vo mard hi kya jo apni mardangi orato pe dikhaye ,ase mardo ko to mard kahelane ka bhi haq nhi he
so same on u rahul kumar... : :angry:
same
VIKRANT PANDEY 2012-06-26 19:07:56

RAHUL JE SAMAJ MAI ADHURA GYAN BATNA GANDI BAAT HAI.....javascript:JOSC_emoticon(\":angry-red:\";)
apni maa behan ko b chod k aaaya hai kya kuttttttt
Unknown 2012-06-29 13:53:06

kamine ullu k patthe.............
jitni galiyan do utni kam hain
:evil:
sachayee ko samne lane vala lekh
rajesh 2012-07-06 21:13:30

priy sathi,
krantikari abhivadan

apke lekh ko pahekar acha laga. jis himmat our samajh ke sath apne samaj ke sachhayee ko samne laya hai, uske liye apko salam. chleye issee bahane bahut sare logo ke soch bhi samne aa rahi hai. purusho ko agar is lekh me kuch galat lagta hai to unhe us kuyen k medhak ke tarah sochne k bayay kuch is tasveer ko badlne ke taraf hath badhana chaheye.

aandolan k sathi..
rajesh
awaz india 2012-07-12 00:07:28

ye aap ne jo bhi likha hai wo galat hai ye sab likhne se logo ki mansikta badle gi nhi balki aur zayada kharab ho jayegi.plz aap aisa mt likhya shayad aap nhi jante ki inka assar hmare samaz pr kitne padta hai agar aap kuch likhna chate hai to kuch aacha likhye sacchai ko duniya ke samne lane ka liye ya phir samaz ko badlna ka liya kuch aisa likya ki sacchi bhi logo k samne aa jaya aur aur unki mansikta pr aacha assar ho.shayad aap ko meri baat aachi na lage pr ye sach hai.is samaz me kuch aisa mansikta ke maa- baap hote hai jo apna beteyon ko lekr bhut protective hote hai.agar aisa parrents padhyenge to apni betiyon k saath dene ka bajaye un k liye darte hai.ye sirf ladkiyon ke liye hi nhi balki ladko k liya bhi hai.unke parrents bhi apne ladko pe shak krte hai.infact hmara samaz me zaydatar ladki ke parrents yahi sochte hai ki jo wo padh rahe hai ya dekh rahe hai wohi sach hai.Isliya meri baato pr plz gouir kiziya baccho ke mata-pita ko protectable banaye lekin belevable.Iam sorry Mr.Rahul kumar agar aapko mere baat buri lagi ho.bt its true hamare society me aadha se zayda log yahe sochte hai jo aapne likha hai wo issa sahi mante hai.so plz issaye badlne ki koshish kiyjiya.kuch aisa likhye ki log in cheezo ko galat manna unki socha badle wo sabhi ko ek puja ya siddhat ki nazar se dekha na ki hawas ki naza se.
Brilliant!
Afreen 2012-07-18 05:10:07

Very well written and spot-on. Sadly enough(and as expected), the sarcasm is lost on most people here. I sincerely hope the editors/your bosses (like most other people) did not misunderstand your post and take a stern action against you for this post.

Best wishes and good luck!
ravi 2012-07-19 15:48:42

:no-comments:
chodo maderchod
deepa 2012-08-18 17:18:02

:ooo:
maderchod
deepa 2012-08-18 17:19:39

fklufnv fuckkkkkkkkkkkkkkkkkkkk mljtgjvkyitfdkvhfv,v :0 :?: :pirate: :ooo: :angry-red: :idea:
main bhooka hoon tum bhojan ho.
Prakash Chand Baloni 2012-08-19 10:09:27

RAHUL,

Aurat ke Kmjori ko Lalkar Kar ushko Jagana, Ushko mard kai baraber la khada karnai ke koshish tumanai kee hai lakin tareeka galat hai, kam sai kam ek patrkar ke soch ka aisa hona apnee bat ko kahani ka aisa andaz Na- Bahi -Na, Aurat, Maa, devi , ko gali dai kar kitnee aurtoon ko jaga paaogai, tum Patrkar kee sharanee main na aa kar jhuggiyon kai pahailee puchnai walai bachai sai aagai nahi ho. tarakee karnai ka aisa tareeka mat use karo ke sansar sarjan karnai wali mata ko nanga karna padai soch badloo har bat ko kahanai kai kaee tareekai hotai hai aapka maksad achha hai per the way you told this story is abseluetly wrong which any pakistanee/talibanee can told wish you will not mind and try to understand that this way you cant win heart but hurt a lot.

Subh chintak
jesi drishti vesi srishti,,, najriya achcha hona e
Anonymous 2012-08-21 15:34:39

eh baate , samjhaane ki sudharne ki kisi ko,, ese nahi kahi jaati khule rup se,, eh vayvhaarik truti wali shelly he, jo aksar bachon ko bhi pasand nahi he,, fir yahan to sabhi mature sajjan log hein,, inhe ek sadharan bhasha mei vayavhaarik santushti wali bhasha se hi ishaare matra se samjh aa jaati he, karaan kesa bhi raha ho,, jo hamen janam deti he istri, chahe kese bhi ve kaaran ki bane,, aadarniya he, eh hmaari BHARTIYA SANSKRITI HE, ise sanjone se hi khud ka ek achcha sunder vavyahaar bnega,, ek santusht aur achcha vavyaharika wala veh insan banega,,, kishore oberoi./facebook-skriya
FACT WORDS IN NO SPEECHES.
CHANDAN KUMAR SHUKLA 2012-08-31 21:50:11

HMARI AUR AAPKI PRATIKRIYA SAME HAI . MAI V AAPSE THODA NHI PURA SEHMT HUN .QKI AAPNE JO IS SANDESH ME DARSAAYA HAI . AAJ KE YUG KI SACHI TASWEER KO HMARE SAAMNE DARSAANA CHAHA HAI ............ i like ur creativity,,,,,,,,,,,, thank\'s 2 ur giving a such wonderful imagination.......///////////// :evil: :D :( :)
I WISHES FOR UR BRIGHT FUTURE BRTHR;;;;;;;;

MAI BHI AURAT HOON MUJHE BHI CHODO MERI CHOOT
Priya kumari 2012-09-06 15:07:13

:idea:
MAI PATNA KI JAWAAN CHOOT HOON.MERI BHI CHOOT CHODO...MERI CHUTAD ME PICHE SE GHAPA-GHAP GHUSAO..AAO AAO AAO AAOOOOOOOOOOOOOOOOOO..
DEKHO RAHUL EK IDE LELO..
APNI BAHAN KI GADRAYI JAWANI KA BHARPOOR MAZAA LELO JISSE SAMAAJ ME BAHAN CHUDAYI KA CHALAN HO JAYGA AOR BaHAR KOI BHI LADKI NANGE NAHEEN NIKLEGI Q KI USKO USKI KHURAAK GHAR ME HI MIL JAYGI..
MAI BHI APNE BETA AOR BHAI SE CHUDATI HOOON.
Rais 2012-09-15 08:09:50

It seems that we do not care for the sentiments of others. Every woman will feel hurt after reading this. Let us respect evry woman in the world and not only tose related to us. I really feel sorry for the author. Let God help him change his approach.
Nari Sasaktikaran
madan kumar 2012-09-15 11:25:53

Hi rahul!
mujhe bahut dukh hai ki aap andhe ki nagari me Darpan bech rhe hai?
a log jo comment kiye hai sirf apki sabdo ko padha hai
uske sandesh kavi nhi samajh sakta hai a?
a wo log hai jo kahate to hai ki sarif hai but jb kisi orat ko nanga kiya jata hai to sabse pahle a log hi mobile se snaping krna suru karte hai?
akele me pornography karte hai or samaz ke samne sarafat ki missal ban kar ate hai!
but or v log hai es india me jo apko samajh sakta hai!
keep it up!
pushpendra kumar 2012-09-20 12:15:17

sir its realy good...jise nahi samjh aaya koi baat nhi.....yah vyngy wakai bejod hai....i need ur email id...to talk vid u...ye wakai aurto ko padhna chahiy...jo aaj bhi chup rah kar sab kuch sahti rahti hai....thnx
Idiots.
Rahul 2012-09-30 22:54:03

So many idiots have NOT understood your sarcasm and criticized you!

We Indians are like that only--- चूतिये ढक्कन!

Good writing! Bookmarked!
sulochna arora 2012-10-02 14:27:37

:D
deshmukh 2012-10-04 10:53:46

apka likhne ka aim sahi hai tarika galt hai
your thinking is very bad--rahul,,
deepak mathur 2012-10-18 13:42:05

:D :angry-red: your story is poor now seen on your background. whats your reality than wrote your next story. i no that what women history but you have no right, you use bad word, wheres your mind, thought. 1stly you have to see women life past and persent. :x :x
do respect of girls
bhavya 2012-11-04 13:10:53

:angry-red: :ooo: do ;)) nt make more stories
Rahul you are a Grate Boy
Ramesh kumar 2012-11-04 21:21:06

1975 ke dasak me ek film aai thi Bhabhi
usme ek gans tha \" jaban ho ya budiya ya nanhe se gudiya kuchh bhi ho aurat hai jahar ke hai pudiya .
yehi baat aap ke kahani me chritarth ho raha hai

Thank yoy
Ramesh Rajgir Nalanda
sooch yahi tak
rishu sharma 2012-11-05 16:27:26

:0 ajeeb lagta hai manav ki sooch abhi yahi hai .its 2012









:angry-red: :angry-red: :angry-red:
Rahul Sharma 2012-11-08 18:08:27

No One seems to understand the sarcasm. But Rahul, you wrote well.
great
parvez khan 2012-11-08 23:58:20

bahut badiya rahul bhai.. mujhe yah dekh kar afsos hai ki aapka lekh padne wale jyadatar lgo ne iska matlab nahi samjha khastor se ladkiya jinke liye ye lekh likha gya tha
mai sabhi ladkiyo se yah nivedan karna chata hu ki is lekh ko padkar yah samjhe ki unka sosan kyu hota hai or uske khilaf eik jut hokar mukabla kare
Mardo Ki Mansikta
Anand Kumar 2012-11-09 16:37:25

Rahul bhai ne to Mardo ki mansikta batayi hai, jo sadiyo se chali aa rahi hai. Aurat ko ek bhog ki wastu bana ke abhi bhi rakha hua. Zamana Inta aage aane ke bad bhi log ki mansikta wahi ka wahi hai. Sirf Naari Shoshan ka thoda sa rooop badal gaya hai. Lekin hai to wahi. Aaj Bhi ladkiyon ki Izzat lalchi nigaho se dekha jaata hai. chahe wo office ho , chahe ghar Parhiwaar ya Bazaar. Aaj bhi Kitne ladkiya apne hi relative ke hatho apni izzat lutwa chuki hoti hai aur Aaj bhi wo sharam se Kisi Ko bata nhi pati. Paper ulat ke dekhiye to pata chalega haqiqat.

Rahul Bhai ne to Mardi ki Mansikta se sabko Ro-ba-Ru Kiya hai.

Anand Kumar
Mansikta
Sidh Nath 2012-11-12 11:04:40

y galti hamari nhi hai ham jo dekhte hai bo hi karte hai. Soch ko badalna hoga or tali kabi ek hath se nhi bajati duniya me har ek ko badana hoga.........!!
Anonymous 2012-11-26 14:40:23

:ooo:
yeh bilkul sahi hai
Rohan 2012-11-27 14:49:03

:angry-red: main aisa isliye keh raha hoon kyonki aj bhi ladkiyon ke sath ye hota aa raha hai. maa baap toh jaise shadi ko compulsory samashte hai
ladki 25 saal ki hui nhi ki tahlka mach jata hai ki meri beti se kon shadi karega. main puchta hoon ki shadi kya compulsory chiz hai. aur agar compulsory hi hai toh ladki kyon sasural jaye aur sari zindagi apne maa baap se door rahe. ladke ko kyon sasural nhi bheja jata. aisa isliye hota hai kyonki ldki hi khud awaj nhi uthti aur chup chap rokar sasural chali zati hai aur pati samajta hai ki lo aa gayi sex ki machine. shadi ki pehli rat ko kehte to suhag rat hain lekin woh kitni bhayanak rat hoti yeh toh har ladki janti hai phir bhi shadi kar leti hai. aur har rat lash ki tarah hi toh leti rehti hai. agar woh chahe toh koi mard use choo bhi na paye . lekin aurat kyon khud ko kamjor samajhti hai. hazaro zulm sahne ke bad hi apni tagat ko zanti hai.
democratic mission ki samiksha
akhilesh 2012-11-28 13:08:28

min samajh raha hun ki yeh lekh to mere prakashan Democratic mission(log on dmission.org)ke layak thik hai bhai. aur rahul je ko aap aur hum samajh bhi rahe hain. other comment wale log to bari choti samajh ke log lagte hain unhe maf karen. yeh bhi theak hai ki mardon ne aisa kafi kuch kia hai parantu. smay badal chuka hai sir. aab larkian larko ka bharpur sosan kar rahi hain har tarah se. dusri bat by nature mard sosan hota hai sosan kar hi nahi sakta. yah to samajh ka fer hai.
Bihari Rahul
dharmesh kumar rathod 2012-11-28 16:08:20

ye jo rahul ne likha hai bilkul bakvas hai.pagal ho gaya hai. aap main itna dum hai to aap apne bare main bhi to nahi likha hai. jate jate apko salah deta hoon. ki aap apne demag ka elaz karviye. aap bhramisht ho gaye hai.
prush prdhan hote huye
k bardwaj 2012-11-29 12:54:06

me. rahul ne yha vahi kha h jo ab tak hota aaya h, or kuch ankhi batto pr roshni dekhane ki batt khi h jo hum kuch log sayd smz n paye.........

ye sach h ke jab tak nari khud kuch nahi kregi tab vo prush pr hawi n ho skti........

lekin bede dhukh ki baat h ki jese up lekha h ki nari hi nari ke dusman h.......

jo aaj ke smaaz me ho rha h, aaj ki baalaye apna sikar khud hi krati h or gidar, kutto, bhediyo ke paas jate h lo humara sikar kro.

ek baat or khna chhau ki aaj k nar or nari ek dusre ko aadan perdan kr rhe h, nari ko pessa or nar ko sex...... aap keya khete ho...............
Mazaaak
Mastram 2012-11-30 18:03:22

ye jagat ek mazak hai baise hi hamare man me bahut se khayal uth sakte hain beh sab prakriti ka mazak matra hai........
acha bura apne apne man ke adhaar se hota hai......
lekin mazak to mazak hota hai.......................
Jai Shri Krishna.
दुसरे के विचारों का सम्मान करें
निहारिका पाण्डेय 2012-12-02 00:09:33

राहुल जी ने जो कहा वोह \"कटु सत्य \" है । बेबाक और स्पष्ट ।दुर्भाग्यवश ऐसा हो रहा है कृपया फिर से पढ़ें :D और दुसरे के विचारों का सम्मान करें ।
adadad
hari 2012-12-04 18:56:41

dabuyuiym bakwaaaaaaaaaaasssssssss haaaaiiiiiiiii kjya likha haiiiiiiiiiiiii
:?: :evil: :angry-red: :angry: :x ;) ;)) :) :evil:
saaleeeee kutteee aurat ki izzat karna seekh T.M.C
Anonymous 2012-12-14 23:37:26

ZYADAAAAAA BHUKH H
Anonymous 2012-12-14 23:40:06

:0 :0 :0 :0 :0 KUTTTTTEEEEEEEEEEEEEEEE
RAHUL KUMAR naam to bahut acha h but soch bahut zy
Anonymous 2012-12-14 23:44:24

:0 :0
Rahul Bhai Tumhare liye ek Sujhav Hai
Dr. Dheeraj K. Soni 2012-12-19 14:43:34

Tumne jo likha woh aaj ke purush ki mansikta hai, jo stri-adhikar, samanta aur sashaktikaran ki baat karta hai, aur aurton ke kapdon mein jhankne ka intezar karta hai, yahi intezar kabhi-kabhi vahshipan par utar aata hai. lekin tum is baat ko sabit karne mein pichhad gaye, mere khayal se tumhe aur padhna chahiye tatha apne drishtikon ko aur spasht evam prakhar tarike se likhne ka prayas karna chahiye. abhi tumhen manav (vishesh roop se purush) manovigyan, samajik dhanche, samajik vikas ki prakriya, bartiya samaj par rajniti ke prabhav aur shareer-vigyan evam kaam-sutra aur yuvaon ke sambandh mein behad talleenta se padhne aur manthan karne ki ghor aavashyakta hai. kyonki inhe samjhe bina tum na to bharat ko samajh paaoge aur na bharat ki samsyaon ko.
regards,
dheeraj
KYA NAM DU ME IN RAHUL MHASY KE VICHARO KO????
sonali kandpal 2012-12-19 18:20:49

KYA SABASI DU ME JO INHONE LIKHA HAI.MANA YE AAJ KI HKIKT HAI.PR KYA IS WASTVIKTA KE JIMEDAR TU LADKE HI NHI HO.AGR TUM SAF DIL KE HOTE TO SAYD DUSRO KO SMJHATE.PA NHI.LO CETEGRI KE LADKE ISE PADHE TO SAYD UNKI LADKIYO KE PRATI YE GANDI SOCH OR BAR JAYE.YAD RAKHO EK NARI TUMHARE GHAR ME B HAI.MA YA BHN KE RUP ME.JIS DIN TUMHARI BHN KISI KE SATH SOI HUI NJR AAYEGI.US DIN APNI KRNI PE ROWOGE. /HM YE NI KHTE KE NARI KO PUJO ,PR YE JRUR KHENGE NARI KO SMJHO. LAKSHMI KO PUJTE HO.SRSWATI KO PUJTE HO WO B EK NARI. ;)) ;)) :)
u r a demon ... creepo
xyz 2012-12-22 21:55:14

u are an ass......... such people lyk ue dont know how 2 rspect women wat if sumone toks lyk dis 2 ur mother or sis...??? :angry-red:
hi rahul
pooja mishra 2012-12-27 14:44:24

mujhe bhut afsos hai ki tum jaisi soch wale insan bhi is dunia mai.mai nhi janti tum kon ho par apne liye dukh mna skti hu ki tum hmare desh mai ho
:ooo:
Anonymous 2012-12-30 10:17:06

;)) :pirate: :angry-red: :ooo: :no-comments:
ghhgjhgf
gghh 2013-01-02 11:13:09

:angry-red: :angry: :ooo: :(
batamiz
Ashi 2013-01-05 19:53:31

sale gadhe bina akal ke dhor kaun si sadi me ji raha hai tujhe to jail bhej dena chahiye ..........
smsthi shekhawat 2013-01-08 19:09:18

very good,,,tum khud ko indian btate ho,,bulshit,,,,tmse ache to pakisthani h km se km samne to h jo h,,,tm to jis thali ka kkato ho usi me chhed kie ja rahe ho,,,bdia shayd tmhare ghar me sbke sath wahi hua hua hain jo aapne likha,,,kahi aaap wace hi to nahi paida hue,,,,great,,,i m a grl,,nd have many indian sisters,,,to kya yahi sikhau unhe,,,haaa,,,dhnya hain bharat ki bhumi jo tm jece aadmi ko paida kia,,,aaj proud feel ho raha h ki tm jece aadmi ke desh me main bhi paida hui,,ek ldki ke rup me....mahan hain aap to,,waaaw,,,,
:D
napus
aishwarya 2013-01-10 11:04:50

jine hum jaiso ko nauchna hai pehle napus bano :angry-red: :evil:
sapoola.........................+++++++++++
abc 2013-01-10 14:36:11

dog stupid idiot i have no words tumhre kuttepan ko baya kerne ke liye aur jo tumse agree hai wo bhi dog hai. :angry:



































































अमानुष हो तुम
Rishi Agarwal 2013-01-10 20:38:39

:angry:
राहुल कहू या राक्षस या फिर एक गन्दी पैदाइश..
जो कहू तेरे लिए वो भी कम हैं..

तुझ जैसे गंदे इंसान को फंसी पे चढ़ा देना चाहिए.. किस तरह तूने सरेआम एक औरत के लिए ये लिख डाला.. क्या तुम्हारे माँ बहन बेटी नहीं हैं.. उनके साथ भी तू ऐसा ही करता हैं क्या..
तू कही मिल एक पल तुझे वो सब दिखाऊंगा की तू मौत के लिए भी हर पल तरसेगा..

धिकार हैं उस माँ पे जिसने तुझे जैसे अमानुष को पैदा किया..
कुछ भी कहो उस माँ को भी दुःख होगा जब तेरे जैसे इंसान की वाहियात बातें ऐसी सुनने को मिलेगी..

आई किल यू कमीने.. :angry-red: :angry-red: :angry-red:
Anonymous 2013-01-10 21:16:05

Doston pahle ise ek baar aur thanda dimaag se padho aur uske baad comment karo Rahul ji ka kahne ka matlab kya hai ye bina jaane paagal kutte ki tarah sab farfara rahe hai.Yaar kam se kam apne aap pe sarm karo koi goli maar dene ko kah raha hai koi kuchh.Matlab batane ka wakt hota to bata deta.
jese nam batane se bhi dar lagta ho o kya bat kare
akhilesh 2013-01-11 00:31:09

enke comment main apna nam bhi chupa lia hai. ye etne darpok hain. virodh karne ki aukat honi chahia. rahul mard aadmi hai. main ek editor hun aur enke lekh ko publish bhi kia hai. eska jawab bhi chapa hua hai. tab comment de, sriman aagyat je.
sach pachane ki aukat nahi hai to dekh, sun to sakte hain. bolna to sapna hai aap ke lia. sach ko parhne ki takat ho to dmission.org per ja kar facts ko jane aur mujha mail karne ki kripa bhi. my mobile no. is 9835199430.
ye aapne aukat per aa gaye. enhe sach pachta hi na
akhilesh 2013-01-11 00:35:26

aap ko sach nahi pachta hai to kyo parte ho bhai. sach to karwa hota hi hai. es lekh ka jawab chahia to dmisssion.org per ja kar dekho. main ek editor hun aur maine ese democratic misssion magazine main chapa bhi hai. comments se aap ka halkapan spast dikhta hai. so keep mum. mob.9835199430
supa-
gk 2013-01-13 16:45:13

supa na supa :D :D :angry: :angry-red: :evil: :idea: :love: :x :no-comments: :ooo: :pirate: :?: :( :sleep: :) ;) ;)) :0
abhishek srivastava 2013-01-16 14:59:16

aapne jo ek-ek baat kaha woh wakai me sahi hai aurat aesi hoti he hai hamesha aurat ki grand marnaa chhiye jab aurat ki grand nahin maroge toh phir maja kya aayegaa kunki bhagwaan ne aurat kyo banyai iislye banyai taaki aurat ki grand mar sake phir maja kar sake ..aaj se kai bahut saal pahle jo raja aur maharaja bhogvilaas me dubaa karte the ..mahabharat me jo war hua tha kis ki wajah se hua tha .. sirf aurat ki wajah se war hua tha ..sirf aurat he jarr hai iislye aurat ki grand marnna chhiye phir maja karna cchiye.. jo iss baat ko nahin samjhshta woh wakai me bahut bada bavkoof hota jo inssan maja na kar pai woh inssan ki kya value ..koi value nahin woh insaan kuta hai kamenna hai madachod hai hamesha madrchod rahegaa . :D :D :D :D
abhishek srivastava 2013-01-16 14:54:36

aapne jo ek-ek baat kaha woh wakai me sahi hai aurat aesi hoti he hai hamesha aurat ki grand marnaa chhiye jab aurat ki grand nahin maroge toh phir maja kya aayegaa kunki bhagwaan ne aurat kyo banyai iislye banyai taaki aurat ki grand mar sake phir maja kar sake ..aaj se kai bahgut saal pahle jo raja aur maharaja bhogvilaas me dubaa karte the ..mahabharat me jo war hua tha kis ki wajah se hua tha .. sirf aurat ki wajah se war hua tha ..sirf aurat he jarr hai iislye aurat ki grand marnna chhiye phir maja karna cchiye.. jo iss baat ko nahin samjhshta woh wakai me bahut bada bavkoof hota jo inssan maja na kar pai woh inssan ki kya value ..koi value nahin woh insaan kuta hai kamenna hai madachod hai hamesha madrchod rahegaa .
abhishek srivastava 2013-01-16 14:57:46

aapne jo ek-ek baat kaha woh wakai me sahi hai aurat aesi hoti he hai hamesha aurat ki grand marnaa chhiye jab aurat ki grand nahin maroge toh phir maja kya aayegaa kunki bhagwaan ne aurat kyo banyai iislye banyai taaki aurat ki grand mar sake phir maja kar sake ..aaj se kai bahut saal pahle jo raja aur maharaja bhogvilaas me dubaa karte the ..mahabharat me jo war hua tha kis ki wajah se hua tha .. sirf aurat ki wajah se war hua tha ..sirf aurat he jarr hai iislye aurat ki grand marnna chhiye phir maja karna cchiye.. jo iss baat ko nahin samjhshta woh wakai me bahut bada bavkoof hota jo inssan maja na kar pai woh inssan ki kya value ..koi value nahin woh insaan kuta hai kamenna hai madachod hai hamesha madrchod rahegaa .
agyata 2013-01-16 21:19:26

shame on u rahul sir.....
bahut acha hai aurat ke bare jo kaha mujhe acha
abhishek srivastava 2013-01-17 14:57:45

aapne jo ek-ek baat kaha woh wakai me sahi hai aurat aesi hoti he hai hamesha aurat ki grand marnaa chhiye jab aurat ki grand nahin maroge toh phir maja kya aayegaa kunki bhagwaan ne aurat kyo banyai iislye banyai taaki aurat ki grand mar sake phir maja kar sake ..aaj se kai bahut saal pahle jo raja aur maharaja bhogvilaas me dubaa karte the ..mahabharat me jo war hua tha kis ki wajah se hua tha .. sirf aurat ki wajah se war hua tha ..sirf aurat he jarr hai iislye aurat ki grand marnna chhiye phir maja karna cchiye.. jo iss baat ko nahin samjhshta woh wakai me bahut bada bavkoof hota jo inssan maja na kar pai woh inssan ki kya value ..koi value nahin woh insaan kuta hai kamenna hai madachod hai hamesha madrchod rahegaa .
Sachcha Hindustani
abcd 2013-01-24 18:19:48

Bhosdike tujhe in gandu baton ke alawa kuchha nahi aata kya. Madharchode, bahen-ke-londe tu Devtaon ke naam apni kahani me kyu leke ata hai. Tujhe apni bahin aur lugai chudwane me agar maja aata hai to chudwa.
:love:
Anonymous 2013-01-26 18:14:02

madarchod tumhari ma ka bosla ..kya naam tumhara ..Sachcha tumhari ma ke saath itana grand marooga ki tum bhosli ke hamesha le liye dekhtaa rah jayegaa aur tum rote rahoge samje madarchod lagtaa meri baat par tumhe 250000 ka volt current lag gaya ya iise bhi jydaa lag gaya hoga mujhe lagtaa tumhari bato se aesa lag raha hai tum rote raat bhar kute ki tarah hoooo kyo aese rote ho bechre tum kute ho oh oh .. ohhhhh .aur suno gali ke kute Sachcha . aur tumhari ma ke chut hai jo aur suno tumhari bahin ki jo chut hai na woh mai chut chat chhouga samje madarchod sala kuta roya rahta hai abbe bahin ki ijaat aur ma ki izzat rakho ghar par samje madrchod bada aayaa madrchod makachut maja aayaa
Anonymous 2013-01-26 18:16:07

:) :) :) :)
Anonymous 2013-01-29 14:41:47

Rahul tumhara kaminapan to dikha diya sath hi un tamam bihariyo ki mansikta bhi bata di jiski vajah se log darte hai.
Anonymous 2013-01-30 16:15:44

madarchod tumhari ma ka bosla . .. tumhari ma ke saath itana grand marooga ki tum bhosli ke hamesha le liye dekhtaa rah jayegaa aur tum rote rahoge samje madarchod lagtaa meri baat par tumhe 250000 ka volt current lag gaya ya iise bhi jydaa lag gaya hoga mujhe lagtaa tumhari bato se aesa lag raha hai tum rote raat bhar kute ki tarah hoooo kyo aese rote ho bechre tum kute ho oh oh .. ohhhhh .aur suno gali ke kute . aur tumhari ma ke chut hai jo aur suno tumhari bahin ki jo chut hai na woh mai chut chat chhouga samje madarchod sala kuta roya rahta hai abbe bahin ki ijaat aur ma ki izzat rakho ghar par samje madrchod bada aayaa madrchod makachut maja aayaa
Laanat hai..
Parisha Agarwal 2013-02-07 00:57:58

Laanat hai uss kokh par jisne tujh jaise raakshas ko janm diya...wo ma bhi roti hogi jisne tujh jaise shaitaan ko paida kiya hai..par ye mat bhool jab paap hadd se zyada badh jata hai tb use rokne ke ke liye jo ma durga aati hai, wo bhi ek aurat hai..aur jab aurat ma kaali ka roop leti hai tb tujh jaise kuch nai kar skte..agar kudrat ne aurat ko janm dene ke liye kokh di hai toh tujh jaise paapiyon ka vinaash karne ki shakti bhi di hai..
Anonymous 2013-02-11 17:12:11

madarchod suno koi ma nahin roti hai tum bas tum rote ho ma ke aage ..tumhari aundar jo aag hai woh kaun bujhaagea ..sirf tumhari maa he bujhaagi kunki jis ma ne he janam diya wahi ma he bujhaagi kaun kargi ..samje madarchod suno tum jese paapiyon ke vinaash nahin kargi ..matalab kush kargi ..jab maa jesi bumpi ko chuuoge ..kitna soft bumpy aur chut chhtooge tabhi tumhe maloom hoga ..maa jesi aurat kya hoti hai ..yeh duniya kar rahi ..tumhe madarchod kutaa hoga jo maja nahin marnaa chhtaa hai ..bane aaye raam lakxman ..aabe chup ho jaye boosare ke chup ho jay :)
tum kya samjhoge, tum insaan ho hi kahan
Parisha Agarwal 2013-02-11 23:15:12

tum jaise jaanwar iss baat ko samajh hi nai sakte..tumhare liye gaali dekar apni baat kehna hi doosron ki baat ko galat saabit karne ki koshish karna hai...tum toh galti se insaan ban gaye...ho toh tum jaanwar se bhi bhattar...tum jaise ko toh ye bhi nai kaha ja sakta ki tumhari behen ke sath kuch hoga toh tumhe pata chalega...kyunki tumhare liye toh apni behen bhi behen nai hogi...bahaut dukh ki baat hai ki iss duniya mein tum jaise log bhi rehte hain...jo iss duniya ko ganda karte hain..aur jahan tak tumhari maa ki baat hai..toh fir toh wo khud hi aisi hongi...tumhe kya sanskar deti..isiliye tumhare liye achhi cheezein sadiyon purani hain..kyunki tum aur tumhari soch hi gande hain...
चंदुलाल का सुजाव
चंदुलाल सुपारीवाला 2013-02-18 09:37:26

जैसा राहुल ने लिखा है ओर स्त्रीओँ प्रति जो भावनाएं व्यक्त की है ओर जिस बेशर्मी ओर लापरवाही से की है ...क्यूँ न उसी प्रकार का बर्ताव उसके साथ भी किया जाए।

मेरा सुजाव है की...

1. राहुल को पैड पे सर-के-बल लटका के दस हिजडों के पास उसके "लिंग" की चुसाई करवानी होगी. और उसके बाद . उसके बाद ...उन्ही हिजडों के पास उल्टा करके एक के बाद एक से उसकी "गांड" मरवानी होगी - वो भी नॉन-स्टॉप!

2. उसके बाद में तुरंत ही उसे दस बदसूरत और मर्दाना किस्म की "एईडस", "सिफलिस", "हर्पीस" वगैरा से पीड़ित औरतों के साथ सहवास करने दिया जाए. अगर उनकी नामंजूरी होगी, तो भी उस पर ये दस कि दस औरतें काफी रहेगी उन्हें वश में करने के लिए. फिर देखते है कैसा जोश दिखाता है वो साला! मेरे ख्याल में कम-से-कम आठ-दस घंटे तक उसके "घंटे" की मरम्मत होती रहेगी.

उसके बाद ... उसका मंतव्य लिया जाए यही टोपिक के बारे में की कुछ विचार में फर्क पड़ा; तबदीली आयी; पछतावे की कोई गुंजाइश है क्या. नहीं तो फिर से ऊपर का सिलसिला चालू रखेंगे जब तक की उसका 'लंड' सड के गिर न जाये।

साले राक्षश वंश की पैदाइश – मादरचोद, राहुल कुमार!

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rajni 2013-02-19 18:38:49

wah!!!!! kya ghatia soch h............
jis ma ke aanchal me khel kar bade hue aaj usi ke samman me char chand lga diye...............tumne aurto ko gali nhi di tumne us aurat ka apmaan kiya jisne tumhe janm diya jo tumhari maa h .....shayad bahan bhi ho to kya tum unke kiye b yahi ummid kar rhe ho aur logo se.....



shayad tumari maa ne tumhe aise hi sanskar diye ho par duniya me aaj bhi achhe log h jinke sahare ye dunia aaj bhi haseen h to tum jese huchh logo k sirf kuchh likh dene se ye dunya insaniyat nhi kho degi............
Anonymous 2013-02-19 18:55:15

:angry-red:
idiot
sushma 2013-02-19 18:56:22

what nonsense
reeta 2013-02-19 19:28:16

dum fool you are made for nothing but just for begging
Anonymous 2013-02-26 12:57:42

madarchod sharm nahin aata hain tumko ye sab baaten likhte huye............
ye meri soch hai. sharad
sharad mishra banda 2013-02-26 20:28:06

Hum jo ladkiyo ke saat ker rahe hai wo galat hai.
Jis din hum shamaj jayege ki ladkiyo ki iztat karna
us din desh me jarur kush na kush jarur shudar
hoga. wo mard nahi hijde hote hai jo aurat ya ladkeyo ko saman samajte hai.aise manav ko manav nahi danav kahna chahie.
mai bus itna hi khana cahuga. sharad
archana 2013-02-26 23:24:56

welll done rahul ji aapke is lekh ke dwara mardo ki gandi maansikta or aurto ki vivasta ka parichay diya hai....kuchh pursho ki yaisi gandi soch hai aaj bhi aurto ke baare mai. kintu wo mard nhi hote jo is prakaar ki vichaardhara rkhte hai....wo to ek maansik rogi hai ;)
archana 2013-02-26 23:38:53

Gandi gaali dene walo se aagrah hai please is lekh ko baar baar padhe . shayad tb smjh aayega ki Rahul ji kahna kya chahte hai....unki maansikata galt nhi hai ....is lekh ke maadhyam se sachchaai se ruhbhru kra rhe hai.............................................................
archana 2013-02-26 23:40:44

jaB AALOCHNA JYADA HONE LGE TB SAMJH LENA CHAHIYE KI KRAANTI AAANE KO HAI :D
Parth Shukla 2013-02-27 15:49:59

bs itna cmnt krna chahunga k beshrm mrdon k cment yha kyu ne aaye. 99.99% mrd jo lekhak mahoday k lekh me vardit h vo nihayat he sharif kism k dhongi h ar isme 99.99% glti mahilaon ki h kyuki wo khud awaz nhi uthati h apne upar hote huae atyachaaron k khilaf ar agr koi uthati b h 2 us awaz ko dbane me b mahilaon bht bda haath hota h. Ek baar yalgaar krke 2 dekhen fir dekhta hu k kis mard me itni himmat h jo kisi behen ki trf glat nazar se dekh bhi ske. jb tk awaz nhi uthegi ye bhediye isi trh shikkar krte rhenge.. Ab zrurat durga chandi kaalratri bnne ki h.. sita maiya bnne ki nhi..

YALGAAR HO.......
Opinion beyond anyone's thought
Lokesh Devpura 2013-03-08 15:03:29

Rahul,
Jis Vyangya ka istemaal tumne kiya hai wo ho sakta hai kafi ko samaj me na aye but more or less it is good effort bcoz it is showing absolutely true mirror of society. Now every man is captured in his own perception and assumption about women. "Nari tum kewal Shradhha ho" ye baat almost ham bhul chuke hai.. Apka vyangya samaj ki mansikta aur soch par hai ye baat shayad bahut kam ko samaj aai but still i agree with many who think that language and words can be used in more graceful and polite manner. Ultimately aap bhi society ka bhala hi chah rahe ho but tarika thoda sa misaligned hai.. one more imp thing and that is ham log sach ko sweekar karne me bahut piche hai.. shabdon ko chashni me lapet kar agar koi kahta hai to ham samaj jate hai but bebak likhne aur bolne me hame sharm aati hai, pata nahi kyon? aapne bebak likhne ki koshish ki, i appreciate.. but ham abhi bhi sach ko bebaki se accept nahi kar pa rahe..ye ham sabki problem hai.. anywaz men and women make society and everyone is responsible for safety of women. We must give respect to every women and need to change our thinking. Women are really god gift.
Asghar Mehdi 2013-03-09 20:18:30

The whole write up is a truth that a woman is living with for thousand of years. This pathetic condition is everywhere, irrespective of faith, race, place and time. A man is conditioned from childhood that a woman is nothing more than commodity, a baby producing machine and a subordinate entity. I do not think mere legislation or activism of elite will bring the change, what we need is to change our mentality, outlook and ideology. It is also a ground reality a mother is short of her duties.

laanat hai aaj ke samaj par
sanjana 2013-03-15 16:50:23

rahul ji you are great apko kuch logo ne samajhne ki koshish nahi ki kaash apke comment par kisi ne amal kiya hota ;)
toda pagal hai
satish gupta 2013-03-17 15:04:46

rahul ji aap ka kahana sahi hai magar aapne jo vichar likhe hai unka tarika galat hai ye desh purush pradhan hai magar yha pr aaj bhi nariyo ki pooja hoti hai nari mahan hai aur hum mardo ko wo hi accha bura sikhati hai nari k bina mardo ki koi pahachan hi nhi hoti , jo khyal aapko nari k prati hai kya vhi vichar aapko apani ma, bahin,aur apani ladki k prti hai? jabab jaroor dena. aur apni vichardhara ko jaroor badalana.
kaminepan ki had kr di
satish gupta 2013-03-17 15:11:58

RAHUL TUM SABSE BADE MADAR........ HO
Samir 2013-03-19 17:03:04

Patrakar Rahul Ji

Mujha nahin lagta ke aap isi duniya ke insan ho kyunki aap ko insan (Aurat) ne paida nahin keya hoga"""!!!!!!


Sam
manish bijole 2013-03-22 15:32:58

sahi hai aadmi kutta hi hai lekin isme pura dosh mardon ka nahi hai isme 70 % dosh ladiyon ka hai our 30% ladko ka hai. jab tak ladkiyan khud ko sambhalengi nahi tab tak ladke nahi sudhrenge. sambhalne ka arth sirf pahnave se nahi hai apitu unhe apne aatmsamman ki rakcha se bhi hai. mere shabdo aaka kathan saty hai is kathan se hame nariyo ko jagrat karna padega
dhananjay rai 2013-04-06 23:40:34

aese mardo ko goli mar deni chahiye jo mahilayo ka sosan karte h.....rahul jii aap ne jo kha ohi mahilaye kre to thik h aese mardo ka mukabla kare apane ko takatwar bano
nari
ashu 2013-04-24 10:30:57

:ooo: mamta ki murat hai nari
pyar ki surat hai nari
tej aur teji hai en me
tbhi hai ye purusho pe bhari
:ooo: bhagvan ki sbse khubsurt kriti nari hai.jo maa ke pyar se suru hota hai.behan ke sneh se bda,bibi ki khusi se jvan aur beti ke aane ke bad budhpa...........hume nari ke liye amman rkhna chahiye :angry-red:
to rahul
rahul 2013-04-30 07:52:12

rahul ji, seedhe seedhe akshore me, aap bahut bade madarchod hai, aur ghatiya kism ki mentaility hai , ladkiyo ke bare me,,, lagta hai tumhe koi ladki pasand nahi karti, ya tum gay ho. aur ye bahut hi afsos ki baat hai ki tum patrakar ho.
ek se ek mard ko napunsak sabit kar sakti he aurat
sandeep tyagi 2013-05-03 21:22:01

aurat hamesa se takatwer rahi he aur rhegi
vyangya
swapneel 2013-05-08 13:23:09

yah aaj kal ki sthiti par ek badhiya vyangya hai.
raj 2013-05-11 16:55:09

tum rahul shayad galti se inshan bat gaye
tum to janwar banane ke layak nahi ho
Anonymous 2013-05-13 21:51:20

mr. rahul aapne bat bilkul sahi kahi hai,insaan agar khud ko samjh le aur har galat chijo ko bardast karne se phle khud ki ahmiyet ke bare me soch le to koi bhi atyachar usk sath nahi ho sakta.aurat kabhi kamjor nahi hoti,ye to samaj ki aur khud uski mentality hai jo woh khud ko har mod pe kamjor si dekhti hai.
rahul ji agar aapk sabd ghatiya hai to samaj ki soch bhi to ghatiya hai,ye bat aapne bilikul shi kaha hai ki aurat sirf jarurat ka saman hai.aurat ko khud apni tasweer badalni hogi aur kuchh purush jinki soch achhi hai aur aurat ko wo apni tarah hi insaan samjhte hai,unhe aage badhkar unka sath dena hoga.
Nari ke bina sansar adhura hay.
Amit kumar shandilya hindu 2013-05-30 23:04:30

Aurath hay to sansar hay nari hay to hum hay aap sab ho nhi to humara astitwa he nahi ma hay to mamta ka sagar hay agar ma nahi to hum aur aap sab nahi ayse humare samaj may gandgi failane wale bhuth he aasmagik prani hay jo aurath ko respect nahi karte ek sb bate jan lo aap logo agar aap galth kroge galath hoga. My contact facebook id and email id= amitkumarshandilya22@gmail.com
wyang
shab 2013-06-02 00:30:36

Aaapka wyang mujhe bahut pasand aaya. mardon ki is dunya men kloi to mard hai jo mard ko pahchanta hai
get well soon
guneet 2013-06-06 00:57:32

Mr. get well soon...u r nt well at ol...plz go any pagalkhana....thts d best place for u...nd i wish tht u become girl in nxt birth nd thts it...plz guys pray for him....
shameless
shikha 2013-06-18 12:57:19

ise patrakar ji ki maa ji ko aur bahno ko padhana chahiye tb maaji ko lagega ki galti ho gai aur bahan nxt rakhi se celebrate krna hi chhor degi :angry-red:
incroachment
Prashant singh 2013-07-14 15:57:34

Mr rahul, you had tried to express the pain of women, violence on women. Good but who has permitted you to interferior in hindu's mythology? SOME BUNCH OF WRITERS LIKE YOU feel very easy and cheap to hit our Gods like Shri Ram and Krishna... to show their secular thoughts. You had hurt our releigious beliefs and you have no rights to do so. They are our GOD and what they have done is to show the Humans the right Path.
Chori kar k paas hua aur patrakar ban gaya bechara
Anonymous 2013-07-29 18:14:57

Kis Yug k prani ho yar? Sharm karo apni bakwas par aur thu hai tumhare ek mard hone par jo apni Maa, Behan, Biwi aur Beti ko nochne ki baat karta hai...
manas ranjan 2013-08-12 14:08:30

Rahul g mujhe sarm ataa he kuin ki app jaise log media me ho.ap kya sabit karna chahte ho ye to mujhe patanehi ..etna pata he app admiyo ko vadkaraheho jarur aurat ke sath kaise gandi bartab karna..he..kiun apna organization ka trp badhane k liye apko bolageya he kya..mujhe to ap ek psyco psent lagte ho vai.
bhasha sahi nahi
harsh 2013-08-15 00:41:56

rahul tumhari language sahi nahi hai ....or saare mard aise hote bhi nahi ...tum shayad aapni bahan ka jism dekhate honge hum nahi .....
naari ek heiper uskey rup aniek hei.
Neelam 2013-08-15 04:53:11

:x :x

rahulji aapney yeh baatey likh ker aapney saabit ker diya hei ki aadmi kitana khudgarj hei.aapney likhker yeh toh bataya ki laxmiji apney pati key paav key pass beythi hei.leykin aap nahi janty ki woh apna patidarm nibha rahi hai.phie kiyo deepawali mey usi laxamiji ko unkey pati key paav say udah ker ghar mey laaker unki pooja karatey ho . tab kiyu unkey kadamo per apna ahenkaari ser rakhker bilbilaatey ho. kyo unsey dhan ki dua kartey ho. yeh orat ki mahanta hei jo saheti hei nahi toh kaali maa bantey deyr nahi lagti jeeneh shaant karaney mey saarey devta haar jaatey hei yaaha teq shivji jeysay big devta bhi kuch nahi ker paatey hei.
So Bad Dear
Kumar 2013-08-16 15:03:24

:pirate:

ye Sab apni apni soch h ..............

par itna bhi ganda nahi sochna chahiye ki aurat sirf ek machine ki tarah h ya khilona h jab chahe khel liya or faink diya, fir jaroorat pade to phir istemal / kiya...........
tumhari soch jaan ke tum per dukh hota he ki kya t
aarti 2013-08-17 17:02:39

Rahul aap ne apni kahani me kahaa he ki -
use apni maa ko bhi dekh kar yahaa tak ki apni bahn ko bhi dekh kar use bhi apni havas ka shikar banane ki ichha hoti he to.........
ak sawal aap se aap apni maa , bahn ko usi najr se dekhate ho .



agar aap
Amit singh 2013-08-18 13:49:57

agar ap jaise lekhak 50 aur aa jaye to aisi katach bhari bato se sayad hamare desh ki nariya jagruk ho uthe ..............................
dimag ko thik karvayo.
rahul roy 2013-08-25 21:58:43

:angry-red:
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