पेटीएम, भीम, रिलायंस जियो... और भी ऐसे अन्य माध्यम जिसमें कैश बैक के अलावा मनी ट्रांजेक्शन पर भी कोई टैक्स नहीं लगता। उनके जरिये दुकानदार टैक्स की चोरी कर रहे हैं। टैक्स चोरी का यह खेल बिलकुल आभूषणों की खरीद जैसा ही है। जिसमें महज 3% टैक्स बचाने कस्टमर बिल नहीं लेता था और पूरा पैसा सुनार की जेब में चला जाता था। बहरहाल टैक्स चोरी के ईजाद हुये इस नये तरीके को देखने के बाद यह तो तय हो गया कि सरकार अगर शेर है तो टैक्स चोर सवा शेर हैं।

अब आपको बताते हैं कि इन एप्प्स की मदद से टैक्स चोर कैसे अपने जेबें भर रहे हैं। मान लीजिये किसी कस्टमर ने 35 हजार का कोई प्रोडक्ट खरीदा। अब अगर वो POS मशीन/चेक या कार्ड से पेमेंट करता है तो शॉप ऑनर को बिलिंग अमाउंट पर सरकार को टैक्स देना पड़ेगा। जिससे बचने दुकानदार कस्टमर को मार्जिन मनी में छूट का लालच देकर उसे 5-5 हजार के स्लॉट में एप्प्स के जरिये पेमेंट करने बोलता है।
 
मार्जिन मनी में कम ज्यादा करने की गुंजाइस वैसे ही रहती है। यानी हजार का प्रोडक्ट अगर वह 15 सौ बताकर 200 का डिस्काउंट भी देता है तब भी उसकी बचत है। ऐसे में एप्प्स की मदद से दुकानदार ने न केवल टैक्स चुरा लिया बल्कि कैश बैक का एक्स्ट्रा बेनिफिट भी ले लिया। जैसे-जैसे टैक्स चोरी का यह खेल बड़े स्तर पर होता जायेगा हाल वही ढ़ाक के तीन पात जैसे हो जायेंगे।

आशीष चौकसे
पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ब्लॉगर
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