गंगा-यमुना को मनुष्य मानने का वैदिक आधार

Mudit Mittal : आज नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे। कुछ दिनों पहले ही न्यूजीलैंड ने भी अपनी वांगानुई नदी को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता दी थी।

संजयलीला भंसाली को इतिहास से खिलवाड़ का हक नहीं

फिल्मकार संजयलीला भंसाली के साथ दुर्व्यवहार निश्चय ही दुर्भाग्यपूर्ण है। किन्तु ऐतिहासिक तथ्यों और लोकमान्य प्रेरणादायक राष्ट्रीय विभूतियों की छवि विकृत करना भी एक सामाजिक अपराध है। यह आवश्यक है कि कवि-कथाकारों और कलाकारों को अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर रचना को अधिक से अधिक कलात्मक बनाने की छूट दी जानी चाहिए किन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि रचनाकार इतिहास के तथ्यों और स्वीकृत सत्यों को ही उलट कर रख दे। फिल्म ‘पद्मावती’ में महारानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताया जाना भी ऐतिहासिक तथ्यों...

डॉ. राम मनोहर लोहिया, शहीदे आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को याद किया

फाइट फॉर राइट ने मनाए शहादत दिवस व लोहिया जयंती नोएडा। देश को चलाने वाले आजादी की कीमत को भूल गए हैं। देश को आजाद कराने में सब कुछ न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों के परिजन फटे हाल में में हैं और देश से गद्दारी करने वाले लोकतंत्र की मलाई चाट रहे हैं। यह फाइट फॉर राइट के राष्ट्रीय अध्यक्ष चरण सिंह राजपूत ने सेक्टर 12 स्थित शिमला पार्क में आयोजित शहादत दिवस व लोहिया जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से किसान आत्म हत्या कर रहे हैं। मजदूर का जमकर शोषण हो रहा है। गरीब की...

APFEJ urges New Delhi to be respectful to media

Guwahati: Asia-Pacific Forum Environmental Journalists (APFEJ), in thebackdrop of Indian government’s recent initiative to ban a BritishBroadcasting Corporation (BBC) scribe on filming in its tigerreserves, has urged New Delhi to be respectful to the global mediaoutlets respecting the democratic spirit of the country. The Dhaka(Bangladesh)-based environment media forum also appealed to the Indianauthority not to think of evoking the British scribe’s visa at anycost.

बस्तर में मानवाधिकार उल्लंघन चिल्लाने वाले अब कहां दुबक गए?

हर हमले से मजबूत होते हैं हम... जब पांच राज्यों के चुनाव परिणाम यह दर्शा रहे थे कि राजनीति में न हार अटल है और ना जीत, ठीक उसी वक्त बस्तर के सुकमा में आतंक के दहशतगर्द नक्सलियों ने आईईडी ब्लॉस्ट कर 12 जवानों को शहीद कर दिया और कुछ को घायल। नक्सलरोधी-नीति पर सवालिया निशान खड़े करती इस घटना के तत्काल बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जो तत्परता-सह्दयता-उदारता दिखाई, उसने शहीद परिवारों के जख्मों पर मलहम तो जरूर लगाया है लेकिन मुंहतोड़ जवाबी कार्रवा...

गाय से प्रेम, हूरों के सपने और सुसाइड बॉम्बर

Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

मैडम जी बोलीं- 'यू नो, उर्दू इज़ अ वेरी ब्यूटीफुल लैंग्वेज!'

Yashark Pandey : बंगाली फ़िल्मकार सृजित मुखर्जी की एक पिक्चर है: 'राजकाहिनी'। दो साल पहले इसका ट्रेलर देखा था तो रोंगटे खड़े हो गए थे। टैगोर के गीत 'भारत भाग्य विधाता' की उन सभी पंक्तियों को- जो राष्ट्रगान में सम्मिलित नहीं हैं- बड़ी खूबसूरती से फिल्माया गया है। ट्रेलर में पूरा गीत किसी एक ने नहीं गाया बल्कि विभिन्न बंगाली गायकों की आवाज में गीत की हर पंक्ति अंदर तक झकझोर देती है। राजकाहिनी की कहानी यही है कि देश विभाजन के समय सरकारी आदेश से एक वेश्यालय को तोड़ा जाना है जो बदकिस्मती से भारत पाकिस्ता...

उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ ही क्‍यों?

संत परंपरा का निर्वहन करते हुए राजनीति में आए योगी आदित्‍यनाथ पर यह आरोप सदैव से लगते रहे हैं कि वे हिन्‍दुत्‍व की राजनीति करते हैं, चुनावों में एक वर्ग विशेष, धर्म-संप्रदाय से जुड़े वोटों का ध्रुवीकरण करते हैं और जरूरत पड़े तो वे तीन तलाक, लव जिहाद, मदरसा, कब्रिस्‍तान जैसे धर्म आधारित विवादित बयान देने से पीछे नहीं रहते । उनके तमाम पुराने बयानों को एक बार में देखने पर यही लगता है कि वे अल्‍पसंख्‍यक समाज खासकर मुसलमानों के धुरविरोधी हैं। सीधेतौर पर इसका प्रभाव भी समुचे यूपी में योगी के विरोध में...

मोदी युग की प्रचंडता : ...सुना है, हवाएं तुम्हारे शहर से होकर आ रही हैं!

जैसे- जैसे-जैसे साल 2016 गुजरा, सत्ता के गलियारों में शतरंज की बिसात अपने नए रंग में आ गई| केंद्रीय सत्तासीन दल भाजपा और विपक्ष में कांग्रेस सहित सपा, बसपा आदि के राजनीतिक पंडित अपनी-अपनी गोटियां उत्तरप्रदेश में फिट करने को उतारू हो चले थे| जी हां, साल 2017 देश के सबसे बड़े राज्य के विधानसभा चुनाव का साक्षी बना और उत्तरप्रदेश की राजनीति के बारे में एक कहावत प्रचलित भी है कि "यूपी की राजनीतिक बिसात ही केन्द्रीय कद का खाका तय करती है|" अक्षरस: सत्य भी है, लोकसभा चुनावों में भी अमित शाह का उत्तरप्र...

योगीराज का लागिन ‘विकास’ है तो पासवर्ड ‘हिंदुत्व’!

विक्रमादित्य से योग्यादित्य! भारतवर्ष के सबसे बड़े प्रान्त उत्तर प्रदेश में अव ‘योगी आदित्य’ यानीयण् सन्धि करने पर ‘योग्यादित्य’ राज आ गया है। तमाम संदेहों व विभ्रम केमकड़जाल में नकारात्मक सोच चिन्तनीय है। जबकि वास्तविकता में त्रेतायुग केरामराज्य के बाद न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन के ही क्रममें ‘योग्यादित्यराज’ होगा, क्योंकि तीनों कालखण्डों की परिस्थितियां एकजैसी हैं। कदाचार की पराकाष्टा के बाद सदाचार का प्राकट्य स्वाभाविकप्रक्रिया प्रतीत होती है।