केंद्र की मोदी सरकार ने भीम एप शुरू कर दिया है| आधार पेमेंट का सिस्टम शुरू हो गया गया है| डिजिटल इंडिया का सपना जल्द ही साकार होगा| हमारा देश भी विकसित हो जाएगा| लेकिन इसी बीच एक और बात ख़ास होगी। वो ये कि अब चोरी और अपराध की वारदातों में कमी आएगी| साथ ही पुलिस को भी अब थोड़ी राहत मिलेगी| लेकिन शायद अब आफत गले पड़ने वाली है| क्यूंकि अब हर पेमेंट एक ऊँगली से हुआ करेगी। तो ऐसे में चोर या ऐसे आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग उँगलियाँ ही काटा करेंगे| फिर ऊँगली या अंगूठा ही उनकी तिजोरी की चाबी हुआ करेगी|

`लौन्डा-लपाड़ी मित्रमण्डल' आप सभी 'धरम पिरेमी' जनता का हारदीक-हारदीक अभिनंदन करती है... सुवागत करती है... वंदन करती है... इसी के साथ जनता 'हेमा' बन गई... (अब इतना डिपली में मत घुसो और आगे बढ़ो!)

वो हुवा यूं कि अपन भण्डारे में गए थे... ये लिख इसलिए रिया हूं कि भण्डारे की लोकेशन ही कुछ ऐसी थी कि - एकदम खुल्लमखुल्ला जगो... (गंदगी वाला 'झक्कास कम्पाउण्ड' बोल सकते हो!)... अपन ने आयोजक को 'दण्डवत' तभी कर दिया जब देखा कि एक ओर 'कल्लू की कलाली' पर 'सोमरस' के लिए 'श्रद्धालु' लाइन में लगे थे, वहीं उसके ठीक सामने 'जिमने का जश्न' चल रहा था... मतलब इधर पियो... और उधर सूतो...

पेटीएम, भीम, रिलायंस जियो... और भी ऐसे अन्य माध्यम जिसमें कैश बैक के अलावा मनी ट्रांजेक्शन पर भी कोई टैक्स नहीं लगता। उनके जरिये दुकानदार टैक्स की चोरी कर रहे हैं। टैक्स चोरी का यह खेल बिलकुल आभूषणों की खरीद जैसा ही है। जिसमें महज 3% टैक्स बचाने कस्टमर बिल नहीं लेता था और पूरा पैसा सुनार की जेब में चला जाता था। बहरहाल टैक्स चोरी के ईजाद हुये इस नये तरीके को देखने के बाद यह तो तय हो गया कि सरकार अगर शेर है तो टैक्स चोर सवा शेर हैं।

न्यूज चैनलों पर चलने वाले खबरों के ज्वार - भाटे से अक्सर ऐसी - ऐसी जानकारी ज्ञान के मोती की तरह किनारे लगते रहती हैं जिससे कम समझ वालों का नॉलेज बैंक लगातार मजबूत होता जाता है। अभी हाल में एक महत्वपूर्ण सूचना से अवगत होने का अवसर मिला कि देश के एक बड़े राजनेता अरविंद केजरीवाल का केस लड़ रहे वकील राम जेठमलानी ने उन्हें मात्र चार करोड़ रुपए की फीस का बिल भेजा है। इस बिल पर हंगामा ही खड़ा हो गया। इसलिए नहीं कि बिल बहुत ज्यादा है, बल्कि इसलिए कि बिल का पेमेंट राजनेता करें या वह सरकार जिसके वे मुख्यमंत्री हैं।

आप लोगों ने अपनी सियासी लड़ाई में मुझे क्यों घसीटा ? मुझे क्यों अपमानित किया ? मेरा नाम क्यों बदनाम किया ? क्या मेरी फितरत में फिरकापरस्ती है ? क्यों में झासेबाज हूँ ? क्या मैं जुमलेबाज हूँ ? क्या मैं नोटबंदी की मौतों और तबाही का जिम्मेदार हूँ ? क्या मैं कुर्सी के लिये ध्रुवीकरण का माहौल पैदा कर समाज को बाँटने की कोशिश करता हूँ ? क्या मैं तरक्की के रास्ते बंद करके हर तरफ तबाही.. बदहाली.. बेरोजगारी. .जेहालत..भ्रष्टाचार.. नफरत.. धर्मवाद..जातिवाद और साम्प्रदायिकता के श्मशान बनवा देना चाहता हूँ।                                             

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं । इसके साथ साथ वे आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष भी हैं । राजनैतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं । इन आरोपों के दो वर्ग हैं । पहले वर्ग में वे आरोप आते हैं जो किसी भी राजनैतिक दल की नीतियों और उसकी विचारधारा को लेकर लगते हों । मसलन भारतीय जनता पार्टी कहती है कि सोनिया गान्धी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा हैं और उनकी पार्टी की सरकार जो नीतियाँ लागू कर रही हैं उससे देश रसातल में चला जाएगा । इस प्रकार के आरोपों का फ़ैसला देश की जनता चुनावों में कर देती है । लेकिन आरोपों का दूसरा वर्ग व्यक्तिगत आरोपों की श्रेणी में आता है।

दास्तान:
आज भारत के अधिकतर क्षेत्रों में निःस्वार्थ भाव से समाज को प्राथमिक शिक्षा बाँटता हुआ प्राइमरी स्कूल गाँवों, कस्बों या शहरों के एक कोने में तन्हा दिखाई दे रहा है. कई दशक पुराना प्राइमरी स्कूल गाँव में बसा होने के बावजूद गाँव से ही अलग-थलग पड़कर अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है. स्कूल पल हरपल टकटकी लगाए विद्यार्थियों का इंतजार कर रहा है. परन्तु आज के बदलते मंजर ने उसके नेक इरादों पर पानी फेर दिया है. जी हाँ, सचमुच प्राइमरी स्कूल अपनी किस्मत कोसता हुआ बद्हाली की मर्म कहानी सुना रहा है. मगर आज की आपाधापी भरी जिन्दगी में भला किसके पास इतना वक्त है कि वह उसके करीब जाकर उसकी ख़बर ले, ख़ामोशी की वजह पूछे और दशकों पहले दिए हुए अतुलनीय योगदान की सराहना करे, यानी उसके वजूद को याद करे. यह वही प्राइमरी स्कूल है जिसने बीते समय में समाज को वैज्ञानिक, क्रान्तिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक और राजनीतिज्ञ तक सौपें हैं.

जैसे- जैसे-जैसे साल 2016 गुजरा, सत्ता के गलियारों में शतरंज की बिसात अपने नए रंग में आ गई| केंद्रीय सत्तासीन दल भाजपा और विपक्ष में कांग्रेस सहित सपा, बसपा आदि के राजनीतिक पंडित अपनी-अपनी गोटियां उत्तरप्रदेश में फिट करने को उतारू हो चले थे| जी हां, साल 2017 देश के सबसे बड़े राज्य के विधानसभा चुनाव का साक्षी बना  और उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में एक कहावत प्रचलित भी है कि "यूपी की राजनीतिक बिसात ही केन्द्रीय कद का खाका तय करती है|" अक्षरस: सत्य भी है, लोकसभा चुनावों में भी अमित शाह का उत्तरप्रदेश में चुनावी दांव ही आज उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद्दावर कद का कारण बना है और वहीं रंग विधानसभा चुनावों में आए परिणामों में झलक गया | जब बात मुख्यमंत्री चुनने की आई , तब उन्होने चुना पूर्वांचल के तेजतर्रार हिन्दुवादी नेता के तौर पर प्रसिद्ध कद्दावर नेता 'योगी आदित्यनाथ' को| जातिगत समीकरणों की गोटियों को फिट करने की कवायद ज़रूर की है , जहाँ दो उपमुख्यमंत्री का चुनाव और मंत्रिमंडल का गठन| इन सब पर हावी रहा रामराज्य की परिकल्पना का दस्ताना|

धीरज सिंह
राजनीति में कैसे-कैसे सूरमा है, कुछ सिर्फ बोलने में ही विश्वास रखते हैं तो कुछ कर गुजरते हैं। हम तो ठहरे, लोकतंत्र युग के प्राणी। कभी असली राजा देखा नहीं, फिल्मों ही देखते रहे कैसे होते थे राजा और क्या-क्या किया करते थे। हम क्या जाने राजा-रजबाड़ों के क्या-क्या शौक हुआ करते थे। अब राजा नहीं है, राजनेता है, वही पूरी कर रहे है राजाओं की कमी। कुछ बोलने में धमाल कर रहे हैं तो कुछ करतूतों में कमाल। 

नेता भूल जाते अपना इतिहास... भाजपा द्वारा गोवा और मणिपुर में जिस तरस से सरकर बनाने का कदम उठाया उससे कांग्रेस घबरा गई. लगा जैसे वह सोच रही थी कि उनके द्वारा उठाई जाती चालों को कोई दूसरा भला कैसे अपना सकता है। इस पर तो उनका ही सर्वाधिकार है कि गलतफहमी में रहते नेताओं को अपना इतिहास भले ही याद न रहे पर जनता को तो याद रह ही जाता है। जो शिक्षा दी गई आज उसका उपयोग अन्य दल कर रहा है तो जलन किस बात की और अगर वह शिक्षा ही गलत थी तो शर्मिंदगी की जगह अंकड़ क्यों?

दुनिया जिस मोड़ पर खड़ी है वहां लूट को व्यापर और लूट के प्रचारक को ब्रांड एम्बेसडर कहा जाता है यानी जो जितना संसाधनों को बेच सकता है वो उतना बड़ा ब्रांड एम्बेसडर जैसे जो जितना बड़ा पोर्न स्टार वो उतना बड़ा कलाकार ... और जो झूठ के बल पर, फ़रेब और ‘लूट’ के गिरोह यानी ‘पूंजीपतियों’ की कठपुतली बनकर उनका एजेंडा चलाये , मीडिया के माध्यम से निरीह जनता को बहकाए, कालेधन को वापस लाकर हरेक के खाते में 15 लाख जमा करने का वादा करे , वोट मिलने के बाद उसे चुनावी जुमला बताये .. याद दिलाने पर नोटबंदी कर, पूरे देश की गरीब जनता को कतार में खड़ा कर, उनको सजा दे... उनको मौत के घाट उतारे और ख़ामोशी को, मजबूरी को ‘जन समर्थन’ समझ कर .. एक तरफा रैलियों में अपनी ही बधाई के गीत गाये ..ऐसे ‘सत्ता लोलुप’ और उनके समर्थकों से आप क्या उम्मीद करते हैं की वो ‘गांधी’ को चरखे से नहीं ‘हटा’ सकता .. बहुत नादान है इस देश के बुद्धिजीवी ... और बहुत नादान है इस देश की जनता ...  उनके ‘सबका साथ , सबका विकास’ जुमले पर विश्वास कर बैठी .. परिणाम सबके सामने हैं ..सिर्फ ‘पूंजीपतियों’ का विकास , बाकी सबका सत्यानाश!

Pankaj Chaturvedi : शराब कम पीनी चाहिए। अधिक-से-अधिक दो प्याले। डोमन साहु 'समीर' द्वारा लिखित और संकलित एक संताली लोक-कथा की यह व्यंजना है। एक आदमी ने पीपल के पेड़ के नीचे चूल्हा सुलगाया और उस पर महुए की हाँड़ी चढ़ाकर शराब बनाने की कोशिश की। मगर इसमें उसे ज़रा भी कामयाबी नहीं मिली। एक ओझा ने उसे सलाह दी कि 'जिस पेड़ के नीचे तुम यह कोशिश कर रहे हो, अगर उसे काटकर चूल्हे की आग में झोंक दो, तो बेहिसाब शराब बनेगी।'

A Public Interest Litigation has been filed in Lucknow bench of Allahabad High Court today as regards the Rs. 104 crores cash money deposited  in old currency by Bahujan Samaj Party between 02 December 20 to 09 December 2016 in the Party’s Union Bank of India bank account in Karol Bagh branch, New Delhi after the demonetization order. Petitioner Pratap Chandra’s counsel Dr Nutan Thakur said that the Election Commission had issued Guidelines for financial transparency on 29 August 2014 which had been further clarified through its order dated 19 November 2014.

इंसान के चांद पर जाने की खबर सुनने के साथ शुरू हुआ स्पेस से मेरा इश्क... यंग साइंटिस्ट कांग्रेस में हिस्सा लेने भिलाई पहुंचे इसरो चीफ डॉ. अल्लुरु सिरीन किरण कुमार ने की दिल की बातें...

(भिलाई में पत्रकार बिरादरी के साथ डॉ. किरण कुमार)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉ. अल्लुरु सिरीन किरण कुमार 28 फरवरी को भिलाई आए। यहां छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई की मेजबानी में छत्तीसगढ़ काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नालॉजी (सी-कॉस्ट) की 15 वीं यंग साइंटिस्ट कांग्रेस में चीफ गेस्ट के तौर पर पहुंचे डॉ. किरण कुमार ने मिशन मंगल पर अपना आधार वक्तव्य (की-नोट एड्रेस) दिया और प्रेस से बातचीत में कई सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान तकनीकी विवि के कुलपति डॉ. मुकेश कुमार वर्मा भी मौजूद थे।

लिखित है अलिखित संविधान में अंतर
भारतीय संविधान और कोर्ट की व्याख्या पढ़कर ताजुब होता है कि देश का संविधान लिखित है फिर भी कुछ जज संसद बनने की कोशिश क्यों करते हैं? दरअसल ब्रिटेन में संविधान अलिखित है। और इसे अलिखित इसलिए रखा गया है जिससे समय आने पर राजपरिवार अपने अनुसार फैसला करा सके। और इसी की पढ़ाई कर आए जज भी अपने अधिकार असीमित समझने लगे। कुछ जज फैसला ऐसा करने की कोशिश करते हैं जो संविधान या कानून में लिखा ही नहीं है। या कानून की अपने अनुसार व्याख्या कर लेते हैं।

फागुन आते ही चहुंओर होली के रंग दिखाई देने लगते हैं. जगह-जगह होली मिलन समारोहों का आयोजन होने लगता है. होली हर्षोल्लास, उमंग और रंगों का पर्व है. यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इससे एक दिन पूर्व होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहा जाता है. दूसरे दिन रंग खेला जाता है, जिसे धुलेंडी, धुरखेल तथा धूलिवंदन कहा जाता है. लोग एक-दूसरे को रंग, अबीर-गुलाल लगाते हैं. रंग में भरे लोगों की टोलियां नाचती-गाती गांव-शहर में घूमती रहती हैं. ढोल बजाते और होली के गीत गाते लोग मार्ग में आते-जाते लोगों को रंग लगाते हुए होली को हर्षोल्लास से खेलते हैं.  विदेशी लोग भी होली खेलते हैं. सांध्य काल में लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और मिष्ठान बांटते हैं.